माँ के जिस्म का मालिक

रोहन के गाँव में मर्दों को औरतों से बहुत ऊँचा दर्जा मिलता था। ज्योति ने भी अपने परिवार और समाज से यही सीखा था कि औरत को मर्द के हर आदेश का पालन करना चाहिए। इस बात का फायदा रोहन को हुआ क्योंकि उसे ज्योति के शरीर को पाना था। ज्योति की आकर्षक बनावट, उसके उभार और उसकी मासूम सी शक्ल किसी को भी ललचा देने वाली थी।

रोहन ज्योति के साथ संबंध बनाना चाहता था लेकिन रोहन के पापा ज़्यादातर समय घर पर रहते थे, इसलिए वह ज्योति के साथ ज़्यादा कुछ कर नहीं पाता था। लेकिन वह दिन दूर नहीं था जब रोहन को ज्योति को अपनी औरत बनाने का मौका मिला। रोहन के दादा की तबीयत खराब होने की वजह से उसके पापा को 2 हफ्तों के लिए अपने गाँव जाना पड़ा। पापा के जाते ही ज्योति को एक अजीब सी बेचैनी हुई, उसे रोहन की नज़रों में हवस दिखने लगी थी।

ज्योति ने महसूस किया कि वह उसे छूने के बहाने ढूँढ रहा था। जब रोहन पीछे से उसे आकर गले लगाता, तब ज्योति को उसकी उत्तेजना अपने शरीर पर महसूस होती थी। जब वह पीछे मुड़कर उसे देखती, तो रोहन उसे देख कर मुस्कुरा रहा होता था। ज्योति को एक अजीब सी घबराहट और अपने बदन में एक गर्मी महसूस होने लगी। रात में ज्योति यही सोच रही थी कि अब जब पापा घर पर नहीं हैं, तो क्या रोहन इसलिए करीब आने की कोशिश कर रहा है।

अगले दिन ज्योति ने देखा कि बाथरूम की कुंडी खराब थी, तो उसने सोचा कि रोहन के उठने से पहले नहा लेती हूँ। जब वह बाथरूम में गई और कपड़े उतार कर नहाने लगी, तभी पीछे से बाथरूम का दरवाजा खुला और रोहन वहां नग्न खड़ा था। ज्योति चिल्लाई, “रोहन यह क्या कर रहे हो!” रोहन ने कहा, “आज आई है तू मेरी पकड़ में।” ज्योति के गीले बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह अपने शरीर को ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह नज़ारा देख कर रोहन और भी बेकाबू हो गया।

रोहन ने ज्योति को कस कर पकड़ा और उसे चूमना शुरू कर दिया। ज्योति ने उसे पीछे धकेलने की कोशिश की लेकिन रोहन ने उसे गोद में उठा लिया। उसने ज्योति के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने शुरू किए, लेकिन धीरे-धीरे ज्योति का विरोध कम होने लगा और उसे सालों में पहली बार ऐसा सुख महसूस हुआ। रोहन ने उसके शरीर के साथ खेलते हुए उसे पूरी तरह अपने वश में कर लिया। अंत में रोहन ने कहा, “अब से तू मेरी बीवी है, समझी?”

थोड़ी देर बाद ज्योति कमरे में गई तो रोहन वहां बैठा था। ज्योति ने कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और वह पापा को कुछ नहीं बताएगी, लेकिन रोहन हँसने लगा। उसने ज्योति को बाज़ार चलने को कहा, वह भी बिना साड़ी के, सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में। ज्योति डर गई थी लेकिन रोहन ने उसे मास्क पहनाया और उसे इसी हालत में बाज़ार ले गया। वहां भीड़ में भी रोहन उसे पीछे से छूता रहा और उसे उत्तेजित करता रहा।

फिर रोहन उसे एक सुनसान गली में ले गया जहाँ उसने फिर से ज्योति के साथ संबंध बनाए। पड़ोस का एक सब्जीवाला यह सब छुपकर देख रहा था। वह हैरान था कि माँ और बेटे के बीच यह सब हो रहा है, लेकिन ज्योति अब खुद इस सुख का आनंद ले रही थी और रोहन का साथ दे रही थी। घर वापस आने के बाद ज्योति को अहसास हुआ कि अब उसके शरीर पर सिर्फ रोहन का हक है। उसने हमेशा मर्द की आज्ञा मानना सीखा था, और अब वह मर्द उसका अपना बेटा बन चुका था। उनके रिश्ते की मर्यादा अब खत्म हो चुकी थी।

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