कुंवारी माँ की शादी और सुहागरात

हैल्लो दोस्तों, यह मेरी पहली कहानी है, जो में आप सबके सामने रख रहा हूँ. यह मेरे जीवन की सच्ची घटना है, जिसने मेरे सारे सपने पूरे कर दिए और आज में एक कुशल जिंदगी जी रहा हूँ, जो कि सेक्स और मस्ती से भरपूर है. दोस्तों मेरा नाम दीपक है और में पंजाब लुधियाना का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 6 फुट 2 इंच है, मेरा रंग सांवला और बॉडी मस्त है. यह कहानी मेरी और मेरी कुँवारी माँ की है.

आप सब हैरान होंगे कि में कुँवारी क्यों लिख रहा हूँ? इस बात का जवाब आपको कहानी में आगे मिलेगा. मेरी उम्र 25 साल है और मेरी माँ की उम्र 39 साल है. दोस्तों मेरी माँ रीता एक भरपूर जिस्म की मालकिन है, उसकी हाईट 5 फुट 2 इंच है और वो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है. में अपने माँ बाप की इकलौती औलाद हूँ, मेरा बाप बहुत ही अमीर आदमी है, जिसके पास बहुत पैसा है.

दोस्तों यह कहानी आज से 2 साल पहले शुरू हुई, जब मेरा 23वां बर्थ-डे था. में शुरू से ही अपनी माँ को कभी माँ की नज़र से नहीं देखता था, बस शुरू से मुझे उसको पाने का जूनून था. मेरी यह इच्छा इस साईट की स्टोरी पढ़कर और बलवान हो गयी और पूरी हुई आज से 2 साल पहले, जब भगवान ने मुझे ताजी कसी हुई बिना फटी चूत वाली माँ मेरी पत्नी के रूप में दी. हुआ यूँ कि मेरे 23 बर्थ-डे पर में मम्मी के कमरे में गया तो मैंने देखा कि मम्मी अपने कमरे में नहीं थी और उनकी डायरी बेड पर खुली पड़ी थी. मम्मी मेरे लिए गिफ्ट लेने के लिए गयी हुई थी. अब में उनकी पर्सनल डायरी उठाकर पढ़ने लगा, जिसे पढ़कर मेरे होश उड़ गये. उस डायरी के ज़रिए मुझे पता चला कि में अपने माँ, बाप की असली औलाद नहीं था, उनको में सड़क पर मिला था.

सुंदर सा जुड़ा बालों पर हो, जाली वाली ब्रा, फूलों वाली अंडरवेयर, महंगी साड़ी लाल रंग की, लंबी बिंदी, फुल ब्राइडल मेकअप करवा दो, ताकि मेरी जानेमन मम्मी दुनिया की सबसे सुंदर दुल्हन लगे और में तुम दोनों को लेने के लिए गाड़ी भेज दूँगा.

फिर मैंने उसके पति को अपना बेडरूम सुहागरात के लिए तैयार करने को बोल दिया. फिर ठीक 6 बजे वो सुहागरात का कमरा तैयार करके मेरे पास आ गया और मैंने एक गाड़ी मम्मी और शीला को लेने के लिए भेज दी और राम सिंह (नौकर) और में मंदिर की तरफ चल पड़े. फिर ठीक 7 बजे मम्मी और शीला भी वहाँ आ गयी. अब पंडित जी पूरी तैयारी कर चुके थे. फिर उन्होंने मुझसे रिंग्स माँगी, तो मैंने उन्हें रिंग दे दी. फिर उन्होंने मंतर जाप के बाद मम्मी को बुलाया, तो मम्मी लंबा घुंघट ओढ़कर आई. फिर उन्होंने एक अंगूठी मम्मी को दी, जिस पर मेरा नाम लिखा था और दूसरी रिंग मुझे दी और कहा कि अब एक दूसरे को पहना दो. फिर मैंने मम्मी को और मम्मी ने मुझे अंगूठी पहना दी. फिर पंडित जी ने कहा कि तुम लोग अब एक दूसरे को वरमाला पहना दो, तो हमने एक दूसरे को वरमाला पहना दी.

मैं मेरी माँ और वसीयत

माई और मेरा परिवार शुरू से ही बहुत आनंद के साथ रहते थे। मेरे पिता जी एक एमएनसी में इंजीनियर के पद पर कर्जारत थे और मेरी माँ एक डिग्री कॉलेज में लेक्चरर थे। माई घर पर अकेला था और इसलिए मुझको बचपन से दोनों का ढेर सारा प्यार मिला। अचानक एक घटना से हमारे परिवार का ऐसा चैन छिन गया। पिताजी एक बार बीमार हुए और डॉक्टर ने काफी टेस्ट के बाद पिताजी को कैंसर के इलाज के लिए बुलाया। डॉक्टरनो ने पिता जी को सिर्फ कुछ महीने का समय दिया और कहा

आप नौकरी ही कर्म चाहते हैं कर डालिये क्योंकि आपके पास समय नहीं है। एह समय हमसब लोगों के लिए बहुत भयंकर था, लेकिन धीरे-धीरे हम लोगों ने इस बात को मान लिया और समय पर सब कुछ छोड़ दिया। एक रात खाना खान एके बुरे पिता जी ने हमको अपने कामरे में बुलाया। पिताजी कामरे में जाकर लेट गए और मुझसे पास में बैठने के लिए कहा। माँ भी पिताजी के पास बैठें। हमलोगन ने बहुत सारी बातें की। पिताजी ने मुझसे मेरे भविष्य के बारे में पूछा और मुझे अपना भविष्य का प्लान बताया। पिता जी ने अपना दुख भी जताया कि कुछ ही दिनों में वो इस संसार से चले जाएंगे और उनका सपना अधूरा रह जाएगा। पिताजी ने एह भी विश्वास जताया कि उन्हें एह उम्मीद है कि मैं उनका सारा का सारा सपना पूरा करूंगा। पिताजी ने फिर कहा, “बेटा तुम मुझसे वादा करो कि मेरे जाने के बाद तुम अपनी माँ का ख्याल रखोगे और उनको कभी भी कोई चीज़ नहीं मिलेगी।” माई बिना सोचे समझे पिता जी को अपना वचन दे दिया। पिताजी फिर कुछ देर चुप रहे. फिर अचानक पिता जी मुझसे बोले। “बेटा तुम मुझको एह बताओ क्या तुम्हारी माँ एक सुंदर औरत है?” मेरे लिए यह कोई मुश्किल सवाल नहीं था और मैंने पिता जी से बोला, ” “हां पिता जी मां बहुत ही सुंदर है।” “तो तुम्हें लगता है कि तुम्हारी मां सच में सुंदर है?” पिता जी ने मुझसे कहा। फिर पिता जी ने मुझसे पूछा, “क्या तुम्हारी मां सेक्सी लगती है?” मैं बहुत शर्मा गया और चुपचाप आंखें नीचे करके बैठा रहा। माई मां की तरफ देखने लगा, लेकिन मां बिल्कुल खामोश बैठी थीं।” अरे शर्माओ मत” पिताजी मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर मुझसे बोले बहुत सेक्सी लगती है” माई पिता जी से आंख चुराते हुए कहा। “क्या तुम अपनी मां के साथ सेक्स करना चाहते हो? बोलो बेटा बोलो क्या तुम अपनी माँ को चोदना चाहते हो?” पिताजी ने मुझसे धीरे से पूछा। मैं बिल्कुल स्थिर रह गया। मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। हलांकी, माई बहुत दिनों से अपनी माँ को चोदना चाहता था और काई बार उनका नाम लेकर मैंने मुठ भी मर राखी थी, लेकिन मैंने कभी एह सोचा भी नहीं था कि मेरा क्वैश कभी इस तरह से पूरा होगा।

चुतर का कुछ ना पूछो, गोल गोल थोरा फैला हुआ और एकदाम करी। मेरी मां की तांगे बहुत ही सुंदर और साथ में उनकी जंघे बिल्कुल तरस गई। मेरी मां के शरीर पर बाल कुछ ज्यादा ही है जो बदन के नीचे उससे मैं और भी ज्यादा है। लेकिन उनके बाल ज्यादा होने से कुछ फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ज्यादा से वो और भी सेक्सी लग रही थीं। “तुम नौकरी ही देख रहो, क्या तुम्हें पसंद है?” मा ने मुझसे पूछा. थोरा रुक कर मा ने फिर पूछा, “क्या तुम्हें इस बदन से मजा मिलेगा, क्या तुम्हें हमारी एह नंगा बदन पसंद है?” माई माँ को हेयरानी से देखता रहा। मुझे एह समझ में नहीं आ रहा था कि कहीं मां मुझसे मजाक नहीं कर रही है? जब कि आँखों में देखा तो पाया कि माँ बहुत सीरियस है। मेरी माँ बहुत घबरा भी रही है। मेरे को लगा कि माँ और पिताजी आपस में एह सब बातें चर्चा कर लिया था औरा बी माँ उन बातों पर अमल कर रही हैं। लेकिन माँ को एह पता नहीं था कि मैं उनकी बातों पर क्या कहूँगा और इसलिए जो घबरा रही थी। बुरे में माँ ने मुझे बताया था कि अगर मैं उस दिन उनकी बातों पर ना कर देता तो पिताजी और खास कर माँ को बहुत धक्का लगता।

चुड़वाऊंगी। बोल बेटा बोल, क्या हमको अपने पिता के सामने चोदेगा?” माई माँ को चोदते चोदते कहा, “माँ पिताजी के सामने क्यों, मैं तो टिमको सबके सामने चोद सकता हूँ। तू बस ऐसे ही मेरे सामने अपनी चूत खोले परी रहना। हाँ, कल से तुम जब तक घर पर रहोगी नंगी ही रहना। मैं भी नंगा ही रहूँगा। बहुत मजा आएगा।” इस तरह से माई माँ और मैं चोदते रहे और थोरी देर के बाद एक जोर दार धक्का मार कर अपनी माँ की चूत के अंदर अपना लंड जार तक डाल कटकर झर गए। मेरे झरने के साथ माँ भी झर गयी और निधल हो कर बिस्तर पर परी रहें। काफी देर तक मैं और मेरी मा बिस्तर चुप चाप एक दूसरे के बाहों में लेते रहे। और जब हमलोग का सांस ठीक हुआ तो मेरी मां उठ कर चली गई।
जाते समय मां मुझसे कह गई, “मुझे तुम्हारे पिता को देखना है। वैसे तुम्हें धन्यवाद देता हूं कि आज बहुत दिनों के बाद मेरी चूत की प्यास बुझी और मैं तुमसे वादा करता हूं कि आज के बुरे तुम जब भी चाहोगे मेरी चूत चोद सकते हो। मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए हमेशा खुली रहेंगी।”लेकिन मुझको तुम्हारे पिताजी के पास जाना है और जब तक मैं औं टिम चुप चाप सो जाओ। माई भी बिस्तर पर से उठ कर माँ को अपने हाथों में लेकर उनको चूमते हुए बोला, “मैं जानता हूँ कि इस समय पिता जी को तुम्हारी बहुत ज़रूरत है। मैं तब तक तुमसे कुछ नहीं कहूँगा जब तुम मुझसे फिर से चुदवाना नहीं चाहती।” माँ मुझसे बोली, “मैं जानती हूँ कि तुम मुझको बहुत प्यार करते हो और मैं तुमको और तुम्हारे पिताजी दोनों को प्यार करती हूँ।” और एह कह कर मा ने अपनी साड़ी अपने ऊपर लपेट लिया, और चली गयी। माँ की ब्रा, पेटीकोट और पैंटी सब हमारे कमरे में ही परी हैं। माई उठ कर माँ की पैंटी और ब्रा उठा लिया और अपनी नाक पर उनको रख कर उनकी खुशबू सुंघने लगा। मुझसे अपनी माँ की चूंची और चूत की सुगंध मिल रही थी। मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया, लेकिन मेरी जरूरत बहुत ही गहरी थी

अगले दिन सुबह जब मेरा खुला चाहिए तो मैंने अपने आप को बहुत ताज़ा बनाया। फिर मेरे दिमाग़ में कल रात की साड़ी घाटा घूम गई और मेरा लंड फिर से ख़राब होने लगा। खैर, मुझको स्कूल जाना था और उसकी तैयारी करनी थी। माई एह सोच रहा था कि कल रात के बाद मा मुझसे कैसा व्यवहार करेगी और मैं अपने ध्रकते दिल के साथ सुबह नाश्ता करने के लिए नाश्ते की मेज पर आ गया। टेबल पर नाश्ता रखा हुआ था और रोज़ की तरह मा मेरा टेबल पर मेरा इंतज़ार कर रहे थे। माई मां की तरफ देखा और मां नेब ही मुझको मुस्कुराते हुए देखी। फिर माँ ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा, “कल रात को दर्द चाहिए?” “हां मां कल रात को जरूरत बहुत अच्छी ऐ” मैंने मां से नजरें ना मिलते हुए कहा। “ख़ूब ऐ की ज़रूरत है?” मा ने फिर हंसे के पूछे. थोरी देर के बाद फिर हमसे बोली, “मुझे मालूम नहीं था कि तुम्हारा लंड इतना लंबा और मोटा होगा। कल रात को मुझे तुमसे चुदवा कर बहुत मजा मिला। मैं समझती हूं कि मुझे यही मजा रोज रात को मिलेगा।” माई फ़ौरन मा से कहा, “मा रोज़ रात को ही क्यों, अगर तुम चाहो मैं तुमको चुदाई का ऐसा अभी इसी वक़्त दे सकता हूँ। तुम बस एक बार कह कर तो देल्हो।” माँ मुझसे बोली, “नहीं, अभी नहीं, अभी मेरा बहुत सा काम पर हुआ है, और कल रात की तुम्हारी जबरदस्त चुदाई से मेरी चूत अभी तक कल्ला रही है। आज रात को मैं फिर से तुम्हारे कमरे में आऊँगी और तुम्हारा लंड अपने मुँह और चूत से खाऊँगी।” माई को उनकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “माँ चूत से लंड खाना तो माई समझ गया लेकिन मन से लंड खाना माई नहीं समझ।” माँ अपने आप को मुझसे चुराते हुए बोली, “रात तक सब्र करो, मैं आज रात को मैं तुम्हें सब समझ दूँगी” और जोरो से हंस परी।
माँ अपने आप को हमसे चुराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैंने उनको कस कर रखा हुआ था। थोरी देर के मा मुझसे लिपट गई और मेरे माथे पर एक चुम्मा दिया। फिर माँ ने मेरे होठों पर भी चुम्मा दिया। फिर मैं अपना जीव माँ के कुन्ह में डाल दिया और मेरे जीव को चूसने लगी। थोरी जीव चूसने के बाद मा मुझसे बोली, “तुम मुझको पागल बना दोगे और अभी तुम्हें कॉलेज जाना है।” फिर माँ ने अपने आप को चुराए हुए और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे बोली, “बस अब तुम कॉलेज जाओ और मैं तुम्हारे पास रात को आऊँगी।” लेकिन उस दिन चूहे को और ना ही अगले काई चूहे को मा मेरे कमरे में नहीं आई। मुझे मकुम था माँ मेरे पिता जी की सेवा में लगी हुई हैं और इसलिए मैंने भी कुछ नहीं बोला। मैं अपनी माँ को मुझसे चुदाई के लिए अपने काम में परेशान नहीं करना चाहता था। करीब एक हफ्ते एके खराब पिता जी की हालत खराब हो गई। माई और मां दोनों दिन-रात पिता जी की देखबहल में लगे रहे। पिता जी को हॉस्पिटल ले जाना और हॉस्पिटल से आना बराबर था, क्योंकि डॉक्टर लोग कोशिश कर रहे थे। हर रात
को माँ पिता जी की हालत देख कर और अपने दुःख से रोओ। माई रोज़ रात अपनी माँ को समझाता था और उनको अपनी बाहों में भर कर शांत करता था। मा थोरी डेर मी हाय मेरे बाहों मी सो जति थे।

आख़िर में करीब दो महेनो के बुरे अपने बीमार से लड़ते हुए मेरे पिता जी चल बेस। माँ पूरी तरह से टूट गई और उनको इंजेक्शन देने की जरूरत है। एह हम लोगों के लिए बहुत ही परेशानी का समय था। हमारा पूरा का पूरा घर अपने रिश्तेदार और रिश्ते से भरा हुआ था। सब कोई आ कर हमको और माँ को शांत करने में लगे हुए थे। पिता जी की अंतिम क्रिया करम, श्राद्ध और शती पथ के बुरे रिश्तेदार सब अपने-अपने घर चले गए। मा भी इतने समय में थोरी बहुत संभल गई। मा अब एह मन लिया था पिता जी वाकाई में चल दिए थे। हमारी मौसी फिर भी कुछ और दिन तक हमारे घर पर बने रहे और हम लोगों को सहारा दिया। पिता जी के देहांत के करीब-करीब एक महीने के बाद हमारा घर फिर से खाली हो गया। अब घर पर सिर्फ मैं और मेरी माँ थे और हम एक दूसरे को सहारा दे रहे थे। माँ अभी भी पिता जी के मरने से दुख खा जा रहे थे। माँ चूहे को उठ कर पिता जी का नाम ले ले कर रोटी रखता था और मैं उनको शांत करने की कोशिश करता रहता था। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ मां शांत हो जाएगी और धीरे-धीरे सामान्य जीवन पर वापसी आने लगेगी। जैसे माँ सामान्य होने लगी, माँ को अपने साथ सुलाने के लिए और चोदने के लिए इंतज़ार करने लगा। माई कभि कभि मा किन अम लेकर रट को मुत्थे मर लेता था।
पिता जी के गुजरे के करीब तीन महीने बाद एक दिन रात को माई और मां डिनर कर रहे थे की मां मुझसे बोली, “बेटा खाना के खराब सोते समय नहा लेना।” माई फ़ौरन समझ गया कि माँ के दिमाग में क्या है। तीन महीने में माँ और मैंने कुछ नहीं किया था। खाना खान एके बुरा माई थोरी देर तक टीवी देखा और फिर नहा लिया। नहाते समय माई अपन बालों में सजंपू लगया और शेव भी किया और अपने आप को चूहे के लिए तैयार कर लिया। मुझे मालूम है कि चूहे को क्या होने वाला है। जब नहा रहा था तो मुझे बाथरूम के दरवाजे से माँ की आवाज़ सुनाई दी, “बेटा नहा कर नये कपरे पहन लेना, मैं तुम्हारे लिए नये कपरे निकाल कर जा रही हूँ और फिर मेरी आवाज़ की प्रतीक्षा करना।” नहा कर बाथरूम से एक बुरा मैंने देखा कि माँ मेरे लिए बिस्टर पर एक जोरा नया क्रीम रंग का कुर्ता पायजामा निकल कर रख गई हैं। मैंने उन्हें पहन लिया और थोड़ा सा परफ्यूम भी लगा लिया। क़रीब आधे घंटे के बाद मुझे कि माँ की आवाज़ सुनाई दे, “बेटा मेरे कमरे में आ जाओ।” मेरा दिल जोर जोर से डर रहा था और नौकरानी धीरे धीरे माँ के कमरे की तरफ चला गया। मैजाब मा के कमरे में घुसा तो मैं चौंक गया और मेरी आंखे फिर-फिर कर देखने लगा। कमरा पूरा का पूरा फूलों से सजा हुआ था और माँ का बिटर पूरा का पूरा खुशबू वाली फूलों से सजा हुआ था। मा बिस्तर पर दुल्हन की तरह से सजी बैठी हुई थे। माँ अपने शेड के समय के साड़ी और ब्लाउज पहने हुए थे। मा ने अपने सारे गहने भी पहने हुए थे। माँ इस समय मुझको बहुत सुंदर लग रही थी और उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा। मा ने मेरी तरफ देखी और मुस्कुरा कर आंखें ही आंख से मुझे अपने पास बुला लिया।
माई कमरे में घुस गया और जा कर माँ के पास बैठ गया। मा बिस्टर पर चुप चाप बैठे थे। उनकी आंखें नीचे झुकी हुई थीं और धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थीं। मेरे को लगा कि माँ एह चाहती है कि जैसे पहली रात को कोई मर्द अपनी बीवी के पास जाता है और उसको नंगी करके चोदता है, मैं भी माँ को वैसी ही नंगी करके चोदू। माई धीरे-धीरे मां के शरीर से उनके गहनें उतार लिया और उनके सिर से साड़ी का पल्लू उतार दिया। फिर माई माँ का चेहरा अपने हाथों में लेकर उनको धीरे धीरे चूमने लगा। सब से पहले मैं उनके होठों को चूमा फिर उनको चूमा। फिर मैं गरम होकर उनके चेहरे, नाक, गाला और गार्डन पर अपना चुम्मा दिया। माँ मेरे चुम्मो से गरम हो गयी और सिस्कारी मरने लगी और मुझको चूमने लगी। माँ मेरे शुद्ध चेहरे को चूम रही हो। हम लोग एक दूसरे को चूमते हुए बिस्टर पर लेट गए औरलेटे वक्त पर माँ के ऊपर था। माई ऊपर हो कर मां के होठों को जोर जोर से चूमने लगा और इतना जोर लगाया कि मां के होंठ उनके दांत से काटने लगे। हमारे जीव एक दूसरे से टकरा रहे थे और हम लोग एक दूसरे की जीव चूसे हुए एक दूसरे को प्यार कर रहे थे। हमलोग अपना-अपना जीव एक दूसरे के मुंह के अंदर डाल कर घुमा रहे थे। फिर धीरे-धीरे हमने एक दूसरे के कपरे उतारने लगे। माई और माँ कपरे के नीचे कोई भी अंडरवियर नहीं पहनने हुआ था। थोड़ी देर में हम एक दूसरे का नंगे बदन पर हाथ फेर रहे थे और एक दूसरे की नंगे बदन की हर इंच में अपना अपना चुम्मा दे रहे थे। अब तक हमारे नंगे बदन पर चुम्मा और कटने का निशान पर चुक्का था। मा ने मेरा सारा प्यार कर अपनी चूत की तरफ ढकेल दिया। माई समझ गया कि मा मुझसे अपनी चूत की गुंडी।

कहा। उन्हें भी कहा कि अगर तुमसे चुदवाती हूं तो एह हम दोनों के लिए सुखद होता है और उनको भी इस बल्ले से शकुन रहेगा कि मेरी चूत एक सही आदमी के हाथ में है। मुझको तुम्हारे पिता जी की बात सही लगने लगी। मुझको लगी कि अगर मैं एह बात को भूल जाऊं कि तू मेरा बता है तो मुझको तेरे अलावा दुनिया में ऐसा कोई नहीं है कि जिससे मैं अपनी चूत चुदवा सकूं। मुझको तो जब जब एह बात हमारे दिमाग में आती है कि मैं तुमसे चुदवाऊंगी तो मेरी चूत में पानी भर जाता था। इसलिए मैंने तुम्हारे पिता जी से अपने मन की बात बोल दिया। लेकिन तुम्हें पिता जी बोले कि पहले मुझे अपने बेटे से बात करनी है, क्योंकि मैं खुद से एह बात तुमसे ना कह पाऊंगी। भगवान जानता है कि जब तुम्हारे पिताजी तुमसे मेरे बारे में बात कर रहे थे तो मैं कितना घबरा गया था। अगर तुमने पिता जी की बात ना माना हो तो मैं बिल्कुल से टूट जाती हूं।”
माई मां की सब बातें सुन कर फिर से गरम हो गई और मेरा लंड फिर से खराब होने लगा। माई मां के होठों पर अपना चुम्मा जर्ते हुए बोला, “मा कैसे तुमने एह समझ लिया कि माई तुम्हारी जैसी सुंदर और सेक्सी औरत को चोदने से मन कर सकता हूँ?” माई फिर से माँ की चूंची से खेलते हुए बोला, “माँ, मैं फिर से तुमको चोदना चाहता हूँ। मैं तुमको अभी चोदना चाहता हूँ। माई बार बार तुम्हारी खुबसूरत चूत में अपना लंड डालना चाहता हूँ।” “हे भगवान! क्या तू सच में मुझको फिर से चोदना चाहता है? अभी तो सिर्फ आधा घंटा ही हुआ है तू मेरे मुँह में अपना लंड डाल कर अपना पानी निकला था। वाह मैं कितना खुशनसीब हूं, अब मेरे पास तेरा जवान लंड है जो मुझको जब तब चोद सकता है। मैं तो बस अब यही सोचती हूं कि मैं तेरे जैसा चुदक्कड़ के साथ हमें दे पाउंगी की नहीं। चल जब तुझे चोदना है तो चोद ले, लेकिन इस बार जरा आराम आराम से चोदना।
माई अपनी माँ की खोली टांगों के कुतिया बैठ कर अपना लंड माँ की चूत के ऊपर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने लगा। माँ की चूत इस समय मुझको थोरी टाइट लग रही थी, लेकिन मैं धीरे-धीरे अपने हाथों से उनकी चूत सहलाता रहा और उनकी गांड में अपनी उंगली डालने लगा। थोरी देर तक गांड में उंगली करने के बाद माँ की चूत से पानी निकलने लगा और चूत गिला हो गया। माँ चूत को गिला होते देख कर एक झटका के साथ अपना लंड पूरा का पूरा जार तक घुसा दिया। चूत के अंदर जाते ही मा अपनी कमर उठना शुरू कर दिया और मैं भी झटके दे दे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। हम लोग एक दूसरे को चूम रहे थे और ऊपर नीचे से धक्का मार मार कर चोदते और चुदवाते रहे। चोदते और चुदवाते समय हम एक दूसरे से मीठी मीठी बातें भी कर रहे हैं। “ओह, मेरा राजा बेटा,” माँ बोली, मैं कितना खुशनसीब हूँ कि मेरी चूत तेरा लंड झा रहा है और तेरा लंड खा खा कर खुश हो रहा है। तेरा लंड बिल्कुल मेरी चूत की साइज़ का है।” “माँ तुम मेरे लिए ही बनी हो और हमेंशा रहोगी” माई माँ की चूची को पकड़ कर धक्का मारते हुए बोला। “मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि मैं एक दिन तुम्हारी चूत अपना लंड डाल कर तुम्हें चोद सकूँगा” माई माँ से फिर से बोला। “क्या माई और मेरी चूत तुझको पसंद है?” मां मुझसे पूछे और फिर से बोली, “देख मुझको खुश करने के लिए झूठ मत बोलना।” करता हूँ. मेरे लिए तुम प्यार और सुंदरता की देवी हो। मैं तुमसे हमशा प्यार करता रहूंगा और जब तुम चाहोगी मेरा लंड तुम्हारी चूत की सेवा के लिए तैयार रहेगा।” मां मुस्कुरा कर बोली, ”बस अब बहुत हो चुका है। चा लैब मैन लगा कर मेरी चूत की सेवा कर और उसको जी लगा कर अपने लंड से चोद। माई मारे चूत की खुजली से मारी जा रही हूँ। तू अपना लंड अंदर तक डाल कर मेरी चूत के अंदर चल रही चिटियों का मार डाल और मुझे शांत कर। बेटा चोद मेरी चूत खूब कस कर चोद।”
“अब आज के बाद ना तो मैं तेरा मां हूं और ना ही तू मेरा बेटा है। असज के बुरे से तू मेरा पति है और तेरा पत्नी” मेरे ढक्को के जवाब में मां अपनी कमर उछालते हुए मुझसे बोली। थोरी देर के बाद मा फिर से बोली, “आज की रात हमलोग की छाया का सुहागरात है। मैं वो सब काम करूंगी जो एक पत्नी अपने पति के लिए करती है। तुझे काम ही पसंद है, मुझसे बोल, मैं तेरी हर बात मन्ने के लिए तैयार हूं।” हमलोग एक दूसरे को अपनी अपनी बाहों में जाकर रखा था और अपनी अपनी कमर उठा कर एक दूसरे की चूत और लंड चोद रहे थे। मेरा लंड माँ की चूत की गरमी पाकर चूत के अंदर बहुत ही कारा हो गया था। Is chudai ke pahale mera lund ek bar MA ki munh ke jhar choka tha aur isliye is chudai me mera lund jharne me jyada waqt le raha tha. माँ की चूत अब तक की चुदाई में दो बार अपना पानी चोर चुकी थी और अपनी चुदाई की खुशी में पागल हो रही थी। माँ मुझको अपने हाथों से पाकर कर बेटाहाशा चूम रही थी और मुझसे लिपट रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसी नई दुल्हन, नई चुदाई, ऐसे पागल हो रही है। जैसे जैसे माँ मुझको चूम रही थी, मेरा खून भी खुल रहा था और मुझको मेरे अंडों में तनब महसस होने लगा था। थोरी देर के मेरा लंड माँ की चूत को चोदते अपना पानी चोर दिया। जैसी ही मेरी माँ की चूत के अंदर अपना लंड थैंक्स कर झड़ा, माँ भी तीसरी बार झड़ गई। हमलोग एक दूसरे के शरीर को अपने हाथों से देखकर निकले थे और जब तक मेरा आखिरी बुंद मां की चूत में ना चल गया, मां को नहीं छोड़ा।
हम लोग झरने के बाद एक दूसरे के हाथों में लेते रहे। हम लोग बिना सांस के चुदाई करते हैं, उखर चुकी हैं और अब बिना धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहे हैं। माई अपना सार मा की फुली फुली चूंची पर रख कर सो गया और ना जाने भी कब मुझसे लिपट सो गई। हम लोग रात भर एक दूसरे से लिपट कर सोते रहे, और जब सुबह आंख खुली तो देखा मा अभी भी मेरे साथ नंगी ही सो रही है। माई उठ कट मा को चूम किया और उनकी चूंची को सहलाने लगा। थोरी देर के बाद मा भी अपनी आंख खोल दी और हमसे लिपट कर मुस्कुरा कर बोली, “बेटा कैसा रहा हमलोग का सुहरात? मजा आया की नहीं? ठीक ठीक बोल बेटा हमको चोद कर तुझको और तेरे लंड को मजा मिला की नहीं?” माई भी माँ से लिपट कर बोला, “माँ बहुत मजा आया हमारी सुहागरात में तुमको चोद कर। क्या एक बार फिर से मैं तुमको चोद सकती हूँ?” माँ बोली, “बेटा एक बार क्यों? तू जितना बार चाहे मुझको चोद सकता है। जब चाहे चोद सकता है। अब पूरी की पूरी तेरी हूँ। बोल बेटा बोल्ट तू मुझको इस समय किस आसन में चोदेगा? मैं तब अपनी माँ की चूत में उंगली करता हूँ।” चाहता हूँ. तुम उठ कर पलंग पर झुक जाओ और पीछे से तुम्हारी चूत में अपना खरा लंड डाल कर चोदने लगा। और माँ एक ही बहन पर पति पत्नी जैसे नागे सोते हैं और चुदाई करते हैं कि वो मेरी अपनी छोटी बहन (मेरी मौसी) को पता कर मुझसे चुदवाएगी।

समाप्त

माँ के जिस्म का मालिक

रोहन के गाँव में मर्दों को औरतों से बहुत ऊँचा दर्जा मिलता था। ज्योति ने भी अपने परिवार और समाज से यही सीखा था कि औरत को मर्द के हर आदेश का पालन करना चाहिए। इस बात का फायदा रोहन को हुआ क्योंकि उसे ज्योति के शरीर को पाना था। ज्योति की आकर्षक बनावट, उसके उभार और उसकी मासूम सी शक्ल किसी को भी ललचा देने वाली थी।

रोहन ज्योति के साथ संबंध बनाना चाहता था लेकिन रोहन के पापा ज़्यादातर समय घर पर रहते थे, इसलिए वह ज्योति के साथ ज़्यादा कुछ कर नहीं पाता था। लेकिन वह दिन दूर नहीं था जब रोहन को ज्योति को अपनी औरत बनाने का मौका मिला। रोहन के दादा की तबीयत खराब होने की वजह से उसके पापा को 2 हफ्तों के लिए अपने गाँव जाना पड़ा। पापा के जाते ही ज्योति को एक अजीब सी बेचैनी हुई, उसे रोहन की नज़रों में हवस दिखने लगी थी।

ज्योति ने महसूस किया कि वह उसे छूने के बहाने ढूँढ रहा था। जब रोहन पीछे से उसे आकर गले लगाता, तब ज्योति को उसकी उत्तेजना अपने शरीर पर महसूस होती थी। जब वह पीछे मुड़कर उसे देखती, तो रोहन उसे देख कर मुस्कुरा रहा होता था। ज्योति को एक अजीब सी घबराहट और अपने बदन में एक गर्मी महसूस होने लगी। रात में ज्योति यही सोच रही थी कि अब जब पापा घर पर नहीं हैं, तो क्या रोहन इसलिए करीब आने की कोशिश कर रहा है।

अगले दिन ज्योति ने देखा कि बाथरूम की कुंडी खराब थी, तो उसने सोचा कि रोहन के उठने से पहले नहा लेती हूँ। जब वह बाथरूम में गई और कपड़े उतार कर नहाने लगी, तभी पीछे से बाथरूम का दरवाजा खुला और रोहन वहां नग्न खड़ा था। ज्योति चिल्लाई, “रोहन यह क्या कर रहे हो!” रोहन ने कहा, “आज आई है तू मेरी पकड़ में।” ज्योति के गीले बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह अपने शरीर को ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह नज़ारा देख कर रोहन और भी बेकाबू हो गया।

रोहन ने ज्योति को कस कर पकड़ा और उसे चूमना शुरू कर दिया। ज्योति ने उसे पीछे धकेलने की कोशिश की लेकिन रोहन ने उसे गोद में उठा लिया। उसने ज्योति के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने शुरू किए, लेकिन धीरे-धीरे ज्योति का विरोध कम होने लगा और उसे सालों में पहली बार ऐसा सुख महसूस हुआ। रोहन ने उसके शरीर के साथ खेलते हुए उसे पूरी तरह अपने वश में कर लिया। अंत में रोहन ने कहा, “अब से तू मेरी बीवी है, समझी?”

थोड़ी देर बाद ज्योति कमरे में गई तो रोहन वहां बैठा था। ज्योति ने कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और वह पापा को कुछ नहीं बताएगी, लेकिन रोहन हँसने लगा। उसने ज्योति को बाज़ार चलने को कहा, वह भी बिना साड़ी के, सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में। ज्योति डर गई थी लेकिन रोहन ने उसे मास्क पहनाया और उसे इसी हालत में बाज़ार ले गया। वहां भीड़ में भी रोहन उसे पीछे से छूता रहा और उसे उत्तेजित करता रहा।

फिर रोहन उसे एक सुनसान गली में ले गया जहाँ उसने फिर से ज्योति के साथ संबंध बनाए। पड़ोस का एक सब्जीवाला यह सब छुपकर देख रहा था। वह हैरान था कि माँ और बेटे के बीच यह सब हो रहा है, लेकिन ज्योति अब खुद इस सुख का आनंद ले रही थी और रोहन का साथ दे रही थी। घर वापस आने के बाद ज्योति को अहसास हुआ कि अब उसके शरीर पर सिर्फ रोहन का हक है। उसने हमेशा मर्द की आज्ञा मानना सीखा था, और अब वह मर्द उसका अपना बेटा बन चुका था। उनके रिश्ते की मर्यादा अब खत्म हो चुकी थी।

मां का इनकार

मेरा नाम राहुल है मेरी उम्र 21 साल है और मेरी मां की उम्र 46 साल है और मेरी एक बहन है.

मेरी मां का शरीर थोड़ा मोटा 70 किलो का है और उसकी लंबाई 5 फुट 4 इंच और रंग गोरा है और मेरी बहन की दोस्त जो कि पड़ोस में रहती है उसका नाम महिमा है प्यार से उसे हम माही बुलाते हैं.

एक दिन उसके घर वाले किसी इमरजेंसी काम से कहीं बाहर जा रहे थे तो उन्होंने कहा की माही एक दिन के लिए आप लोगों के पास रुक जाएगी और हम शाम तक वापस आ जाएंगे मेरी मम्मी ने कहा “हां ठीक है”.

यह सुनते ही मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि बहुत दिनों बाद वह हमारे साथ रहने आ रही थी.

सुबह के 7:00 रहे थे वह हमारे घर आई उसे देखते ही मम्मी ने उससे कहा ” अरे माही तुम और राहुल नाश्ता कर लो और मैं स्कूल जा रही हूं”. फिर माही ने उनसे पूछा कि मेरी बहन भी साथ में जा रही है क्या.

मम्मी ने कहा ” हां मैं इसे भी साथ ले जा रही हूं क्योंकि आते समय इसे कुछ सामान खरीदना है तो मैं वहीं से इसे लेते आऊंगी”.

अब घर में सिर्फ मैं और माही अकेले थे. वह बहुत ही खूबसूरत थी सबके चले जाने के बाद माही ने मुझसे बोला ” हम पूरे दिन क्या करेंगे”

मैंने कहा “तुम बोलो क्या करना है”. तो उसने कहां की क्यों ना हम कोई खेल खेलें मैंने उत्सुकता से उससे पूछा कौन सा खेल वह बोली “चलो लूडो खेलते हैं” मैं भी हां कहा.

फिर हम थोड़ी देर तो खेलें लेकिन वह बहुत बोरिंग सा था तो मैंने कहा चलो कोई मूवी देखते हैं.

तो मैं एक मूवी लगाई, मूवी बहुत इंटरेस्टिंग थी पर उसमें अचानक से एक रोमांटिक सीन आया जिसमें हीरो हीरोइन को किस कर रहा था.

यह देख माही शर्मा गई और मुझसे पूछा “किस करने में इतना क्या मजा आता है”

मैंने कहा “यह तो ट्राई करने के बाद ही पता चलेगा”. उसका चेहरा और लाल हो गया और जो मैंने सोचा नहीं था वह उसके आंखों में दिख रहा था जैसे वह सच में किस का एहसास करना चाहती थी.

उसने धीमी आवाज में मुझसे कहा ” क्यों ना हम एक बार किस करके देखें”

यह सुनकर मैं हैरान हो गया और बेचैनी बढ़ने लगी. हम दोनों एक दूसरे के काफी करीब बैठे हुए थे बिना कुछ सोचे समझे दूसरे को चूमना चालू कर दिया. उसके होंठ जैसे गुलाब की पंखुड़ी जैसे थे. हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ लिए लेकिन हम यह भूल गए दरवाजा खुला ही था सिर्फ पर्दा लगा हुआ था मेरा एक हाथ उसकी पीठ को रगड़ रहा था दूसरा हाथ ब्रेस्ट को सहला रहा था उसे भी मजा आने लगा था. हमें यह करते करीब 10 मिनट हुए थे क्या अचानक मम्मी और मेरी बहन दोनों आ गई हम जल्दी से डर के मारे एक दूसरे से अलग हुए पर उन दोनों ने एक सेकंड के लिए यह सब होते हुए देख लिया था.

मम्मी के चेहरे पर अजीब सा गुस्सा था क्योंकि माही के घर वाले भरोसे पर छोड़कर गए थे और वह भी मेरी बहन की दोस्त थी. और मेरी बहन भी यह सब देखकर दंग रह गई और माही के चेहरे का रंग भी उड़ा हुआ था. मैं सोच में पड़ गया कि अब क्या होगा, मम्मी का सामना करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.

मैंने मम्मी को देखा कि वह नॉर्मल बिहेव कर रही थी क्योंकि वह माही को नहीं जताना चाहती थी कि उसके घर में उसके साथ कुछ गलत हुआ है. शाम को माही के मम्मी पापा घर आए और उसे ले गए.

मैं उसे वक्त सामने भी नहीं गया और मेरी बहन पढ़ने चली गई अपने कमरे में तभी मम्मी मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ के स्टोर रूम में ले गई रूम का दरवाजा काफी पुराना था इसमें जगह-जगह पर लकड़िया टूटी हुई थी और कई जगह पर छेद भी थे जिससे इस तरफ से उसे तरफ देखा जा सकता था. जब मम्मी मुझे अंदर ले गई इसका मतलब हुआ वह शायद मेरी बहन के सामने यह सब बात नहीं करना चाहती थी. उसने स्टोर रूम का लाइट चलाया जो की बहुत हल्की रोशनी दे रहा था उसे बंद कमरे में मम्मी मानो ऐसी लग रही थी जैसे बहुत गुस्से में हो.

मम्मी ने मुझसे पूछा “क्या हो रहा था तुम दोनों का”. मैं डरा हुआ था मैंने धीमी आवाज में कहा ” कुछ भी नहीं हम बस मूवी देख रहे थे”. मम्मी बोली ” मुझे क्या बेवकूफ़ समझा है तुम दोनों चुम्मा चाटी कर रहे थे, उसके ब्रेस्ट को दबा रहे थे और मुझे मालूम नहीं चलेगा”.

सच में मम्मी के मुंह से ऐसे शब्द मैंने पहली बार सुना था वह बहुत स्ट्रिक्ट थी और मम्मी का ब्रेस्ट दबाने का कहना मेरे दिमाग में बैठ गया अचानक मेरी नजर पता नहीं क्यों मम्मी के बदन पर पढ़ने लगी उसका ब्रेस्ट बहुत बड़ा था गोरी कमर हल्की रोशनी में इतना सुंदर दिख रहा था मन कर रहा था पकड़ लूं.

वह मेरी तरफ हैरानी से देख रही थी क्योंकि उसकी बातों का मुझ पर फर्क होना बंद हो चुका था क्योंकि मेरा ध्यान उसके शरीर पर जा रहा था.

मम्मी ने लाल कलर की ब्लाउज और ब्लू कलर की साड़ी पहनी थी वह जैसे किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी घने लंबे बाल और चेहरे की सुंदरता.

वह बोली ” मैं तुझे कुछ पूछ रही हूं और तु मेरी तरफ ऐसे क्यों देख रहा है, तुझे थोड़ी भी शर्म नहीं आई तेरी बहन ने देखा होगा तो क्या सोचा होगा”.

मैंने बिना सोचे समझे मम्मी का हाथ पकड़ लिया और कहने लगा पास जाकर बोला “मम्मी मुझसे गलती हो गई आप ही बताओ मैं क्या करूं उसने भी मुझसे किस करने को कहा था”.

मैं और आगे बड़ा मम्मी को दीवार से लगा दिया और बोला “मम्मी जितनी पास अभी आप हो इतनी पास आकर उसने मुझसे कहा था मैं कैसे रोक पता अपने आप को”.

मैं मम्मी के इतने करीब जा चुका था उसकी गर्माहट महसूस कर सकता था और उसके बदन की खुशबू बहुत प्यारी थी.

मम्मी ने तुरंत धक्का देकर कहा ” दूर हो जा मेरे पास से अब क्या अपनी मां को भी नहीं छोड़ेगा बेशर्म”. मैं फिर से मम्मी का हाथ पकड़ लिया और दीवार से लगा दिया वह चौंक गई ” यह तुझे क्या हो गया है मैं मां हूं तेरी”. उसका नशा मेरे सर पर चढ़ गया था उसकी खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी मैं सारा डर भूल गया.

मैंने कहा ” मम्मी एक बार आपको चुम्मा लेने दो बहुत मन कर रहा है और हम दोनों के अलावा इस कमरे में कौन है किसी को पता नहीं चलेगा”.

मम्मी ने कहा ” दूर हट जा मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा ऐसा निकलेगा”

फिर मैं मम्मी को समझने की कोशिश करने लगा ” आप भी तो हर समय अकेले रहती हो पापा तो साल में एक बार आते हैं वह भी चार-पांच दिन के लिए क्या आपका मन नहीं करता रोमांस का”. मम्मी ने तुरंत बोल “इसका क्या मतलब है अपने बेटे से काम चला लूं और तू यह कैसी पागलों जैसी बातें कर रहा है”.

मैं एक चीज तो समझ गया था अगर इस वक्त मैं अपनी मम्मी को बाहों में जो करके चूमलूं तो भी यह किसी को नहीं बताएगी क्योंकि यह रिश्ता अलग है इसके बारे में किसी से जिक्र भी नहीं करेगी. तो मैं मेरी मम्मी को कमर से पकड़ लिया और दीवार से फिर से लगा दिया और उसके गर्दन को चूमने लगा और हाथों से उसके बड़े चूची को मसलने लगा वह बहुत कोशिश कर रही थी मुझसे पीछा छुड़ाने का पर मैं भी नहीं रुक रहा था मुझे लगा कि शायद मैंने उसे गर्म कर दिया है पर मैं गलत था उसने मुझे जोर से धक्का दिया और बोली “तू सच में बेशर्म हो गया है” और जैसे तैसे अपनी साड़ी को संभाल कर दरवाजा खोली और चली गई.

मैं भी सोचने लगा कि शायद मैंने जो किया वह सही नहीं था क्योंकि जो इतना समझाने पर भी नहीं समझी तो हो सकता है नहीं गलत हूं.

रात को मम्मी और बहन दोनों कमरे में सोने चले गए और मैं बाहर हाल में ही सो गया.

अगले दिन सुबह मम्मी ने आंखें भी नहीं मिलाई और नाश्ता टेबल पर रखकर स्कूल के लिए चली गई. एक बार मेरा मन फिर से मां के बारे में सोचने लगा. हमारा घर छोटा ही था एक कमरा जिसमें मम्मी और बहन सोई थी और एक हाल और किचन और साथ में एक स्टोर रूम. मैं हाल में ही सोया करता था और मैं उसके कमरे में चला गया फिर मेरा मन उसकी चड्डी और ब्रा देखने को हो रहा था, मैंने अलमारी खोला तो देखा की मम्मी के पास हर कलर की पैंटी थी हाथों में लेकर सुंघा तो उसमें से मम्मी की बुर की खुशबू आ रही थी जिसने अंदर से मुझे और बेचैन कर दिया अब फिर से वह स्टोर रूम वाली बातें याद आने लगी जब मैं मम्मी को पकड़ा था और अब बस यही मन कर रहा था कि उसका बुर कैसे देखना है,कैसे चाटना है और कैसे चोदना है. और जब मैं दूसरा दरवाजा खुला अलमारी का तो मैंने देखा मेरी बहन की पेंटि भी वहां पर थी मैं मम्मी की और मेरी बहन की पेंटि बारी-बारी से सूंघने लगा मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और अब रहा नहीं जा रहा था. शाम को जब मम्मी और बहन वापस आई तो मैंने देखा मम्मी फिर से नॉर्मल बिहेव कर रही है. मैं मन ही मन में यह समझ गया की अब गुस्सा उतर चुका है. रात का खाना हम सब साथ बैठकर खा रहे थे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और पावर कट भी हो गया.

मम्मी ने उठकर मोमबत्ती जलाई और बोली “आज हम सब साथ सोएंगे क्योंकि पावर कट है और अंधेरे में किसी को कोई जरूरत पड़ी तो पास रहेंगे तो अच्छा रहेगा”.

यह मैंने क्या सुना क्या सच में मम्मी ने साथ में सोने को कहा है पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि हम साथ कैसे सोएंगे मम्मी तो मुझसे नाराज थी फिर मैं कहां सोऊंगा.

जब सोने की बारी आई तब मम्मी ने कहा “बेटा तू मेरे बाएं तरफ सो जा कोई दिक्कत तो नहीं” मैंने तुरंत कहा “नहीं मम्मी आपने कहा है तो क्या दिक्कत होगी”. यह सुनकर मम्मी ने मेरी तरफ आंखों में आंखें डालकर देखा मैं थोड़ा सा घबरा गया कि मैं कुछ गलत तो नहीं बोल दिया पर मम्मी ने और कुछ रिएक्ट नहीं किया, मेरी बहन को दाएं और सोने को कहा.

बारिश बहुत तेज थी बिजली भी कड़क रही थी और हम सब एक ही बिस्तर पर सोने के लिए तैयार थे सबसे पहले मेरी बहन उसके बाद मेरी मम्मी और उसके बाद मैं. मम्मी ने एक चादर को हम सबके कमर तक रख दिया ताकि ठंड ना लगे पर मौसम ठंडा था मैं मम्मी के पीछे लेता हुआ था मम्मी ने मेरी तरफ कमर कर दिया जल्दी मेरी बहन सो गई. मम्मी ने मुझे जगाया और बोली की एक मोमबत्ती ले ले मुझे वॉशरूम जाना है उधर काफी अंधेरा है. मैंने मोमबत्ती लिया और उसे जलाकर मम्मी के आगे आगे चलने लगा वॉशरूम आते ही मम्मी ने कहा

“तू यहीं रुक मैं टॉयलेट करके आ रही हूं” तो मैंने कहा “मम्मी अगर मैं बाहर तो अंदर पूरा अंधेरा हो जाएगा आपको कुछ नहीं दिखेगा”.

मम्मी- ” दरवाजा खुला रहने दे और अपना मुंह उसे तरफ घुमा”

मैं-“हां ठीक है” दबी हुई आवाज में.

पर मैं उसे देखे बिना कैसे रह पाता मैं सुबह से यही तो देखना चाहता था उसने पीठ मेरी और घुमाई साड़ी को कमर तक उठाया उसने रेड कलर की पैंटी पहनी थी उसकी गोरी गोरी जाएंगे साफ दिखाई दे रही थी और टॉयलेट के लिए बैठने के लिए जा रही थी उसने अपना पैंटी को नीचे किया और उसका गांड साफ-साफ दिखाई दे रहा था दरवाजा खुला था और उसके मुतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी मन तो कर रहा था जो कि उसकी बुर और कैसे चोदना है. और जब मैं दूसरा दरवाजा खुला अलमारी का तो मैंने देखा मेरी बहन की मेरी बहन की पेंटि भी वहां पर थी मैं मम्मी की और मेरी बहन की पेंटि बारी-बारी से सूंघने लगा मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और अब रहा नहीं जा रहा था. शाम को जब मम्मी और बहन वापस आई तो मैंने देखा मम्मी फिर से नॉर्मल बिहेव कर रही है. मैं मन ही मन में यह समझ गया की अब गुस्सा उतर चुका है. रात का खाना हम सब साथ बैठकर खा रहे थे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और पावर कट भी हो गया.

मम्मी ने उठकर मोमबत्ती जलाई और बोली “आज हम सब साथ सोएंगे क्योंकि पावर कट है और अंधेरे में किसी को कोई जरूरत पड़ी तो पास रहेंगे तो अच्छा रहेगा”.

यह मैंने क्या सुना क्या सच में मम्मी ने साथ में सोने को कहा है पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि हम साथ कैसे सोएंगे मम्मी तो मुझसे नाराज थी फिर मैं कहां सोऊंगा.

जब सोने की बारी आई तब मम्मी ने कहा “बेटा तू मेरे बाएं तरफ सो जा कोई दिक्कत तो नहीं” मैंने तुरंत कहा “नहीं मम्मी आपने कहा है तो क्या दिक्कत होगी”. यह सुनकर मम्मी ने मेरी तरफ आंखों में आंखें डालकर देखा मैं थोड़ा सा घबरा गया कि मैं कुछ गलत तो नहीं बोल दिया पर मम्मी ने और कुछ रिएक्ट नहीं किया, मेरी बहन को दाएं और सोने को कहा.

बारिश बहुत तेज थी बिजली भी कड़क रही थी और हम सब एक ही बिस्तर पर सोने के लिए तैयार थे सबसे पहले मेरी बहन उसके बाद मेरी मम्मी और उसके बाद मैं. मम्मी ने एक चादर को हम सबके कमर तक रख दिया ताकि ठंड ना लगे पर मौसम ठंडा था मैं मम्मी के पीछे लेता हुआ था मम्मी ने मेरी तरफ कमर कर दिया जल्दी मेरी बहन सो गई. मम्मी ने मुझे जगाया और बोली की एक मोमबत्ती ले ले मुझे वॉशरूम जाना है उधर काफी अंधेरा है. मैंने मोमबत्ती लिया और उसे जलाकर मम्मी के आगे आगे चलने लगा वॉशरूम आते ही मम्मी ने कहा

“तू यहीं रुक मैं टॉयलेट करके आ रही हूं” तो मैंने कहा “मम्मी अगर मैं बाहर तो अंदर पूरा अंधेरा हो जाएगा आपको कुछ नहीं दिखेगा”.

मम्मी- ” दरवाजा खुला रहने दे और अपना मुंह उसे तरफ घुमा”

मैं-“हां ठीक है” दबी हुई आवाज में.

पर मैं उसे देखे बिना कैसे रह पाता मैं सुबह से यही तो देखना चाहता था उसने पीठ मेरी और घुमाई साड़ी को कमर तक उठाया उसने रेड कलर की पैंटी पहनी थी उसकी गोरी गोरी जाएंगे साफ दिखाई दे रही थी और टॉयलेट के लिए बैठने के लिए जा रही थी उसने अपना पैंटी को नीचे किया और उसका गांड साफ-साफ दिखाई दे रहा था दरवाजा खुला था और उसके मुतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी मन तो कर रहा था जो कि उसकी बुर को चाटलू और जब मैं उसकी तरफ देख रहा था उसने अचानक नजरे घुमाई तो उसने देखा कि मैं उसकी तरफ देख रहा हूं. वह झट से पेंटि को ऊपर उठाई और साड़ी संभालते हुए बाहर निकली वह समझ गई थी कि मैं उसे देख रहा था उसने और उसे भी पता था कि मेरा लंड निकर के अंदर तना हुआ था. उसने मुझसे कहा ” जा तुझे भी जाना है तो चले जा फिर रात को मुझे जागना मत” ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरी लंड को देखना चाहती हो इसलिए मैं भी देर नहीं किया मैं अंदर गया और अपना लंड निकर से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से खड़ा था यह देखकर वह दंग रह गई. उसे अंदाजा लग गया था मेरे इरादे का मैं भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखा वह नीचे मुंह कर ली. मैंने एक बार फिर हिम्मत दिखाइए मैं बाहर निकला और मम्मी को लेकर बाथरूम में चला गया इस बार उसने धीमी आवाज में कहा “यहां क्यों लाया है मुझे”.

मैं- “मम्मी अब तो मान जाओ”

मम्मी-” पर यह सही नहीं है किसी को हम दोनों के बारे में अगर पता चल गया तो?”.

मैं-” इस बाथरूम में मेरे और आपके अलावा और है कौन जो किसी को पता चलेगा”

मम्मी-” तेरी बहन बाहर सो रही है अगर जाग गई तो?”

मैं- “नहीं जागेगी, आप भी जानती हो वह गहरी नींद में सोती है”.

मम्मी-” पर करना क्या चाहता है तू?”

मैं-” आपको चोदना”

मम्मी-” थोड़ा तो शर्म कर मां से कोई ऐसी बात करता है”.

मैं-“जब मां इतनी सेक्सी हो तो बेटा कैसे रोक पाएगा अपने आप को”.

और मम्मी की होठों को चूसने लगा मोमबत्ती की हल्की की रोशनी मैं उसकी लिप्स और चमक रहे थे. क्या गर्माहट थी और लिप्स की मानो पूरे बदन में करंट सा लग रहा हो. मैंने उसकी ब्लाउज की बटन को खोल दिया मम्मी ने ऊपर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी. मुझे यकीन नहीं हो रहा था क्या यह वही मां है जो कि अपने बेटे को डांट रही थी और आज अपने आप को मेरे हवाले कर दिया. मैंने जोर से मम्मी के ब्रा को पीछे से खोलना शुरू किया और वह बेचैन होने लगी जल्दी से उसने खुद अपने ब्लाउस को उतारा और फिर ब्रा को मेरे सामने मेरी मां का पूरा नंगा स्तन था. मैं तुरंत उसकी चूची को अपने मुंह में भर के चूसने लगा वह बेचैन होती जा रही थी मैं चुस रहा था बहुत रसीला था मम्मी का दूध.

मम्मी ने अचानक मेरे मुंह को हटाया घुटने के बल पर बैठ गई और मेरे पेंट को नीचे किया और मेरा लंड के छेद के चुम्मा दिया और फिर दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे लंड को मुंह में घुसाने लगी.

मैं-” लंड कैसा लगा मम्मी?”.

मम्मी-” सोचा नहीं था इतना मजा आएगा”(कांपते हुए आवाज में).

मम्मी देर तक चुस्ती रही मेरे लंड को मुझे लगा अगर और देर तक चुस्ती रही तो मेरा पानी निकल जाएगा मैं इतना जल्दी खेल खत्म होने नहीं देना चाहता था, पहली बार था उसके होठों को छूते ही आग लग चुकी थी.

मैं-” मम्मी अपना बुर दिखाओ ना”.

मम्मी-” उसे दिन माही का नहीं देखा था क्या”.

मैं-” देखने वाला था पर तभी आप आ गई उसका ना सही आपका तो अब देख सकता हूं.”

मम्मी -“क्या करेगा देखकर”

मैं-” उसे जी भर कर चाटना है”

मम्मी-“ओ हां हां आज चाट ले अपनी मम्मी का बुर”. यह बोलकर मम्मी ने जल्दी से अपनी पैंटी उतारकर नीचे लेट गई. जैसे ही मैंने टांगों को थोड़ा सा फैलाया उसके बुर के होठों का उभार मुझे और पागल करने लगा और मैं तुरंत उसके बुर को अपने मुंह मे भर लिया वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी उसके बुर का रस मेरे मुंह में आ रहा था वह क्या स्वाद था उसका. चाट चाट के उसका बुर साफ कर दिया. उसके छोटे-छोटे झाँट के बाल

उसके छोटे-छोटे झाँट के बालों की खुशबू मेरे नाक में आ रही थी. मैं उसके बुर को चाटता रहा और वह सिसकियां भर रही थी साथी आह की आवाज.

मम्मी-“आह आ..आह अब मत चाट बेटा पूरा पानी निकल गया है”. एक बार अपना लंड घुसा दे अंदर.”

मैं-“ओह मम्मी, सच में अब रहा नहीं जा रहा टांगों को थोड़ा सा फैला लो मम्मी.”

मम्मी ने पूरी मेहनत की और अपने पैरों को चौड़ा किया मेरा लंड लेने के लिए अपने आप को तैयार किया मैं एक चीज तो जानता था कुछ भी हो है तो मेरी मां मेरे से तो ज्यादा एक्सपीरियंस है इसका मैंने अपने लंड के ऊपर के हिस्से को मम्मी के बुर से रगड़ना शुरू कर दिया लंड को छूते ही वह थरा गई उसकी सांसे और तेज चलने लगी और वही हाल मेरा भी था और क्यों ना हो पहली बार अपनी मां की बुर में लंड को घुसने जा रहा था. मैंने अपने लंड का निशाना मां की बुर की छेद पर किया धीरे से धक्का देने की कोशिश की मैंने देखा मेरा लंड थोड़ा सा मम्मी के अंदर जाने लगा था पर अभी भी एक मोटा लंबा हिस्सा बाहर था और मम्मी का इतने में ही आह निकल रहा था.

मम्मी-“आह..आह बेटा थोड़ा धीरे करना”

मैं-” क्या हुआ मम्मी आपको तो इस चीज का एक्सपीरियंस होगा फिर क्यों डरती हो”.

मम्मी-” ऐसा नहीं है साल में एक बार तेरे पापा आते हैं उसमें क्या एक्सपीरियंस और अब मैं जवान भी तो नहीं हूं जो तेरी जोर-जोर के झटके बर्दाश्त कर पाऊं”.

मैं-” कोई बात नहीं मम्मी आपकी बुर को ध्यान से चोदूंगा धीरे-धीरे” और यह कहकर मैं अपना लंड लेकर अपनी मां की बुर में अंदर तक घुसता जा रहा था.

मम्मी-” बस बेटा ओ…हो..हो.आह..आह धीरे-धीरे.”

मैं-” क्या करूं मम्मी अब रहा नहीं जा रहा है कुछ नहीं होगा कर लेने दो जोर-जोर से”.

मम्मी-“सारी ताकत ताजी निकाल देगा क्या”.

मैं-” आपके लिए तो हर दिन तैयार रहूंगा आप टेंशन मत लो बस आज जी भर कर चोद लेने दो” मैं और तेज चोदता रहा मम्मी को और वह सिसकियां भरती रही. मम्मी ने जोर से मुझे पकड़ कर अपनी बाहों में भर लिया मैं अपना पूरा लंड मम्मी के बुर में घुसा दिया और उसकी गर्मी मेरे लंड का पानी निकलने वाला था तभी मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर मम्मी की चूची पर अपना पानी निकाल दिया. हम दोनों की हालात एक जैसी थी ऐसी बारिश और ठंडा मौसम में भी पसीने से भीग चुके थे और वही फर्श पर सोए हुए थे. मैंने इसी बहाने से पूछ लिया.

मैं-” मम्मी कल तो इतना नाराज हुई थी मुझसे, डांट रही थी फिर आज अचानक ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों यहां तक आ गए.”

मम्मी-” क्या करूं मैं आज पूरे दिन स्कूल में यही सोचती रही अगर हम दोनों मैं कोई ऐसा रिश्ता बन जाता है जो किसी को पता ही ना चले तो बुरा ही क्या है.”

हम इस तरह एक दूसरे की बाहों में लिपटी ही थे तभी अचानक मेरे बहन की आवाज आने लगी बाहर से ढूंढ रही थी. और अब हम दोनों डरे हुए थे हमने तुरंत कपड़े पहनना शुरू किया और फिर जल्दी से प्लान बनाया कि पहले मम्मी बाहर जाएगी और उसकी बातों में मिल जाएगी और मैं धीरे से निकल लूंगा पीछे से पर यह प्लान फेल हो गया जैसे ही मम्मी ने दरवाजा खोला तो देखा मेरी बहन दरवाजे पर ही खड़ी थी बाहर निकली वह तुरंत अंदर आ गई बोलते हुए कि उसे टॉयलेट करना है.

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यह कहानी है हम 3 दोस्तो की. बबलू, विक्की और मैं आशु (निकनेम्स), हम तीनो देल्ही के साउत-एक्स इलाक़े मे पले- बढ़े हैं. हम तीनो ही अप्पर मिड्ल क्लास से थे. पैसे की कोई टेन्षन नही पर लिमिट भी थी. दिन मे स्कूल-कॉलेज फिर शाम को साउत-एक्स मार्केट मे तफ़री. हमारी मार्केट की खास बात है कि यहा सिर्फ़ हाई-फाइ लोग ही शॉपिंग करने आते है. यह अमीरो की मार्केट जो है. एक से एक सेक्सी कपड़ो मे सुन्दर-गोरी लड़किया ही मार्केट की रौनक थी. बाकी दुनिया मल्लिका सहरावत, नेहा धूपिया, एट्सेटरा. हेरोयिन्स को जिन कपड़ो मे सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देख पाते है, हम उन्हे अपनी आखों के सामने देखते थे. हर लड़की के साथ कोई ना कोई बाय्फ्रेंड ज़रूर होता था. कोई लीप किस कर रहा है तो कोई कमर मे हाथ डाल कर चल रहा है. इतने शानदार नज़ारो को देखते हुए रात के 10-11 बज जाते थे. ये जश्न तो उसके बाद भी चलता रहता था पर घर पर डाँट पड़ने का भी डर होता था, इसलिए हम 11 बजे तक घर पहुच जाते थे… ऐसे हस्ते खेलते आँखे सेकते लाइफ कट रही थी, पर अचानक हमारी जिंदगियो मे बवंडर आ गया. हम तीनो बी.कॉम के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम मे लटक गये. कॉलेज से रिज़ल्ट देख कर घर जाते समय हम एक ख़तरनाक फ़ैसला कर चुके थे… 4 दिन बाद हम तीनो मुंबई के वीटी स्टेशन पर उतरे. घर वालो का पता नही क्या हाल था. हम तीनो के पास अपने कुल 5500 रुपये थे. हमे पता था कि मुंबई मे ये 5-6 दिन से ज़्यादा नही चलेंगे. स्टेशन से सीधे हम विरार मे विक्की के दोस्त श्याम के पास पहुच गये. श्याम अपनी प्लेसमेंट एजेन्सी चलाता था. हमने उससे रहने की जगह का बंदोबस्त करने को कहा और नौकरी का भी इन्तेजाम करने को कहा. फिर हम निकल पड़े मुंबई नगरी के जलवे देखने. शाम को वापस पहुचने पर श्याम का चेहरा खिला हुआ था. विक्की- क्यो दाँत दिखा रहा है बे ? श्याम- अबे मैदान मार लिया. तुम तीनो सुनोगे तो मेरा मूह चूम लोगे. विक्की- कुत्ते तूने हमे गे समझ रखा है क्या ? तेरा मूह तोड़ देंगे. श्याम- अरे भड़क क्यो रहा है यार…मैने तुम्हारे लिए ऐसे कामो का इन्तेजाम किया है कि तुम जिंदगी भर मुझे याद रखोगे. ये लो जॉब कार्ड्स और कल सुबह 10 बजे तक अपनी-अपनी नौकरी पर पहुच जाना. मैने कहा- थॅंक यू श्याम भाई. फिर हम तीनो रात बिताने के लिए अपना समान उठाकर श्याम की बताए जगह पर पहुच गये. सुबह के 9.50 हो चुके थे और मैं अपनी नौकरी की जगह के सामने खड़ा था. जुहू मे एक शानदार सफेद रंग का बंग्लॉ था. मैं गेट और बिल्डिंग के बीच शानदार लॉन था जिस पर 1 छतरी, 2 कुर्सी और 1 मेज लगे थे. मैनगेट पर वॉचमन खड़ा था. उसके पास पहुच कर मैने जॉब कार्ड दिखाया और बोला- नौकरी के लिए आया हू. वॉचमन- मुंबई मे नये हो ? मैं (आशु)- हा. पहले देल्ही मे था. वॉचमन- फिर तो मुंबई मे टिक जाओगे, देल्ही तो मुंबई की बाप है. फिर उसने इंटेरकाम पर बात की और छोटा गेट खोल दिया और बोला- सीधे अंदर बिल्डिंग के पीछे चले जाओ. मेडम वही मिलेंगी. मैने अपना समान उठाया और बिल्डिंग के पीछे पहुच गया. बिल्डिंग के पीछे का नज़ारा आगे से भी शानदार था. वाहा भी हरियाली थी और बाउंड्री वॉल बहुत उँची थी. बिल्डिंग के साथ एक बहुत बड़ा स्विम्मिंग पूल बना था जिस पर सूरज रोशनी पड़ने से तेज चौंधा निकल रहा था. कुछ सुन-बात कुर्सी पड़ी थी और एक पर कुछ टवल जैसे कपड़े पड़े थे. एक कॉर्डलेस फोन भी पूल की मुंडेर पर रखा था. पर वाहा पर कोई मेडम नही थी. मैं वापस गेट के लिए मुड़ने ही वाला था कि अचानक पानी की आवाज़ आई. एक 30 साल की हसीना ने स्विम्मिंग पूल के पानी से अपना सिर बाहर निकाला और बोली- तुम ही केर टेकर की नौकरी के लिए आए हो? क्या नाम है तुम्हारा ? आशु- ज..जी म..मेरा नाम आशु है. मेडम- हकलाते हो क्या ? (हंसते हुए बोली) आशु- ज..जी नही. मेडम- ठीक है. अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर मे रख दो और 5 मिनिट मे मैं हॉल मे आ जाओ. देल्ही मे मैने आइटीआइ से हॉस्पिटालिटी, विक्की ने वीडियो फोटोग्रफी और बबलू ने टेलरिंग का कोर्स किया था. यही ट्रैनिंग आज हमारे काम आ रही थी. हमने श्याम को अपने सर्टिफिकेट दे दिए थे और उसने हमारे लिए वैसे ही काम ढूँढ दिए. उधर विक्की और बबलू भी अपनी-अपनी नौकरियो पर पहुच चुके थे. विक्की को एक फिल्म प्रोड्यूसर के पास असिस्टेंट कॅमरामेन जॉब के लिए गया था और बबलू एक टेलरिंग शॉप मे असिस्टेंट मास्टर के लिए. चलिए अपनी कहानी आगे बढ़ते हैं. फिर मैने (आशु) अपना समान उठाया और कनखियो से मेडम की तरफ देखा. पर मेडम फिर पानी मे गायब हो गयी थी. मैं सीधा वॉचमन के पास पहुचा और बोला- भाई अब ये सर्वेंट क्वॉर्टर कहा है. वॉचमन चाबी देते हुए बोला- तीसरा कमरा खाली है, वही तुम्हे मिलेगा. कमरे पर पहुच कर अपना समान रखा और नज़र कमरे को देखा और बाहर निकल गया. सीधे मैं हॉल मे पहुचा, पर वाहा कोई नही था. बिल्डिंग के अंदर क्या शानदार सजावट थी वो शब्दो मे नही बता सकता. एक खास बात थी कि बिल्डिंग की एंट्रेन्स से लेकर सब जगह आदमियो के न्यूड स्कल्प्चर्स (मूर्तिया) लगे थे. औरत की कोई नही थी. मैं हॉल से पीछे स्वीमिंग पूल का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा था. तभी स्विम्मिंग पूल से मेडम बाहर निकली… संगेमरमर मे तराशे हुए जिस्म पर पानी से तर-बतर छोटी सी बिकिनी मे मेडम अपने सुन्बाथ चेर के पास पहुचि. सूरज की रोशनी मे मेडम के अंगो का एक एक कटाव और भी गहरा लग रहा था. मेडम की लंबी गोरी टाँगे, बिकिनी से बाहर झाँकते 36डी के बूब्स, पूरी निर्वस्त्रा कमर पर केवल एक डोरी… ये सब देख कर मेरे पूरे शरीर मे कीटाणु रेंगने लगे. दिल धड़-धड़ कर बजने लगा और मेरा लंड बुरी तरह अकड़ गया. टट्टो मे दर्द होने लगा. मेरी पॅंट मे एक पहाड़ सा उभर आया. (आप लोग यकीन मानिए की मैं अब तक (18 साल) ब्रह्मचारी ही था. मेरा वीर्य-पात अब तक नही हुया था और ना ही मुझे इस बारे मे पता था. देल्ही मे माइक्रो-मिनी और ट्यूब-टॉप पहने आध-नंगी लड़कियो की मैं मार्केट मे लड़को के साथ चुहल-मस्ती देखकर भी हम तीन दोस्तो को कभी भी मूठ मारने ख़याल नही आया थी. इसका ही नतीजा था कि मेरा लंड जब खड़ा होता था तो पूरे 8″ का पत्थर बन जाता था. और कुछ ना करने पर भी कम से कम आधे घंटे बाद ही शांत होता था.) अब मेरे लिए भारी मुश्किल हो गयी थी. सामने मेडम ने अपना टवल गाउन पहन लिया था और अब मैं हॉल की तरफ आ रही थी. इधर मेरी पॅंट मेरे मन की दशा जग-जाहिर कर रही थी. मैने अपने लंड को शांत करने के लिए थोडा सहलाया पर इससे बेचेनी और बढ़ गयी. और कुछ ना सूझा तो, मैं एक सोफे की पीछे जाकर खड़ा हो गया. इससे मेरी पॅंट को उभार छिप गया था. मेडम मैं हॉल मे आ चुकी थी- पहले कभी कहीं काम किया है ? आशु- जी नही. मेडम- तुम मुंबई कब आए. आशु- जी 1 दिन पहले. मेडम- बड़े लकी हो की एक दिन मे ही जॉब मिल गया. आशु- जी. मेडम- इतनी दूर क्यों खड़े हो यहाँ आओ. मैं जैसे-तैसे वाहा बैठ गया. पता नही मेडम ने पॅंट को नोटीस किया या नही. मेडम- मैं ज़्यादा नौकर-चाकर नही रखती. जीतने ज़्यादा होते हैं उतना सिरदर्द. मुझे अपनी प्राइवसी बहुत पसंद है. वॉचमन को भी बिल्डिंग मे कदम रखने इजाज़त नही है. केवल तुम्हे ही बिल्डिंग मे हर जगह जाने की इजाज़त होगी. इसलिए तुम्हे ही पूरी बिल्डिंग की केर करनी होगी. बोलो कर सकोगे ? आशु- जी. मेडम- वैसे तो इस घर मे कुल 2 लोग ही रहते हैं, मैं और मेरे पति की बेटी दीपा. घर पर खाना नही बनता. इसके अलावा लौंडरी, चाइ-कॉफी, रख-रखाव जैसे छोटे मोटे काम करने होंगे. आशु- मेडम तन्खा कितनी मिलेगी ? मेडम मुस्कुराते हुए बोली- शुरू मे 20000 रुपये महीना मिलेगा. अगर तुम हमारे काम के निकले तो कोई लिमिट नही है. बोलो तय्यार हो ? आशु- ज..जी मेम . मेडम- ठीक है तो उपर दीपा मेडम का कमरा है, उसे जाकर जगा दो. फिर कॉफी लेकर मेरे लिविंग रूम मे पहुच जाना, एकदम कड़क चाहिए. आशु- जी. मैं तुरंत वाहा से निकल लिया. जान बची सो लखो पाए. किचन मे कॉफी मेकर मे कॉफी का समान डाल कर मैं उपर पहुच गया. वाहा 4 कमरे थे. 3 कमरे लॉक थे. मैने चौथे कमरे का दरवाजा नॉक किया, पर कोई रेस्पोन्स नही आया. थोड़ी देर बाद मैं दरवाजे का हॅंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया. अंदर एक दम चिल्ड था. एक गोल पलंग पर एक खूबसूरत सी लड़की सोई थी. एक दम गोरी-चित्ति, ये दीपा थी. उसके कपड़े देख कर देल्ही की याद ताज़ा हो गयी. वही ट्यूब टॉप और माइक्रो मिनी. पर यहा की बात ही अलग थी. वाहा देल्ही मे लड़कियो को डोर से देख कर ही आँखे सेक्नि पड़ती थी और यहा एक अप्सरा मेरे सामने पड़ी थी. आल्मास्ट सोने से दीपा के कपड़े अस्त-व्यस्त हो गये थे. उसकी ब्लू स्कर्ट तो कमर पर पहुच गयी थी और पूरी पॅंटी अपने दर्शन करा रही थी. उपर का वाइट टॉप भी उपर चढ़ गया था और सुन्दर सी ऑरेंज एमब्राय्डरी ब्रा दिखने लगी थी.

टॉप और ब्रा के बीच उसकी क्लीवेज भी सॉफ दिखाई दे रही थी. इस हालत मे मैने दीपा को जगाना ठीक ना समझा. मैने वापस गेट के बाहर जाकर पुकारा- दीपा मेम. पर कोई हलचल नही हुई. हिम्मत जुटा कर अंदर गया और पुकारा- दीपा मेम. फिर वही हालात. मैने दीपा को हल्के से हिलाकर फिर पुकारा. पर कोई फायेदा नही. दीपा का कमसिन जिस्म देखकर मेरी हालत फिर सुबह जैसी होती जा रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आ चुका था और बुरी तरह फदक रहा था. टट्टो मे भी दर्द बढ़ता जा रहा था. अब मैने दीपा को ज़ोर से हिलाया. पर वो तो जैसे बेहोश पड़ी थी. उसकी कलाईयो पर कई जगह छोटे-छोटे लाल निशान बने थे. अब मैं खुद को रोक नही पा रहा था. अब कोई चारा नही था. मैं बेड पर दीपा के बगल मे लेट गया. सब कुछ अपने आप हो रहा था. मेरी नज़र दीपा की क्लीवेज पर गढ़ी हुई थी. इतने साल जो चीज़ देख कर ललचाते थे, वो आज मेरे सामने पड़ा था. हिम्मत और डर दोनो बढ़ते जा रहे थे. फिर धीरे से अपनी उंगली दीपा की क्लीवेज पर फिरा दी. पहली बार उस जगह का स्पर्श पाकर मैं बहकने लगा. अब मेरे हाथो ने उसके बूब्स को कपड़ो के उपर से ढक लिया था. फिर मैं दीपा के योवन-कपोत (बूब्स) को धीरे-धीरे दबाने लगा. इधर मेरे हाथो का दबाव दीपा के बूब्स पर बढ़ता उधर मेरी साँसे और लंड फूलते जाते. फिर मैने उसके टॉप के स्ट्रॅप्स खोल दिए. अब दीपा केवल ब्रा मे थी. ऑरेंज रंग की ब्रा मे उसके बूब्स किसी टोकरी मे रखे सन्तरो की तरह लग रहे थे. मैने उसकी क्लीवेज पर अपनी जीभ फिरानी शुरू की. दोनो हाथो से उसके बूब्स भीच रहा था. थोड़ी देर तक उपर से दबाने के बाद मैं बदहवास सा हो गया था. मुझ बेचारे को क्या पता था कि बूब्स के अलावा भी एक लड़की के पास काम की चीज़े होती हैं. मैं तो इन्ही को देख-देख कर बड़ा हुआ था. इतना सब होने के बाद भी दीपा की तंद्रा (नींद) नही टूटी और मेरी हिम्मत और ज़ोर मारने लगी. अब मैने धीरे से अपना दाया हाथ दीपा की ब्रा मे सरकया. अंदर जाकर मेरे हाथ की उंगलियो के पोर (फिंगर-टिप) उसकी छोटी सी निपल से टकराया. थोड़ी देर मे उसका निपल मेरी दो उंगलियो के बीच फँसा था. मैं उस निपल को मसल्ने लगा. अपने निपल्स के साथ छेड़खानी दीपा सहन नही कर सकी और हरकत करने लगी. उसकी टाँगे मसल्ने लगी और मुँह से इश्स..स.सस्स की आवाज़े निकलने लगी. दीपा का हाथ अपनी जाँघ के बीच पहुच गया और धीरे-धीरे जाँघो के बीच मसलने लगा. जैसे-जैसे वो मसल्ति जाती वैसे-वैसे उसकी सिसकारिया तेज हो रही थी. अचानक एक तेज आवाज़ सुनाई दी- आशु…कॉफी… मैं एक झटके मे बेड से उछल कर खड़ा हो गया. और भागता हुआ किचन मे पहुचा. कॉफी मेकर का स्विच ऑन किया. 5 मिनिट बाद मैं कॉफी ट्रे मे लेकर मेडम के पास खड़ा था.

इसी तरीके से काम करोगे तो ज़्यादा दिन नही टिकोगे !- मेडम गुस्से से बोली. आशु- मेडम सॉरी..वो दीपा मेडम को काफ़ी उठाया…पर वो उठ ही नही रही. मेडम- हा अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद जो है..मैं ऑफीस जा रही हू…शाम तक घर साफ मिलना चाहिए. इतना कहकर मेडम बाहर निकल गयी. 11 बज चुके थे और पेट मे चूहो ने हंगामा कर रखा था. मैं सीधे किचन मे गया और खाने की चीज़ ढूँढने लगा. पूरे किचन के डब्बे खाली थे. ऐसे लग रहा था कि चाइ-कॉफी के अलावा यहा कभी कुछ नही बना. मैं बाहर ही निकलने वाला था की फ्रिड्ज पर नज़र गयी. फ्रिड्ज पूरा मालामाल था. मैने वाहा से 2 बर्गर उठाए और ओवेन मे डाल दिए. फिर गरमा-गरम बर्गर और चिल्ड जूस पीकर शांति मिली. फिर मैं सीधे अपने कमरे पर पहुचा. कमरा साफ करके अपना समान सेट किया. तभी गेट पर नॉक हुई. वॉचमन- और भाई सब ठीक-ठाक हो गया. आशु- हा यार. वॉचमन- अपना नाम तो बता दो यार. आशु- आशु. वॉचमन- मेरा नरेश है. पिछले 15 साल से यहा काम कर रहा हू. आशु- अच्छा..तुम्हारा बाकी परिवार कहा है? नरेश- सब गाव मे हैं. आशु- अच्छा नरेश भाई एक बात तो बताओ…ये मेडम के साब कहा है? नरेश- ….मुझसे ये नही पूछो तो अच्छा है. और कुछ भी पूछ लो. आशु- अच्छा कोई बात नही.. पर ये मेडम की उम्र तो 30 साल से ज़्यादा नही लगती…फिर ये 17-18 साल की बेटी कहा से पैदा हो गयी. नरेश- तुम सब पूछ कर ही मनोगे. दीपा मेडम दीपिका मेम की सौतेली बेटी है. दीपा मेडम के पापा ने दूसरी शादी की थी. आशु- ओह तो ये बात है. मैं दीपा मेडम को उठाने गया था पर वो उठी ही नही ? नरेश- किसी को बताना नही उसे कुछ दिन से ड्रग्स लेने की आदत पड़ गई है. अच्छा मैं गेट पर चलता हू. कोई दिक्कत हो तो इंटरकम पर बता देना. आशु- ओके अब मैं भी थोड़ा आराम करूँगा. बिल्डिंग मे दुबारा पहुचने मे 2 बज गये थे. घर की सफाई करने मे कब 6 बजे पता ही ना चला. तभी कार के रुकने की आवाज़ आई. मेडम ने अंदर आते हुए कहा- दीपा कहा है ? आशु- मेडम मैं दुबारा उपर नही गया. देखने जाउ ? दीपिका- नही, वो गयी होगी अपने दोस्तो के साथ. मेरे सिर मे काफ़ी दर्द है. तुम एक बढ़िया सी कॉफी बना कर आधे घंटे बाद मेरे बेड रूम मे ले आना. उससे पहले नहा ज़रूर लेना. कितनी गंदे लग रहे हो. आशु-जी. आधे घंटे बाद मैं कॉफी लेकर मेडम के बेडरूम के बाहर खड़ा था. नॉक करने पर अंदर से आवाज़ आई, दरवाजा खुला है.. अंदर आ जाओ. कमरे के अंदर जाते ही एक दिन मे तीसरी बार मेरा लंड भड़क गया. मेडम एक स्किन कलर की नेट वाली नाइटी पहने बाथरूम से बाहर निकल रही थी. नाइटी के नीचे से उनकी ब्लॅक ब्रा सॉफ दिखाई दे रही थी. नाइटी की लंबाई उनके हिप्स तक थी और छाती के पास केवल एक बटन लगा था. 36डी साइज़ के बूब्स के उभार के कारण उनकी नाइटी नीचे से खुल गयी थी और पूरे पेट और नाभि के दर्शन हो रहे थे. नीचे उन्होने ब्लॅक पॅंटी पहनी थी. पॅंटी के नीचे गोरी पूरी टाँगे एकदम नंगी थी. मेडम- कॉफी साइड टेबल पर रख दो और यहा आ जाओ. मेडम का अंदाज मादक था. पर मेरे कानो ने जैसे कुछ सुना ही नही था. मैं एकटक मेडम के बूब्स को ही देख रहा था. मेडम ने मेरे हाथ से ट्रे ले कर टेबल पर रखी और हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा दिया..मैं जैसे सपना देख रहा था. मेडम- क्या देख रहे हो. यह सुनकर मुझे झटका सा लगा और मे तुरंत उछल कर खड़ा हो गया. आशु- ज..जी सॉरी मेडम. मेडम- मेरी टाँगो मे बड़ा दर्द हो रहा है. क्या तुम थोड़ा दबा दोगे. आशु-जी मेडम. और मैं मेडम की टांगो के पास बैठ गया. मेडम की गोरी मखमली टाँगो पर एक भी बाल नही था. उनके बदन से भीनी-भीनी महक आ रही थी. मैने एक टांग को हाथो मे लेकर दबाना शुरू किया. तभी मेडम चीख पड़ी- क्या करते हो ? आराम से दबाओ और ये लो थोड़ा आयिल भी लगा दो. मैने वैसे ही हल्के हाथ से मालिश शुरू कर दी. मेडम आँखे बंद करके और घुटने मोड़ कर लेटी रही. मेरी नज़र फिर मेडम के मोटे-मोटे बूब्स पर जा टिकी जो ब्लॅक ब्रा के बाहर झाँक रहे थे. मेरे पूरे शरीर मे चीटिया सी रेंगने लगी थी. पर अबकी बार मैने अपने होश नही खोए. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब थोड़ा उपर करो. यह सुनकर मेरे हाथ मेडम के घुटनो पर पहुच गये. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. मैं मेडम के घुटनो से जाँघ की मालिश करने लगा. जब भी मेरे हाथ नीचे से उपर की ओर जाते थे. मेडम साँस रोक लेती थी. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. आशु- वाहा तो आपकी पॅंटी है, वो तेल से गंदी हो जाएगी. मेडम- तो फिर उसे उतार दो ना. मैने वैसा ही किया. अब मेडम बूब्स के नीचे से पूरी नंगी थी. 2 मिनिट बाद मेडम ने अपनी मुड़े हुए घुटने फैला दिए. जिस जगह पर हमारा लंड होता है वाहा पर मेडम का केवल एक हल्का सा उभार था, जो की बीच से कटा हुआ था. वाहा पर बाल एक भी नही था. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब ज..जाँघ को करो. मेरे दोनो हाथ मेडम की गोरी चित्ति जाँघो को धीरे से सहला रहे थे. हाथ जब भी मेडम के कटाव के पास पहुचते तो मेडम अपने दाँत भींच लेती. मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था. शायद मेडम बहुत थॅकी हुई थी और मेरी मसाज से उन्हे आराम मिल रहा था. मेडम (आँखे बंद किए हुए ही)- अब मेरी चिड़िया की भी मालिश करो. आशु- मेडम आपकी चिड़िया कहा है ? मेडम- अरे बुद्धू मेरी चूत के उपर जो दाना है वही चिड़िया है. आशु- मेडम ये चूत कहा होती है ? तब मेडम ने अपने दोनो हाथो से अपने कटाव की दोनो फांको को खोल दिया- ये चूत है. फिर अपनी उंगली चूत के उपर के दाने पर लगा कर कहा ये चिड़िया होतो है. अब इसकी मालिश करो. मैं मेडम की दोनो टाँगो के बीच बैठ गया और मेडम की चिड़िया को सहलाने लगा. थोड़ी देर मे ही मेडम की टाँगे मचलने लगी. मेडम-थोड़ा तेज करो…….थोड़ा तेज………और तेज….तेज. मैं मेडम के कहे अनुसार अपनी रफ़्तार और दबाव बढ़ता गया. मेडम- टाँगो पर तो बड़ा दम दिखा रहे थे. एक चिड़िया को नही मार सकते. थोड़ा तेज हाथ चलाओ ना. यह सुनकर मैने मेडम की चूत को अपने बाए हाथ की 2 उंगलियो से खोला और दाए अंगूठे मे आयिल लगा कर मेडम की चिड़िया को बुरी तरह रगड़ने लगा. अब मेडम बुरी तरह छटपटाने लगी. मुँह से इश्स..हा..स..हा निकल रहा था. टाँगे इधर उधर नाच रही थी. अपने हाथो से मेरे बालो को पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ दबाने लगी. मेडम जितना तेज सिसकती, मेरी बेरहमी उतनी ही बढ़ती जाती. अचानक मेडम के मूह से जोरदार चीख निकली-आआआआआआअहह और चूत से एक जोरदार पिचकारी निकल कर मेरे मूह पर आ पड़ी. मैने सोचा मेडम ने मेरे मूह पर यूरिन कर दिया है. थोड़ा मेरे मूह मे भी चला गया था. उसका स्वाद अजीब सा था पर स्वादिष्ट था. मेरी जीभ अपने आप ही बाहर निकल कर मेरे मूह को चाटने लगी. मेडम ने मेरे अब तक चल रहे हाथो को ज़ोर से पकड़ लिया और बोली- तेरे हाथ तो रैल्गाड़ी की तरह चलते है. तेरी मालिश ने तो मेरी टाँगो की सारी थकान निकाल दी. पर मुझे अनमना देख कर मेडम थोड़ा अटकी और पूछा – क्या हुआ ? आशु- क्या मेडम आप भी ना. अपने मेरे मूह पर ही यूरिन कर दिया. मेडम ज़ोर के खिलखिला उठी- पगले ये यूरिन नही स्त्री-रस होता है. केवल इस रस से ही पुरुषो की प्यास बुझ सकती है. आशु- ओह….हा इसका स्वाद तो बहुत अच्‍छा था. मेडम- मैने तेरी प्यास बुझाई अब तू मेरी भी बुझा. आशु- मेडम मेरे पास तो कोई चूत या चिड़िया नही है. आपकी प्यास कैसे बुझाउ. मेडम फिर खिलखिला उठी. वो उठी और मुझे बेड पर लिटा दिया. मेडम ने मेरी पॅंट उतार दी. मेरे अंडरवेर मे 8 इंच का उभार बना हुआ था. मेडम- अरे तुमने तो यहा एक तंबू भी लगा रखा हा. इस तंबू का बंबू कहा है? मैं शर्म के मारे कुछ नही बोला. मैं जिस बात को सुबह से छिपा रहा था, मेडम सीधे वहीं पहुच गयी थी. मैं बिना हिले दुले पड़ा रहा. अब मेडम ने मेरे अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया. मेडम एक दम सन्न रह गयी. फिर अगले ही पल मेरा अंडरवेर भी उतर गया. मेडम- ये क्या है. पत्थर का इतना मोटा मूसल लगा रखा है. मैने आज तक नही इतना मोटा नही देखा. इसे कौन सा तेल पिलाते हो. मैं चुप ही रहा पर मेरा लंड… मेरा लंड जुंगली शेर की तरह दहाड़े लगा रहा था. मेडम ने अपने कोमल हाथो से मेरे लंड को दोबारा नापा. अंडरवेर के अंदर उनको लंड की इतनी मोटाई का विश्वास नही हुआ था. लंड को हल्का सा सहलाने के बाद उन्होने उसे बीच से कस कर पकड़ लिया और नीचे खिचने लगी. मेडम का मूह मेरे लंड के ठीक उपर था और जीभ लप्लपा रही थी. जैसे -जैसे लंड की काली खाल नीचे जा रही थी एक चिकना-गोरा-बड़ी सी सुपारी जैसा कुछ बाहर निकल आया. आशु- मेडम ये क्या है. मेडम- इसको सूपड़ा कहते है. जैसे मेरी चिड़िया ने तेरी प्यास बुझाई थी वैसे ही मेरी प्यास इस से बुझेगी. यह कहकर मेडम ने मेरे लंड को सूँघा. पता नही कैसी स्मेल थी पर मेडम एक दम मदहोश हो गयी. फिर धीरे से उन्होने अपनी जीब मेरे सूपदे पर फिराई और चाटने लगी. पूरे लंड को उपर से नीचे तक चाटने के बाद, मेडम ने सूपदे के मूह पर अपना मूह लगा दिया. उनका मूह पूरा खुला हुआ था. उन्होने एक हाथ से खाल को नीचे खीचा हुआ था. फिर धीरे-धीरे मेडम मेरे लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते लंड का सूपड़ा मेडम के गले तक पहुच गया. अब भी मेरा लंड 2 इंच बाहर था. फिर मेडम ने मेरे लंड की लंबाई-चौड़ाई अपने मूह से नापने के बाद उसे बाहर निकाला. मेडम के मूह मे लार भर गयी थी जो उन्होने लंड पर उगल दी और एक गहरी साँस ली. अब मेरा लंड पूरा भीग गया था. मेडम उसे कुलफी की तरह चूसने लगी. बार बार मेरा लंड उनके मूह से बाहर आता फिर तुरंत अंदर चला जाता. मेडम की तेज़ी बढ़ती जा रही थी. बीच-बीच मे मेडम अपने बाए हाथ मे पकड़ी खाल को भी उपर नीचे कर देती थी. इस सब से मैं भी मदहोश हो रहा था. मैने सोचा ऐसे मेडम की प्यास तो पता नही कैसे बुझेगी, पर मेरी हालत अब काबू से बाहर थी. जो आवाज़े पहले मेडम निकाल रही थी, वैसी ही आवाज़े अब मेरे मूह से अपने आप निकल रही थी. टाँगे फदक रही थी और हाथ मेडम के सिर पर अपने आप पहुच गये थे. पर इस सब से मेडम को कोई फरक नही पड़ा था. पूरे 10 मिनिट तक चूसने के बाद मेडम ने मेरा लंड से मूह उठाया और फिर लंबी साँस ली और बोली- बड़ा स्टॅमिना है तेरे मे. पर मेरा नाम भी दीपिका है, मैं अपनी प्यास बुझा कर ही रहूंगी. अगले ही पल जोरदार चुसाई चालू हो गयी. मेडम को पता नही क्या जुनून था. पर इससे मुझे क्या, मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. अचनांक पता नही मेरे अंदर से कोई तूफान मेरे लंड की ओर बढ़ता सा लगा. अचनांक बहुत मज़ा सा आने लगा, जो शब्दो मे बताना असंभव है. म्‍म्म्ममममममममममममममममममममह – एक ज़ोर की आवाज़ निकली. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे इतना मज़ा इससे पहले कभी नही आया था. मेरा रोम-रोम निहाल हो रहा था. जिस शांति की तलाश मे मेरा लंड अब तक भटक रहा था वो अजीब सी शांति मेरे लंड को मिल रही थी. इधर मेडम ने भी उपर नीचे करके चूसना छोड़ कर अपने होंठ मेरे सूपदे पर कस लिए. वो पूरा ज़ोर लगा कर मेरे लंड को आम की तरह चूसने लगी. 5-7 सेकेंड तक मेरे लंड से कुछ निकलता रहा और मेडम उसे निगलती रही. अच्छी तरह लंड की खाल को उपर तक निचोड़ लेने के बाद ही मेडम ने अपना मूह मेरे लंड से हटाया. मेडम की आँखे बंद थी. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे नींद सी आने लगी थी. मेडम ने 1 मिनिट तक चुप रही फिर बाकी का भी निगल गयी. फिर मेडम ने मेरे लंड के सूपदे को चूमा और बोली- क्यो आया मज़ा ? आशु- मेडम क्या आपकी प्यास बुझ गयी. मेडम ने मादक अंगड़ाई लेकर कातिल नज़रो से मुझे देखा और बोली- पता नही बुझी या तूने और भड़का दी. तेरी रस का स्वाद कुछ अलग सा था एक दम ताज़ा. कोई खास बात है क्या ? आशु- मेडम आज से पहले मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया. मुझे तो पता भी नही था की मेरे अंदर भी कोई रस होता है. मेडम- यानी आज तेरा पहली बार का रस निकला है… तभी मैं कहु… मेडम की आँखे चमक उठी और कुछ सोचकर बोली -तू अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर से लाकर बगल वाले रूम मे रख ले ना. अब तू हमारे साथ ही रहेगा, पता नही कब कौन सा काम पड़ जाए. मैं हैरानी से एक टक मेडम को देखता रहा पर कुछ ना बोल सका. मेडम- अच्छा अब तेरी नौकरी भी पक्की और सॅलरी भी डबल. और बोल क्या चाहिए ? आशु- मेडम क्या आप मेरे काम से इतनी खुश है? मेडम- हा. और कुछ मन मे हो तो वो भी माँग ले. आशु- जी कुछ नही चाहिए. मेडम- तू बोल तो सही. आशु- रहने दीजिए…पर मेडम आपकी कॉफी तो ठंडी हो गई. मेडम- तेरा रस पी लिया तो कॉफी कौन पिएगा….चल तुझे एक खेल सिखाती हू…तूने कभी चूत लंड की लड़ाई देखी है… आशु- जी नही, कैसे खेलते है बताइए ना.

अंजाना रास्ता सेक्स कहानी हिन्दी

ये कहानी तब की है जब मे 11 क्लास मे पढ़ता था . मे अपने चाचा जी के घर पर पढ़ाई कर रहा था क्योंकि मेरा घर गाँव मे था और वाहा कोई अच्छा स्कूल नही था इसलिए मेरे चाचा मुझे अपने साथ अपने घर ले आए थी. उनका घर काफ़ी बड़ा था. अब मुझे मिलाकर घर मे चार मेंबर हो गये थी . पहले और घर के बड़े चाची जी और चाची जी और उनकी एक लोति संतान अंजलि दीदी जिनकी उम्र उस वक्त 23 थी और चोथा था मे ( अनुज ). अंजलि दीदी बहुत खूबसूरत थी उनकी हाइट 5′ 5″ , स्लिम , गोरा रंग और जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थी वो थी उनके रेशमी लंबे बाल जो कि उनकी लो बेक तक आते थे. कुल मुलाकर अंजलि दीदी किसी फिल्म आक्ट्रेस से काम नही लगती थी. वो मुझे बहुत प्यार्कर्ती थी इसकी वजह शायद ये भी थी कि उनके कोई अपने छोटे भाई बहन नही थे. सो मेरे घर मे आने से वो अब अकेला महसूस नही करती थी . अंजलि दीदी एम.कॉम कर रही थी उनकी मैथ बहुत अच्छी थी . सो वो मुझे अक्सर मैथ मे हिल्प कर दिया करती थी. मेरे स्कूल मे मेरे ज़्यादा फ्रेंड नही थे सिर्फ़ गिने चुने दोस्त थे. राज भी उनमे से एक था ..वो पढ़ाई लिखाई मे कम और गुंडा गर्दि मे ज़्यादा लगा रहता था …उसकी मेरी दोस्ती तब हुई थी जब मे स्कूल मे नया आया था. मे नया नया गाँव से आया था सो ज़्यादा पता नही था सहर के लोगो के बारे मे इसलिए कुछ सीनियर लड़को ने मुझे स्कूल मे पकड़ कर मेरे पैसे छीनने चाहे ..मे बहुत डर गया था..पर मैने उन्हे पैसे देने से इनकार कर दिया ..तब एक लड़के ने मेरा गिरेवान पकड़ कर मुझे मुक्का मारना चाहा कि तभी कही से राज आ गया वो लंबा चौड़ा था ..उसको देख कर उन लड़को ने मुझे छोड़ दिया..तब से ही हम दोस्त थे… मेरा स्कूल बाय्स स्कूल था सो एक दिन क्लास मे जब मे लंच टाइम मे लंच कर रहा था तो राज मेरे पास आया और बोला ..” अबे क्या अकले अकेले खा रहा है … मैने उसको बोला ले भाई तू भी खा ले …वो हस्ने लगा और बोला जल्दी खाना खा तुझे एक अच्छी चीज़ दिखाता हू….उसका चेहरा चमक रहा था..मुझे भी उत्सुकता थी ज़ल्दी खाना खाया और फिर बोला ” हा. राज बता क्या बात है’ तब राज ने इधर उधर देखा ..क्लास मे और कोई नही था ..उसने अपने बेग मे हाथ डाला और के छोटी सी किताब निकाल ली…मैं बड़े ध्यान से उसे देख रहा था….जैसे ही उसने वो किताब खोली मेरे रोंगटे खड़े हो गये ..उस किताब मे जो फोटो थी उनमे लड़कियो की नंगी तस्वीरे थी….मेरा चेहरा लाल हो गया था शरम से. मुझे देख राज हंस पड़ा. और बोला.” अबे चुतिये क्या हुआ ..तेरी गांद क्यो फॅट रही है…” मैने अपनी ज़िंदगी मे पहली बार ऐसे फोटो देखी थी .. मैने कहा राज कोई देख लेगा यार..अगर पकड़े गये तो बहुत पिटाई होगी..तब राज बोला तू तो बड़ा फटू है साले इतनी मुस्किल से तो इस किताब का जुगाड़ किया है मैने ..फिर वो उसके पन्ने पलट ने लगा ..दूसरे पन्नो मे एक आदमी खड़ा था और एक लड़की उसका लंड अपने मूह मे ले रही थी..मुझे बहुत डर लग रहा था पर अब मेरी इच्छा और बढ़ गई थी मे उस बुक को पूरा देखना चाहता था…तभी स्कूल बेल बजी जिसका मुतलब था कि लंच टाइम ख़तम हो गया है ..राज ने उस किताब को वापस अपने बेग मे रख लिया क्योंकि बाकी बच्चे क्लास मे आने लगे थे…मुझे बड़ा गुस्सा आया क्योंकि मुझे उस किताब की बाकी फोटो भी देखनी थी ..पर क्या करता क्लास अब बच्चो से भर चुकी थी और साइन्स का टीचर क्लास मे एंटर हो चुका था. उस दिन जब मे छुट्टी होने के बाद घर गया तब घर पर चाची ही थी . चाचा जी तो ऑफीस से शाम को आते थे और अंजलि दीदी 4 बजे कॉलेज से आती थी . खैर मैने खाना खाया और अपने कमरे मे थोड़ा आराम करने के लिए चला गया ( मे आपको ये बता दू अंजलि दीदी और मेरा कमरा एक ही था बस बेड अलग थे ).गर्मियो के दिन थे सो मुझे नींद आ गयी..मुझे सपनो मे भी वोही तस्वीरे ..वो नंगी लड़किया..उनकी बूब्स..नज़र आ रही थी..कि तभी मुझे कुछ गिरने की आवाज़ आई ..मैने अपनी आँखे खोली तो देखा की दीदी के बेड पर कुछ बुक्स पड़ी है जिसका मुतलब सॉफ था कि दीदी घर आ चुकी है…तभी मेरी नज़र अपने पाजामे पर गयी..उसका टेंट बना हुआ था ..मेरा लंड उन फोटो को याद करते करते खड़ा हो चुका था..वो तो अच्छा था कि मे उल्टा सोया था नही तो दीदी उसको देख सकती थी..मे उठ कर बैठा ही था कि अंजलि दीदी कमरे मे आए उन्होने पिंक सूट और ब्लॅक सलवार पहने हुए थी . ” और मिस्टर जाग गये तुम….कितना सोते हो..” अंजलि दीदी अपना दुपट्टा उतार कर स्टडी टेबल पर रखते हुए बोली….मे अभी भी थोड़ा नींद के नशे मे था …दुपपता उतारने से उनके बूब्स और उभर कर बाहर आ गये थे..और मेरे नज़र सीधी उनपर गयी…वैसे तो मे दीदी को काई बार विदाउट दुपपता देख चुका था फिर पता नही आज उनके बूब्स देखते ही मेरा दिमाग़ उन नंगी लड़कियो के बूब्स को दीदी के बूब्स से कंपेर करने लगा और मेरे लंड ने ज़ोर से झटका लिया..ऐसा मेरे साथ पहले बार हुआ था…” दीदी बहुत थक गयी थी..पता नही कब नींद लग गयी मुझे.” मैने दीदी की तरफ देखा जो कि अपने बेड पर बैठ गयी थी..तभी दीदी ने कुछ ऐसा किया के मेरे लंड ने दोसरा झटका मारा दीदी ने अपने जुड़े की पिन खोली और उनकी लंबे सेक्सी रेस्मी बाल खुल गये फिर दीदी ने उनको आगे किया और मुझे देखते हुए बोली ” क्या हुआ मिस्टर. ऐसे क्या देख रहा है तू..” मेरा तो चहरा एक दम से लाल हो गया मुझे ऐसा लगा जैसे की मे चोरी करते हुए पकड़ा गया हू… मे घबरा कर बोला..एमेम…ह्म्म…का .कुकुच ..नही दीदी …वो आपके बाल …” मेरा गला सुख चुका था. दीदी हस्ते हुए अपने बेड से उठ कर मेरी बगल मे बैठ गयी. मुझे उनके बदन पर लगे डीयोडरेंट की खुशुबू आ रही थी..और साथ मे डर भी लग रहा थी कि कही दीदी मेरे पाजामे की तरफ ना देख ले…खैर ऐसा कुछ नही हुआ और दीदी ने मुझे गाल पर एक किस दिया और बाहर जाने लगी..मे उन्हे जाते हुए देख रहा था..उनकी लंबे बाल उनकी कमर पर बड़े सेक्सी तरीके से लहरा रहे थे..और मुझे चिड़ा रहे थे… ” अबे वो किताब कैसे लगी थी तुझे…मज़ा आया था.” राज मुझे चिड़ाते हुई बोला. हम क्लास मे पिछले डेस्क पर बैठे थे. ” कितनी बार मूठ मारा था तूने ..बोल बोल…शर्मा मत..” वो फिर बोला “मैने ऐसा कुछ नही क्या” मे बोला “अबे चूतिए वो तो सिर्फ़ फोटो थी …बोल उनकी मूवी देखे गा…ज़ल्दी बोल..” ये सुन कर मेरे लंड मे हर्कात से होने लगी. और ना चाहते हुए भी मेरे मूह से निकला ” क..कहा..देखेंगे ” वो तू मुझ पर छोड़ दे ..चल स्कूल के बाद मेरे साथ चलना और.मैने हा मे सिर हिला दिया. स्कूल की छुट्टी होते ही राज मुझे स्कूल के पास वाले साइबर केफे ले गया..हमने कोने वाली एक सीट ली ..कंप्यूटर को राज ओपरेट कर रहा था ..जिस तरह से वो कंप्यूटर चला रहा था उससे पता लगता था कि वो इस काम मे काफ़ी एक्ष्पर्त है..मैने उसे कई बार इस साइबर केफे से आते जाते देखा था…तभी उसने कोई साइट खोली और सामने नंगी लड़कियो की तस्वीर आनी शुरू हो गयी.. ये सब देखते ही मेरा गला सूख गया मे ये सब पहली बार देख रहा था..फिर राज ने किसी लिंक पर क्लिक किया और कुछ सेकेंड बाद एक क्लिप प्ले होने लगी ..उसमे एक आदमी एक लड़की के उप्पर चढ़ा हुआ था..लड़की झुकी हुई थी और वो आदमी ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था….ये देखते ही मेरा लंड ना जाने क्यू मेरी पॅंट मे खड़ा हो गया .. ” इसको चुदाई कहते है ..देख कैसे चोद रहा है लड़की की चूत को…..” मे कुछ बोल नही रहा था मेरी आँखे तो कंप्यूटर स्क्रीन से चिपक गयी थी ..मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. ..और मन मे ये डर भी था कि कही कोई हमे पकड़ ना ले ये सब देखते हुए.. अचानक मेरी आँखे नीचे गयी और मैने देखा कि राज के पेंट मे भी टेंट बना हुआ है…सिर्फ़ अंतर इतना था कि उसका टेंट काफ़ी बड़ा लग रहा था.. मैने फिर से कंप्यूटर की तरफ़ देखा..अब वहा दूसरी क्लिप चल रही थी ..इसमे एक काला आदमी की गोरी लड़की को बड़ी बेरहमी से चोद रहा था ” गोरी लड़की बहुत खूबसूरत थी और वो काला आदमी उतना ही बदसूरत..पता नही क्यू इसे देख मेरा लंड और ज़्यादा कड़क हो गया..क्लिप्स छोटी छोटी ही थी..पर उन छोटी छोटी क्लिप्स ने मेरे अंदर बड़े बड़े अरमान जगा दिए थे.. हम वहा १ घंटे तक रहे फिर मे घर आ गया. “आह….फक मी..ह्म्म….” लड़की चिल्ला रही थी. ये वोही लड़की थी जिसको मैने उस मूवी क्लिप मे देखा था बस अंतर इतना था कि उस काले आदमी के जगह मे उसको चोद रहा था…एमेम….ह्म..आ.आ….फक..मी..मेरे आँखे बंद थी . तभी मुझे कुछ गीला गीला लगा..मेरी आँखे खुल चुकी थी ..और मेरा सपना भी टूट चुका था…मेरे लंड ने सपना देखते देखते ही पानी छोड़ दिया था…मैने घड़ी की तरफ़ देखा तो रात के 2 बजे थे .कमरे मे नाइट बल्ब जल रह था….. यका यक मेरी नज़र सामने अंजलि दीदी के बेड पर गयी. जिसको देख तेही मेरे रोंगटे खड़े हो गये……. दीदी बिस्तर पर सीधी सो रही थी ..उनकी चूचियाँ बिल्कुल सीधी तनी खड़ी थी ..जैसे जैसे दीदी सास लेती थी वो उप्पर नीचे होती थी…मेरे नज़र तो मानो उन खोबसुर्रत उभारो पर ही जम गयी थी …अब मुझे अपने पाजामे मे फिर से वो ही हरकत महस्सूस होनी लगी .मेरा लंड खड़ा हो रहा था….मुझे ये समझ नही आ रहा थी कि मुझे अपनी दीदी को देख कर क्यू ऐसा लग रहा है..वो मुझे कितना प्यार करती है ..मुझे अपने उप्पर गिल्टी होने लगी..मे फिर सीधा बाथरूम गया और पेशाब कर कर अपने बेड पर आकर सो गया. अगली सुबा मेरी आख 8 बजे खुली.मे उठ कर बैठा और चारो तरफ़ देखा तो पाया की दीदी का बॅग टेबल पर रखा है. आज दीदी कॉलेज नही गयी शायद. खैर मे उठ कर फ्रेश हुआ और ड्रॉयिंग रूम की तरफ़ चला ..अंजलि दीदी सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी… दीदी को देखते ही मुझे रात की बात याद आई ..और मेरे अंदर फिर से गिल्टी फीलिंग आ गयी.. “अरे..मेरा राजा भैया जाग गया..आजा..यहा बैठ मेरे पास..” दीदी मुस्कुराते हुए बोली. ” आप कॉलेज नही गयी दीदी” मैने पूछा. “लो कर लो बात …तुझे हुआ क्या है आज कल…अरे सनडे को कोई कॉलेज जाता है क्या ” दीदी मुझे अपने पास बैठाते हुए बोली. ओह आज सनडे है मुझे अपने बेवकूफी पर गुस्सा आया. सच मे पछले कुछ दिनो से राजके साथ रहकर मैं भी उसकी ही तरह हो गया हू. “चाची और चाचा जी नज़र नही आ रहे.” मे बोला “अरे हा ..मे तुझे बताना भूल गयी मम्मी पापा आज बुआ जी के यहा गये है . शाम तक आएँगे…” दीदी टीवी देखते हुए बोली. “तुझे भूक लगी होगी ना..मम्मी खाना बना कर गयी है ..रुक मे तेरे लिए लाती हू’ और दीदी उठ कर किचिन मे चली गयी. मैने टीवी का रिमोट लिया और चैनल चेंज करना चाहा पर रिमोट के सेल वीक हो गये थे सो कई बार बटन दबाने के बाद चैनल चेंज हुआ..मैने बड़े मुस्किल से अनिमल प्लॅनेट चैनल लगाया..मुझे अनिमल प्लॅनेट चैनल देखना बहुत पसंद था..थोड़ी देर के बाद दीदी खाना लेकर आ गयी..वो मेरे पास बैठ गयी..हम दोनो ने खाना खाया.फिर दोनो टीवी देखने लगे.. ” तू ज़रूर बड़ा होकर जानवरो का डॉक्टर बनेगा .” दीदी मुस्कुराती हुई बोली ” क्यू..दीदी” मैं उत्सुकता से दीदी की तरफ़ देखता हुआ बोला सारे दिन अनिमल प्लॅनेट जो देखता रहता है तू.. दीदी अपने रेशमी बाल खोल कर अपने सीने पर डालते हुए बोली..मेरा तो बुरा हाल होगया ..एक तो दीदी थी ही इतनी खोब्सूरत उपर से जब अपने लंबे रेशमी बाल खोल लेती थी तो क्या काहू..कटरीना कैफ़ भी फैल हो जाती थी उनकी सामने. ” ला अपना लेफ्ट हॅंड दे ..मे तुझे तेरा फ्यूचर बताती हू ” कहते हुए दीदी ने मेरा हाथ अपने हाथो मे ले लिया ( मे आपको बता दू कि दीदी नी लॉस टी-शर्ट ऑफ पाजामा पहना हुआ था ) . ” ओफ्फ….म्म..क्या मुलायम हाथ था दीदी का..उनके गोरे गोरे हाथो मे मेरे हाथ भी काले नज़र आने लगे थे… ” तू..बड़ा होकर बनेगा ..म्म..एक..जोकर….हा .हा हा..” दीदी हस्ने लगी. दीदी मज़ाक कर रही थी और मुझे हसाने की कोशिस कर रही थी पर मे तो उनकी खूबसूरती को निहार रहा था. पर थोड़ा मज़ाक करने के बाद हम दोबारा टीवी देखने लगे..कुछ 5 मिनट ही हुए थे कि तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरी ही नही दीदी की भी साँसे रुक गयी थी….जैसा कि मैने आपको को बताया कि टीवी पर अनिमल प्लॅनेट चल रहा था..सब कुछ सही चल रहा था ..कुछ ज़ब्रा घास चर रहे थे कि अचनाक एक बड़ा सा ज़ीब्रा वाहा आया और एक फीमेल ज़ीब्रा की चूत को पीछे से सूंघने लगा..फिर उसने अपनी ज़ीब निकाली और वो उसकी चूत को चाटने लगा..कॅमरा मॅन ने इसका क्लोज़ अप लेना सुरू कर दिया..जैसे जैसे वो उसकी चूत चाट रहा था मैने देखा कि अब कमरे का फोकस उस ज़ीब्रा की टाँगो की तरफ़ था चूत चाटते चाटते उसका लंड बढ़ता ही जा रहा था..और ये सब मे अकेला नही बल्कि पास बैठी दीदी भी देख रही थी..पूरे कमरे मे अब सिर्फ़ टीवी की आवाज़ ही आ रही थी..यका यक पता नही मेरी नज़र दीदी पर गयी…तो मैने पाया कि दीदी बिना आँखे बंद किए ये सब देख रही है…फिर मेरी नज़र दीदी की गर्दन से नीचे सीधे उनके उभारो पर गयी..अब वे और ज़्यादा तन गयी थी .और जल्दी जल्दी उपर नीचे हो रही थी.शायद दीदी की सासे तेज चल रही थी…तभी दीदी की नज़र मुझसे मिली..कुछ सेकेंड के लिए.ही मिली थी …शर्म से उनका गोरा चहरा लाल हो रहा था..वो कुछ ना बोली और आगे बाद कर रिमोट उठा कर चैनल चेंज करने लगी..पर जैसे कि मैने पहले बताया था कि रिमोट के सेल वीक हो गये थे चैनल चेंज नही हुआ..पर तभी टीवी स्क्रीन पर वो ज़ीब्रा उस फीमेल ज़ीब्रा पर चढ़ गया…मुझे तभी अहसास हुआ कि मेरा हाथ अब भी दीदी के कोमल हाथो मे था जो कि अब उनकी राइट थाइ पर रखा हुआ था…उनकी सॉफ्ट थाइट की स्किन को मे उनके पजामे के उपर से महसूस कर सकता था..मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा..उधर ज़ीब्रा ने एक ही झटके मे अपना विशाल लंड फीमेल ज़ीब्रा की चूत मे घुसा दिया..और जैसे ही उसने पहला झटका मारा दीदी ने मेरे हाथ को कस कर भीच लिया..मेरी हालत बहुत बुरी हो गयी…मुझे लग रहा था कि एक तरह से मे दीदी के साथ बैठा ब्लू फिल्म देख रहा हू..मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया..ज़ीब्रा लगातार झटके मार रहा था…मुझ पर सेक्स का नशा चढ़ता जा रहा था …कुछ तो उन जानवरो की चुदाई देख कर ..और कुछ दीदी के नरम हाथो और उनकी गरम जाँघो की गर्मी..मुझसे रहा नही गया और अचानक मैने अपने हाथो को थोड़ा खोला और अंजलि दीदी की राइट जाँघ जिस पर मेरा हाथ रखा था को कस्स कर दबा दिया…बस मेरे लिए ये काफ़ी था और मेरे लंड से पानी छोड़ दिया…वो तो अच्छा था मैने अन्दर्वेअर और उपर से पॅंट पहनी थी नही तो दीदी को पता चल जाता…तभी टेलिफोन की घंटी बजी .दीदी तो मानो सपने से जागी उनको शायद ये भी पता नही था कि मैने उनकी थाइस को दबाया है..वो फॉरन दूसरे कमरे की तरफ़ चली गयी जहा फोन बज रहा था

बाकी दिन और कुछ खांस नही हुआ…बस ये था कि उस दिन दीदी और मेरे बीच कुछ ज़्यादा बाते नही हुई..धीरे धीरे दिन बिताने लगे और एक हफ़्ता और गुजर गया.. इस बीच मे राज के साथ एक दो बार साइबर केफे भी गया था..अब मुझे सेक्स के बारे मे काफ़ी नालेज हो गई थी…अंजलि दीदी भी अब फिर से मेरे साथ नॉर्मल हो गयी थी.. एक दिन की बात है फ्राइडे का दिन था मैं रूम मे कंप्यूटर गेम खिल रहा था उन दिनो स्कूल और कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही थी. दीदी रूम मे आई और मुझे बोली के मैं उनके साथ बॅंक चलू क्योंकि उनको एक ड्राफ्ट बनवाना है…अंजलि दीदी उस दिन हरा सूट और ब्लॅक पाज़ामी पहने हुए थी.. दीदी के रेशमी बाल एक लंबे हाइ पोनी टेल मे बँधे थे . “ ज़ल्दी कर अनुज बॅंक बंद होने वाला होगा…और मुझे आज ड्राफ्ट ज़रूर बनवाना है” दीदी अपने संडले पहनते हुए बोली..वो झुकी हुई थी..और उनके झुकने से मुझे उनके सूट के अंदर क़ैद वो गोरे गोरे उभार नज़र आ रहे थे..मेरा दिल फिर से डोल गया था. बॅंक घर से ज़्यादा दूर नही था सो हम चल दिए. मैने चलते चलते वोही महसूस क्या जो मे हर बार महसूस करता था ज़ॅब दीदी मेरे साथ होती थी. लगभाग हर उम्र का आदमी दीदी को घूर रहा था….उनकी आखो मे हवस और वासना की आग सॉफ साफ देखी जा सकती थी. पर दीदी उनलोगो पर ध्यान दिए बगैर अपन रास्ते जा रही थी. मुझे अपने उप्पर बड़ा फकर महसूस हो रहा था कि मे इतनी खोबसूरत लड़की के साथ हू हालाकी वो मेरी बड़ी चचेरी बहन थी. खैर हम 10 मिनट मे बॅंक पहुच गये बॅंक मे बहुत भीड़ थी..हालाकी ड्राफ्ट बनवाने वाली लाइन मे ज़्यादा लोग नही थे वो लाइन सबसे कोने मे थी…दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और हम उस लाइन की तरफ़ बढ़ चले. “अनुज तू यहा बैठ..और ये पेपर पकड़..मैं लाइन मे लगती हू” दीदी बॅग से कुछ पेपर निकालते हुए बोली. मैं साइड मे रखी बेंच पर बैठ गया और दीदी कुछ पेपर और पैसे लेकर लाइन मे लग गयी..भीड़ होने की वजेह से औरत और आदमी एक ही लाइन मे थे. मैं खाली बैठा बैठा बॅंक का इनफ्राज़्टरूट देखने लगा.और जैसा हर सरकारी बॅंक होता है वो भी वैसे ही था …जिस लाइन मे दीदी लगी थी वो लाइन सबसे लास्ट मे थी और उसके थोड़ा पीछे एक खाली रूम सा था जिसमे कुछ टूटा फर्निचर पड़ा हुआ था..उस जागह काफ़ी अंधेरा भी था. शायद टूटा फर्निचर छुपाने के लिए जान भूज कर वाहा से बल्ब और ट्यूब लाइट हटा दिए गये थे..इसलिए वाहा इतना अंधेरा था..खैर ये तो हर सरकारी बॅंक की कहानी थी.. दीदी जिस तरफ़ लाइन मे खड़ी थी वाहा थोड़ा अंधेरा था. मुझे लगा कही दीदी डर ना जाय क्योंकि उन्हे अंधेरे से बहुत डर लगता था…तभी दीदी मुझे अपनी तरफ़ देखते हुए थोड़ा मुस्कुराइ और ऐसा जताने लगी की..मानो कहना चाहती हो कि ये हम कहा फँस गये. गर्मी भी काफ़ी थी..तभी एक आदमी और उस लाइन मे लग गया..वो देखने मे बिहारी टाइप लग रहा था..उमर होगी कोई 35 साल के आस पास. उसने पुरानी सी शर्ट और पॅंट पहने हुए था और वो शायद मूह मे गुटका भी चबा रहा था..एक तो उसका रंग काला था उप्पर से वो लाइन के अंधेरे वाले हिस्से मे लगा हुआ था..उसको देख कर मुझे थोड़ी हँसी भी आरहि थी. “कितनी भीड़ है बेहन चोद “. वो अंधेरी साइड मे गुटका थुक्ता हुआ बोला. तभी उसका फोन बजा.फोन उठाते ही उसने फोन पर भी गंदी गंदी गाली देने शुरू कर दी..जैसे..तेरी बेहन की चूत ,,मा की लोड्‍े,,तेरी बहन चोद दूँगा..वागरह वागारह..दीदी भी ये सब सुन रही थी शायद पर क्या कर सकती थी वो..मुझे भी गुस्सा आ रहा था.. कुछ मिनिट्स के बाद मैने कुछ ऐसा देखा जिससे मेरे दिल की धड़कन तेज होगयी अब वो बिहारी दीदी से चिपक कर खड़ा था. उसकी और दीदी की हाइट लगभग सेम थी जिससे उसका अगला हिस्सा ठीक दीदी की पाजामी के उप्पर से उनके उभरे हुए चूतर पर लगा हुआ था. वो लगातार दीदी को पीछे से घूर भी रहा था..दीदी के सूट का पेछला हिस्सा थोड़ा ज़्यादा खुला हुआ था जिससे उनकी गोरी पीठ नज़र आ रही थी . तभी वो थोड़ा पीछे हुआ और मैने देखा कि उसके पेंट मे टॅंट बना हुआ है .फिर उसने अपना राइट हॅंड नीचे किया और अपने पॅंट को थोड़ा अड़जस्ट क्या..अब उसका वो टेंट काफ़ी विशाल लग रहा था..मेरा दिल जोरो से धड़क ने लगा. मेरे लंड मे हरकत शुरू होने लगी ये सोच कर ही कि अब ये गंदा आदमी मेरी खूबसूरत दीदी के साथ क्या करेगा. हालाकी वो और दीदी अंधेरे वाले हिस्से मे थे फिर भी उस आदमी ने इधर उधर देखा और.फिर अपने आपको धीरे से दीदी से चिपका लिया उसका वो टेंट अंजलि दीदी के पाजामे मे उनके उभरे हुए चुतड़ों के बीच कही खोगया था. और जैसे ही उसने ये किया दीदी थोड़ा आगे की तरफ़ खिसकी..दीदी का चेहरा अंधेरे मे भी मुझे लाल नज़र आ रहा था. तनाव उनके चेहरे पर सॉफ देखा जा सकता था..ये सारी बाते बता रही थी कि दीदी जो उनके साथ हो रहा था उससे अब वाकिफ्फ हो चुकी थी. दीदी की तरफ़ से कोई ओब्जेक्सन ना होने की वजह से उसके होसले बढ़ने लगे थे वो दीदी से और ज़्यादा चिपक गया . जैसा कि मैने बताया था कि अंजलि दीदी ने अपने रेशमी बालो की हाइ पोनी टेल बाँधी हुई थी.उस आदमी का गंदा चेहरा अब दीदी के सिर के पीछले हिस्से के इतना पास था कि उसकी नाक दीदी की बालो मे लगी हुई थी और शायद वो उनके बालो से आती खुसबू सुंग रहा था..दीदी की पोनी टेल तो मानो उनके और उस बिहारी के बदन से रगड़ खा रही थी. मेरी बेहद खूबसूरत जवान बड़ी बहन के बदन से उस लोवर क्लास आदमी को इस तरह से चिपका देखा मेरा लंड मेरे ना चाहने पर भी खड़ा होने लगा था.

मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी उस आदमी ने अपना नीचला हिस्सा धीरे धीरे हिलाना सुरू कर दिया और उसका लंड पेंट के उप्पर से ही अंजलि दीदी के उभरे हुए चूतरो पर आगे पीछे होने लगा..ये सारी हरकत करते हुए वो आदमी लगातार दीदी के खूबसूरत चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था. अंधेरे कोने मे होने की वजह से कोई उसकी ये हरकत नही देख पा रहा था और इसका वो आदमी अब पूरा फ़ायदा उठा रहा था..वैसे भी इतनी सुंदर जवान लड़की उसकी किस्मत मे कहा होती. दीदी डर के मारे या ना जाने क्यू उस आदमी को रोक नही पा रही थी..पर तभी अचानक दीदी को शायद याद आया कि मैं भी उधर ही बैठा हू तब उन्होने थोड़ा सा मूड कर मेरी साइड की तरफ़ देखा कि कही मैं से सब तो नही देख रहा हू ..मैने फॉरन अपना ध्यान न्यूज़ पेपर पर लगा लिया जो के मेरे हाथो मे था. दीदी को शायद यकीन हो गया था कि मैं उनकी साथ जो हो रहा है उसको नही देख रहा हू. वो आदमी अब पिछले 10 मिनट से दीदी को खड़े खड़े ही कपड़ो के उप्पर से उनकी चूतादो पर अपने खड़ा लंड को अंदर बाहर कर रहा था. तभी मुझे लगा की उस आदमी ने दीदी की कानो मे कुछ धीरे से कहा पर दीदी ने कोई जवाब नही दिया…मेरा दिल अपनी बड़ी बहन का सेडक्षन देख इतनी जोरो से धड़क रहा था कि मानो अभी मेरा सीना फाड़ कर बाहर आ जाएगा..तभी मुझे एक हल्की से कराह सुनाई दी…और मुझे ये समझने मे देर ना लगी कि वो मादक आवाज़ अंजलि दीदी के मूह से आई थी..दीदी की आँखे 5 सेक के लिए बिल्कुल बंद हो गई थी और उनके दाँतअपने रसीले होटो को काट रहे थे..मुझे से समझ नही आया कि ये क्या हुआ..उस आदमी का हाथ तो अब भी साइड मे था..पर भगवान ने इंसान को दो हाथ दिए है….तभी मुझे दीवार के साइड से दीदी की चुननी हिलती हुई नज़र आई…क्या वो आदमी…..नही ये नही हो….सकता…क्यो नही हो सकता….क्या उस आदमी का लेफ्ट हॅंड दीवार की साइड से दीदी के लेफ्ट बूब्स पर है..अब उस आदमी की आँखो मे हवस साफ नज़र आ रही थी..वो दीदी की लेफ्ट चूची को उनके हरे सूट के उप्पर से हवस के नशे मे शायद बड़े जोरो से दबा रहा था ..तभी उसने दोबारा दीदी की कान मे कुछ कहा ..और दीदी ने झिझाक ते हुए अपनी टाँगो को थोड़ा खोल लिया …अब वो आदमी थोड़ा ज़ोर से दीदी के उभरे हुए कोमल चुतड़ों को ठोकने लगा..हवस का ऐसा नज़ारा देख मे खुद पागल सा हो गया था ..अब मैं ज़्यादा से ज़्यादा देखना चाहता था कि वो आदमी अब और क्या करेगा..दीदी की बढ़ती सासो से उनके वो पके आम की साइज़ के उभार सूट मे जोरो से उप्पर नीचे हो रहे थे ..पर शायद मेरी किस्मात खराब थी क्योंकि तभी मेरे पास एक बूढ़ा आदमी आया और बोला कि बेटा मेरे लिए एक स्टंप पेपर ला दोगे बाहर से..उस बुढ्ढे आदमी को उधर देख वो बिहारी फटाफट दीदी से अलग हुआ..शायद उसको भी गुस्सा आया था…और क्यू ना आए ऐसा गोलडेन चान्स कोन छोड़ना चाहता था..मैने देखा दीदी और वो बिहारी मेरी तरफ़ देख रहे है..मुझे गुस्सा तो बहुत आया बुढ्ढे आदमी पर क्या करता मैं ये सोच कर मैं उठा और बाहर जाने लगा.वो बुढ्ढा अब मेरी जगह पर बैठ गया था..बाहर जाते जाते मैने तिरछी नज़र से देखा कि वो बिहारी फिर दीदी को कुछ बोल रहा है और इस बार दीदी भी उसकी तरफ़ देख रही थी उनका गोरा चहरा शरम और डर से लाल हो रहा था…मैं ज़ल्दी से बाहर गया और स्टंप पेपर लेने के लिए दुकान ढूँढने लगा…मेरे मन मे अब ये चल रहा था कि अब वो आदमी दीदी के साथ क्या क्या कर रहा होगा..क्या वो रुक गया होगा..क्या दीदी ने उसको मना कर दिया होगा…ये सब दीदी की मर्ज़ी से नही हुआ है…शायद ..मेरी दीदी के भोले पन का उसने फ़ायदा उठया है..मेरी दीदी ऐसी नही है.….ये सब बाते मेरे दिमाग़ मे चल रही थी..करीब 20 मिनट घूमने के बाद मुझे स्टंप पेपर मिला..और मैं बॅंक मे वापस गया ..वो बूढ़ा मुझे गेट मे एंट्री करते ही मीलगया ..मैने उसको स्टंप पेपर दिया..अब मैं उम्मीद कर रहा था अब ताक दीदी ने ड्राफ्ट बनवा लिया होगा ..और वो आदमी भी जा चुका होगा …और मैं फटाफट ड्राफ्ट की लाइन के तरफ़ बढ़ा..पर वाहा पहुच कर मेरा सिर चकरा गया …ड्राफ्ट की लाइन अब ख़तम हो चुकी थी ..काउंटर पर लिखा था क्लोस्ड ..बॅंक मे भी भीड़ कम होने लगी थी..मैं परेशान हो गया ..मैने सोचा की दीदी शायद बाहर मेरा वेट कर रही होंगी ..सो मैं बाहर जाने ही लगा था कि..मैने देखा जिस तरफ अंधेरा था और वाहा जो खाली रूम था जिसमे टूटा फर्निचर पड़ा था..वाहा से वोही बिहारी अपनी पॅंट की ज़िपार बंद करता हुआ निकला..और बाहर चला गया..मुझे ये बड़ा आजीब लगा पर फिर मैने सोचा शायद टाय्लेट गया होगा क्योंकि टाय्लेट भी उधर ही था…फिर मे बाहर जाने के लिए मुड़ा ही था की मैने देखा अंजलि दीदी अपने बालो को सही करते हुए उसी रूम से बाहर आ रही है जहा से कुछ मिनिट पहले वो आदमी निकला था..मेरा दिल की धाड़कन एक दम बढ़ गयी …दीदी उस कमरे मे उस गंदे आदमी के साथ अकेले थी…जो आदमी खुले आम किसी लड़की के साथ इतनी छेड़ खानी कर सकता है ..वही आदमी अकेले मे एक खोबसुर्रत जवान लड़की के साथ क्या क्या करेगा…इन सब ख्यालो ने मेरे लंड मे खून का दौर बढ़ा दिया…दीदी ने मेरी तरफ़ नही देखा था….मैं दीदी की तरफ़ बढ़ा “ “दीदी आप कहा थी..मैं आपको ढूंड रहा था..”मैं बोला दीदी थोड़ा घबरा गयी पर फिर शायद अपनी घबराहट को छुपाटी हुई वो थोड़ा मुस्कुराइ और बोली. “ तू कब आया था …और स्टंप पेपर दे दिए तूने उन अंकल को” “जी..और आपने ड्राफ्ट बनवा लिया क्या” मैने उनके पसीने से भरे चेहरे को देखते हुए बोला.उनका सूट भी कई जगह से पसीने से तर बतर था. जिसका सॉफ सॉफ मतलब ये था कि दीदी उस रूम मे काफ़ी टाइम से थी. “नही यार…क्लर्क ने कहा है कि ड्राफ्ट बनवाने के लिए इस बॅंक मे अकाउंट होना ज़रूरी है”

मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी उस आदमी ने अपना नीचला हिस्सा धीरे धीरे हिलाना सुरू कर दिया और उसका लंड पेंट के उप्पर से ही अंजलि दीदी के उभरे हुए चूतरो पर आगे पीछे होने लगा..ये सारी हरकत करते हुए वो आदमी लगातार दीदी के खूबसूरत चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था. अंधेरे कोने मे होने की वजह से कोई उसकी ये हरकत नही देख पा रहा था और इसका वो आदमी अब पूरा फ़ायदा उठा रहा था..वैसे भी इतनी सुंदर जवान लड़की उसकी किस्मत मे कहा होती. दीदी डर के मारे या ना जाने क्यू उस आदमी को रोक नही पा रही थी..पर तभी अचानक दीदी को शायद याद आया कि मैं भी उधर ही बैठा हू तब उन्होने थोड़ा सा मूड कर मेरी साइड की तरफ़ देखा कि कही मैं से सब तो नही देख रहा हू ..मैने फॉरन अपना ध्यान न्यूज़ पेपर पर लगा लिया जो के मेरे हाथो मे था. दीदी को शायद यकीन हो गया था कि मैं उनकी साथ जो हो रहा है उसको नही देख रहा हू. वो आदमी अब पिछले 10 मिनट से दीदी को खड़े खड़े ही कपड़ो के उप्पर से उनकी चूतादो पर अपने खड़ा लंड को अंदर बाहर कर रहा था. तभी मुझे लगा की उस आदमी ने दीदी की कानो मे कुछ धीरे से कहा पर दीदी ने कोई जवाब नही दिया…मेरा दिल अपनी बड़ी बहन का सेडक्षन देख इतनी जोरो से धड़क रहा था कि मानो अभी मेरा सीना फाड़ कर बाहर आ जाएगा..तभी मुझे एक हल्की से कराह सुनाई दी…और मुझे ये समझने मे देर ना लगी कि वो मादक आवाज़ अंजलि दीदी के मूह से आई थी..दीदी की आँखे 5 सेक के लिए बिल्कुल बंद हो गई थी और उनके दाँतअपने रसीले होटो को काट रहे थे..मुझे से समझ नही आया कि ये क्या हुआ..उस आदमी का हाथ तो अब भी साइड मे था..पर भगवान ने इंसान को दो हाथ दिए है….तभी मुझे दीवार के साइड से दीदी की चुननी हिलती हुई नज़र आई…क्या वो आदमी…..नही ये नही हो….सकता…क्यो नही हो सकता….क्या उस आदमी का लेफ्ट हॅंड दीवार की साइड से दीदी के लेफ्ट बूब्स पर है..अब उस आदमी की आँखो मे हवस साफ नज़र आ रही थी..वो दीदी की लेफ्ट चूची को उनके हरे सूट के उप्पर से हवस के नशे मे शायद बड़े जोरो से दबा रहा था ..तभी उसने दोबारा दीदी की कान मे कुछ कहा ..और दीदी ने झिझाक ते हुए अपनी टाँगो को थोड़ा खोल लिया …अब वो आदमी थोड़ा ज़ोर से दीदी के उभरे हुए कोमल चुतड़ों को ठोकने लगा..हवस का ऐसा नज़ारा देख मे खुद पागल सा हो गया था ..अब मैं ज़्यादा से ज़्यादा देखना चाहता था कि वो आदमी अब और क्या करेगा..दीदी की बढ़ती सासो से उनके वो पके आम की साइज़ के उभार सूट मे जोरो से उप्पर नीचे हो रहे थे ..पर शायद मेरी किस्मात खराब थी क्योंकि तभी मेरे पास एक बूढ़ा आदमी आया और बोला कि बेटा मेरे लिए एक स्टंप पेपर ला दोगे बाहर से..उस बुढ्ढे आदमी को उधर देख वो बिहारी फटाफट दीदी से अलग हुआ..शायद उसको भी गुस्सा आया था…और क्यू ना आए ऐसा गोलडेन चान्स कोन छोड़ना चाहता था..मैने देखा दीदी और वो बिहारी मेरी तरफ़ देख रहे है..मुझे गुस्सा तो बहुत आया बुढ्ढे आदमी पर क्या करता मैं ये सोच कर मैं उठा और बाहर जाने लगा.वो बुढ्ढा अब मेरी जगह पर बैठ गया था..बाहर जाते जाते मैने तिरछी नज़र से देखा कि वो बिहारी फिर दीदी को कुछ बोल रहा है और इस बार दीदी भी उसकी तरफ़ देख रही थी उनका गोरा चहरा शरम और डर से लाल हो रहा था…मैं ज़ल्दी से बाहर गया और स्टंप पेपर लेने के लिए दुकान ढूँढने लगा…मेरे मन मे अब ये चल रहा था कि अब वो आदमी दीदी के साथ क्या क्या कर रहा होगा..क्या वो रुक गया होगा..क्या दीदी ने उसको मना कर दिया होगा…ये सब दीदी की मर्ज़ी से नही हुआ है…शायद ..मेरी दीदी के भोले पन का उसने फ़ायदा उठया है..मेरी दीदी ऐसी नही है.….ये सब बाते मेरे दिमाग़ मे चल रही थी..करीब 20 मिनट घूमने के बाद मुझे स्टंप पेपर मिला..और मैं बॅंक मे वापस गया ..वो बूढ़ा मुझे गेट मे एंट्री करते ही मीलगया ..मैने उसको स्टंप पेपर दिया..अब मैं उम्मीद कर रहा था अब ताक दीदी ने ड्राफ्ट बनवा लिया होगा ..और वो आदमी भी जा चुका होगा …और मैं फटाफट ड्राफ्ट की लाइन के तरफ़ बढ़ा..पर वाहा पहुच कर मेरा सिर चकरा गया …ड्राफ्ट की लाइन अब ख़तम हो चुकी थी ..काउंटर पर लिखा था क्लोस्ड ..बॅंक मे भी भीड़ कम होने लगी थी..मैं परेशान हो गया ..मैने सोचा की दीदी शायद बाहर मेरा वेट कर रही होंगी ..सो मैं बाहर जाने ही लगा था कि..मैने देखा जिस तरफ अंधेरा था और वाहा जो खाली रूम था जिसमे टूटा फर्निचर पड़ा था..वाहा से वोही बिहारी अपनी पॅंट की ज़िपार बंद करता हुआ निकला..और बाहर चला गया..मुझे ये बड़ा आजीब लगा पर फिर मैने सोचा शायद टाय्लेट गया होगा क्योंकि टाय्लेट भी उधर ही था…फिर मे बाहर जाने के लिए मुड़ा ही था की मैने देखा अंजलि दीदी अपने बालो को सही करते हुए उसी रूम से बाहर आ रही है जहा से कुछ मिनिट पहले वो आदमी निकला था..मेरा दिल की धाड़कन एक दम बढ़ गयी …दीदी उस कमरे मे उस गंदे आदमी के साथ अकेले थी…जो आदमी खुले आम किसी लड़की के साथ इतनी छेड़ खानी कर सकता है ..वही आदमी अकेले मे एक खोबसुर्रत जवान लड़की के साथ क्या क्या करेगा…इन सब ख्यालो ने मेरे लंड मे खून का दौर बढ़ा दिया…दीदी ने मेरी तरफ़ नही देखा था….मैं दीदी की तरफ़ बढ़ा “ “दीदी आप कहा थी..मैं आपको ढूंड रहा था..”मैं बोला दीदी थोड़ा घबरा गयी पर फिर शायद अपनी घबराहट को छुपाटी हुई वो थोड़ा मुस्कुराइ और बोली. “ तू कब आया था …और स्टंप पेपर दे दिए तूने उन अंकल को” “जी..और आपने ड्राफ्ट बनवा लिया क्या” मैने उनके पसीने से भरे चेहरे को देखते हुए बोला.उनका सूट भी कई जगह से पसीने से तर बतर था. जिसका सॉफ सॉफ मतलब ये था कि दीदी उस रूम मे काफ़ी टाइम से थी. “नही यार…क्लर्क ने कहा है कि ड्राफ्ट बनवाने के लिए इस बॅंक मे अकाउंट होना ज़रूरी है”

फिर हम घर आने के लिए चल पड़े दीदी मुझसे थोड़ा आगे चल रही थी..मैने पीछी से दीदी की बॅक देखी उनके रेस्मी बालो जो पोनी टेल मे बाँधती थी उसमे से काफ़ी बाल बाहर आए हुए थे ..मानो कि वो दो लोगो के बीच हुए रगड़ मे आ गये हो . तभी मेरी नज़र दीदी की गर्दन के पिछले हिस्से पर गयी वाहा एक पिंक सा निशान पड़ा हुआ था..मानो किसी ने वाहा काटा हो..एक तो दीदी इतनी गोरी थी सो वो निशान और ज़्यादा उभर का नज़र आ रहा था.. पूरे रास्ते मे मैं आसमंजस मे रहा. मैं ये ही सोच रहा था कि शायद दीदी सही बोल रही है..वो आदमी भी तो पॅंट की ज़िपार बंद करता हुआ ही बाहर आया था.शायद मेरा दिमाग़ खराब हो गया है..राज के साथ रह रह कर और वो सारे गंदी क्लिप्स देख कर ही मुझे ये गंदे खियाल आ रहे है.. कुछ देर बाद ही हम घर पहुच गये इस दोरान दीदी और मुझे मे कोई बात न हुई थी. रात को मुझे नींद नही आ रही थी रह रह कर बॅंक वाली घटना मेरे दिमाग़ मे चल रही थी.और कई अनसुलझे सवाल दिमाग़ मे आ रहे थे..और उनमे सबसे बड़ा सवाल ये था कि दीदी ने उस आदमी को रोका क्यो नही था…और क्या दीदी वकाई उस अंजान आदमी के साथ उस कमरे मे अकेली थी…पर एक बात पक्की थी जो भी हुआ था पता नही क्यू उसने मेरे अंदर वासना और हवस का एक बीज ज़रूर बो दिया था….ये सब सोचते सोचते ही अचानक मेरा हाथ मेरे अब तक खड़े हो चुके लंड पर चला गया ..ये सारी बाते सोच सोच कर मैं इतना गरम हो चुका था कि जैसे ही मैने अपने लंड पर हाथ लगाया उसमे से पानी निकल गया..और फिर मुझे नींद आ गयी. अगले दिन स्कूल के बाद मे राज के साथ साइबर केफे जा रहा था..के मुझे जोरो से पेशाब लगा…अछा हुआ कि साथ मे ही सरकारी टाय्लेट था सो मे उसमे गुस्स. गया.मैने अपना पॅंट की जिपर खोली और पेशाब करने लगा..तभी राज भी उधर आ गया और मेरे बराबर मे खड़ा होकर वो भी पेशाब करने लगा.. “आजा …आजा….अहह…याल्गार” वो अपना मूह उपर करता हुआ बोला. तभी अचानक मेरी नज़र उसके लंड पर चली गयी..बाप रे कितना बड़ा था उसका..ना चाहते हुए भी मैं उसके लंड का साइज़ अपने से कंपेर करने लगा. राज का लंड ढीला पड़ा हुआ था फिर भी वो इतना बड़ा लग रहा था..और इतना तो मेरा खड़ा होकर भी नही होता होगा..तभी राज ने मुझे अपने लंड की तरफ़ घूरते हुए देख लिया.. “क्यू कैसा लगा…गन्दू” वो मुझे चिड़ाता हुआ बोला. मैने कोई जवाब नही दिया और अपने पॅंट की ज़िप बंद करने लगा..”. “अबे बोल ना…बड़ा है ना…साले इस पर तो लड़किया मरती है” वो हस्ते हुए अपने लंड से पिशाब की बची कुछ बूंदे झाड़ता हुआ बोला. हम टाय्लेट से बाहर निकले ही थे के मुझे लगा कोई मुझे बुला रहा है. मैने पीछे मूड कर देखा तो पाया कि अंजलि दीदी मेरी तरफ़ आ रही थी.उन्होने आज ब्लू जीन्स और ग्रीन टॉप पहना था..हालाकी वो ज़्यादा जीन्स वागरह नही पहनती थी पर कभी कभार चलता था. “क्या बात है..साले तू तो छुपा हुआ रुस्तम निकला …कोन है ये.आइटम” राज दीदी को घूरता हुआ बोला.मुझे बड़ा गुस्सा आया राज पर. पर गुस्से को मैं मन मे ही दबा गया “मेरी दीदी है…प्लीज़ उनको आइटम मत बोल…” मैने चिढ़ते हुए जवाब दिया . दीदी अब हमारे पास आ चुकी थी.उनके पास आते ही उनके बदन पर लगी डेयाड्रांट की खुसबु मैं महसूस कर सकता था. “कहा जा रहा है ..और ये श्री मान कोन है” दीदी राज की तरफ़ देखते हुए बोली. मैं कुछ बोलता इससे पहले ही राज आगे बढ़ा और अपना हाथ आगे कर बोला..”जी..जी मेरा नाम..राज शर्मा है.मैं इसका दोस्त हू. दीदी ने भी रिप्लाइ मे अपना हाथ आगे बढ़ा दिया. “ओके नाइस टू मैंट यू राज” दीदी राज से हाथ मिलाती हुई बोली. मैने देखा राज की नज़रे अब सीधी दीदी के बूब्स पर थी.टॉप्स की उपर से दीदी के बूब्स की गोलाइया काफ़ी आकर्षक लग रही थी.शायद दीदी ने भी राज को अपने बदन का मुआईना करते हुए देख लिया था. वो थोड़ा सा शर्मा गयी. “दीदी मे साइबर केफे जा रहा था..स्कूल के कुछ असाइनमेंट्स बनाने है” मे बोला. “अच्छा चल ठीक ..है जल्दी घर आ जाना..मुझे तेरी थोड़ी हेल्प चाहिए आज” दीदी बोली मैने हा मे सिर हिलाया.

“आप फिकर ना करे दीदी मैं इसको खुद ही घर छोड़ दूँगा” राज दीदी की आँखो मे देखता हुआ बोला और अपना हाथ फिर से हॅंडशेक के लिए बढ़ा दिया. “थॅंक्स यू राज” दीदी ने भी अपना हाथ आगे बढ़ा दिया. “और हा दीदी ..अगर मुझसे कोई हेल्प चाहये तो ज़रूर बताना” ये बोलते हुए राज ने दीदी के हाथ को हल्का सा दबा दिया.ये सब इतना जल्दी हुआ कि शायद दीदी भी ना समझ पाई थी. फिर दीदी मूडी और घर जाने लगी .राज जींस के उप्पर से अंजलि दीदी के सुडौल और उभरे हुए चोतड़ो को देख रहा था.और अपने एक हाथ से अपने लंड को खुज़ला रहा था.ये देख मेरे दिल मे एक कसक सी उठी..ना जाने क्यू ? साइबर केफे मे उसने मुझसे दीदी के बारे मे कई क्वेस्चन्स पूछे..मुझे ये सब अच्छा नही लग रहा था..राज एक बिगड़ा हुआ और आवारा लड़का था…बाद मे वो मुझे घर भी छोड़ने आया..हालाँकि मैं उसे अपना घर नही दिखाना चाहता था पर मेरे ना चाहने के बाद भी वो मेरे घर तक आ गया था.वो तो घर के अंदर भी आना चाहता था पर मैने उसको कोई बहाना मार कर बाहर से ही चलता कर दिया. मैं घर के अंदर घुसा.तो देखा..चाचा जी घर आ चुके है और टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे. चाची किचिन मे खाना बना रही थी. “आज बड़ी देर लगा दी..स्कूल से आने मे” चाचा जी चाइ की चुस्की लेते हुए बोले. मैने उनके पैर छुए और बोला ” स्कूल के काम से साइबर केफे गया था चाचा जी”. “अरे भाई तुझे अंजलि पूछ रही थी..पता नही क्या काम है “.वे बोले. “दीदी कहा है ..” मैने पूछा “उपर रूम मे जा पूछ ले क्या काम है” चाचा जी बोले. मैं उप्पर रूम की तरफ़ बाढ़ चला. अंदर घुसते ही मैने देखा कि दीदी अपने बेड पर पेट के बाल लेटी हुई है..उनके बाल खुले हुए एक साइड मे लहरा रहे है .उस वक्त उन्होने पाजामा और टी शर्ट पहना हुआ था.और वो कुछ लिख रही थी. पता नही क्यू अब जब भी मैं दीदी को अकेले मे देखता था तो मेरे दिल मे कुछ कुछ होने लगता था.मैने अपना स्कूल बॅग मेज पर रखा .. “आ गये सर..कितनी देर लगा दी” दीदी लिखती हुई बोली. “सॉरी दीदी..टाइम थोड़ा ज़्यादा लग गया” मैने जवाब दिया. “चल कोई बात नही…” दीदी उठकर बैठ गयी “यार ..सर मे बहुत दर्द हो रहा है..तू एक काम करेगा” दीदी अपने माथा सहलाते हुए बोली “जी .दीदी …”मैं उत्सुकता से बोला “मेरे सर की मालिश कर देगा क्या” मेरी तो मानो लौटरी ही लग गयी ..कब से मे दीदी के उन लंबे खूबसूरत सिल्की बालो को छूना चाहता था. मैं फॉरन तैयार हो गया. “ओह्ह मेरे राजा भाई” दीदी मुस्कुराती हुई अपने बेड से उठी. और मेरे बॅड के पास नीचे बैठ गयी.मैं बेड पर बैठा था फिर मैने अपने टाँगे थोड़ी खोली और उनके बीच दीदी बैठ गाएे . मेरी टाँगे दीदी के साइड मे दोनो तरफ़ थी.दीदी को इतना पास देख मेरा दिल धड़कने लगा.. “दीदी…तेल..कहा है” मैं थोड़ा हकलाता हुआ बोला. मैं नर्वस हो गया था इसलिए हकला रहा था शायद. “अरे बिना तेल के कर दे यार” दीदी बोली फिर आंटिसिपेशन मे अपने काँपते हुए हाथो को मैने दीदी के बालो मे डाल दिया ..वाह क्या रेशमी बाल थे..उसमे से आती शॅमपू की खुसबु को सूंघते ही मेरे लंड मे हरकत शुरू हो गयी थी.. मुझे अब मानो थोडा थोड़ा नशा होने लगा था .मैने मालिश शुरू कर दी..ग्रिप अच्छी नही बनी तो मैं थोड़ा आगे सरक गया अब दीदी का सर मेरी पॅंट के अंदर खड़े होते लंड के बहुत पास था..तभी मेरी नज़र दीदी के अगले हिस्से पर गयी..और मैने देखा कि टी- शर्ट थोड़ी लूज होने की वजह से दीदी की चूचिया थोड़ी थोड़ी नज़र आ रही थी..ये पहली बार था जब मैने उनको इतना पास से देखा था..दीदी ने शायद ब्रा नही पहनी थी..और जैसे जैसे मैं दीदी के सर की मालिश करता मेरे हाथो के प्रेशर से दीदी के साथ साथ उनकी चूचियाँ भी बड़े मादक तरीके से हिल जाती..इस सब से मुझे इतना जोश चाढ़ गया था कि मैने दीदी के सिर को थोड़ा ज़ोर से रगड़ दिया.. “आआआ..ह…आराम से कर ..अनुज.र” दीदी बोली मुझे तो मानो नशा हो गया था.. मुझे फिर याद आया कि कैसे राज दीदी को देख रहा था….आख़िर वो दीदी को ऐसे क्यो देख रहा था..फिर मुझे हर उस आदमी की याद आई जो दीदी को घूरते रहते थे..वो खूबसुर्रत लड़की जिससे सब बात करने के लिए भी तरसते थे अभी मेरे इतनी पास बैठी है..इन्सब बातो मे मैं ये भी भूल गया था कि वो मेरी बड़ी बहन है..वासना मुझ पर हावी हो चुकी थी..तभी मुझे एक आइडिया आया मैने फिर दीदी के बालो को इकट्ठा कर अपने राइट हॅंड मे भर कर अपने पॅंट मे खड़े होते लंड की उप्पर डॉल दिया..फिर मैं दीदी के रेस्मी बालो को उसपर रगड़ने लगा. ” अरे दोनो हाथो से कर ना…” दीदी अपनी बंद आखो को थोड़ा खोलते हुए बोली. फिर.एक दो बार मैने दीदी के सिर को मालिश के बहाने पीछे कर अपने खड़े लंड पर भी लगाया..मैं बस झड़ने ही वाला था कि ..चाची रूम मे आ गयी.. “क्या बात है बड़ी बहन की सेवा हो रही है” चाची हमारे पास आते हुए बोली. मेरा सारा मज़ा किरकिरा हो गया था.. “मम्मी ..सच मे अनुज बहुत अच्छी मालिश करता है…आपसे भी अछी..हा हा हा”दीदी हस्ते हुए बोली “अच्छा चलो जल्दी करो खाना लग गया है..दोनो हाथ मूह धोकर नीचे आ जाओ..” चाची बोली ‘ओके जी “दीदी अपने बालो का जुड़ा बनाते हुए बोली. फिर वो उठ गयी और नीचे जाने लगी.मैने अपने आप को कंट्रोल मे किया और नीचे चला गया. पीछले कुछ महीनो मे मेरा अंजलि दीदी के प्रति नज़रिया बदलने लगा था..अब अंजलि दीदी मुझे अपनी बड़ी बहन लगने के बजाय एक जवान लड़की ज़्यादा लगने लगी थी…पर थी तो फिर भी वो मेरी बहन ही..वो मुझे कितना प्यार करती थी..हमेशा मेरा साथ देती थी..उन्होने मुझे सग़ी बहन से भी ज़्यादा प्यार दिया.. .मेरा उनके बारे मे गंदा सोचना पाप था….नही नही से सब ग़लत है ..मेरा दिल आत्म ग्लानि से भर गया…..पर अगर कोई और ये सब दीदी के साथ करे तो..कोई अंजान..जिसका दीदी से रिश्ता सिर्फ़ लंड और छूट का हो तो..ये सोचते ही मेरे अंदर का शैतान जागने लगा…मुझे फिर वो बॅंक वाली घटना याद आई …और राज का उस तारह से दीदी को देखना … जून का महीना था मेरे एग्ज़ॅम्स ख़तम हो चुके थी पर दीदी के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम चल रहे थे.दीदी ज़्यादा तर अपने रूम मे पढ़ती रहती थी..एक दिन मैं घर के बाहर खड़ा कुछ समान ले रहा था..दुक्कान घर के सामने रोड के दूसरी तरफ़ थी ..हमारे घर की एक साइड कुछ खाली जगह पड़ी हुई थी..मैने देखा उस खाली जगह पर एक अधेड़ उम्र का आदमी पिशाब कर रहा था….जैसा कि इंडिया मे अक्सर होता है ..कि जहा खाली जगह देखो बस उस को टाय्लेट बना लो..वैसे तो सब कुछ नॉर्मल था..पर तभी मैने देखा को वो आदमी पिशाब करता करता बार बार उप्पर देख रहा है…पर वो उप्पर क्यो देख रहा था…खैर कुछ देर बाद वो आदमी वाहा से चला गया..मैं भी घर आ गया ..समान चाची को देकर मैं सीधे उप्पर रूम मे गया जहा दीदी पढ़ रही थी…दीदी तो रूम मे नही थी..पर मैने देखा के रूम की खिड़की खुली हुई है..वो खिड़की उस खाली पड़े हिस्से की तरफ मे खुलती थी…मुझे कुछ शक हुआ ..और मैं खिड़के को बंद करने के लिए आगे बढ़ा. ..मैने खिड़की से नीचे झाँका तो मुझे वो जगह सॉफ सॉफ नज़र आई जहा उस आदमी ने पिशाब किया था..पर मुझे ये समझ नही आया कि वो बार बार उप्पर क्यो देख रहा था..तभी मेरे दिमाग़ की घंटी बजी..क्या इस खिड़की पर अंजलि दीदी खड़ी थी…ये सोचते ही मेरे लंड मे एक कसक सी उठी…पर बिना किसी सबूत के मैं कैसे दीदी पर शक कर सकता हू..अब मैने प्लान बनाया कि मैं ये जान कर ही रहूँगा..अगले दिन मैं फिर उस दुकान पर खड़ा था पर इस बार मेरा माक़साद समान लेना नही था..ठीक शाम को 6 बजे वो बुढ्ढा अंकल पेशाब करने के लिए उस कोने की तरफ़ बढ़ा.उसकी चाल से लगता था कि वो एक शराबी है ..वो थोड़ा एडा तेरछा चल रहा था..फिर वो पेशाब करने लगा.. यही मोका था मैं तुरंत जल्दी से घर के अंदर गया और उप्पर रूम की तरफ़ जाने लगा..रूम का दरवाजा बंद था हालाकी कुण्डी नही लगी थी शायद अंदर से..अंदर क्या हो रहा होगा इस आशा मे मेरा हाथो मे पसीना आ गया था …काँपते हाथो से मैने रूम का दरवाजा हल्का सा खोला और अंदर चुपके से झाका..अंजली दीदी खिड़की के पास खड़ी थी..और उनका एक हाथ टी-शर्ट के उप्पर से अपनी बाई चूची को हल्के हल्के सहला रहा था..और उनका दूसरा हाथ जिसमे दीदी ने पेन पकड़ा हुआ था उसको पजामि के उप्पर से शायद अपनी चूत पर गोल गोल घुमा रही थी.. दीदी लगातार खिड़की से नीची झाँक रही थी ..चेहरा..शरम से लाल था..उनके चेहरे पर वासना छाई हुई थी…फिर दीदी थोड़ा और आगे की तरफ़ झुक गयी जिससे अब उनके बॅक प्युरे तरह से मेरे सामने थी ..तभी मैने देखा की उन्होने अपना नीचला हिस्सा हिलाना शुरू कर दिया है..वो अपने नीचले हिस्से को नीचे देखते देखते दीवार पर रगड़ने लगी थी….पता नही क्यो ये सब देखते देखते मेरा हाथ पॅंट के उप्पर से मेरे लंड पर चला गया ये सब देख मेरा लंड इतना टाइट हो चुका था कि जितना पहले कभी नही हुआ था ..और मैं मूठ मारने लगा…अच्छा था उस वक्त घर मे और कोई ना था..नही तो मैं पकड़ा जा सकता था…अब ये पक्का हो गया था कि दीदी भी सेक्स की इच्छुक हो गयी है.. तभी दीदी ज़ल्दी ज़ल्दी अपना नचला हिस्सा दीवार पर रगड़ने लगी और उनके हाथ अब ज़ोर ज़ोर से अपनी कड़क हो चुकी चूची को दबाने लगे.

“आप फिकर ना करे दीदी मैं इसको खुद ही घर छोड़ दूँगा” राज दीदी की आँखो मे देखता हुआ बोला और अपना हाथ फिर से हॅंडशेक के लिए बढ़ा दिया. “थॅंक्स यू राज” दीदी ने भी अपना हाथ आगे बढ़ा दिया. “और हा दीदी ..अगर मुझसे कोई हेल्प चाहये तो ज़रूर बताना” ये बोलते हुए राज ने दीदी के हाथ को हल्का सा दबा दिया.ये सब इतना जल्दी हुआ कि शायद दीदी भी ना समझ पाई थी. फिर दीदी मूडी और घर जाने लगी .राज जींस के उप्पर से अंजलि दीदी के सुडौल और उभरे हुए चोतड़ो को देख रहा था.और अपने एक हाथ से अपने लंड को खुज़ला रहा था.ये देख मेरे दिल मे एक कसक सी उठी..ना जाने क्यू ? साइबर केफे मे उसने मुझसे दीदी के बारे मे कई क्वेस्चन्स पूछे..मुझे ये सब अच्छा नही लग रहा था..राज एक बिगड़ा हुआ और आवारा लड़का था…बाद मे वो मुझे घर भी छोड़ने आया..हालाँकि मैं उसे अपना घर नही दिखाना चाहता था पर मेरे ना चाहने के बाद भी वो मेरे घर तक आ गया था.वो तो घर के अंदर भी आना चाहता था पर मैने उसको कोई बहाना मार कर बाहर से ही चलता कर दिया. मैं घर के अंदर घुसा.तो देखा..चाचा जी घर आ चुके है और टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे. चाची किचिन मे खाना बना रही थी. “आज बड़ी देर लगा दी..स्कूल से आने मे” चाचा जी चाइ की चुस्की लेते हुए बोले. मैने उनके पैर छुए और बोला ” स्कूल के काम से साइबर केफे गया था चाचा जी”. “अरे भाई तुझे अंजलि पूछ रही थी..पता नही क्या काम है “.वे बोले. “दीदी कहा है ..” मैने पूछा “उपर रूम मे जा पूछ ले क्या काम है” चाचा जी बोले. मैं उप्पर रूम की तरफ़ बाढ़ चला. अंदर घुसते ही मैने देखा कि दीदी अपने बेड पर पेट के बाल लेटी हुई है..उनके बाल खुले हुए एक साइड मे लहरा रहे है .उस वक्त उन्होने पाजामा और टी शर्ट पहना हुआ था.और वो कुछ लिख रही थी. पता नही क्यू अब जब भी मैं दीदी को अकेले मे देखता था तो मेरे दिल मे कुछ कुछ होने लगता था.मैने अपना स्कूल बॅग मेज पर रखा .. “आ गये सर..कितनी देर लगा दी” दीदी लिखती हुई बोली. “सॉरी दीदी..टाइम थोड़ा ज़्यादा लग गया” मैने जवाब दिया. “चल कोई बात नही…” दीदी उठकर बैठ गयी “यार ..सर मे बहुत दर्द हो रहा है..तू एक काम करेगा” दीदी अपने माथा सहलाते हुए बोली “जी .दीदी …”मैं उत्सुकता से बोला “मेरे सर की मालिश कर देगा क्या” मेरी तो मानो लौटरी ही लग गयी ..कब से मे दीदी के उन लंबे खूबसूरत सिल्की बालो को छूना चाहता था. मैं फॉरन तैयार हो गया. “ओह्ह मेरे राजा भाई” दीदी मुस्कुराती हुई अपने बेड से उठी. और मेरे बॅड के पास नीचे बैठ गयी.मैं बेड पर बैठा था फिर मैने अपने टाँगे थोड़ी खोली और उनके बीच दीदी बैठ गाएे . मेरी टाँगे दीदी के साइड मे दोनो तरफ़ थी.दीदी को इतना पास देख मेरा दिल धड़कने लगा.. “दीदी…तेल..कहा है” मैं थोड़ा हकलाता हुआ बोला. मैं नर्वस हो गया था इसलिए हकला रहा था शायद. “अरे बिना तेल के कर दे यार” दीदी बोली फिर आंटिसिपेशन मे अपने काँपते हुए हाथो को मैने दीदी के बालो मे डाल दिया ..वाह क्या रेशमी बाल थे..उसमे से आती शॅमपू की खुसबु को सूंघते ही मेरे लंड मे हरकत शुरू हो गयी थी.. मुझे अब मानो थोडा थोड़ा नशा होने लगा था .मैने मालिश शुरू कर दी..ग्रिप अच्छी नही बनी तो मैं थोड़ा आगे सरक गया अब दीदी का सर मेरी पॅंट के अंदर खड़े होते लंड के बहुत पास था..तभी मेरी नज़र दीदी के अगले हिस्से पर गयी..और मैने देखा कि टी- शर्ट थोड़ी लूज होने की वजह से दीदी की चूचिया थोड़ी थोड़ी नज़र आ रही थी..ये पहली बार था जब मैने उनको इतना पास से देखा था..दीदी ने शायद ब्रा नही पहनी थी..और जैसे जैसे मैं दीदी के सर की मालिश करता मेरे हाथो के प्रेशर से दीदी के साथ साथ उनकी चूचियाँ भी बड़े मादक तरीके से हिल जाती..इस सब से मुझे इतना जोश चाढ़ गया था कि मैने दीदी के सिर को थोड़ा ज़ोर से रगड़ दिया.. “आआआ..ह…आराम से कर ..अनुज.र” दीदी बोली मुझे तो मानो नशा हो गया था.. मुझे फिर याद आया कि कैसे राज दीदी को देख रहा था….आख़िर वो दीदी को ऐसे क्यो देख रहा था..फिर मुझे हर उस आदमी की याद आई जो दीदी को घूरते रहते थे..वो खूबसुर्रत लड़की जिससे सब बात करने के लिए भी तरसते थे अभी मेरे इतनी पास बैठी है..इन्सब बातो मे मैं ये भी भूल गया था कि वो मेरी बड़ी बहन है..वासना मुझ पर हावी हो चुकी थी..तभी मुझे एक आइडिया आया मैने फिर दीदी के बालो को इकट्ठा कर अपने राइट हॅंड मे भर कर अपने पॅंट मे खड़े होते लंड की उप्पर डॉल दिया..फिर मैं दीदी के रेस्मी बालो को उसपर रगड़ने लगा. ” अरे दोनो हाथो से कर ना…” दीदी अपनी बंद आखो को थोड़ा खोलते हुए बोली. फिर.एक दो बार मैने दीदी के सिर को मालिश के बहाने पीछे कर अपने खड़े लंड पर भी लगाया..मैं बस झड़ने ही वाला था कि ..चाची रूम मे आ गयी.. “क्या बात है बड़ी बहन की सेवा हो रही है” चाची हमारे पास आते हुए बोली. मेरा सारा मज़ा किरकिरा हो गया था.. “मम्मी ..सच मे अनुज बहुत अच्छी मालिश करता है…आपसे भी अछी..हा हा हा”दीदी हस्ते हुए बोली “अच्छा चलो जल्दी करो खाना लग गया है..दोनो हाथ मूह धोकर नीचे आ जाओ..” चाची बोली ‘ओके जी “दीदी अपने बालो का जुड़ा बनाते हुए बोली. फिर वो उठ गयी और नीचे जाने लगी.मैने अपने आप को कंट्रोल मे किया और नीचे चला गया. पीछले कुछ महीनो मे मेरा अंजलि दीदी के प्रति नज़रिया बदलने लगा था..अब अंजलि दीदी मुझे अपनी बड़ी बहन लगने के बजाय एक जवान लड़की ज़्यादा लगने लगी थी…पर थी तो फिर भी वो मेरी बहन ही..वो मुझे कितना प्यार करती थी..हमेशा मेरा साथ देती थी..उन्होने मुझे सग़ी बहन से भी ज़्यादा प्यार दिया.. .मेरा उनके बारे मे गंदा सोचना पाप था….नही नही से सब ग़लत है ..मेरा दिल आत्म ग्लानि से भर गया…..पर अगर कोई और ये सब दीदी के साथ करे तो..कोई अंजान..जिसका दीदी से रिश्ता सिर्फ़ लंड और छूट का हो तो..ये सोचते ही मेरे अंदर का शैतान जागने लगा…मुझे फिर वो बॅंक वाली घटना याद आई …और राज का उस तारह से दीदी को देखना … जून का महीना था मेरे एग्ज़ॅम्स ख़तम हो चुके थी पर दीदी के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम चल रहे थे.दीदी ज़्यादा तर अपने रूम मे पढ़ती रहती थी..एक दिन मैं घर के बाहर खड़ा कुछ समान ले रहा था..दुक्कान घर के सामने रोड के दूसरी तरफ़ थी ..हमारे घर की एक साइड कुछ खाली जगह पड़ी हुई थी..मैने देखा उस खाली जगह पर एक अधेड़ उम्र का आदमी पिशाब कर रहा था….जैसा कि इंडिया मे अक्सर होता है ..कि जहा खाली जगह देखो बस उस को टाय्लेट बना लो..वैसे तो सब कुछ नॉर्मल था..पर तभी मैने देखा को वो आदमी पिशाब करता करता बार बार उप्पर देख रहा है…पर वो उप्पर क्यो देख रहा था…खैर कुछ देर बाद वो आदमी वाहा से चला गया..मैं भी घर आ गया ..समान चाची को देकर मैं सीधे उप्पर रूम मे गया जहा दीदी पढ़ रही थी…दीदी तो रूम मे नही थी..पर मैने देखा के रूम की खिड़की खुली हुई है..वो खिड़की उस खाली पड़े हिस्से की तरफ मे खुलती थी…मुझे कुछ शक हुआ ..और मैं खिड़के को बंद करने के लिए आगे बढ़ा. ..मैने खिड़की से नीचे झाँका तो मुझे वो जगह सॉफ सॉफ नज़र आई जहा उस आदमी ने पिशाब किया था..पर मुझे ये समझ नही आया कि वो बार बार उप्पर क्यो देख रहा था..तभी मेरे दिमाग़ की घंटी बजी..क्या इस खिड़की पर अंजलि दीदी खड़ी थी…ये सोचते ही मेरे लंड मे एक कसक सी उठी…पर बिना किसी सबूत के मैं कैसे दीदी पर शक कर सकता हू..अब मैने प्लान बनाया कि मैं ये जान कर ही रहूँगा..अगले दिन मैं फिर उस दुकान पर खड़ा था पर इस बार मेरा माक़साद समान लेना नही था..ठीक शाम को 6 बजे वो बुढ्ढा अंकल पेशाब करने के लिए उस कोने की तरफ़ बढ़ा.उसकी चाल से लगता था कि वो एक शराबी है ..वो थोड़ा एडा तेरछा चल रहा था..फिर वो पेशाब करने लगा.. यही मोका था मैं तुरंत जल्दी से घर के अंदर गया और उप्पर रूम की तरफ़ जाने लगा..रूम का दरवाजा बंद था हालाकी कुण्डी नही लगी थी शायद अंदर से..अंदर क्या हो रहा होगा इस आशा मे मेरा हाथो मे पसीना आ गया था …काँपते हाथो से मैने रूम का दरवाजा हल्का सा खोला और अंदर चुपके से झाका..अंजली दीदी खिड़की के पास खड़ी थी..और उनका एक हाथ टी-शर्ट के उप्पर से अपनी बाई चूची को हल्के हल्के सहला रहा था..और उनका दूसरा हाथ जिसमे दीदी ने पेन पकड़ा हुआ था उसको पजामि के उप्पर से शायद अपनी चूत पर गोल गोल घुमा रही थी.. दीदी लगातार खिड़की से नीची झाँक रही थी ..चेहरा..शरम से लाल था..उनके चेहरे पर वासना छाई हुई थी…फिर दीदी थोड़ा और आगे की तरफ़ झुक गयी जिससे अब उनके बॅक प्युरे तरह से मेरे सामने थी ..तभी मैने देखा की उन्होने अपना नीचला हिस्सा हिलाना शुरू कर दिया है..वो अपने नीचले हिस्से को नीचे देखते देखते दीवार पर रगड़ने लगी थी….पता नही क्यो ये सब देखते देखते मेरा हाथ पॅंट के उप्पर से मेरे लंड पर चला गया ये सब देख मेरा लंड इतना टाइट हो चुका था कि जितना पहले कभी नही हुआ था ..और मैं मूठ मारने लगा…अच्छा था उस वक्त घर मे और कोई ना था..नही तो मैं पकड़ा जा सकता था…अब ये पक्का हो गया था कि दीदी भी सेक्स की इच्छुक हो गयी है.. तभी दीदी ज़ल्दी ज़ल्दी अपना नचला हिस्सा दीवार पर रगड़ने लगी और उनके हाथ अब ज़ोर ज़ोर से अपनी कड़क हो चुकी चूची को दबाने लगे.

और ये हाल सिर्फ़ मेरा ही नही बल्कि अपने चेहरे पर डर से आया पसीना पोछती हुई अंजलि दीदी का भी था दीदी ने भी उसको पहचान लिया था..वो इंसान कोई और नही बल्कि वोही अंकल था जिसको दीदी अपने रूम से नीचे झाक कर पेशाब करते हुए देखती थी..शायद अंकल भी दीदी को पहचान गये थे क्योंकि वो रुक गया था और दीदी को देख कर उसके गंदे चेहरे पर शैतानी हसी आ गयी थी.. ” अरे वाह किसी ने सही कहा है जब भगवान देता है तो झप्पड़ फाड़ कर देता है..आज जुए मे भी मे 10’000 रुपेये जीता और अब…” अंकल मुस्कुराता हुआ बोला “बेटे पहचाना मुझे ..कुछ याद आया ..” वो बड़ी बेशर्मी से अपना लंड अपनी पॅंट के उप्पर से खुजलाता हुआ बोला. अंजलि दीदी तो मानो सुन्न पड़ गयी थी..उनका खूबसूरत चेहरा शर्म से लाल हो गया था..वो दोनो कुछ सेकेंड तक लगातार एक दूसरे की आखो मे देखते रहे ..वो शायद ये भी भूल गये थी कि मैं भी वही साथ मे खड़ा हू. अंकल तो मानो आखो ही आखो मे दीदी से कुछ कह रहा था…तभी दीदी ने अपनी नज़रे नीची कर ली.. “भाई क्या हुआ..यहा कैसे..” अंकल बोला दीदी ने कुछ ना बोला ..दीदी को कोई जवाब ना देते देख मे बोल उठा.” हम यहा सर्वे करने आए है…” “वाह वाह..अच्छा है…किस चीज़ का सर्वे” वो अब मेरी तरफ़ देखता हुआ बोला. अंकल की आखो मे अब चमक आ चुकी थी.. “हम यहा लोगो को सफाई की इंपॉर्टेन्स बताने आए है” मैने तुरंत जवाब दिया. “बहुत अछा .कितना नेक काम कर रहे हो आप लोग …मेरी खोली यही पास मे है मुझे भी कुछ बता दो…” “नाअ..नही हमे अब घर जाना है..” दीदी काँपती आवाज़ मे बोली. अंकल एक बड़ा हारामी इंसान था इतना अच्छा मौका भला वो कैसे छोड़ता. उसने फॉरन अंजलि दीदी का गोरा हाथ अपने गंदे से हाथ ले लिया और बोला ” अरे ऐसे कैसे..आप लोग मेरे मेहमान है मुझे भी मेहमान नवाज़ी का मोका दो..” दीदी तो मानो उसके हाथ की गुड़िया सी बन गयी थी. अंकल तो मुझे ऐसे इग्नोर कर रहा था जैसे कि मैं वाहा हू ही नही उसका सारा ध्यान दीदी पर ही केंद्रित था. मुझे अंकल की ये हरकत बुरी लग रही थी..और मैं चाहत्ता तो उनको रोक भी सकता था ..पर ना जाने क्यू मेरे अंदर छुपा वो हवस का भूका शैतान मुझे से सब करने से रोक रहा था..और कुछ ही देर मे हम दोनो अंकल के झोपडे के अंदर थे. झोपड़ी कुछ ज़्यादा बड़ी ना थी फिर भी उसमे दो हिस्से थे..यहा वाहा कुछ खाली शराब की बोटले पड़ी थी..समान के नाम पर एक पुरानी चारपाई .एक लकड़ी की मेज , एक बड़ा सा बक्सा और कुछ छोटा मोटा घरेलू समान था…दीदी और मैं चारपाई पर बैठे थे… “देख लो ये है मेरा हवा महल..हा हा हा ..” वो अपनी जेब से एक शराब की बॉटल निकाल कर मैंज पर रखता हुआ बोला. दीदी अब भी उस आदमी से नज़रे नही मिला पा रही थी..अंकल कुछ देर के लिए झोपड़ी के दूसरे हिस्से मे गया और थोड़ी देर बाद वापस आया तो उसके बदन पर सिर्फ़ लूँगी बँधी थी…अंकल बिल्कुल दुब्ब्ला पतला था ..उसके सीने पर उगे सफेद होते बॉल काफ़ी घने थे . ” अरे भाई मुझे भी तो बताओ..सफाई के फ़ायदे ..देखो मेरा घर कितना गंदा है ..और मेरे यहा सफाई करने वाला भी कोई नही..” वो पास पड़े इस्तूल को दीदी के बिल्कुल पास रख उसपर बैठता हुआ बोला. अब मेरी नज़र दीदी पर थी दीदी की साँसे तेज चल रही थी जिसकी गवाही सूट मे क़ैद उनकी छातियाँ ज़ल्दी ज़ल्दी उप्पर नीचे होकर दे रही थी. दीदी की घबराहट सिर्फ़ मैने ही नही बल्कि उनके पास बैठे अंकल की पारखी नज़र ने भी देख ले थी.” अरे बिटिया क्या हुआ तुमने तो कोई जवाब ही नही दिया..” और अंकल ने अपना उल्टा हाथ खाट पे बैठी दीदी की राइट जाँघ पर रख दिया. दीदी को तो मानो 11’000 वॉल्ट का करेंट लगा गया और उनके बदन ने एक झटका खाया.. ” उन्न..अंकल हम लेट हो रहे है..हम आपको किसी और दिन समझा देंगी” दीदी ने पहली बार अंकल की आँखो मे देखते हुए बोला. “अरे अभी तो सिर्फ़ दोपहर के 2 बजे है. और बाहर बहुत गर्मी है थोड़ी देर बाद चले जाना बिटिया..” अंकल अपना हाथ जो कि अभी भी दीदी की जाँघो पर रखा था उसको धीरे धीरे से सहलाते हुए बोले. दीदी ने अपने हाथो मे पकड़े हुए रेजिस्टर ( जो कि उन्होने सर्वे की इंपॉर्टेंट जानकारी लेने के लिए लिया हुआ था ) उसको जोरो से जाकड़ लिया. “तुम्हारा नाम क्या है.” अंकल सीधा दीदी की ऊपर नीचे होती हुई छातियो को देखते हुए बोला. “जीई..मेरा..ना..नामाम है …अंजलि ” दीदी को अपने इतना पास देख वो अंकल बहुत ही उतावला लग रहा था.अगर मैं वाहा मोजूद ना होता तो शायद अब तक वो दीदी के कपड़े फाड़ उनकी जवानी लूटना शुरू भी कर चुका होता. “तुम इतना क्यो डर रही हो बिटिया..इसमे डरने वाली क्या बात है….” बोलकर अब अंकल स्टूल से उठकर चारपाई पर दीदी की लेफ्ट साइड मे खाली पड़ी जगह पर बैठ गया.वो जब उठ रहा था तो मेरी नज़र यका यक उसकी लूँगी पर बनते हुए टेंट पर गयी..वो टेंट अभी ज़्यादा बड़ा नही बना था फिर भी अंकल के खड़े होने पर वो सॉफ नज़र आ रहा था…और ये सिर्फ़ मैने नही दीदी ने भी देखा था. “पानी पीओगी..” अंकल बोला. दीदी ने सोचा कि अगर वो हा करती है तो अंकल उठ कर पानी लेने चला गाएगा जिससे कि उनको थोड़ा सकून मिलेगा. “हंजी” दीदी धीरे से बोली पर अंकल तो मंझा हुआ शिकारी था उसने तुरंत मेरी तरफ देखा और बोला ” अरे बेटा छोटू जा अंदर जा एक ग्लास पानी ले आ..ग्लास अलमारी से निकाल लेना और पानी का मटका वही नीचे रखा है “. मैं भी क्या करता उठ कर झोपड़ी के दूसरे हिस्से मे चला गया.अब मेरी बड़ी बहन उस अंजान अंकल के साथ अकेली थी मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा..फिर मैने सामने अलमारी मे रखे एक पीतल के ग्लास को हाथ मे उठाया ही था कि मुझे..अचानक दीदी की हाथो मे पहने कड़ो की खनक ने की आवाज़ आई..मानो दीदी अपने हाथो को जोरो से हिला रही है…मेरे दिमाग़ मे ख़तरे की घंटी बजने लगी …और फिर ‘”आआ..इसस्स्शह…..” दीदी के मूह से निकली ये सीत्कार बहुत धीरे होने के बावजूद मेरे अब तक सतर्क हो चुके कानो मे आई. दूसरी तरफ़ क्या हो रहा होगा..ये सोचते ही मेरे लंड मे करेंट फैलने लगा. जो दीवार झोपडे को बाटती थी मैं चुप चाप उसके पास जाकर खड़ा हो गया अब मैं देख तो कुछ नही पा रहा था पर हल्की हल्की आवाज़े मुझे ज़रूर सुनाई दे रही थी.. और मैने सुना दीदी : आह..अंकल….प्लीज़ अब घर जाने दो..’ अंकल: ” इस.हह..ऐसे कैसे जाने दू मेरी जान…..मुझे तो अपने किस्मत पर यकीन ही नही हो रहा है..जिस लड़की को सोच सोच कर मैने इतना मूठ मारा ..वो आज मेरे घर मे..आहह..” दीदी : “उन..ह…अंदर ..मेरा छोटा भाई है प्लीज़…..अहह..मे बदनाम हो जाउन्गी…” अंकल : “क्यो क्या हुआ जब तू मुझे पेशाब करते हुए देखती थी…तब तुझे शर्म नही आती थी..साली तेरे बारे मे सोच सोच कर मैने कितनी रंडिया चोदी है .क्या तुझे इस बात का ज़रा भी इल्म है” तभी दीदी के काँपते होटो से फिर एक सिसकारी निकली.”आहह.इसस्स्स्स्शह….वो मेरा भाई उन..अंदर…….आईशह…”. अंकल : “अच्छा..अब समझ आया ..तू अपने भाई के पास होने से डर रही है..तू रुक मे कुछ करता हू अभी..” दीदी कुछ ना बोली.. मैं सोच मे पड़ गया क्या वाकई दीदी मेरी वजह से हिचाक रही है..?? मैं तुरंत पानी का ग्लास लेकर उस तरफ़ निकला ही था कि मेरे पैर से एक शराब की खाली पड़ी बॉटल टकरा गयी..इस आवाज़ से कुछ पल के लिए सब शांत हो गया और मैं उस तरफ़ जहा वो दोनो थे..चल पड़ा ..उधर आते ही मैने देखा कि दीदी के बालो का जुड़ा खुला हुआ है.और उनके बाल फेले हुए है और दीदी अपना दुपट्टा सही कर रही है. अंकल अभी भी दीदी की बगल मे बैठे थे और वो अपने लूँगी मे खड़े लंड को शायद मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहे थे.

Striking

When it comes to striking a lover, this should only be employed during sex and with the consent of both individuals involved. Not everyone enjoys being slapped or struck, so never engage in this unless you have discussed it beforehand. If, however, both of you are interested in adding in striking during sexual intercourse, the Kama Sutra lays out the rules for doing so.

First, the places that you are allowed to strike your partner are:

  • The shoulders
  • The head
  • The back
  • The sides
  • In between their breasts
  • The Jaghana

You may then strike them in four different ways:

  • With the back of your hand
  • With the fingers sprawled out
  • With an open hand
  • With a fist

It is during being struck that a lover will make various sounds, as she may be in pain and so she will cry out. Any blows that one lover delivers should always be reciprocated by the other. This is never a one-sided activity, and each action should be mirrored in order to highlight the pleasures that are being felt. It is also important that you strike in different ways, along with different spots on the body. For example, if striking with a fist, this should only be done along the back as it is sturdier and should never be done to the head. Striking should never be done in excess and is not done out of anger but instead out of pure pleasure.

Biting

Similar to the pressing of nails and scratching, there are eight different kinds of bites that are made by a lover onto the body of their partner. These are also done in private places on the body and are used as a way to remind the partner that they are loved and desired. The eight types of bites are:

Hidden Bite

A bite where no teeth marks are left, only redness in the area

Swollen Bite

When the bite causes the skin to be pressed on both sides

Point

Only two teeth are utilized in order to nip at a small section of skin

Line of Points

Using all of the teeth to bite at small sections of skin

Coral and the Jewel

When you bite someone using both your teeth and lips

Line of Jewels

Any bite that is made using all of the teeth

Broken Cloud

If you have space between your teeth, this type of bit will leave a round mark that is not fully enclosed

Biting off a Boar

Many rows of bites all close to one another

Pressing of the Nails and Scratching

There are eight different types of scratches that are described within the Kama Sutra, each based on a certain way of pressing the nails into the skin.

Sounding

Pressing in the nails so that no mark is made

Half Moon

Leaving a curved mark along the neck and breasts

Circle

Two half-moons created beside each other

Line

A scratch that is made in the shape of a line

Tiger’s Nail

A curved scratch made on the breast

Peacock’s Foot

A curved mark made by pressing all 5 nails into the breast

The Jump of a Hare

A scratch-made with all 5 nails near the nipple

Leaf of a Blue Lotus

A mark made in the shape of a lotus near the breast. These marks are all designed to be placed in hidden locations across the body, particularly on the breast, so that they are only seen by the two lovers and by no one else. They are there to remind the person of their lover and to excite them whenever they gaze upon each mark.

Types of kissing

There are different types of kissing teachings from the Kama Sutra we would be featuring. You can learn from them and apply them to express a lifting in your relationship. Here are the different types of kissing.

The Bent Kiss

Why not kiss your lover naturally today with this bent kiss. With your head angled slightly on one side which will allow you to get a maximum lip contact. You can even have a deep tongue penetration with this type of kiss, which is very sensual.

To perform this type of kiss, gently approach your partner and draw it very slowly as you head tilt to one side. You can pick any side you like – left or right. As you go for the kiss, take it slowly, let the lips touch first, then after the full contact, you then open your lips and play around with it before going for the deep penetration. You can also place your hand at the back of your partner’s head as you rub it gently for a more sensual feeling.

The Turned Kiss

If you want to tease your lover and make them feel gentleness and tenderness, go for this type of kiss. This type of kiss is also perfect when you want to start foreplay with your partner. Also, when you’re making love slowly in a face-to-face standing or sitting position.

To perform this type of kiss, one of you, preferable the man turns up the face of his love by holding the chin and head. In that position, he then goes in slowly as your lips touch hers.

The Straight Kiss

When you kiss your love with your heads, you wouldn’t be able to have so much of the tongue penetration. This kiss isn’t to express an intense passion but a gentle way of showing affection and expression of desire. This type of kiss is recommended for new lovers.

To perform this type of kiss, let your lover sits on your lap and uses your hand to caress, fondle her body, especially her back while kissing. Then as you go for the kiss, let your heads be angled only slightly, that it would seem almost straight. Then let your lips come in direct contact with each other and enjoy yourself.

Pressed Kiss

This type of kiss is more of an erotic prelude to kissing. It’s sensual as you’d feel the contact of your lover’s lips. There are two ways you can have this kiss with your lover.

The first method is when you are kissing your lover, and you press your lover’s lower lips with force. This kiss expresses the degrees of passion you feel for your lover at that moment. And if you do it right, it can prelude to even more foreplay and clothes go off, and you know the rest.

For the second method, you use your lips to touch your loves lower lips first, then you go for a greatly pressed kiss. This other type of kiss is even more emotional than the first one, so you can choose any one of the two types of pressed kisses to show how much passion is in your heart.

Kissing the Upper Lips

This kissing from the teaching in Kama Sutra, Vatsyayana talks about a woman returning a man’s kiss, making it clear that a woman can also initiate the kiss. This can also apply to other forms of lovemaking. So, women shouldn’t feel afraid to make the first move.

To perform this kiss, as you kiss your lover’s upper lips, she returns the kiss by kissing his lower lip. You can increase the sensuality of the kiss by kissing your partner’s upper and lower lips in turn. And like most kisses, you and your lover can have it sitting, standing or lying down.

The Clasping Kiss

This type of kiss is the one where either the woman or man takes both the lips of the other between her or his lips. However, for the woman, you can only enjoy taking this kiss when your lover doesn’t have a mustache. That way, you don’t have to get all those hair in your mouth.

When you are enjoying this type of kiss with your lover and your lover uses his/her tongue to touch the tongue, teeth, or palate of your lover, it’s called the fighting of the tongue. Generally, in clasping kiss, scrupulous oral hygiene is important.

A Young Girl’s Kiss

The young girl’s kiss is a type of kiss the Kama text recommends for lovers who are about to have sex for the first time. There are different types of young girl’s kiss, and it’s recommended that the kiss is done moderately and not to be continued for a long time.

The nominal kiss

To have this kiss like a girl, use your mouth to touch your love’s own. But don’t do the touching yourself, approach your lover closely, and he would do the touching himself.

The throbbing kiss

To have this kiss like a girl, set your bashfulness aside, touches the lips of her lover that is pressed into her mouth, and with an object move her lower lips but not the upper one.

The touching kiss

To have this kiss like a girl, kiss your lover by using your tongue to touch his lips. As you close your eyes, place your hands on your lover’s hands and enjoy the kiss.