दीपा- क्या बात है. तुम्हारी गन तो फिर से लोड हो गयी. ऑटोमॅटिक है क्या ? आशु- मेडम जी. एक तो पहले ही आप इस बिकिनी मे कहर ढा रही हो , उपर से आपकी ये कातिल अदाए. उफ्फ. गन तो रिलोड होनी ही थी. दीपा अपनी तारीफ सुन कर फूली नही समा रही थी, जो उसके खिल उठे चेहरे से जाहिर था. दीपा- ओह. तो तुम्हारी गन मेरे कारण लोड हो गयी है. ये बस ऐसे ही लोड होती रहती है या कभी चलाई भी है. आशु- पहले कभी चलाई तो नही, पर मुझे पता है कि कैसे चलती है. आपको सीखना है क्या ? मैने सच को छुपाना ही ठीक समझा. दीपा- ह..हा..वही सीखने तो तुम्हारे पास आई हू. प्लीज़ सीखा दो ना. आशु- मेडम जी. ये इतना आसान नही है. दीपा- तो मैं कब मना कर रही हू. मुश्किल चीज़े सीखने मे ही तो असली मज़ा है. आशु- मेडम जी. आपको बहुत दर्द होगा. दीपा- तुम्हे अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी सहन कर लूँगी. आशु- आप समझ नही रही. इतना दर्द होता है कि जान ही निकल जाती है. दीपा- एक लड़की के लिए उसकी इज़्ज़त जान से बढ़ कर होती है. जब मैं वही तुम पर लूटा रही हू तो जान की किसे परवाह. आशु- तो तुम पक्का फ़ैसला करके आई हो. दीपा- हा..अब ज़बान नही अपनी गन चला कर दिखाओ मेरी जान. दीपा मेरी बगल मे आकर लेट गयी और मेरी पहल का इंतेजार करने लगी. मैं डरते हुए उसकी टाँगो के बीच पहुच गया. दीपा का शानदार हुस्न देख कर सारा डर मेरे दिमाग़ से गायब हो गया. मैं बस बिकिनी टॉप और शॉर्ट जीन्स मे से बाहर झाँकते दीपा के अनुपम सौंदर्या को निहारने लगा. दीपा बेसब्री से मेरा इंतेजर कर रही थी. दीपा- क्या हुआ…कुछ करो ना. मैं दीपा के उपर आ गया पर उसे तो छुआ नही. फिर मैने उसकी बिकिनी मे उभरे हुए एक निपल को होंठो मे दबा लिया. मेरी इस पहली हरकत से ही उसकी आँखे बंद होने लगी. धीरे-धीरे मेरे होठ और जीभ उसके दोनो बूब्स के हर उतार-चढ़ाव का रासा-स्वादन करने लगे. इसी बीच पता नही कब, बेचारी छोटी सी बिकिनी के दोनो कप साइड मे सरक गये और दीपा के गुलाबी निपल उजागर हो गये. मेरी जीभ दीपा के छोटे से निप्पलो से खेलने लगी. कभी उपर नीचे चाटती तो कभी बेरेहमी से दबा देती. निप्पलो पर हुए प्रहारो से दीपा जबरदस्त गरम हो गयी थी. उसकी टाँगे एक दूसरे को मसल रही थी और मूह से सिसकारिया निकल रही थी. दीपा- प्लीज़ इनको दबाओ ना. दीपा के सॉलिड बूब्स मे कुलमुलाहट हो रही थी, जो केवल बुरी तरह मसल्ने से ही मिट सकती थी. पर मैने उन्हे छुआ तक नही और उन्हे उसी हालत मे छोड़ दिया. फिर उसके जिस्म को चाटते हुए नीचे की और जाकर दीपा की नाभि (नेवेल) को चाटने लगा. मैं और नीचे उसके तालपेट (लोवर स्टमक) को चाटने लगा. अब आगे दीपा की शॉर्ट जीन्स थी. मैने उसका बटन खोल कर ज़िप नीचे कर दी. उसके बाद जीन्स दीपा के घुटनो पर पहुच गयी. दीपा की चूत एकदम गीली थी. चूत पानी से चमक रही थी. उसकी गुलाबी चूत के दर्शन कर के मैं एक बार फिर धन्य हो गया था. मेरा लंड बार-बार फन्फना कर दीपा की चूत को सलामी दे रहा था. अब मुझे कोई रोक नही सकता था. मैने उसकी जीन्स को निकाल कर फेंक दिया और उसकी टाँगो को पूरी तरह खोल दिया. उसकी चिड़िया एकदम लाल हो चुकी थी. मैने दीपा की चूत के छेद मे अपनी एक उंगली डालनी चाही पर वो एक इंच से ज़्यादा अंदर नही घुस पाई. मैं उसकी मखमली चूत की कोमलता पर ज़ोर-आज़माइश नही कर पा रहा था. पर मेरी इस हरकत ने दीपा की चूत की आग को बुरी तरह भड़का दिया. वो अपनी गंद उछाल कर मेरी उंगली को चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी. दीपा- इंतेजार किसका कर रहे हो ? अरे डरो नही एक ज़ोर का धक्का दो और अपनी गन लेकर मेरी प्रेम-गली मे घुस जाओ ना. मैं दीपा की बात पर मुस्कुरा उठा और अपनी उंगली को उसकी चूत मे थोड़ा अंदर कर दिया. दीपा- क्यो तड़पा रहे हो. प्लीज़ करो ना. दीपा उत्तेजना की अतिरेक्ता से बहाल हुए जा रही थी. पर मुझे पता था की ये सब इतना आसान नही होगा. जब दीपिका मेडम जैसी एक्सपीरियेन्स्ड औरत का बुरा हाल हो गया था तो दीपा की क्या बिसात है. उसकी चूत के छेद मे तो उंगली घुसने की जगह है नही, मेरा लंड कैसे घुसेगा. आशु- मेमसाहब, आपकी प्रेम-गली ये मेरी गन नही उंगली फँसी हुई है. आपके छेद मे मेरी गन के लिए जगह नही है. दीपा ने हैरानी से अपनी आँखे खोली और अपनी चूत की तरफ देखने लगी. दीपा- हा. तो तुम मुझसे मज़े ले रहे हो. गन-वन चलानी नही आती तो लोड क्यो करते हो. हाए कितनी शानदार गन है…पता नही तुन्हे कैसे मिल गयी. अब तुम रहने दो और यहा पर लेट जाओ और इस गन को इधर लाओ. मैं खुद ही चला लूँगी. यह सुन कर मुझे दीपिका मेडम वाला सीन याद आ गया. फिर मैने सोचा इस बेचारी को भी अपने मन की पूरी कर लेने दो भाई. आशु- अच्छा एक बात तो बता दो…ये आक्सिडेंट कैसे हो गया ? दीपा- वो तो बस नाटक था…तुम्हारी नीयत को टेस्ट करने के लिए. आशु- अच्छा जी. टेस्ट का क्या रिज़ल्ट निकला ? दीपा- वो मैं तुम्हे बता चुकी हू. तुम फर्स्ट क्लास फर्स्ट आए हो. आशु- ठीक है तो मेरा इनाम कहा है ? दीपा- इनाम तुम्हे अवॉर्ड सेरेमनी मे दिया जाएगा. आशु-अब ये सेरेमनी कब ऑर्गनाइज़ होगी. दीपा- वही तो ऑर्गनाइज़ कर रही हू मेरी जान. यह कह कर दीपा मेरे उपर सवार हो गयी. दीपा- तुम्हारी इस गन का नाम तो बता दो. तुम इसे क्या कहते हो ? आशु- मेरा नाम तो पूछा नही मेरी गन का नाम क्यो पूछ रही हो. दीपा- तुम्हारा इनाम इसी गन के द्वारा ही तो दिलवाया जाएगा ना, इसीलिए. आशु- इसको लंड कहते है जानेमन. आपके छेद का नाम पूछ सकता हू ? दीपा- मैने तो कोई नाम नही रखा पर मेरी फ्रेंड्स इसको चूत कहती है. छी ! कितना गंदा सा नाम है ना. आशु- जो है सो है. वैसे आपके इन कबूतरो को किस नाम से पुकारा जाता है, वो भी बता ही दो ? दीपा- हा इनका नाम तो तुम पूछोगे ही. सब मर्दो की नज़र चेहरे से पहले इन्ही का साइज़ तो चेक करती है. सब इन्ही पर मरते है. कोई इन्हे बूब्स कहता है कोई मुम्मे. और भी बहुत नाम है, इनके. आशु- ठीक है. चलो अब सो जाते है. बहुत रात हो गयी है. दीपा- ये तो धोखा है. मैने इनाम देने के लिए पूरी सेरेमनी ऑर्गनाइज़ कर दी है. अब तुम भाव खा रहे हो. . आशु- मेरी जान तुम्हे बहुत दर्द होगा. दीपा- मेरी सब फ्रेंड्स अपने बाय्फरेंड्स के साथ सेक्स करती है. उन्हे तो बड़ा मज़ा आता है. उनकी बाते सुन-सुन कर मेरे पागल हो गई हू. सब की चूत मे उनके बाय्फरेंड्स के लंड डेली घुसते है. उन्हे तो कभी दर्द नही होता फिर मेरी चूत मे क्या कमी है. आशु- तुम शर्त लगा लो. तुम्हारी चूत मे मेरा लंड नही घुसेगा. दीपा- ठीक है अगर तुम जीते तो जो तुम कहोगे वो दूँगी. हारे तो जो मैं कहूँगी वो देना पड़ेगा. आशु- मैं तो अब तुम्हारा हो गया हू. मेरा क्या है जो मैं दूँगा. दीपा- ज़यादा बाते नही. बोलो शर्त लगाते हो. आशु- चलो डन. इसके बाद दीपा बेड से उतर कर बाथरूम मे गयी और एक बॉटल ले आई. उसने उसकी कॅप खोली और तेल मेरे लंड पर उडेल दिया. थोड़ा उसने अपनी उंगली से अपनी चूत के अंदर भी लगा लिया. दीपा- ये शर्त तो मैं जीत कर रहूंगी. दीपा फिर मेरे उपर चढ़ गयी और अपनी चूत मेरे लंड पर टीका दी. फिर उसने अपने दाँत कस कर भीच लिए और अपने शरीर का भार मेरे लंड पर छोड़ दिया. आआआआआआआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययईईईईईईईईईईई-एक कानफ़ादू चीख आई. एक ही झटके मे मेरा लंड दीपा के अंदर 3 इंच तक घुस चुका था. आयिल की चिकनाई से लंड चूत के कुछ अंदर तक फिसल गया था. पर 3 इंच तक जाने के बाद चूत के अंदर किसी दीवार ने उसका रास्ता रोक लिया. दीपा की मस्त टाइट चूत मे घुस कर मेरा लंड निहाल हो गया था. उधर दीपा की आँखे अपने कटोरो से बाहर निकलती सी लग रही थी. उसकी साँस भी रुक सी गयी थी. वो बिना हीले 2 मिनिट तक ऐसे ही चढ़ि रही. मेरा लंड चारो और से पड़ रहे दबाव से झानझणा रहा था. थोड़ी देर बाद दीपा का दर्द कम हुआ तो उसकी जान मे जान आई. आशु- क्या हुआ ? दर्द हो रहा है. दीपा- तुम तो चुप ही रहो. देखो घुसा कि नही. ऐसे घुसाते है. अब ये ट्रैनिंग याआद रखना. आशु- तुम्हारी हिम्मत की तो दाद देनी पड़ेगी. तुम्हे दर्द होगा इसलिए मैं हिचकिचा रहा था. पर तुमने तो एक झटके मे ही… दीपा मेरे मूह पर हाथ रख कर बोली- ज़्यादा बाते नही…अब मैने इतना घुसा दिया है. बाकी काम तुम करो. आशु- क्यो ? दीपा- मैने अपना हाइमेन अपने पति के लिए सलामत रखा था. आशु- अब ये हाइमेन क्या है ? दीपा- ये हर लड़की की चूत मे होती है. उसके वर्जिन होने की निशानी. आशु- मैं समझा नही. दीपा- ऊफफो…तुम बस ये समझो कि ये लाल-किले का दरवाजा है, जो तुम्हे अपनी गन से तोड़ना है. बसस्स. ये कह कर दीपा बेड पर टाँगे फैला कर लेट गयी. दीपा- चलो अब शुरू भी हो जाओ.
थोड़ी देर बाद फोन की बेल बजी. काउंटर वाली लड़की- हेलो…..गुड मॉर्निंग मॅम…..जी….एक आदमी आया है…..टेलर के काम के लिए….जी श्याम प्लेसमेंट एजेन्सी से…जी ठीक है. लड़की- सुनो…तुम्हारा नाम क्या है. बबलू- जी बबलू. लड़की- मेडम तो आज आएँगी नही. तुम्हे अपायंट करने से पहले 2-3 दिन ट्राइ पर रखेंगे. उसके बाद ही बाकी बाते फाइनल होंगी. बबलू- जी. लड़की- उपर मास्टर जी से जाकर मिल लो. सीढ़िया उधर है. बाबबलू- उनसे क्या कहु कि किसने भेजा है ? लड़की- उनसे कहना निशा ने भेजा है. बबलू- आपका नाम निशा है. लड़की- क्यो कोई दिक्कत है. बबलू- न..नही. फिर बबलू चुप-चाप निशा के बताई सीढ़ियो से उपर फर्स्ट फ्लोर पर पहुच गया. उपर चढ़ते ही सामने एक रूम दिखाई दिया. कमरे मे 3 स्विंग मशीन रखी थी. उनमे से एक मशीन पर एक 50-55 साल का आदमी कम कर रहा था. वाहा 2 ट्राइ रूम भी बने हुए थे. बबलू- मस्टेरज़ी नमस्ते मस्टेरज़ी- हा नमस्ते. बोलो क्या काम है. बबलू- मैं टेलर के काम के लिए आया हू. मुझे निशा मेडम ने आपके पास भेजा है. मस्टेरज़ी- अच्छा. चलो कोई तो आया. मैं अकेला परेशान हो गया था. बबलू- तो आप अकेले यहा पर काम करते है. और कोई नही है ? मस्टेरज़ी- अरे बेटा आज कल के लड़के दर्जी का काम तो जानते नही है और आ जाते है कैंची चलाने. तुम्हे भी काम आता है या नये रंगरूट हो. पहले कभी काम किया है. बबलू- जी मैने पहले कही काम तो नही किया है. पर आपका सिर पर हाथ होगा तो जल्दी सीख जाउन्गा. मस्टेरज़ी- बेटा कोई हुनर किसी के सिखाने से नही आता. ये तो अपनी काबिलियत पर होता है. दिल लगा कर सीखेगा तो जल्दी उस्ताद बन जाएगा. बबलू- जी मैं पूरी लगन से सीखूंगा. मस्टेरज़ी- देखो असली टेलर वही जो एक बार मे ही एकदम सही फिटिंग के कपड़े सिले. बबलू- जी मस्टेरज़ी- सही फिटिंग के लिए सही नाप लेना बहुत ज़रूरी है. असली ग़लती इसी मे ही होती है. बबलू- जी मस्टेरज़ी- जाओ नीचे से किसी को बुला कर लाओ. बबलू- जी बबलू नीचे जाकर निशा से बोला- जी वो मस्टेरज़ी ने किसी को उपर भेजने के लिए कहा है. निशा- क्यो क्या काम है. बबलू- वो तो पता नही. निशा ने इंटरकम से मस्टेरज़ी के पास फोन मिलाया. निशा- मस्टेरज़ी… किस को बुलाया है. मस्टेरज़ी- अरे कुछ नही… इस नये लड़के को थोड़ी सी ट्रैनिंग देनी थी. निशा- लड़की के साथ ? मस्टेरज़ी- तो क्या मैं खुद का नाप लेना सिखाउ. लॅडीस टेलर है तो किसी लेडी का ही नाप लेगा ना. निशा- ओके इतना भड़कते क्यो हो. किसे भेजू दू. मस्टेरज़ी- तूमम्म्म….ऐसा करो रश्मि को भेज दो. वही ठीक रहेगी. निशा- वही क्यो. मैं आ जाती हू. मस्टेरज़ी- ना बाबा तू रहने दे. तू उसे ही भेज दे. निशा- जैसी आपकी मर्ज़ी. फोन रखकर… निशा- रश्मि उपर जा…मस्टेरज़ी ने बुलाया है. तुम भी उपर जाओ….बबलू. बबलू ने बाकी लड़कियो की तरफ देखा कि कौन जाएगी. रॅक वाली लड़कियो मे से एक बबलू के पास आई और बोली- चलो. बाकी लड़किया भी बबलू की तरफ ही देख रही थी. एक साथ इतनी लड़कियो की अटेन्षन पाकर वो सकपका गया और नज़रे फेर ली. रश्मि आगे चल रही थी और बबलू उसके पीछे था. रश्मि का जिस्म मांसल था. चेहरा ज़्यादा आकर्षक नही था पर रंग सॉफ था. उसकी देह मे बूब्स और कुल्हो पर काफ़ी माँस था. पर उसकी कमर पतली ही थी. चेहरा अटरॅक्टिव होता तो शायद कयामत ढाती. इसी ध्यान मे मगन कब बबलू कब मस्टेरज़ी के पास पहुच गया पता ही नही चला. रश्मि- जी मस्टेरज़ी. कहिए क्या काम है ? मस्टेरज़ी- अरे. निशा ज़रा इसको लॅडीस का सही से नाप लेना सीखना है. तू ज़रा इधर आकर खड़ी हो जा. रश्मि – जी. मस्टेरज़ी- अरे हीरो. तू भी इधर आ जा. बबलू- जी. अब बबलू और मस्टेरज़ी रश्मि के सामने खड़े थे. मस्टेरज़ी ने इंचीटेप उठा लिया. मस्टेरज़ी- पहले कभी किसी का नाप लिया है. बबलू- जी वो कोर्स मे तो नाप लिखा हुआ मिलता था. उसी के हिसाब से कटिंग करके सिल्ना होता था. मैने कभी किसी का नाप नही लिया. मस्टेरज़ी- मुझे पता था. कभी कोई डिप्लोमा-डिग्री से भी कोई हुनर आता है क्या. असल जिंदगी की सच्चाई तो अब पता चलेगी. बबलू- जी. मस्टेरज़ी- चलो आज ब्लाउस से शुरुआत करते है. देखो सबसे पहले लंबाई का नाप लेते है. उसके बाद छाती और कमर का. चलो तुम लेकर दिखाओ. यह सुन कर रश्मि अपना सूट निकालने लगी. बबलू- अरे, आप ये क्या कर रही हो. मस्टेरज़ी- तो तू नाप कैसे लेगा बेटा. बबलू- जी नाप लेने के लिए कपड़े निकालने की क्या ज़रूरत है. उपर से ही ले लेता. मस्टेरज़ी- साले सब कुछ उपर से कर लेता है क्या ? इन कपड़ो के उपर थोड़े ही पहनने है, जो तू इन कपड़ो का नाप लेगा. शरीर का नाप लेना है और सही नाप लेने के लिए अंडर-गारमेंट्स मे ही नाप लेना चाहिए. बबलू- जी समझ गया. अब तक रश्मि अपना सूट उतार चुकी थी. उसके उपरी शरीर पर केवल एक ब्रा ही थी. उसके बूब्स की हालत देख कर सॉफ पता चल रहा था कि ब्रा कुछ ज़्यादा ही छोटी थी. मस्टेरज़ी- बेटा ये क्या है. रश्मि- मस्टेरज़ी, क्या करू पता नही दोनो कैसे अपने-आप ही बड़े होते जा रहे है. मस्टेरज़ी- लगता रोज इनकी खूब सेवा होती है. रश्मि (शरमाते हुए)- क्या मस्टेरज़ी आप भी ना. मस्टेरज़ी- अब बड़े हो रहे है तो क्या हुआ. ब्रा तो मम्मो के साइज़ के हिसाब से ही पहनेगी. देख बेचारो की क्या हालत हो गयी है. कुछ तो इनकी कदर किया कर. रश्मि- मस्टेरज़ी, अभी तो ये दोनो निगोडे मेरी छोटी साइज़ की ब्रा मे जैसे तैसे काबू मे रहते है. अगर बड़ी ब्रा पहनी तो फिर इनका साइज़ जग-जाहिर हो जाएगा. मस्टेरज़ी- तो क्या हुआ पगली. इन्ही पर तो हर मर्द मरता है. जा उधर जाकर ड्रॉयर मे से अपने साइज़ की ब्रा पहन ले. रश्मि- पर मस्टेरज़ी मुझे तो अपनी ब्रा का साइज़ ही नही पता है. मस्टेरज़ी- ऑफ..हो. ये भी मैं ही बताउ. यहा आने वाली हर औरत को मैं ही उनसी ब्रा का सही साइज़ बताता हू. रश्मि- हा मस्टेरज़ी. पिछली बार भी तो आपने ही बताया था मुझे. मस्टेरज़ी- वही तो मैं सोच रहा था की 3 महीनो मे ये नाषपाती से खबूजे कैसे बन गये. रश्मि- मस्टेरज़ी प्लीज़…बार-बार मत छेड़ो ना. मस्टेरज़ी- चल ठीक है. उतार दे इसको. शायद ब्रा के साइज़ के चक्कर मे दोनो बबलू को भूल गये थे. रश्मि की ब्रा को फाड़ कर बाहर निकलने को आतुर मम्मो को देख कर बबलू उत्तेजित हो रहा था. लंड तन कर एक दम सख़्त हो चुका था. रश्मि ने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया. दोनो कबूतर आज़ाद होकर फुदकने लगे. वाकई मे रश्मि के मम्मो ने कहर ढा दिया था. एक पल को लगा की बबलू की साँसे रुक सी गयी हो. उसकी नज़रे रश्मि के निप्पलो पर गढ़ सी गयी थी. मस्टेरज़ी- तेरा साइज़ तो एकदम मस्त हो गया छोरी. ब्रा मे तो असली साइज़ का पता ही नही चल रहा था. ये इतने बड़े हो गये है फिर भी एक दम तने हुए है. क्या राज छुपा रखा है. रश्मि- मस्टेरज़ी मैं डेली ब्रेस्ट टोनर गेल लगाती हू. उसी का कमाल है. मस्टेरज़ी- ह्म्म्म…हा आज कल तो कई तरीके है. हमारे समय मे तो बस मालिश ही करते थे. रश्मि- आपने तो मस्टेरनिजी की खूब मालिश की होगी. खूब मोटे होंगे उनके मम्मे. मस्टेरज़ी- उसके मम्मो की बात मत कर. चल सीधी खड़ी हो जा. बबलू का मन कर रहा था कि काश मस्टेरज़ी की जगह उसके हाथ रश्मि के बूब्स का नाप ले रहे होते. पर वो मन मसोस कर खड़ा रह गया. मस्टेरज़ी ने इंक्फिटेप उठाया और रश्मि के बाए बूब की जड़ पर लपेट दिया और फिर दाए का नाप लिया और पॅड पर लिख दिया. फिर उन्होने कमर से लेकर मम्मो तक टेप को लपेटा और लिख लिया. मस्टेरज़ी- पूरे 36 के हो गये है तेरे कबूतर. फिर उन्होने कंधे से निपल तक का नाप लिया और बोले- तू वाहा से 36फ साइज़ की ब्रा लेले. रश्मि ड्रॉयर तक गयी और ब्रा देखने लगी. फिर एक लेकर वापस मस्टेरज़ी के पास आ गयी. रश्मि-ये वाली ठीक लगती है. मस्टेरज़ी- चल पहन ले पर कल तक वापस ला दियो. फिर मस्टेरज़ी ने बबलू की ओर देखा. बबलू जड़ हो चुका था. रश्मि के कबूतरो ने उसके होश उड़ा दिए थे. उसका लंड ने पॅंट मे ही तंबू गाड़ कर आंदोलन कर रखा था. मस्टेरज़ी- क्या हुआ बच्चू ? ये तो रोज होता है यहा. अगर तू ऐसे ही तंबू गाढ कर खड़ा हो जाएगा तो काम क्या तेरा बाप करेगा. साले रश्मि की तो कोई बात नही. पर किसी कस्टमर ने तेरा ये लंड इस हालत मे देख लिया तो तेरी खैर नही बेटा. बबलू- स…सॉरी मस्टेरज़ी. रश्मि- मस्टेरज़ी अबी नया नया है. मुंबई की हवा अभी लगी नही है. बेचारे का इतना सा ट्रेलर देख कर ये हाल हो गया, पूरी फिल्म देखेगा ओ पता नही क्या होगा. रश्मि की बात सुनकर बबलू का चेहरा शरम से लाल हो गया था. तभी फोन की घंटी बजी. मस्टेरज़ी- बोल निशा…रुक मैं ही नीचे आता हू. (फोन रखकर) रश्मि मैं 10 मिनिट मे आता हू. तू इसको नाप लेने की प्रॅक्टीस करा देना. और बबलू तू रश्मि के ब्रेस्ट, वेस्ट, लेंग्थ, और शोल्डर का नाप लेने की प्रॅक्टीस कर लेना. मैं आकर चेक करूँगा.
रश्मि ने ब्लॅक कलर की सही साइज़ की ब्रा पहन तो ली थी पर ये ब्रा नॉर्मल ब्रा नही थी, ये लो नेक लाइन ब्रा थी. (इस टाइप की ब्रा लॅडीस तब पहनती है जब उन्हे डीप नेक ब्लाउस पहनना हो और ज़्यादा क्लीवेज दिखानी हो). रश्मि के आधे से ज़्यादा बूब्स ब्रा के बाहर दिख रहे थे. पर रश्मि शायद ये नही जानती थी. इस ब्रा मे रश्मि का सौन्दर्य निखर कर सामने आ रहा था. उसका चेहरा सावला ज़रूर था पर मम्मे एक दम दूधिया रंग के थे. सलवार भी नाभि से 2 इंच नीचे बढ़ी थी. कुल मिलकर रश्मि की जाँघो के उपर का ज़्यादातर हिस्सा अपने दर्शन दे रहा था. इस खूबसूरत नज़ारे को देख कर कोई भी बहक जाता तो मेरे बेचारे कुंवारे दोस्त की क्या ग़लती. बबलू इन दर्शनो से निहाल हुआ जा रहा था. वो पूरी तरह सेक्स के सागर मे डूब चुका था. आँखो ही आँखो मे वो रश्मि के हर अंग का नाप ले रहा था. मस्टेरज़ी के जाने के बाद बबलू और रश्मि वाहा पर अकेले थे. रश्मि बिल्कुल बिंदास सीना ताने खड़ी थी और बबलू रश्मि की क्लीवेज की गहराई मे जाने क्या ढूँढ रहा था. रश्मि भी समझ गयी थी कि बबलू का ध्यान कहा है पर वो चुप ही रही. पर कुछ देर बाद उसके सबर का बाँध टूट गया और झल्ला कर बोली- ओ श्याने. रात तक मैं ऐसे ही खड़ी रहने वाली नही है. कुछ करना है तो कर नही तो मैं चली. बबलू इस से अचानक झटका सा खा गया. उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे. वो बेखायाली मे आगे बढ़ा और उसके हाथो ने ब्रा के उपर से रश्मि के दोनो बूब्स को पकड़ लिया. बबलू का दिमाग़ अपने वश मे नही था. वो तो पूरी तरह कामदेवजी का गुलाम हो चुका था. कभी कोई मरा कबूतर ना पकड़ सकने वाले बबलू ने आज जीते-जागते भारी भरकम कबूतर पकड़ रखे थे. पर रश्मि बबलू की इस हरकत से सहम सी गयी थी. उसे इस बात की सपने मे भी उम्मीद नही थी. उसके मूह से आवाज़ नही निकल पा रही थी पर फिर भी वो जैसे-तैसे बोली- ये…ये क…क..या….है. पर बबलू पर इसका उल्टा ही असर हुआ. उसने अपना दाया हाथ रश्मि की ब्रा मे डाल दिया. रश्मि बबलू को रोकना चाहती थी पर पता नही किस शक्ति ने उसके हाथ जाकड़ लिए थे. बबलू का हाथ रश्मि की ब्रा मे ऐसे घूम रहा था जैसे उनकी पैईमाश कर रहा हो. कभी वो एक बूब को पकड़ता तो कभी दूसरे को. रश्मि के बूब्स बड़े ही नही एकदम सख़्त भी थे. थोड़ी ही देर मे रश्मि की ब्रा के अंदर का एक-एक इंच जगह पर बबलू का हाथ कई-कई बार सैर कर चुका था. रश्मि बबलू के सामने असहाए खड़ी थी. उसके मूह से बोल नही निकल रहे थे. जैसे-तैसे उसने अपने हाथो से बबलू के हाथ पकड़ने चाहे. उसके हाथ बबलू के हाथो को हटाने की कोशिश ज़रूर कर रहे थे पर उनमे ज़रा भी इक्चाशक्ति नही थी. बबलू के लिए ये सब बिल्कुल नया सा था. पर सब कुछ अपने आप हो ही रहा था. उसने रश्मि का एक बूब ब्रा से बाहर निकाल लिया. रश्मि के निप्प्प्ल एकदम कड़े हो चुके थे. निपल को देखते ही बबलू की जीभ अपने आप बाहर निकली और निपल को छेड़ने लगी. अब तो रश्मि के बहकने की बारी थी. पता नही कैसे उसके हाथो ने बबलू के सिर को पकड़ लिया और उसके सिर को रश्मि के बूब पर दबाने लगे. आख़िरकार बबलू का मूह रश्मि के बूब मे धँस गया और बबलू ने निपल मूह मे ले लिया. एक बार निपल मूह मे आने के बाद तो बबलू जैसे भूखा बच्चा बन गया. वो निपल को बुरी तरह चूसने लगा जैसे उसमे से दूध निकाल कर ही मानेगा. पर एक कुँवारी लड़की के निपल चूसने से दूध नही रस निकलता है वो भी नीचे वाली गली से. रश्मि मदहोश होती जा रही थी. एक अंजान लड़का, जो आज पहली बार मिला है, मिलने के 1 घंटे के अंदर उसे नंगा देख चुका है और अब उसका बूब बाहर निकाल कर बुरी तरह चूस रहा है. और वो कुछ नही कर पा रही, बल्कि उसे इसमे मज़ा आ रहा था. उसके मूह से सिसकारिया फूट रही थी. ये सिसकारिया आग मे घी का कम कर रही थी. बबलू ने रश्मि का दूसरा बूब भी बाहर निकाल लिया और वैसे ही चूसने लगा. रश्मि के बूब्स बबलू की हथेलियो से काफ़ी बड़े थे पर फिर भी वो पूरी तरह मैदान मे डटा हुआ था. वो उसके बाए बूब को चूस रहा था और उसका बाया हाथ उसके दाए बूब को मसल रहा था. थोड़ी देर बाद बबलू के हाथ और मूह ने जगह बदल ली. पर कामदेवजी का काम जारी था. करीब 10 मिनिट तक अपने बूब्स की जोरदार सेवा करवा लेने के बाद रश्मि की चूत मे जैसे बवाल मच गया था. इधर बबलू का लंड भी बुरी तरह अकड़ चुका था. टट्टो मे भयंकर दर्द हो रहा था. ना चाहते हुए भी रश्मि अब गरम हो चुकी थी. ना चाहते हुए भी उसकी चूत से पानी रिस रहा था. ना चाहते भी उसकी बाई टांग दाई को मसल रही थी कि दोनो के जोड़ पर थोड़ी राहत मिल जाए, पर इससे तो आग भड़कती जा रही थी. कुल मिलाकर रश्मि अब बबलू की गुलाम बन चुकी थी. वो जो चाहता रश्मि करने को तैय्यार थी. जालिम नीचे की मंज़िल पर कब आएगा. आग तो निचली मंज़िल पर लगी थी और ये कमीना तो बस उपर ही लगा हुआ था. रश्मि ने बबलू का एक हाथ पकड़ कर अपनी सलवार के उपर ही चूत पर रगड़ दिया. इतना करना था कि रश्मि की टाँगो ने जवाब दे दिया और वो ज़मीन पर घुटनो के बल ढेर हो गयी. अब बबलू की पॅंट का उभार रश्मि के मूह के सामने था. रश्मि ने बबलू की पॅंट की ज़िप को खोल दिया और अंदर हाथ डाल दिया. रश्मि के हाथो का स्पर्श पाते ही बबलू के लंड को राहत मिलने लगी. रश्मि का हाथ बाहर आया तो एक 10 इंच का काला नाग निकल लाया जो बाहर आते ही फुफ्कारने लगा. रश्मि उसको देखते पागल सी हो गयी. वो खुद को रोक ना सकी और.. नीचे मस्टेरज़ी का की दोस्त मिलने आया हुआ था. मस्टेरज़ी- अरे निशा मैं ज़रा 10 मिनिट मे आता हू. निशा- जी. मस्टेरज़ी- मैं उस नये रंगरूट को ट्रैनिंग के लिए उपर छोड़ कर आया हू. उसका ध्यान रखना. रश्मि भी वही है. निशा- जी मैं देख लूँगी. ये कह कर मस्टेरज़ी अपने दोस्त के साथ बगल वाले रेस्टोरेंट मे चले गये थे. निशा ने भी अपना अकाउंट्स का काम निपटा लिया था. उसने कंप्यूटर स्क्रीन पर सीक्ट्व का फीड ऑन कर दिया. पूरे बुटीक मे हर कमरे मे सीक्ट्व कॅमरा लगे हुए थे. यहा तक की ट्राइ रूम मे भी. कुछ ही देर मे मस्टेरज़ी के कमरे का सीन निशा के सामने था. रश्मि एक सेक्सी ब्रा मे बबलू के सामने खड़ी थी. निशा के चेहरे पर कातिल मुस्कान तेर गयी. निशा की आगे क्या होता है यह देखने की उत्सुकता बढ़ गयी. और उसे निराश नही होना पड़ा. उसके बाद जो कुछ हुआ, निशा ने पूरे सीन का लाइव टेलएकास्ट देख लिया था. ऐसे सेक्सी सीन को देख कर निशा के शरीर मे भी उत्तेजना भरने लगी. आख़िर वो भी तो एक कुँवारी लड़की थी. बबलू के हाथ उसे अपने शरीर पर महसूस हो रहे थे. उधर रश्मि गिरी कि इधर मस्टेरज़ी ने बूटीक का दरवाजा खोला. निशा (मन ही मन)- आ गयी केबाब मे हड्डी. मस्टेरज़ी उपर पहुच गये तो सब कबाड़ा हो जाएगा. इनको तो यहा से भगाना पड़ेगा. निशा- मस्टेरज़ी. प्लीज़ इधर आना. मस्टेरज़ी- क्यो मेरी आरती उतारनी है. निशा बात तो मस्टेरज़ी से कर रही थी पर उसकी नज़रे बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन पर जा रही थी. अब रश्मि ने बबलू की चैन खोल ली थी. निशा- मस्टेरज़ी. एक काम कर दो ना प्लीज़. मस्टेरज़ी- बोल. निशा- मस्टेरज़ी कुछ समान मंगाना है. मस्टेरज़ी- मैं कोई तेरा नौकर हू. निशा- अब ये क्याबात हो गयी. इतने प्यार से कह रही हू ला दो ना. प्लीज़. मस्टेरज़ी- तू ऐसी बाते करके मेरा बॅंड बजवाती है. बोल क्या लाना है ? निशा- कुछ नही बस एक कॉंडम का पॅकेट ला दो ना प्लीज़. उधर रश्मि ने बबलू की पॅंट मे अपना हाथ डाल दिया था और निशा को जल्दबाज़ी मे और कुछ नही सूझा. मस्टेरज़ी- क्या ला दू. (मस्टेरज़ी भी भूचक्के रह गये थे, उन्हे अपने कानो पर विश्वास नही हुआ) निशा- मस्टेरज़ी. वो केमिस्ट की दुकान एक कामसुत्रा कॉंडम का पॅकेट ला दो ना प्लीज़. ये लो 100 रुपये. मस्टेरज़ी- तेरा दिमाग़ खराब हो गया है क्या ? मैं बुड्ढ़ा कॉंडम लेता अच्छा लगूंगा. और तेरी तो शादी भी नही हुई है. तुझे कॉंडम क्यो चाहिए ? निशा- आप ज़्यादा सवाल मत करो. ये बताओ लाओगे या नही. मस्टेरज़ी- अच्छा बाबा. लाता हू. पर जो लाना है लिख कर देदे. निशा- ये लो.