अंजानी डगर सेक्स कहानी हिन्दी

दोस्तो किस्मत बबलू पर मेहरबान थी. रश्मि और निशा तो पहले ही उसकी हो चुकी थी. और पता नही आगे कितनी चूत उसके लंड पर प्रेम रस बरसाने वाली थी. बबलू उस तालाब मे डुबकिया लगा रहा था जिसमे एक से एक मस्त मछली भरी थी अब ये उस पर था की किस मछली को दाना डाले और किस को छोड़ दे बेचारी मल्लिका मेडम की साँसे अटकी हुई थीबबलू डरते डरते मल्लिका मेडम की बड़ी बड़ी चूचियो को हथेलियो मे भर कर अंदर की और दबाने लगा. उसके हाथो और मेडम के मम्मो के बीच अब केवल एक पतला सा ब्लाउस का कपड़ा था. मम्मो के हर कटाव को बबलू महसूस कर सकता था क्योकि मेडम ने ब्लाउस के टाइट हाइन की वजह से ब्रा नही पहनी थी. बबलू दबाए जा रहा था और मेडम के मक्खन जैसे मम्मे उसके हाथो का दबाव पाकर दब्ते जा रहे थे. अपने मम्मो पर पराए मर्द का दबाव पड़ने से मल्लिका मेडम के शरीर मे चींतिया सी रेंगने लगी, जिसका प्रभाव ब्लाउस मे उभर चुके निप्पलो पर साफ दिख रहा था. बबलू मेडम के बूब्स को सामने खड़ा होकर ही दबा रहा था और उसकी नज़रे मेडम की गहरी होती जा रही क्लीवेज मे गढ़ी हुई थी. दरअसल बबलू के हाथ कॉर्सेट का काम कर रहे थे और दबाव पड़ने से मेडम के माममे ब्लाउस के उपर से बाहर निकल कर मेडम की जबरदस्त क्लीवेज बना रहे थे. ये मदहोशी भरा नज़ारा देख कर बबलू के होठ सूखने लगे. उसने अपने होंठो पर जीभ फेर कर उन्हे गीला किया. सख़्त हो चुके निप्पलो पर मल्लिका मेडम को ये दबाव अजीब सा सुख दे रहा था. उनकी आँखे धीरे धीरे मूंद रही थी. पर निशा सारा माजरा समझ चुकी थी. निशा- मेडम आप…हुक खोलिए. मल्लिका- आ…अरे तुम ग़लत दबा रहे हो. ऐसे तो और मुश्किल होगी. मुझे तो आगे कुछ नही दिख रहा है. हुक कैसे खोलू. मल्लिका मेडम की गहराइयो मे तैरने के बाद भी बबलू का हलक सूखा हुआ था. वो कुछ नही बोल पाया. निशा- मेडम मिरर उधर है. मल्लिका- हा. उधर ही चलते है. पर बबलू तो जैसे जड़ हो गया था और उसके हाथ अभी भी मल्लिका मेडम के बूब्स को जकड़े हुए थे. निशा ने बबलू की हथेलियो को मेडम के मम्मो से हटाया और उसका हाथ पकड़ कर मिरर के आगे खड़ा कर दिया. फिर मल्लिका मेडम खुद बबलू की ओर पीठ करके खड़ी हो गयी और मिरर मे से उसको देखने लगी.. मल्लिका- अब तुम पीछे से ही दबाओ. यहा से हुक सही दिखाई दे रहे है. बबलू खोया हुआ सा उठा और अपने हाथ मेडम की बगल मे घुसा दिए और फिर से मेडम के तने हुए मम्मो को पकड़ लिया. अबकी बार मेडम के खड़े हुए निपल बबलू की हथेलियो से दब गये. बबलू ने जैसे मेडम की गिटार का कोई तार छेड़ दिया हो. इसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स- मल्लिका मेडम अपनी सीत्कार को रोक नही पाई- क..क्या कर रहे हो…ढंग से दबाओ ना. ऐसे तो मैं…. मेडम पर भी सुरूर चढ़ रहा था. बबलू ने दबाव और बढ़ा दिया. मेडम फिर से सिसक उठी पर बोली कुछ नही. मेडम की सिसकारिया बबलू की उत्तेजना को और बढ़ा रही थी. उसका लंड अब पत्थर बन चुका था. उसने मेडम के मम्मो का मसाज सा शुरू कर दिया और बबलू को रोकने बजाए मेडम खुद भी बहकति जा रही थी. दोनो के जिस्म अब पूरी तरह गरम हो चुके थे. बात कुछ आगे बढ़ती इससे पहले ही निशा बोल उठी – मेडम आप हुक खोल लेंगी या मैं खोल दू. निशा की बात सुन कर मेडम वास्तविक दुनिया मे लौट आई. उनका गोरा चेहरा शरम से लाल हो चुका था. मेडम को बबलू ने इतना उत्तेजित कर दिया था कि उनको जगह और समय का ध्यान ही नही रहा. बबलू के हाथ भी रुक गये और मेडम के मम्मे बेचारे दबे रह गये. मेडम के मम्मे पूरी तरह दबे हुए थे. उन्होने जल्दी से हुक खोलदीए और बबलू ने अपने हाथ हटा लिए. बबलू के हाथ हटते ही जैसे 2 कबूतर पिंजरे से आज़ाद हो गये. मेडम के मम्मे आज़ाद होकर फुदकाने का सीन बबलू ने मिरर मे देख लिया था और मेडम ने भी बबलू का खुला हुआ मूह देख लिया था. पर वो चुप ही रही और गहरी सांस ली. निशा टांग नही अड़ाती तो आज बबलू एक बार फिर बिन ब्याहे सुहाग रात मना चुका होता. ( चाहे ये दुल्हन कुँवारी नही थी ). निशा वाहा पर कबाब मे हड्डी का काम करने के लिए ही तो खड़ी थी. उसने बबलू की पॅंट का तंबू और मेडम की सिसकारिया सुन ली थी. उसे पता था कि बबलू का लंड कितनी जल्दी फुफ्कारने लगता है. इसीलिए वो रश्मि के साथ नही गयी थी. खैर मल्लिका मेडम का ब्लाउस तो आख़िरकार उतर गया था और वो दूधिया रंग के मम्मो को अपनी छाती पर मेडल्स की तरह टाँगे खड़ी थी. उनके गुलाबी निपल अब तक कड़े थे. निशा- मेडम आपने ब्रा भी नही पहनी. बबलू – एक कड़क आवाज़ सुनाई दी. जी….जी – बबलू हड़बड़ा कर बोला. मल्लिका मेडम रेड ब्लाउस पहने खड़ी थी और मस्टेरज़ी गुस्से से चिल्ला रहे थे. दोस्तो अपना बबलू खड़ा खड़ा सपना देख रहा था म्‍मास्टर जी की आवाज़ ने उसे धरातल पर ला दिया था मस्टेरज़ी- अबे मेडम को क्यो देखे जा रहा है ? बबलू- म…म..मैं वो… मस्टेरज़ी- अबे मल्लिका मेडम कितनी देर से खड़ी है और तू दिन मे कौन से सपने देख रहा है नमकूल. बबलू- ज..जी मेडम का ब्लाउस टाइट था और वो ब्लाउस चेंज करने गयी थी. और मैं…. मस्टेरज़ी- रश्मि कहा गयी और ये निशा यहा क्या कर रही है. साले तूने नाप लेने की प्रॅक्टीस भी की थी ? बबलू- जी मस्टेरज़ी मैने पूरी प्रॅक्टीस कर ली थी. बबलू अब तक संभाल चुका था. मस्टेरज़ी- चल अभी पता चल जाएगा कि तूने कितनी प्रॅक्टीस की है. मेडम के ब्लाउस का नाप लेना शुरू कर. बबलू- जी. मस्टेरज़ी- मेडम इसकी ग़लती के लिए मैं शर्मिंदा हू. बेचारा नया-नया है. नीचे मुझे रश्मि ने बताया कि आप आई है तो मैं भागा-भागा उपर चला आया. आप प्लीज़ इसको नाप दे दीजिए. बबलू मल्लिका मेडम का नाप लेने लगा. सबसे पहले उसने मेडम की ब्रेस्ट का नाप लेने के लिए मल्लिका मेडम के हाथ उपर किए और नाप लिया – 32 मल्लिका- अरे नही मेरी ब्रेस्ट का साइज़ तो 38 है. ब्लाउस टाइट है इसलिए कम आ रहा होगा. मस्टेरज़ी- मेडम आपने ये टाइट वाला ब्लाउस पहना ही क्यो है. इससे नाप कैसे सही मिलेगा. आप अंदर जाइए और चेंज करके ब्रा पहन लीजिए. मेडम- इस लड़के ने ही तो कहा था….चलो कोई बात नही. पर ब्लाउस मुझे आज ही चाहिए. मेडम पैर पटकते अंदर चली गयी और चेंज करके बाहर आई. बबलू की नज़र गेट पर ही टिकी हुई थी. मेडम ने बाहर निकलते ही कहर ढा दिया था. मेडम के हर बढ़ते कदम के साथ उनके ब्रा के कप्स मे सजे हुए बूब्स फुदकते और बबलू का दिल बैठ जाता. मेडम की क्लीवेज की गहराई वाकई मे जानलेवा थी. एक बार फिर बबलू अपने ख़यालो की दुनिया मे डूबने लगा था. पर मस्टेरज़ी की आवाज़ ने उसे वापस ला कर पटक दिया. मस्टेरज़ी- अब ठीक से नाप लियो. कोई ग़लती मत करियो. यह कह कर मस्टेरज़ी ऑर्डर बुक लेकर बैठ गये. बबलू के हाथ कांप रहे थे. निशा और रश्मि की जवानी मल्लिका मेडम के हुस्न के आगे फीकी पड़ गयी थी. मल्लिका मेडम का अंग-अंग शायद काफ़ी फ़ुर्सत मे गढ़ा गया था. उनके बूब्स एक दम तने हुए थे और ब्रा पर ज़रा भी दबाव नही डाल रहे थे. बबलू ने फिर से मेडम के हाथ उठवाए. मेडम की बगल से मनमोहक सेंट की खुश्बू आ रही थी. उनकी कांख एक दम गोरी और बाल रहित थी. बबलू ने हाथ बढ़ाए और इंचिटपे को उनकी ब्रेस्ट पर लपेट दिया – 38 – बबलू बोला. मल्लिका मेडम ने राहत की सांस ली. जैसे कोई इम्तिहान पास कर लिया हो. मस्टेरज़ी- मेडम आपका पहले का नाप तो 32 ही लिखा है. नही नही 2 महीने मे साइज़ कैसे बढ़ जाएगा. शायद पहले वाले लड़के ने ही ग़लत लिख लिया होगा. मेडम- नही नही मास्टर जी. पहले का साइज़ 32 ही था. मैने ब्रेस्ट इम्प्लान्ट का ऑपरेशन करवाया है. पूरे 2 लाख खर्च हुए है. मस्टेरज़ी का मूह खुला का खुला ही रह गया था. ऐसा भी होता है ! बबलू- कमर 28. मेडम ब्लाउस की लेंग्थ तो उतनी ही रहेगी. नेक कितना डीप रहेगा. मल्लिका- ये ब्रा जितना ही डीप रखना. पहले बहुत कम डीप था. मैं तो बहुत डीप पहनती हू. बबलू ने इंचिटपे था सिरा मेडम के कंधे पर रखा और उसे खींच कर मेडम के क्लीवेज की लाइन के सिरे से लगा दिया. फिर धीरे धीरे नीचे आने लगा. 8 9 10 11 मेडम 11 इंच तक आएगा. मल्लिका- और डीप नही हो सकता. बबलू- फिर आपकी ब्रा दिखेगी. मल्लिका- चलो बॅक से ज़्यादा डीप रखना. बबलू- मेडम 14 इंच मे 11 इंच से ज़्यादा क्या डीप होगा. मस्टेरज़ी- मेडम बॅकलेस बना दे. मल्लिका- हा वही ठीक रहेगा. मस्टेरज़ी- ये नाप तो हो गया. और सेवा बताइए. मल्लिका- और कुछ नही बस 6 बजे से पहले मेरे पास भिजवा देना मुझे फिर पार्लर भी जाना है. मस्टेरज़ी- आप चिंता ना करे. अब ये मेरी ज़िम्मेदारी है. मल्लिका- थॅंक यू मस्टेरज़ी. यह कह मल्लिका मेडम निशा के साथ नीचे चली गयी और मस्टेरज़ी ब्लाउस को उधेड़ने लगे. और बबलू मल्लिका मेडम के सम्मोहन मे खोया गया. वॉल क्लॉक मे 5 बज चुके थे. मस्टेरज़ी- बबलू. बबलू अपने ख़यालो से बाहर आया- जी मस्टेरज़ी. मस्टेरज़ी- ये ब्लाउस तैयार हो गया है. पर बेटा मुझे अपने दोस्त के बेटे की शादी मे जाना है. तू नीचे से मल्लिका मेडम का अड्रेस लेले और 6 बजे से पहले इसे पहुचा देना. बबलू- मस्टेरज़ी मैं तो मुंबई मे नया हू. मैं कैसे जाउन्गा. और मुझे अभी अपना रहने का ठिकाना भी तो खोजना है अभी. मस्टेरज़ी- जगह के लिए तू निशा से बात कर ले. वो कोई ना कोई बंदोबस्त कर देगी. बस तू ये टाइम पर पहुचा ज़रूर देना. बबलू- जी जैसा आप कहे. बबलू ने ब्लाउस लिया और नीचे निशा के पास पहुच गया. निशा- चले ? बबलू- कहा चले ? निशा- जहा तुम ले चलो. बबलू- मुझे तो ये ब्लाउस डेलिवरी करने जाना है. मल्लिका मेडम का अड्रेस दे दो. निशा- क्यो तुम अपना प्रॉमिस भूल गये क्या ? बबलू- कौन सा प्रॉमिस ? निशा- अच्छा बच्चू. अब वो भी मुझे ही याद दिलाना पड़ेगा क्या ? बबलू- अच्छा वो. अभी तो मुझे काम से जाना है. फिर कभी पूरा कर दूँगा. निशा- फिर कभी क्या ? मुझे तो आज ही करना है. बबलू- आज तो मुश्किल है. मस्टेरज़ी कह रहे थे कि तुम रूम का अरेंज्मेंट करा दोगि…. निशा- रूम देखना है तो अभी चलना होगा. नही तो रात हो जाएगी. बबलू- रूम तो चाहिए पर पहले ये ब्लाउस 6 बजे तक पहुचना ज़रूरी है. निशा- हा तो ठीक है. ये ब्लाउस डेलिवरी करके यही पर वापस आ जाना. फिर कमरा देखने चलेंगे. बबलू- पहले अड्रेस तो दो. निशा- ये तो पास मे ही है. 1 घंटे मे वापस आ जाओगे. ये लो बाहर मेरी किनेटिक खड़ी है. वो ले जाओ. बबलू- ना जान ना पहचान. पहले ही दिन इतना विश्वास. कही मैं तुम्हारी किनेटिक लेकर भाग गया तो. निशा- अरे मैं तुझे भागने दूँगी तब ना. बबलू- अच्छा-अच्छा. मैं आता हू. मेडम के जाने के बाद पूरे दिन बबलू की आँखो के आगे मेडम का मादक जिस्म तैरता रहा. मेडम की लचकदार कमर और कातिल गोलाइया. पूरे दिन उसने अपने ख्वाबो मे मल्लिका मेडम के जिस्म को तरह-तरह से चोद लिया था. लंड तो बेचारा पता नही कितनी बार आकड़ा और फिर शांत हुआ. उसकी तो बस ये ही तम्माना थी की उसका सपना एक बार सच हो जाए और मेडम उसे अपने मादक जिस्म को प्यार करने की किसी तरह इजाज़त दे दे. बबलू को बाहर वेटिंग रूम मे बिठाया गया था पर वाहा से कोठी के अंदर की शानदार स्जावट दिख सकती थी. रामू चाइ और बिस्कट दे गया था. बबलू ने चाइ ख़तम ही की थी कि रामू पास आकर बोला कि मेडम आपको बुला रही है. इतना सुनते ही बबलू का लंड फिर से झटके खाने लगा. उसे फिर से मेडम के मादक शरीर के दर्शन होने वाले थे. बबलू उठा और रामू के पीछे हो लिया. कोठी वाकई जानदार थी. रामू बबलू को ग्राउंड फ्लोर पर ही एक रूम के बाहर तक पहुचा कर बोला- अंदर चले जाइए. मेडम अंदर ही है. यह कमरा शायद मल्लिका मेडम का बेडरूम था. पर रूम मे मेडम दिखाई नही दी. अंदर एक और दरवाजा खुला हुआ था. बबलू उसके अंदर चल गया. ये शायद मेडम का ड्रेसिंग रूम था. पूरे कमरे मे अलमारिया बनी थी और एक तरफ बड़ी सी ड्रेसिंग टेबल पर मल्लिका मेडम मिरर के सामने खड़ी थी और ब्लाउस पहनने की कोशिश कर रही थी. मेडम को देख कर बबलू की उत्तेजना और बढ़ गयी. मेडम ने नीचे तो पेटिकॉट पहन रखा था पर उपर उनके जिस्म केवल एक लो नेक लाइन ब्रा थी. निपल को छोड़ कर लगभग पूरे ही बूब्स की झलक मिरर मे दिखाई दे रही थी. बबलू के शरीर मे जैसे लावा सा बहने लगा था. बबलू मल्लिका मेडम को घुरे जा रहा था. मेडम ने उसे घूरते हुए देख तो लिया था पर उन्होने इसे अनदेखा कर दिया और बोली- ये ब्लाउस तो मुझे समझ नही आ रहा. पता नही कैसे पहना जाएगा. प्लीज़ तुम मेरी थोड़ी मदद कर दो ना. मेडम की आवाज़ मे रूमानियत भी थी और रिक्वेस्ट भी. बबलू उन्हे मना नही कर पाया. उसने मेडम से ब्लाउस ले लिया और उसकी डोरी ढीली करने लगा. बीच बीच वो नज़र चुरा कर मेडम की छातियो का भी नज़ारा ले लेता. मेडम सब देख रही थी पर पता नही उनके मन मे क्या चल रहा था. वो शांत खड़ी रही. बबलू- मेडम आप हाथ सामने कर लीजिए. मेडम- अरे मेरे सिर मे दर्द है. मैने अभी गोली ली है. तुम्हे जो करना है चुपचाप करते जाओ. बोलो नही. बबलू- जी आप बस खड़ी होकर इसमे बाजू डाल लीजिए बाकी फिटिंग मैं देख लूँगा. मेडम ने हाथो मे ब्लाउस की बाजू पहन ली और ब्लाउस को उपर तक चढ़ा लिया. बबलू मेडम के पीछे आ गया और डोरी टाइट करने लगा. बॅक लेस ब्लाउस मे मेडम की गोरी कमर बड़ी मस्त लग रही थी. डोरी टाइट करने के बाद बबलू सामने की तरफ आया. मेडम का ब्लाउस का गला बहुत डीप था. लाल रंग के डीप नेक ब्लाउस मे मेडम कयामत लग रही थी. बबलू तो बस देखता ही रह गया. मेडम- आ… क्या चुभ रहा है यहा पर. बबलू- मेडम कहा पर. मेडम- ये देखो यहा पर. ये क्या है. आअह… बबलू ने ध्यान से देखा की ब्लाउस मे कोई चीज़ घुसी हुई थी. मेडम- अरे जल्दी कुछ करो. बहुत दर्द हो रहा है….आ… बबलू- मेडम ब्लाउस उतरना पड़ेगा. शायद कोई चीज़ ब्लाउस मे चली गयी है. मेडम- अब ब्लाउस उतारने का टाइम नही है मेरे पास. तुम ऐसे ही निकाल दो. बबलू- ऐसे कैसे निकाल दू. वो ब्लाउस मे नीचे की तरफ है. मेडम- कैसे क्या ? भगवान ने ये हाथ क्यो दिए है तुम्हे ? इनका इस्तेमाल नही जानते क्या…आ…जल्दी करो…आइईए बेचारा बबलू मरता क्या ना करता. उसने मेडम के ब्लाउस को थोड़ा सा खीचा और उस चीज़ की सही जगह का अंदाज़ा लगाया. वो जगह मेडम के निपल के ठीक नीचे थी. बबलू मेडम के पीछे गया और ब्लाउस की डोरी को ढीला कर दिया. फिर उसने मेडम को चेर पर बैठा दिया. इसके बाद बबलू बाई ओर आया और मेडम के ब्लाउस और ब्रा के बीच मे अपनी काँपति हुई उंगलिया डाल दी. जैसे मक्खन से जमे हुए गोल च्यूक पर हाथ दिया हो. मेडम के मम्मो मे काफ़ी कसाव था. बबलू के लिए इतना ही काफ़ी था. उसका दिल धड़-धड़ करके बज रहा था. लंड बुरी तरह सूज कर अकड़ चुका था. केवल मेडम के जिस्म की चुअन से ही बबलू के शरीर के रौंगटे खड़े हो चुके थे. बबलू ने दूसरे हाथ से अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर लंड को बाहर निकाल लिया और थोडा सहलाने लगा. लंड मे ध्यान लगने से बबलू ब्लाउस को भूल सा गया था. पर मेडम का दर्द बढ़ता जा रहा था. मेडम- ज़ल्दिकरो ना प्लीज़. मेडम की दर्द भरी आवाज़ सुन कर बबलू ने लंड को छोड़ दिया और एक हाथ से ब्लाउस को आगे खींच लिया और उसमे देखने की कोशिश करने लगा. पर वाहा देखने के लिए जगह ही नही थी. बबलू धीरे-धीरे अपना दूसरा हाथ मेडम के ब्लाउस मे सरका रहा था. आख़िर मे उसका हाथ से कोई सख़्त चीज़ टकराई. उसने उसे थोड़ा सा सहला कर देखा, शायद कोई चने का दाना था. बबलू ने उसे थोड़ा ज़ोर से दबा दिया. इसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स- मेडम की सिसकारी नकल गयी – ये क्या कर रहे हो. मेरी तो जान ही निकल गयी. मेडम के हाथ बबलू के हाथो पर पहुच गये थे और चेहरे पर पसीना आ गया था. बबलू- मेडम आपके ब्लाउस मे जो चुभ रहा वही निकल रहा हू. पता नही ये चने जैसा दाना आपके ब्लाउस मे कैसे आ गया. मेडम- ईडियट ऐसे नट्स तो हर औरत की छाती पर होते है. बबलू- मेडम किस लिए ? देखो अब आपको चुभ रहा है ना. मेडम- चुभ तो उसके नीचे रहा है…स्टुपिड. बबलू ने हाथ थोड़ा और नीचे सरकया तो अचानक उसकी उंगली पर चुबी. उसने तुरंत हाथ बाहर निकाल लिया और हिलाने लगा. शायद कोई नीडल चुभि थी. उसके उंगली पर खून उभर आया था. मेडम ने उसकी उंगली पर खून देखते ही चिल्ला उठी – खून. और उंगली को अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी. बबलू- मेडम शायद कोई नीडल रह गया है अंदर. आपको ब्लाउस उतारना ही पड़ेगा. मेडम ने सिर हिला कर हामी भर दी. बबलू ने धीरे से मेडम के मूह से अपनी उंगली निकाली और मेडम के ब्लाउस की डोरी खोल दी. खून बंद हो चुका था. शायद मेडम के चूसने से ऐसा हुआ था. मेडम ने धीरे से ब्लाउस उतारा तो देखा वाकई मे नीडल थी. नीडल चुभने से ब्रा पर भी खून का धब्बा आ गया था. मेडम- अरे ये ब्रा तो खराब हो गयी. चेंज करनी पड़ेगी. तुम प्लीज़ स्ट्रॅप खोल दो. बबलू ने ब्रा के स्ट्रॅप खोल दिए. ब्रा खुलते ही मेडम के बूब्स कबूतरो की तरह आज़ाद होकर फुदकने लगे. उसकी आँखे फटी रह गयी. होठ सूखने लगे. उसने जीभ से अपने होठ गीले किए. तभी मेडम की निपल के नीचे खून की एक बूँद उभर आई. बबलू उसे देखते ही बोला- खून.

बबलू- मेडम आपके तो खून निकल रहा है. बॅंडेज लगानी पड़ेगी. मेडम- अब यहा पर बॅंडेज लगा कर पार्टी मे थोड़े ही जाउन्गी. तुम प्लीज़ अपनी जीभ से थोड़ा चाट दो. खून रुक जाएगा. बबलू की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी थी. चारा खुद घोड़े को बुला रहा था. उत्तेजना के मारे उसकी आँखे मूंद गयी. वो घुटने के बल बैठ गया और चोट वाली जगह पर मूह ले जा कर अपनी जीभ निकाल ली और चोट को जीभ से चाटने लगा. मेडम की चोट को चाटते-चाटते बबलू फिसल कर मेडम के निपल पर जा पहुचा. और अपनी जीभ से मेडम के निपल को ही चाटने लगा था. थोड़ी देर बाद बबलू ने पीछे हटना चाहा तो मेडम ने उसके सिर को पकड़ लिया और दबा दिया. जिससे बबलू के होठ निपल पर लग गये. मेडम- चॅटो ना प्लीज़. बड़ी राहत मिल रही है….. हा ऐसे ही इसको चूस्ते रहो. दर-असल बबलू द्वारा निपल के साथ अंजाने मे हुई छेड़खानी से मेडम की भावनाए भड़क उठी थी. बबलू तो आँखे मुन्दे चोट के नाम पर निपल को चाते जा रहा था पर मेडम की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी. उन्होने अपने पेटिकट का नाडा खोल दिया और पॅंटी मे हाथ डाल कर अपनी चूत को मसल्ने लगी. मेडम ने अपनी चूत मे उंगली डाली और चिड़िया को सहलाने लगी. मेडम की हर हरकत आग मे घी डालने का काम कर रही थी. उपर बबलू उनके एक ही निपल को चोट समझ कर चूसे जा रहा था. नीचे मेडम की चूत मे आग लगी हुई थी और उसको बुझाने का एक ही उपाए था जो उनके सामने लटक रहा था. उन्होने लपक कर बबलू के 10 इंच के काले नाग को पकड़ लिया. बबलू का काला स्याह लंड मेडम की गोरी उंगलियो मे कुछ ज़्यादा ही काला लग रहा था. लंड के पकड़े जाते ही बबलू चोंक उठा और उसकी आँखे खुल गयी. उसके होंठो मे मेडम का निपल था. उसने तुरंत मूह पीछे हटाया और खड़ा हो गया. उसका लंड अब भी मेडम के हाथ मे था. मेडम का हुलिया बदल चुका था. उनका पेटिकॉट उतर कर घुटनो तक आ गया था और एक हाथ मे लंड था तो दूसरा हाथ पॅंटी मे था. मेडम की आँखे बंद थी. बबलू सारा माजरा समझ गया. उसने टांग मार कर दरवाजा बंद कर दिया और फिर से नीचे घुटनो पर बैठ गया और दोनो हाथो मे मेडम का एक मम्मा पकड़ कर अपने होठ निपल पर चिपका दिए. कहने की आवश्यकता नही कि ये दूसरा मुम्मा था. ईईईस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…..हहाआआआआआआआआ अपने दूसरे निपल पर मेडम बबलू के होंठो को बर्दाश्त नही कर पाई और ज़ोर की सिसकारी मूह से निकल गयी. बबलू ने दूसरे हाथ से मेडम के दूसरे मम्मे को पकड़ लिया और उस से खेलने लगा. मेडम के एक माममे के लिए बबलू के दोनो हाथ भी कम थे. मेडम- क…क.क्या कर रहे हो….मत करो…ना ..इश्स…हा…प्लीज़…मत ….हा.. बबलू ने दूसरा सहला कर मेडम के हाथ के साथ ही उनकी पॅंटी मे डाल दिया. फिर उनके हाथ के साथ ही अपनी उंगलिया फिसला कर उनकी उंगलियो तक पहुच गया. मेडम- इसस्स….ममियीयीयियी………नही…………प्लीज़…….ऐसा..करो…………प्लीज़….मत कर….मर ……आ…….जाउन्गी…. मेडम की सिसकारिया जारी थी. बबलू की उंगलिया मेडम की उंगलियो के साथ ही चिड़िया तक पहुच चुकी थी. मेडम की पॅंटी मे पहले ही प्रेम रस का दरिया उफान रहा था. फिर बबलू ने भी पूरी निर्दयता के साथ मेडम की चिड़िया को कुचल दिया. मेडम- उई मुम्मि…….हाए….. मेडम की रसभरी चूत ने फिर से एक बौछार कर दी और बबलू का हाथ मेडम के रस से सराबोर हो गया. मेडम की छाती ढोँकनी की तरह उपर नीचे हो रही थी. बबलू मेडम की हालत को समझ गया था. उसने देर ना करते हुए मेडम को नीचे कालीन पर लिटा दिया और पॅंटी को शरीर से अलग कर दिया. मेडम इसी पल के इंतेजार मे बहाल हुए जा रही थी. बबलू का कुंड भी अब फटने ही वाला था. मेडम ने खुद ही टाँगे खोल दी और फिर बबलू ने निशाना लगाया और… …घापप्प गरम लोहे सा लंड फिसलता हुआ मेडम की रसीली चूत मे चला गया और अंदरूनी दीवार से जा टकराया. मेडम फिर चीख उठी. पर ये चीख उत्तेजना की नही दर्द से भरी ती. बबलू के लंड ने सीधे मेडम की बच्चेदानी पर चोट की थी. मेडम की साँसे तेज़ी से चल रही थी. पर हमारा शेर रुका नही. मेडम की चूत कुँवारी नही थी और उसने शुरू से ही तेज धक्के लगाना शुरू कर दिया. बबलू का लंड मेरी तरह ज़्यादा मोटा नही था पर इतना लंबा था की चूत से 1-2 इंच बाहर ही रह जाता था. थोड़ी देर मे मेडम दर्द भूल कर अपनी चुदाई का मज़ा लेने लगी थी. प्लीज़…तेज…और …तेज….और…और…अंदर …तक…प्लीज़….तेज….तेज….कर…ओ…ना…तेज… बबलू के दोनो हाथ मेडम के मम्मो को बुरी तरह मसले जा रहे थे पर इससे उनके आकार पर कोई फ़र्क नही पड़ रहा था. पता नही शायद रब्बर के थे. 10 मिनिट के बाद मेडम की सिसकारिया अब चीखों मे बदल गयी थी. और मेडम की शालीनता भी गायब हो गयी थी. वो अब लोकल मुंबइया लॅंग्वेज मे चीख रही थी. स्याला….तुझे सुबह से देख रही थी….साले मेरे मम्मो को घुरे जा रहा था…साले…अब क्या हुआ तुझे…सब दम निकल गया क्या….साले थोड़ा ज़ोर लगा के चोद ना….मर्द का बच्चा नही है क्या….कामीने… मेडम की हर ललकार पर बबलू धक्को की रफ़्तार बढ़ा देता. पर 15 मिनिट तक फुल स्पीड मे चोदने के बाद भी मेडम की चूत की आग शांत नही हुई थी. बबलू का लंड भी सुबह की जोरदार चुदाइयो के कारण सूखा हुआ था और इतनी जल्दी रस बरसाने को तैय्यार नही था. मुक़ुआबला बराबरी का था. एक तरफ मेडम का खेली खाई चूत थी तो दूसरी तरफ बबलू का जोशीला लंड. कोई भी पीछे हटने को तैय्यार नही था. आख़िर मे बबलू ने एक बार फिर पूरे ज़ोर से पूरा लंड मेडम की चूत मे पेल दिया. आहह मेरी माआआआ. मेरी चूत…..साले फाड़ दी तूने…बस..अब और नही…प्लीज़….निकाल…ले…प्लीज़…और मत…पेल.. पर बबलू को तो हाल बुरा था. मेडम ने उसके लंड को फिर से लटका दिया था. उनका खुद का तो कम तमाम हो गया था पर बबलू का लंड अब भी आकड़ा हुआ था. उसने मेडम की चूत से लंड को बाहर निकाला और मेडम को पलट दिया. कालीन पर मेडम की चूत के नीचे एक तालाब सा बना हुआ था. मेडम की चूत पता नही कितनी बार झड़ी थी. बबलू ने मेडम की चूत की माँ ही चोद दी और उनकी टाँगो को तोड़ा खोल दिया. बबलू के सामने दो मलाईदर पहाड़ खड़े थे. बुटीक मे जीने मे चढ़ते वक्त का नज़ारा बबलू की आँखो मे घूम रहा था. मेडम के हिप्स उनके बूब्स से कही भी कमतर नही थे. दोनो पहाड़ो के बीच मे एक कतव्दर घाटी थी और घाटी के बीच मे एक बंद मूह वाला ज्वालामुखी सा दिखाई दे रहा था. खास बात ये थी कि पहाड़ समेत पूरा इलाक़ा एक दम गोरा-चिटा था. कोई तिल आदि का निशान भी नही था. कसाव के तो क्या कहने. मेडम- मेरी टाँगे क्यो खोल दी. अब मेरी आस को फाड़ने का इरादा है क्या ? बबलू- मेडम पीछे से भी सेक्स हो सकता है ? पर यहा तो कोई भी छेद नही है. मेडम- ये जो लेट्रीन वाला छेद है ना, लोग उसी….. (मेडम कहते कहते अचानक चुप हो गयी…शायद उन्हे अपनी भूलका एहसास हो गया था.) बबलू- ठीक है फिर तो मज़े आ गये ! (बबलू चहकते हुए बोला) मेडम- नही-नही…मैने कभी पीछे से नही करवाया है. मेरे हज़्बेंड भी इसके पीछे पड़े रहते है. बबलू- मेडम मैं आपका हज़्बेंड नही हू. फिर पता नही कब मौका मिले आपके इस मखमली जिस्म की सेवा करने का. और फिर मेरा लंड तो भी बुरी तरह आकड़ा हुआ है. बिना इसे शांत किए मैं बाहर कैसे जाउन्गा? मेडम- चलो ठीक है…पर ज़रा आराम से करना. और पहले उंगली से इसे……. बबलू- वो आप मुझ पर छोड़ दीजिए. बबलू से अब बर्दाश्त नही हो रहा था. मेडम की बात काट कर उसने लंड पकड़ा और मेडम की गंद के मुहाने पर रख कर पहले की तरह पूरे ज़ोर से धक्का मार दिया. आआआआआररर्ररगगगगगगगघह आआआआआररर्र्र्रररगगगगगघह एक साथ दो चीखे उभरी. जैसे बबलू ने अपना लंड किसी बंद दरवाजे मे दे मारा हो. बेचारा लंड पकड़ कर एक तरफ लुढ़क गया. लंड का गुलाबी सूपड़ा एक सूम लाल होकर सुन्न पड़ गया था. उधर मेडम को भी चक्कर आने लगे थे. दर्द के मारे दोहरी हुई जा रही थी. बेचारी की कुँवारी गंद को बबलू ने अपने मूसल से प्रहार करके कुचल दिया था. पूरा इलाक़ा त्रहिमाम कर रहा था. मेडम- ईडियट पहले कभी किसी के साथ अनल किया भी है. ऐसे किसी की अनस मे कभी पेनिस घुसता है ? बबलू- सॉरी मेडम. मैने तो आज पहली बार किसी औरत को छुआ है. मुझे क्या पता इस बारे मे. मेडम- जब मैं बता रही थी तो बड़े तीस-मार-खा बन रहे थे. बबलू- सॉरी मेडम. मेडम- ओके. चलो दिखाओ क्या हाल कर लिया तुमने अपने पेनिस का. लंड तो एक दम टॉप की माफिक तना हुआ था पर बबलू हॉर्नी नही था. लंड का हुलिया भी ठीक था बस सूपड़ा थोड़ा रेडिश हो गया था. दर्द भी नही था. पर बबलू के मन मे कुछ और ही था. बबलू- मेडम बहोत दर्द हो रहा है. प्लीज़ कुछ करिए ना. मेडम- ऑल मेला बेबी. इधर आ जा. मेला बैबी. क्या हुआ… बबलू- मेडम थोड़ा आराम से पकड़ना प्लीज़. देखिए अभी तक लाल है. मेडम ने लंड को बीच मे से पकड़ लिया और बबलू के टट्टो को चाटने लगी. टट्टो के उपर मेडम की जीभ फिरने से बबलू का उत्तेजना तंतरा फिर से काम करने लगा था. मेडम ने उसके मर्म-स्थान को छेड़ दिया था. बबलू की टाँगे एक दम खुल गयी थी और मेडम भी उसके टट्टो से थोड़ा उपर उठ कर उसके लंड पर जीभ फिराने लगी. धीरे-धीरे मेडम ने पूरा लंड अपने थूक से सराबोर कर दिया. केवल सूपड़ा ही बचा था. मेडम- मेरी वेजाइना मे डालोगे या मैं इसे चूस लू. बबलू- मेडम आपकी चुसाई मे बड़ा मज़ा आ रहा है. प्लीज़ आप करती रहिए ना. मेडम ने सूपड़ा मूह मे लिया और चूसने लगी. बबलू काफ़ी उत्तेजित हो चुका था. बीच-बीच मे मेडम के मूह मे ही धक्के लगा देता. पर जो लंड मेडम की चूत को फाड़ कर आया था वो मेडम के नरम और गरम मूह मे ज़्यादा देर टिक नही पाया. थोड़ी ही देर मे उसका लंड मेडम के मूह मे पिघल गया. मेडम उसके रस की हर एक बूँद का टेस्ट लेते हुए सारा सीमेन (वीर्य) गटक लिया. इसके बाद बबलू का शरीर जवाब दे गया. बेचारे बबलू के लंड ने पहले ही दिन घंटो तक काम किया था और पता नही कितना रस उगला था. मेडम काफ़ी संतुष्टि दिखाई दे रही थी. अचानक उन्हे पार्टी की याद आई. वो तुरंत उठी और बाथरूम मे नहाने के लिए घुस गयी. बेचारे बबलू के शरीर मे बिल्कुल जान नही थी. नही तो मेडम के साथ जक्यूज़ी मे भी नहा लेता. बेचारा.. मेडम- उठो. सो गये क्या ? ये ब्लाउस तो पहना दो. बबलू ने 15-20 मिनिट की झपकी ले ली थी और वो काफ़ी तरो-ताज़ा महसूस कर रहा था. वो चुप-चाप उठा. और मेडम की ब्लाउस पहनने मे मदद करने लगा. मेडम ने सारी पहले ही पहन रखी थी. ब्लाउस की डोरी बँध जाने के बाद मेडम बोली- ये लो मेरा कार्ड. जब कोई ज़रूरत हो या मिलने का मन करे तो मेरे सेल पर फोन कर लेना. बबलू- जी मेडम इतना कह कर बबलू कोठी से बाहर निकला. बबलू के चेहरे पर आत्मा-विश्वास सॉफ दिखाई दे रहा था. रात के 8 बजने वाले थे. बबलू ने किनेटिक स्टार्ट की और भगा ली. उधर निशा को मन ही मन चिंता हो रही थी कि कही उसने ग़लत आदमी पर भरोसा तो नही कर लिया. उसे बबलू पर भी गुस्सा आ रहा था. 15 मिनिट का ही तो काम था और अब 3 घंटे होने आए थे. बेचारी बार-बार बाहर निकल कर उसकी राह देख रही थी. 8 बजे बुटीक भी बंद हो गया. पर निशा बाहर खड़ी रही. उसका दिल बबलू को ग़लत मानने के लिए राज़ी नही हो रहा था. इसीलिए शायद उसने सबके मना करने पर भी बबलू का इंतेजार करने का फ़ैसला कर लिया था. रात घिरने के साथ ही सारा इलाक़ा सुनसान होता जा रहा था और निशा के मन मे डर समता जा रहा था. निशा वाहा अकेली खड़ी थी. जब भी कोई वेहिकल वाहा से गुज़रता तो उसके दिल की धड़कने तेज हो जाती. उसके निकल जाने के बाद ही उसकी जान मे जान आती. पॉश इलाक़ो मे यही दिक्कत रहती है. रात को सड़क पर कोई आदमी ढूँढने से भी नही मिलता. ऐसे ही 15 मिनिट बीत गये. अचानक एक बड़ी सी बीएमडब्ल्यू वाहा पर रुकी और ड्राइवर विंडो का ग्लास नीचे हुआ. उसमे से एक लड़के ने सी बाहर निकाला और बोला- हाई बेब. वॉट’स अप….वाना हॅव फन… निशा की तो घिग्घी ही बँध गयी. हालाँकि उसका पूरा तन पूरी तरह ढका हुआ था पर उस लड़के की नज़रो मे वो खुद को नंगा महसूस कर रही थी. उसके हाथ कपड़ो को खीच कर लंबा करने की कोशिश करने लगे. उससे कोई जवाब ना पाकर लड़के की हिम्मत और बढ़ गयी.

अचानक उस लड़के ने गाड़ी आगे बढ़ा दी. 50 मीटर बाद गाड़ी रुक गयी और गेट खुला. एक लड़का उतर कर ओट मे हो गया. गाड़ी मूड गयी और 100 मीटर दूर जाकर फिर मूडी. एक और लड़का गाड़ी से उतरा और ओट मे हो गया. 2 मिनिट बाद गाड़ी धीरे से आगे बढ़ने लगी. दोनो लड़के एक साथ ओट से बाहर निकले और निशा पर झपाटे. निशा- कौन हो तुम…क्या चाहते हो… लड़का- अपनी चोंच बंद कर और चुप चाप चल. निशा- कहा चालू …मैं तो तुमको जानती भी नही… दूसरा- चलती है या तेंठूआ कर दू तेरा. पहला- आबे लड़की के तेंठूआ कहा होता है… दूसरा- भोंसड़ी के… तू मुझे सिखाएगा…माल उठा और निकल ले… दोनो ने निशा के हाथ पकड़ लिए थे. निशा चिल्लाने लगी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो….मैं ऐसी लड़की नही हू… पहला- कोई बात नही..एक बार हमारे साथ चल…तुझे टॉप की रंडी बनाउन्गा. निशा- छोड़ दो….बचाओ बचाओ… निशा भी ज़ोर आज़माने लगी. पर इतने मे BMW वाहा पहुच गयी और दोनो ने निशा को अंदर डाल दिया. फिर पहला उसे पकड़ कर अंदर बैठ गया और दूसरा दूसरी तरफ से. अंदर बैठते ही उन्होने निशा के मूह पर कपड़ा बाँध दिया. पर निशा ने छूटने की कोशिश नही छोड़ी. वो बेचारी हाथ पाँव मारती रही. इसी आपा धापी मे उसका हाथ एक लड़के की नाक पर पड़ गया और उसने भी पलट कर निशा पर वार कर दिया. निशा एक ही वार मे बेहोश हो गयी. ड्राइव कर रहे तीसरे लड़के ने BMW की स्पीड बढ़ा दी. आगे की सीट पर बैठा चौथा लड़का बोला- अबे सालो कपड़े तो उतारो इसके…रात भर पूजा करोगे क्या इसकी. यह सुन कर पीछे बैठे दोनो लड़के निशा की देह को नंगा करने मे जुट गये. कपड़े टाइट थे इसलिए उतारना मुश्किल हो रहा था और उन तीनो की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. उन्होने उसके कपड़े फाड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर मे निशा जन्म-जात नंगी पड़ी थी. उसके गोरा शरीर 4-4 भेड़ियो के सामने नंगा नीचेष्ट था. उसके शरीर पर केवल सेंडल ही बची थी. पहला- हाए क्या जवानी चढ़ि है छोरी पे… तीसरा- साली का रंग तो देखो जैसे चाँद ज़मीन पर उतर आया हो… दूसरा- भाई मुझसे तो रुका नही जा रहा….मैं तो चला… BMW मे काफ़ी स्पेस और लेगरूवूम था. दूसरे लड़के ने इसका भरपूर फायेदा उठाया और निशा की टाँगे खोल कर उसकी चूत को उजागर कर दिया. फिर उसकी चूत की फांके खोल कर उसमे अपनी जीभ डाल कर चोदने लगा. पहला लड़के ने निशा के मम्मो पर धावा बोल रखा था. दोनो की आज़माइश से निशा फिर से होश मे आ गयी थी. पर उसने उन पर ये जाहिर नही होने दिया. अपनी चूत से हो रहे खिलवाड़ से वो उत्तेजित नही हो पा रही थी बल्कि अपनी बेबसी पर उसे रोना आ रहा था. थोड़ी देर बाद BMW रुक गयी. तीसरा (ड्राइव करने वाला)- चलो कुछ खा पी लेते है फिर पूरी रात मज़े लेंगे. चौथा- हा अब सीधे फार्म हाउस पर चलेंगे. निशा को इसी पल का इंतेजार था. दूसरा- तुम जाओ मैं इसकी रखवाली करूँगा. पहला- इतनी देर से कुत्ते की तरह उसकी चूत चाते जा रहा हा. इसके मूत से अपना पेट भरेगा क्या. चल छोड़ इसे. दूसरा- भाई मैं तो इसको तैय्यार कर रहा था. पर हरम्जदि का रस ही नही निकल रहा. चौथा- अबे भोंसड़ी के…बेहोश है तो रस कहा से चोदेगि…. दूसरा- एक बार फार्म हाउस पहुच जाए…फिर पूरी रात इसकी चूत से रस का दरिया बहेगा.. तीसरा- ठीक है. पर अब तो चलो. ये कही नही जाएगी. कार लॉक कर देंगे. दरवाजा खुलेगा तो पता चल जाएगा. चौथा- और फिर बिना कपड़ो के कहा जाएगी. रास्ते के कुत्ते पीछे पड़ जाएँगे इसको चोदने के लिए. इसकी चूत को भोसड़ी बना कर चोदेन्गे….हहहहहा हहाहहाहा –चारो की कामिनी हँसी गूँज उठी. फिर चारो कार को लॉक कर के बार मे चले गये. दूसरे लड़के को पूरा भरोसा नही था इसलिए वो वापस आया और बेहोश निशा के हाथ बाँध दिए. पैर बाँधने लगा तो उस पर बाकी लड़के चिल्लाने लगे. उसने निशा को देखा और उसके निपल की चुम्मि लेकर डोर लॉक कर के चला गया. चारो के जाते ही निशा के दिमाग़ के घोड़े दौड़ने लगे थे. कार से बाहर निकल भी गयी तो इस हालत मे कैसे कहा जाएगी. तन पर एक भी कपड़ा नही था. उसके शरीर से नोचे गये कपड़े तो उन लड़को ने पहले ही बाहर फेंक दिए थे. अब क्या करू ?…आख़िर मे उसने इसी हालत मे बाहर निकलने का फ़ैसला किया. बाहर तो फिर भी बचने के चान्स थे पर अंदर रही तो आज उसकी आज़ादी की आख़िरी रात होगी. यही सोच कर उसने डोर का हॅंडल पकड़ा पर उसे उस लड़के की बात याद आ गयी. गेट खुलते ही साइरन बज जाता और चारो वाहा वापस आ जाते. तभी उसकी दिमाग़ मे बिजली सी कौंधी और वो विंडो का मिरर नीचे करने लगी और बाहर निकल गयी. बाहर निकल कर देखा तो कार रोडसाइड पर पार्क थी और सड़क एकदम सुनसान थी. दूर तक पेड़ ही पेड़ थे. निशा को रास्ते का समझ नही आ रहा था कि किस दिशा मे जाए. उसने कार की पीछे की दिशा मे जाने का फ़ैसला किया. वो सड़क से उतर कर कच्चे मे आ गयी ताकि इस हालत मे सड़क पे चलने वाले वाहनो से बच सके और फिर किसी मुसीबत मे ना फँस जाए. हर कदम के साथ उसकी रफ़्तार बढ़ती गयी. 10 मिनिट के बाद तो वो पूरा ज़ोर लगा कर दौड़ रही थी. बीच-बीच मे वो मूड-उड़ कर देख लेती. अबकी बार उसने मूड कर देखा तो उसे 2 रोशनीया अपनी और आती दिखाई दी. उसकी दिल की तेज धड़कने और तेज हो गयी. वो साइड मे एक पेड़ के पीछे छिप गयी और कार को निकलने दिया. ये वही BMW थी और वो लड़के उसी को ढूँढ रहे थे. दौड़ते दौड़ते हलक सुख चुका था और सांस भी फूल रही थी. वो थोड़ी देर वही बैठ गयी और सांसो को कंट्रोल करने लगी. 2 मिनिट बाद वही BMW फिर वापस आई और तेज़ी से दूसरी दिशा मे निकल गयी. निशा खड़ी हुई और फिर दौड़ने लगी. वो 5 मिनिट ही दौड़ी होगी की फिर वही BMW की तेज लाइट्स उस पर पड़ी. निशा की सांस अटक गयी. अब उसके बचने की कोई उमीद नही थी. वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी- बचाओ बचाओ… पर किसी ने उसकी आवाज़ नही सुनी उस सुनसान मे. वो फिर दौड़ने लगी. वो बार बार कार से अपनी दूरी का अंदाज़ा लगा रही थी जो कि लगातार कम हो रही थी. लगभग 2-3 मिनिट तक दौड़ने के बाद वो अंधेरे मे किसी से जा टकराई. वाहा अंधेरे मे उसका चेहरा नही दिखाई दे रहा था. पर ये बबलू ना था. निशा गिड़गिदते हुए बोली- प्लीज़ मुझे बचा लो भैया. तभी BMW भी वाहा पहुच गयी. चारो एक साथ नीचे उतरे और उनके हाथो मे हॉकी, बेसबॉल बॅट आदि हथियार थे. पहला- आए श्याने…छोड़ दे लौंडिया को… और फुट ले यहा से. पाँचवा (जिससे निशा जाकर टकराई थी) –भोंसड़ी के अगर गंद मे दम हो तो आकर ले जा. दूसरा- साले इसके साथ तेरी मा-बहन भी चोद देंगे. पाँचवा- “गंद मे हमारी दम नही-हम किसी से कम नही.” पहले इसको तो चोद लो कुत्तो. यह सुन कर चारो और उत्तेजित हो गये और हथियारो के साथ अकेले खड़े पाँचवे पर टूट पड़े. पर ये क्या…चारो अपनी टाँगो पर दौड़ कर आए थे पर उड़ते हुए वापस पहुच गये. पाँचवा- क्यो क्या हुआ. चोदोगे नही इसको. आओ चोद लो. लंड है भी या लूंड हो. उसकी ललकार सुनकर चारो ने हथियार फेंक दिए और ऐसे ही उसको पकड़ने के लिए भागे. पर ये पाँचवा तो वाकई मे उस्ताद था. एक एक कर के चारो की जबरदस्त धुनाई चालू हो गयी. आते जाओ पीटते जाओ. चारो के हर दाँव पर उस अकेले के दाँव भारी थे. 5 मिनिट बाद ही चारो सड़क पर पस्त पड़े थे. निशा अपने रखवाले के पैरो मे गिर पड़ी और रोने लगी- भैया आज आपने मुझे बचा लिया नही तो मैं क्या करती. पाँचवा- जब मुझे भाई कह दिया तो तुझे डरने की कोई ज़रूरत नही है. ये लोग कौन थे और तू इनके साथ कैसे फँस गयी. तभी उसे ध्यान आया कि निशा तो नंगी खड़ी थी. उसने तुरंत उसके हाथ खोले और अपनी शर्ट उतारकर निशा की ओर कर दी – लो पहले इसको पहन लो. दोनो का ध्यान भटका तो चारो ने उसकी टाँगे पकड़ कर उसे नीचे गिरा लिया और उस पर टूट पड़े. निशा की तो चीख ही निकल गयी. वो मदद के लिए इधर उधर देखने लगी. चारो उस लड़के को बेरहमी से मारने लगे – साले आज दिखाते है कि हमारी गंद मे कितना दम है. तभी एक जोरदार किक पाँचवे लड़के को पीट रहे एक लड़के के चेहरे पर पड़ी. उसकी बत्तीसी के सारे दाँत खून के साथ हवा मे उछल गये और वो ज़ोर से दिल दहलाने वाली चिंघाड़ के साथ सड़क पर लम-लेट हो गया. ये देख कर बाकी तीनो नीचे लेटे पाँचवे को भूल गये और सामने देखने लगे. निशा भी चोंक गयी और उस नये मसीहा को देखने लगी. ये हमारा बबलू था. वो कुंगफु का एक्सपर्ट था. बबलू ने एक राउंड किक चलाई और तीनो के सिर टकरा गये और तारे नाचने लगे. बबलू- विक्की…मेरे भाई तू यहा क्या कर रहा है…और ये लोग कौन हैं. पाँचवा- ये चारो इस लड़की के पीछे पड़े थे. आअह… बाबबलू- कौन लड़की… विक्की- वो खड़ी है बेचारी…इन हरमजदो ने उसके कपड़े भी फाड़ दिए…मेरा तो खून खौल गया था..छोड़ूँगा नही इन हरमजदो को. बबलू ने सिर घुमा कर देखा. निशा एक तरफ खड़ी सूबक रही थी. उसके शरीर पर केवल एक शर्ट थी जो बमुश्किल उसकी जाँघो तक पहुच रही थी. बबलू का भी खून खौल गया. बबलू- हराम के पिल्लो. तुमने मेरे भाई समान दोस्त को चार चार ने मिलकर पीटा. मेरी जान की इज़्ज़त पर हाथ डाला. तुमको ऐसा सबक सिखाउन्गा की तुम्हारी मा रोएगी कि तुमको पैदा ही क्यो किया. बबलू का पारा सातवे आसमान पर था. उसने इधर-उधर नज़र दौड़ाई तो उसे निशा के पैरो के पास पड़ी रस्सी दिखाई दी. उसने वो रस्सी उठाई और चारो को एक एक किक मारी. चारो दर्द के मारे दोहरे हो गये. बबलू- अपनी-अपनी पॅंट उतारो. पहला- प्लीज़ हमे छोड़ दो. हमे हमारे किए की सज़ा मिल गयी है. बबलू- बहनचोद तेरे किए की सज़ा तो जितनी दम कम है. अब उतार इसे. चारो दर्द के मारे बहाल थे. पॅंट उतरने के बाद चारो के अंडरवेर भी उतर गये. फिर बबलू ने वाहा पड़ी हॉकी भी उठा ली. बबलू- कभी स्कूल गये हो ? मुर्गा बन जाओ. जिसकी गंद सबसे नीचे होगी उसमे ये हॉकी घुसा दूँगा और मरोडुँगा भी. चारो तुरंत ही मुर्गा बन गये और अपनी गंद उपर पहुचने की होड़ करने लगे. चारो के टटटे और लंड सॉफ दिखाई दे रहे थे. बबलू ने रस्सी उठाई और चारो के टटटे रस्सी से बाँध दिए. दर्द के मारे चारो उठने लगे तो बबलू ने चारो की गंद पर एक एक हॉकी जमा दी. चारो फिर नीचे झुक कर कराहने लगे. बबलू- अब तुम दोनो लेट जाओ और बाकी दोनो इनके उपर 69 पोज़िशन मे लेट जाओ. चारो एक दूसरे का लंड चूसो. जिसका रस सबसे पहले निकलेगा और जो सबसे आख़िर मे दूसरे का रस निकलेगा, दोनो के टट्टो को मैं उखाड़ दूँगा. चलो अब शुरू हो जाओ. चारो ने एक दूसरे के लंडो को चूसना शुरू कर दिया. चारो के दिल बुरी तरह बज रहे थे. जो हारेगा उसका पौरुष आज ख़तम होने वाला था. जल्दबाज़ी मे चारो ने एक दूसरे के लंडो को कई बार अपने दन्तो से छील दिया. पर वो रुके नही. इधर बबलू ने निशा को अपनी बाँहो मे भर लिया- मुझे माफ़ कर दो निशा. उसकी आँखो से आँसू बहने लगे थे. निशा की आँखो मे से भी आँसू बहने लगे. विक्की भी खड़ा हो गया था- भाई आज अंजाने मे मैने अपनी ही भाभी की इज़्ज़त को बचा लिया. भगवान तेरा लाख लाख शुक्रिया है. इधर इनका सीन देख कर चारो धीमे हो गये थे. बबलू ने ज़ोर से चारो की रस्सिया खींच दी….आआआआआआययययययययययययईईईईईई चारो एक स्वर मे चीख पड़े और स्पीड बढ़ा दी. पर टटटे जब बँधे थे तो रस कहा से निकलता. बबलू- सालो तुम कुछ नही कर पाओगे. मुझे ही कुछ करना होगा. विक्की तू कार इधर ले आ. विक्की BMW ले आया. बबलू ने उससे चाबी लेकर किनेटिक की चाबी उसे दे दी और निशा को उसके साथ बिठाकर आगे चलने को कहा. उनके जाने के बाद उसने चाबी मे लगे लाइटर से चारो के कपड़े जला दिए. फिर चारो रस्सियो के सिरे पकड़ कर कार मे ड्राइवर सीट पर आ गया. यह देख कर चारो के चेहरो पर ख़ौफ़ उतर आया. चारो बबलू के रहमोकरम पर थे. बबलू- तुम चारो रस तो निकाल नही पाए. चलो आख़िरी मौका देता हू. चारो कार के साथ दौड़ोगे. जिसके टटटे बच गये सो बच गया. जिसके उखड़ गये सो उखड़ गये… ये कह कर बबलू ने BMW को भगा लिया. अगले 1 मिनिट तक वो इलाक़ा उन चारो की चीखो से गूँजता रहा. एक एक कर के चारो रस्सिया ढीली हो गयी. 2 किमी बाद बबलू कार से उतरा और देखा पीछे कोई नही था. चारो रस्सी ज़मीन पर थी. रस्सी के दूसरे सिरो पर बँधे टट्टो का भी कुछ पता नही था. बबलू ने स्टेआरिंग व्हील को सॉफ किया और कार को वही छोड़ कर पैदल ही चल दिया.

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