मैं बेड पर लेटा हुआ था. मेडम ने मेरे जाँघो के दोनो तरफ घुटने रख लिए और मुझे अपने बाकी कपड़े उतारने को कहा. मेडम की चूत मेरे लंड के ठीक उपर थी. मेरा लंड एवरेस्ट की तरह तना हुआ था. सूपड़ा भी बाहर था. लंड की लंबाई भी 10 इंच लग रही थी. मेडम ने अपने हाथ से लंड को सहलाया. पर जैसे मुझे कुछ महसूस ही नही हुआ. मेडम ने लंड का कसाव चेक किया और बोली- अरे ये तो अब तक सख़्त है. फिर मेडम ने अपनी गीली चूत का मूह मेरे सूपदे पर टीका दिया और लंड से चूत के दाने को रगड़ने लगी. इससे मेडम की चूत से थोडा पानी बाहर आ गया और वो बदहवास होने लगी. उन्होने लंड को हाथ मे पकड़ कर उस पर चूत को टीका दिया. पर मेरी नज़र तो मेडम के 36डी बूब्स पर टिकी थी. अब मूह के होंठो की तरह मेडम की चूत के होठ मेरे लंड को चूमने लगे. मेडम अपनी चूत का दबाव मेरे लंड पर बढ़ाने लगी. मेडम ने सहारे के लिए दोनो हाथ मेरे कंधो के पास बेड पर रख लिए. तभी मैने उनकी नाइटी का बटन खोल दिया और उनके बूब्स ब्रा से झाँकने लगे. मेडम की क्लीवेज की गहराई देखते ही मूह मे पानी आ गया. मैने ठान लिया कि आज इनको पाकर ही दम लूँगा. मैने हिम्मत करके अपने दोनो हाथ मेडम के बूब्स पर रख दिए, पर मेडम का ध्यान तो केवल लंड घुस्वाने पर था. मैं बूब्स को दबाने लगा. पर यहा मामला दूसरा था. मेडम ने पूरा ज़ोर लगा लिया पर लंड था कि घुसा ही नही. मेडम की चूत की चिकनाई से लंड फिसल गया और मेडम की चिड़िया तो कुचल गयी. मेडम सिसक उठी और लंड को फिर सही जगह लगाने के लिए नीचे झुक गयी और उनके मोटे मोटे बूब्स मेरे छाती पर दब गये. मैने मौका अच्छा देखा और मेरे हाथ मेडम की कमर पर पहुच गये. अगले ही पल मेडम की ब्रा की स्ट्रॅप्स खुल गये और जैसे ही मेडम उपर उठी, ब्रा कंधो से फिसलकर नीचे कलाईयो तक पहुच गयी. अब मेडम के मोटे-मोटे बूब्स मेरे मूह के उपर नाच रहे थे. मैने दोनो को पकड़ लिया और दबाने लगा. दोनो खरबूजे सख़्त थे उन पर मेरे हाथो का दबाव बढ़ता गया. थोड़ी ही देर मे मेरे हाथ मेडम के बूब्स को बुरी तरह मसल रहे थे. फिर मैने अपना सिर थोडा उपर किया और बाए बूब का निपल मूह मे दबा लिया. मेडम- आराम से…कही कट ना जाए. मेडम की स्वीकृति पाकर मेरी बाँछे खिल गयी. अब मैने मेडम के दोनो निपल बारी बारी चूसने लगा. मेडम के बूब्स के आगे दीपा के बूब्स कही नही थे. रात दिन जिस चीज़ के ख़यालो मे खोया रहता था वो आज मेरी थी. मुझे जो चाहिए था वो मिल गया था पर मेडम पूरी कोशिश के बाद भी सफल नही पा रही थी. बार बार लंड फिसलकर उनकी चिड़िया को कुचल देता था. उनकी चिड़िया ज़्यादा देर तक ये प्रहार सहन ना कर सकी और चूत ने रस की बौछार कर ही दी. मेरा लंड उनके रस से पूरी तरह भीग गया. 3 मिनिट तक जुगत लगाने के बाद मेडम की हालत पस्त हो चुकी थी. बिल्ली के बिल मे शेर इतनी आसानी से कैसे घुस सकता था. इसके लिए 50 केजी की मेडम बहुत कमजोर थी. अंत मे मेडम मेरे उपर ही धराशायी हो गयी और उनके बूब मेरे मूह पर दब गये… मेडम मेरे आगोश मे पूरी तरह नंगी पड़ी थी. मेरे हाथ उनके संगमरमरी जिस्म को धीरे-धीरे सहला रहे थे. मेरे हाथ बार-बार उनके मोटे-मोटे बूब्स पर पहुच जाते और निपल को छेड़ देते. इससे मेडम चिहुक उठती. मेडम बेहद थॅकी सी लग रही थी पर उनकी आँखो के गुलाबी डोरे उनके मन की हालत बयान कर रहे थे. मैं बेड से उठा और मेडम को खीच कर उनकी चूत अपनी ओर कर ली. मेडम- न..न..नही ये मेरी चूत मे नही घुस पाएगा. मेरी चूत फट जाएगी. आशु- मेडम प्लीज़. बस एक बार. मेडम- थोड़ा आराम कर ले, मैं कही भागी थोड़े ही जा रही हू. आशु- मेडम मेरा लंड अब काबू मे नही है. प्लीज़ आप टाँगे खोल दीजिए ना. मेडम केवल उपर से ही मना कर रही थी. मन मे तो उनके लड्डू फुट रहे थे. मेडम ने अपनी टाँगे खोल कर हवा मे उठा दी. अब उनकी चूत किसी गुलदस्ते की तरह लग रही थी. गोरी चूत के अंदर लाल चिड़िया सॉफ दिखाई दे रही थी. चूत एकदम गीली थी. मेरे लंड का सूपड़ा मेडम के चूत के उपर लहरा रहा था. मेडम ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर चूत के मुहाने पर रख दिया और बोली- मैं कितना भी चिल्लाउ, पर पूरी बेरहमी से चोदना. मैने थोड़ा ज़ोर लगाया तो लंड का सूपड़ा 2 इंच अंदर चला गया. मेडम ने अपने दाँत भीच लिए. फिर मैने और ज़ोर से धक्का लगाया तो लंड थोड़ा और अंदर घुस गया. मेडम दर्द के मारे चीखने लगी- आआआययययययययईईईई…रुक जाओ… अभी और अंदर मत करना… बहुत दर्द हो रहा… मम्मी…आज तो मर जाउन्गि…रुक जा…फॅट जाएगी…आअहह इधर मेरा हाल भी बुरा था. जब मेडम के मूह मे लंड गया था तो सब आराम से हो रहा था. पर यहा तो जैसे पत्थर मे कील ठोकने जैसा था. लंड को जैसे ज़ोर से बाँध दिया हो. अजीब सा नशा छा रहा था. इसी नशे की खुमारी मे अचानक एक ज़ोर का धक्का लग गया. मेडम- आआआआग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…चिर गयी……फॅट गयी…….मार डाला……..काट डाला……..बाहर निकालो…..मुझसे सहन नही हो रहा….छोड़ दो मुझे…….बाहर निकालो….आआआआआआआअहह. मेडम की हालत देख कर मैं डर सा गया. 2 मिनिट तक बिना हीले रुका रहा. मैने थोड़ा झुक कर मेडम के निपल चूसने लगा. इस से मेडम उत्तेजित होने लगी. मौका अच्छा देख कर मैने फाइनल धक्का मार दिया. अब मेरा लंड 8 इंच अंदर पिछली दीवार से जा टकराया. मेडम की चूत मे तो जैसे किसी ने गरम पिघला लोहा भर दिया हो. उनकी साँसे अटक रही थी और आँखो से आँसू बह रह थे. मेडम बदहवास हो कर इधर-उधर हिल कर लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी. दर्द उनकी सहन शक्ति के बाहर था. मैं शांत रहा. 2 मिनिट बाद धीरे से लंड को बाहर निकालने लगा. पर मेडम ने फिर नीचे खिच लिया. 3-4 बार ऐसे ही किया को मेडम की चीखे सिसकारियो मे बदलने लगी. मुझे भी इस नये खेल मज़ा आने लगा. मेडम बेड पर टाँगे फलाए लेटी थी और मैं अपनी टाँगो पर बेड के साथ खड़ा था. मेडम ने अपने हाथो से चादर पकड़ रखी थी. लंड के अंदर बाहर होने की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. मैने दोनो हाथो से मेडम के विशाल मुम्मे लगाम की तरह पकड़ रखे थे. पथ..पथ की आवाज़े निकल रही थी. लंड और चूत की जोरदार जंग छिड़ी थी. मेडम- इसस्स..हहा…थोड़ा तेज करो ना…आज अपनी मेडम की चूत को फाड़ दो ना…प्लीज़ थोड़ा तेज…और तेज…जो कहोगे वो करूँगी….बहुत मज़ा आ रहा है…मेरे रज्जा..मैं तेरी हू…मेरी चूत तेरी है…तेज…चोद…फाड़..काट दे इसको…इश्स हहाअ. जैसे-जैसे रफ़्तार बढ़ती जा रही थी मेडम बदहवास होती जा रही थी. मेडम की सिसकारियो का वॉल्यूम बढ़ता जा रहा था. मेडम के बेडरूम मे जोरदार चुदाई हो रही थी. दो जवानिया टकरा रही थी. लंड और चूत की जोरदार भिड़ंत हो रही थी. चिल्ड एसी था पर दोनो पसीने से भीगे हुए थे. मेडम की सिसकारिया पूरी बिल्डिंग मे गूँज रही थी. हर 2-3 मिनिट बाद मेडम कुछ ज़्यादा तेज चिल्लाने लगती और उनकी चूत से रस बहने लगता. फिर 20-25 सेकेंड के लिए वो निढाल हो जाती. पर मुझे इस सब से कोई फरक नही पड़ता था. मैं अपने काम मे लगा हुआ था. थोड़ी ही देर मे मेडम फिर मैदान मे आ जाती पर 2-3 मिनिट बाद ही झाड़ जाती. मेडम के 6 बार झड़ने के बाद अब मेरी बारी थी. अचानक मुझे भी बहुत मज़ा सा आने लगा. मैने पूरा ज़ोर लगा कर मेडम की चूत मे अपना लंड एकदम भीतर तक घुसा दिया. 10 सेकेंड तक मेरा लंड अपना रस उगलता रहा और मेडम की चूत मे भरता रहा. मेडम भी मेरे साथ झाड़ गयी. अब जाकर मुझे संतुष्टि मिली थी. मेरा लंड अपने आप छोटा होकर मेडम की चूत से बाहर आने लगा. मेडम का चेहरा खिला हुआ था. मैं मेडम की बगल मे धराशायी हो गया और मेडम मेरे बालो मे उंगलिया फिराने लगी. पूरी रात मैं और मेडम एक दूसरे से लिपट कर सोए रहे. सुबह जब आँख खुली तो मेडम कही जाने के लिए तय्यार हो रही थी. उनका समान भी पॅक रखा था. मेडम- मैं कुछ दिन के लिए बाहर जा रही हू. पीछे से सावधानी से रहना. और ये लो 50000 रुपये, तुम्हारी अड्वान्स तन्खा. तुम चाहो तो इस रूम मे भी रह सकते हो. आशु-जी. मैने मेडम का समान उठाया और ले जाकर कार मे रख दिया. मेडम के जाने के बाद मुझे दीपा का ख्याल आया. मैं सीधा उसके रूम मे पहुच गया.
दीपा अपने कमरे मे नही थी. बाथरूम भी खाली था. पूरा कमरा बिखरा पड़ा था. मैने सारा कमरे को साफ करके सेट कर दिया और बाहर आ गया. धीरे-धीरे शाम हो गयी. मैं खाना खाकर सोने ही जा रहा था कि दीपा के कमरे से कुछ आवाज़ आई. मैने जाकर देखा तो 2 लड़के दीपा को उठा कर उसके कमरे मे ले जा रहे थे, शायद उसके दोस्त थे. मुझे बस उनकी पीठ ही दिख रही थी. दीपा ने स्पगेटी टॉप और मिडी पहन रखी थी. मैं जैसे ही दीपा के कमरे के दरवाजे पर पहुचा, उन लड़को की हरकते देख कर ठिठक गया. उन दोनो के हाथ दीपा के छोटे से कपड़ो मे घुसे हुए थे. दीपा नशे की हालत मे भी उनके हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी पर कोई फाय्दा नही हुआ. फिर एक लड़का उसके के बूब्स को मसल्ने लगा. उनमे से एक लड़का बोला- यार पूरे रास्ते तू इसको नोचता आया है. अभी तक तेरा मन नही भरा क्या. जो करने आया है वो कर ना. दूसरा- हा यार, 2 हफ़्तो से जाल बिछा रखा था. आज मछली जाल मे फँसी है. पहला- जब से इसको क्लब मे देखा है उसी दिन ठान लिया था की इसकी चूत मे पहला लंड तो अपन ही डालेगा. दूसरा- तभी तूने इसे ड्रग्स के जाल मे फँसाया था ताकि इसकी चूत पर अपना ठप्पा लगा सके. पहला- चल बाते बहुत हो गयी. अब इसको नंगा कर. दीपा (लड़खड़ाती आवाज़ मे)- न…नही मु…झे छोड़ दो. मैं वैसी लड़की नही हू. पहला- साली क्लब मे अपने जिस्म की नुमाइश क्यो करने जाती थी. अब हमारा दिल तुझ पर आ गया तो हमारा क्या दोष. आज तो तेरी सुहागरात मनेगि, 2-2 दूलहो के साथ. फिर उन दोनो के हाथ तेज़ी से चलने लगे. दीपा ने उन्हे रोकने की हल्की सी कोशिश भी की. पर वो कहा रुकने वाले थे. 1 मिनिट बाद ही दीपा अपने बेड पर जन्मजात पड़ी थी. दीपा बेचारी नशे मे भी अपनी आबरू बचाने की कोशिश मे लगी थी. उसका एक हाथ निपल्स को छुपा रहा था और दूसरा कुँवारी चूत को. कमले की सारी ट्यूब-बल्ब चालू थे. दीपा गोरा-चितता छरहरा जिस्म एक दम संगेमरमर की तरह दमक रहा था. बेचारी कोशिश तो बहुत कर रही थी पर उसके पतले हाथ ज़्यादा कुछ नही छुपा पा रहे थे. ऐसा मादक हुस्न देख कर मेरा लंड भी भड़क गया था तो फिर उन लड़को की क्या कहु. एक लड़का दीपा के नंगे जिस्म को चाटने लगा और दूसरा उसके बूब्स को नोचने लगा. दीपा अपनी इस असहाय स्थिति को देख कर रोने लगी. अब दोनो लड़के पूरी तरह सुरूर मे आ चुके थे. उन्होने अपनी जीन्स की जीप खोल कर अपने लंड बाहर निकाल लिए. ये देख कर दीपा ने अपने दोनो हाथ अपनी चूत पर कस लिए. एक लड़के ने दीपा मे मूह पर अपना लंड टेक दिया और ज़बरदस्ती घुसाने की कोशिश करने लगा. दीपा ने कस कर अपने दाँत भींच रखे थे, पर लंड की बदबू से उसे उबकाई आने लगी और लंड को अपना रास्ता मिल गया. उधर दूसरा नीचे चूत पर ज़ोर आज़माइश कर रहा था. दूसरा- साली तेरी चूत तो फाड़ कर ही रहूँगा. तेरा ये रेप तुझे जिंदगी भर याद रहेगा. जो ड्रग्स तूने हमसे ली थी उसके बदले मे तेरी कुँवारी चूत ही तो ले रहा हू. चुप चाप हाथ हटा ले. पर दीपा आँखो मे आँसू और मूह मे लंड लिए अपना सिर हिला कर अपनी इज़्ज़त बक्शने की मिन्नते कर रही थी. उसकी आँखो मे याचना का भाव साफ दिख रहा था. पर वो दोनो तो जैसे वासना के पुतले बने हुए थे. रेप शब्द सुनते ही मेरा खून खौल गया. देल्ही मे रेप के अनेको किस्से अख़बारो मे पढ़ रखे थे. मैं ये जानता था कि रेप के बाद लड़की का जीवन किस तरह तबाह हो जाता है. अभी तक मैं उन दोनो को दीपा मेडम का दोस्त समझ रहा था. मुझे लग रहा था कि अमीर बाप की ये बिगड़ी हुई औलाद ही इन दोनो को खुद यहा बुला कर लाई है. पर माजरा समझ मे आते ही मेरी पिंदलिया फड़काने लगी. दीपा की इज़्ज़त अब मेरे हाथ मे थी. मैं चुपके से कमरे मे बेड के पास पहुच गया. अगले ही पल मेरी बाए पैर की राउंड किक दीपा की चूत पर चढ़े लड़के के मूह पर पड़ी. वो उड़ता हुआ जाकर ड्रेसिंग टेबल पर ज़ोर की आवाज़ के साथ ढेर हो गया. इस आवाज़ से दीपा के मूह पर चढ़ा हुआ दूसरा लड़का चोंक गया. वो जैसे ही पीछे देखने के लिए घुमा, मेरी बाए पैर की मंकी किक उसके थोबादे पर पड़ी. उसके मूह से खून की बौछार शुरू हो गयी. फिर मैने उसे उठा कर ज़मीन पर गिरा लिया और उसकी छाती पर चढ़ कर एक पंच उसकी नाक पर जड़ दिया. उसके के लिए इतना ही बहुत था और वो बेहोश हो गया. मैं तुरंत उठा और पहले वाले के पास पहुचा. वो बेचारा और भी बुरी हालत मे था पर होश मे था. ड्रेसिंग टेबल पूरी तरह टूट चुकी थी और उसके काँच उसके शरीर मे घुस गये थे. वो बुरी तरह काँप रहा था. इतना दर्द होने पर भी उसकी चू तक नही निकल रही थी. आशु- जान प्यारी है तो अपने दोस्त को उठा और यहा से दफ़ा हो जा. वो झटके से उठा और अकेला ही बाहर भाग गया. मैने उसे बहुत पुकारा पर वो गायब हो चुका था. मैने एक नज़र दीपा को देखा, वो बेसूध सी बड़ी थी. उसकी सुध लेने से पहले इस बेहोश पड़े लड़के को ठिकाने लगाने के लिए उसे घसीट कर ग्राउंड फ्लोर पर ले गया. इतने मे वॉचमन दौड़ता हुआ आया और बोला- अरे क्या हुआ. थोड़ी देर पहले ही तो ये दोनो दीपा बेटी के साथ आए थे. अभी एक लड़का पागलो की तरह गाड़ी से भागा तो मैं डर गया और भागता हुआ यहा आ गया. क्या हुआ ? आशु- कुछ नही. वो अपना दोस्त यही छोड़ गया है. आप इसे गेट के बाहर ले जाकर सड़क पर डाल दो. नरेश- ये मर गया क्या? आशु- नही बेहोश है. अगर होश मे रहता तो मैं इसे मार ही डालता. अब जल्दी करो. नरेश- ठीक है. नरेश ने उसे संभाल लिया और मैं वापस भगा. रात के 11 बज चुके थे. कमरे मे बेड पर दीपा वैसे ही नंगी पड़ी थी. मैने उसके कपड़े उठाकर उसे पहना दिए. पर वो छोटे से कपड़े दीपा की मदमस्त जवानी को छुपा पाने मे असमर्थ थे. दीपा नंगी से ज़्यादा इन टाइट छोटे कपड़ो मे गजब की सेक्सी लग रही थी. मैं कल की तरह बहक ना जाउ इसलिए उसके जिस्म पर एक चादर डाल दी. फिर ड्रेसस्सिंग टेबल के काँच समेटने लगा. साफ सफाई करके दीपा के उतारे गये कपड़ो को बाथरूम मे रखने गया तो वाहा पर एक इंजेक्षन और एक बॉटल बाथटब के स्लॅब पर पड़ी देखी. मैने दोनो चीज़ उठा ली और साथ वाले कमरे मे सोने चल दिया. सुबह के लगभग 11 बजे मेरी नींद खुली. शायद कल के काम की थकान के कारण. मैं जल्दी फ्रेश होकर दीपा के रूम मे पहुचा. वाहा बेड पर कोई नही था. बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दीपा टवल मे लिपटी हुई बाहर निकली. उसे ऐसी हालत मे देख मैं बाहर जाने लगा. दीपा- रूको. आशु- जी. दीपा- कौन हो तुम ? दीपा की आवाज़ एकदम सुरीली थी और खनकदार भी थी. आशु- जी मैं यहा का केर..ट… नया मॅनेजर हू. दीपा- ओह…फिर तो ठीक है आशु- आप कुछ लेना पसंद करेंगी ? कोई जवाब ना पाकर मैं वापस जाने के लिए मूड गया. दीपा- अरे रूको, मेरी बात पूरी नही हुई है. मैं कुछ कहना चाहती हू. आशु- जी, कहिए. दीपा- कल रात की हेल्प के लिए थॅंक्स बोलना था. दीपा चहकति हुई बोली. पर उसके तेवर देख कर मैं गुस्से से भर गया. दीपा को अब भी अपनी ग़लती का पछतावा नही था. मैं बिना दीपा की ओर देखे हुए ही बोला- आप थॅंक्स तो ऐसे बोल रही है जैसे आपके लिए ये रोज की बात है, क्यो ? दीपा ऐसे तीखे जवाब के लिए तयार नही थी. पर वो कुछ ना बोली. आशु- जब आपने ही खुद को उन भेड़ियो के सामने परोस दिया तो इसमे उनका क्या दोष. इस बार तो मैने बचा लिया पर अगर वो ज़्यादा होते तो क्या होता… मैं दीपा को झाड़ता जा रहा था और दीपा छोटे बच्चे की तरह चुप चाप डाँट खा रही थी. 2 मिनिट तक डाँट खाकर वो धीरे से बोली- आइ..एम..सॉरी. ये सुन कर मैं दीपा की ओर मुड़ा. इसी बीच जाने कब दीपा के जिस्म पर बँधा हुआ टवल खिसक गया और दीपा एकदम निर्वस्त्रा हो चुकी थी. अब वो मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी और टवल उसकी टाँगो मे पड़ा था. डाँट खाने मे व्यस्त दीपा को शायद इसका पता नही चल पाया था, पर मैं इसे दीपा की जानबूझ कर की हुई हरकत समझ बैठा. मेरा पारा और चढ़ गया. मैं कड़क आवाज़ मे बोला- डॉन’ट से सॉरी इफ़ यू आर नोट सॉरी. ये कह कर मैं कमरे से बाहर निकल गया. मेरे इस व्यवहार से भौचक्की दीपा कमरे के गेट की ओर एकटक देखती रही. उसे समझ नही आ रहा था की सॉरी बोलने के बाद मेरा गुस्सा क्यो बढ़ गया था. फिर हार कर जैसे ही आगे कदम बदाया तो उसकी टाँगो तक पहुच चुके टवल से वो लड़खड़ा गयी. अब उसे अपने नंगेपन का अहसास हुआ और मेरे गुस्से का कारण भी समझ आ गया.
किचन मे ठंडा पानी पीकर मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हुआ. दीपा को डाँट तो दिया था पर मेरी समझ मे नही आ रहा था कि अब क्या करू. तब तो दिल दिमाग़ पर हावी हो गया था. पर अब मैं वास्तविकता मे वापस आ गया था. मेरी नौकरी जाना लगभग तय थी. मैने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी. मुझे क्या ज़रूरत थी दीपा से उल्टा-सीधा बोलने की…. मैं इसी उधेड़बुन मे था की दीपा की आवाज़ आई- मुझे कॉलेज जाना है, मेरा ब्रेकफास्ट ले आओ. मैने फ्रिड्ज मे से ऑरेंज जूस एक ग्लास मे भर कर किचन से बाहर चल दिया. दीपा डाइनिंग टेबल पर बैठी मुझे कातिल नज़रो से देख रही थी. मैं नज़रे नीची किए टेबल के पास पहुचा और ग्लास रख कर बोला- आप नाश्ते मे क्या लेंगी ? दीपा (नज़रे घुमा कर)- फ्रिड्ज मे बर्गर और क्रेअमरोल्ल रखे होंगे. वही ले आओ. आशु- जी बर्गर तो ख़तम हो गये, स्प्रिंग्रोल्ल और क्रेअमरोल्ल है, ले आउ ? दीपा- कैसे ख़तम हो गये….चलो वही ले आओ. दीपा की नज़र हटी तो मैने उसे एक पल को देखा. 2 दिन मे पहली बार दीपा इतनी सुंदर लग रही थी. वाइट सलवार-सूट और रेड दुपट्टा कयामत ढा रहे थे. वो इतनी शोख लग रही थी कि जो भी देखे तो बस देखता ही रह जाए. उसके बेदाग हुस्न ने एक पल को मुझे जड़ कर दिया. पर अगले ही पल सिर झटक कर मैं किचन मे चला गया. ओवन मे स्प्रिंग रोल रखे और उसे ऑन कर दिया. मैं सोच रहा था की इतनी सुंदर लड़की को ड्रग्स की लत कैसे लग गयी. ये ड्रग्स इसके जीवन को बर्बाद करके ही छोड़ेगी. ओवन की रिंग बजी तो मेरा ध्यान टूटा और मैने प्लेट मे स्प्रिंग्रोल्ल काट कर क्रेअमरोल्ल भी रख लिए. बाहर दीपा फिर वैसी ही नज़रो से मुझे देख रही थी. मैने नज़रे बचा कर ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया. दीपा- आज तो तुम्हारी लॉटरी लग गयी….क्यो ? ये सुन कर मैं सकपका गया.. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- मेरा टवल खिसक गया तो तुम्हारे तो भाग खुल गये..क्यो? दीपा ब्रेकफास्ट करते हुए ही ताने मार रही थी. आशु- आपका टवल खुल गया तो इसमे मेरी क्या ग़लती है. आपको कस कर बांधना चाहिए था. दीपा- टवल खुल गया तो तुम्हे मुझे बताना तो चाहिए था. मुझे इतनी देर तक ऐसे ही देखते रहे. आशु- जी मेरा मूह तो दूसरी तरफ था. जब मैं लास्ट मे घुमा तो आप पूरी नं…. ऐसे ही खड़ी थी. दीपा- तुम्हारा मूह दूसरी तरफ था पर मैं सब जानती हू कि नज़रे कहा थी. जब तुमने देख लिया कि मेरा टवल गिर गया है तो उसी वक्त क्यो नही बताया. आशु- ज…जी मैं क्या बताता, आपको टवल खिसकने का एहसास नही हुआ ? मैने तो देखा भी नही. दीपा के चेहरे पर मुस्कान साफ दिख रही थी पर आवाज़ वैसी ही तीखी थी. दीपा- बात मत घूमाओ. सच-सच बताओ कि तुम क्या देख रहे थे. आशु- जी मैने कुछ नही देखा. मैं सच बोल रहा हू. मैने जैसे ही आपको न्यूड देखा तो मैं शरमा गया था. इसलिए मैं तुरंत वाहा से चला गया. दीपा- तुम और शरम ? हा. कल रात को क्या कर रहे थे ? दीपा की बात की टोन मे अजीब सी कशिश थी. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- तुम इतने नासमझ तो नही दिखते. कल रात को भी तो तुमने मुझे न्यूड देखा था. आशु- ज…जी उसमे मेरी क्या ग़लती है. मैने तो आपको उन लड़को से बचाया था. दीपा- हा. पर उसके बाद क्या किया था तुमने ? आशु- ज…जी कमरे की सफाई. दीपा- हा. बहुत स्मार्ट हो, क्यो. दीपा मेरे ही अंदाज मे मुझे ताने मार रही थी और मैं चुपचाप सुन रहा था. दीपा- मुझे नंगा बेड पर पड़ा देख कर कुछ किया था ? आशु- जी आपके उपर चादर डाल दी थी. दीपा- ओह..हो तुमने मुझे छुआ क्यो था ? आशु- जी आपको कपड़े पहनाते वक्त छू गया होगा. दीपा- केवल चादर डाल देते. कपड़ो की क्या ज़रूरत थी. आशु- आप एकदम न्यूड पड़ी थी…कोई आ जाता तो. दीपा- मेरे शरीर को छूने के लिए तुमने मुझे कपड़े पहनाने का नाटक किया. मेरा टॉप पहनाते वक्त तुम्हारी नज़रे कहा थी और तुम्हारे हाथ क्या कर रहे थे, मैं सब जानती हू. आशु- ज..जी वो टॉप पहनाते समय हाथ लग गया होगा. दीपा- लग गया होगा क्या मतलब ? आशु- मैने एक हाथ से आपका टॉप पकड़ा था और दूसरे से …. दीपा- और दूसरे से मेरे बूब्स को छेड़ रहा था…क्यो ? आशु- जी आपका टॉप इतना छोटा था कि उसमे वो घुस ही नही रहे थे. इसलिए मुझे उन्हे दबा कर घुसाना पड़ा. दीपा- वाह. किसी लड़की की बूब्स को दबाने का क्या लेटेस्ट बहाना बनाया है. आशु- जी..सॉरी…आप तब क्या होश मे थी ? दीपा के चेहरे पर कातिल मुस्कान तेर गयी. पर वो इतने से ही नही मानी. दीपा- होश मे थी या नही, तुम ये देखो कि तुमने क्या किया. आशु- जी…सॉरी..आगे से नही होगा. दीपा- ठीक है, आगे देखते है कि क्या होगा और क्या नही. मैं कॉलेज जा रही हू. ये शब्द सुन कर मेरी जान मे जान आई. फिर दीपा उठकर बाहर जाने लगी और मैं उसके कुल्हो की हरकत देखता रहा. मैने कान पकड़े की आगे से दीपा से बच कर रहना है. दीपा के जाने के बाद मैं पूरे घर मे फिर अकेला था. मैने पूरे घर का मुआयना किया. घर मे एक से एक एलेक्ट्रॉनिक आइटम पड़ी थी. स्कल्प्चर्स और पेंटिंग्स भी हर दीवार पर थी. बाथरूम तो कमरो से ज़्यादा बड़े थे. हर एक मे जेक्यूज़ी था. इतने शानदार बंगले मे मालकिन के बगल के सूयीट मे रहना, 50000 की तन्खा और सबसे बढ़कर मेडम का शानदार जिस्म. मुझे बिन माँगे इतना मिल गया था कि अपनी किस्मत रश्क हो रहा था. मेडम का ख़याल आते ही लंड मे जोश भरने लगा. ये मेडम ही थी जिन्होने मेरी जिंदगी मे इतने रंग भर दिए थे. उन्होने ही मुझे लड़के से आदमी बनाया था. मेरा पहला वीर्यापात उनकी ही कृपा से हुआ था. अचानक ही उस पहले वीर्यापात के पल को याद करके मेरे शरीर मे एक मीठी सी चीस मार गयी. ये सब सोचते हुए मैं दीपा के कमरे मे पहुच चुका था. वाहा दीपा की बड़ी सी तस्वीर देख कर उसके हुस्न मे खो गया. ऐसा बेदाग सौन्दर्य मैने अपने जीवन नही देखा था. उसकी आवाज़ की खनक मेरे कानो मे गूँज रही थी. सफेद सलवार सूट मे उसके चित्र को मेरे मन ने सज़ा लिया था. पर मैं उसके त्रिया-चरित्र को समझ नही पा रहा था. अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मेरी शुक्रगुज़ार होने की बजाए उसने मुझे ही कटघरे मे खड़ा कर दिया था. दीपा की इज़्ज़त को बचाते वक़्त मेरे मन मे वासना का रत्ती भर भी ख़याल नही था. उसे नंगी देख कर भी मेरा मन नही डोला था. पता नही मुझे क्या हुआ था…. इन्ही ख़यालो मे खोया हुआ मैं अपने नये कमरे मे जाकर सो गया. पता नही इस घर मे आकर मुझे इतनी नींद क्यो आ रही थी. या मैं ही इतने ऐश-ओ-आराम पाकर आलसी हो गया था. जब भी खाली होता हू तो सोने का मन करता. दीपा के जाने के बाद आँख लगी तो सीधे शाम के 6 बजे खुली. इतना सोने के बाद भी आलस आ रहा था. दीपा का ख़याल आया तो मैं उठ कर दीपा के कमरे मे गया वो खाली था. फिर मैने इंटरकम से नरेश को बात की. आशु- अरे यार वो दीपा मेडम अभी तक नही आई है. नरेश- तुझे क्यो चिंता हो रही है. दीपा अभी नही आएगी. वो रात को 10 बजे के बाद ही आती है. आशु- अच्छा ठीक है. ये कौन सा कॉलेज है जो सुबह से रात तक चलता है. फिर मुझे ख़याल आया कि वो गयी होगी अपने नशे की प्यास के लिए. सुबह मैने उसका माल तो गायब कर दिया था. मैने कुछ रुपये उठाए और किचन आदि का सामान लेने बाजार चल दिया. वापस आने मे 9 बज गये थे और बादल भी गरज रहे थे. मैं तेज कदम बढ़ने लगा. मैं मेनगेट से करीब 50 मीटर की दूरी पर था कि अचनांक तेज बरसात पड़नी शुरू हो गयी. तभी एक गाड़ी सीधे गेट के साथ वाले पेड़ से जा टकराई. जोरदार आवाज़ थी पर सड़क सुनसान थी. मैं भाग कर वाहा पहुचा. नरेश पहले ही गेट खोल कर बाहर आ चुका था. अंदर एक लड़की ड्राइविंग सीट पर बैठी थी और स्टियरिंग वील पर बेहोश पड़ी थी. एरबॅग्स खुल गये थे नही तो बचना मुश्किल था. मैने उसकी हालत देखने को ज़रा सा पलटा, वो दीपा थी. मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. मैने उसे हिलाने डुलाने की कोशिश की पर वो होश मे नही आई. गनीमत थी की कही से खून नही निकला था. मैने तुरंत उसे अपनी दोनो बाँहो मे उठाया और बिल्डिंग की और भागा. दीपा एकदम फूल की तरह हल्की थी. उसका वेट 45 केजी से ज़्यादा नही था. तेज बरसात हो रही थी. मेनगेट से बिल्डिंग लगभग 150 मीटर दूर थी. बरसात की बूंदे दीपा के चेहरे पर पड़ रही थी. मैने उसका चेहरा ढकने के लिए उसका दुपट्टा उपर कर दिया. पर शायद मुझसे ग़लती हो गयी थी. अब बरसात से उसका सूट भीगने लगा. बिल्डिंग तक पहुचते-पहुचते हम दोनो पूरी तरह भीग चुके थे. मैं सीधे उसे उसके कमरे मे ले गया. बेहोशी मे भी उसका चाँद सा चेहरा दमक रहा था. मैने पानी के छींटे उसके चेहरे पर मारे पर कोई फायेदा नही हुआ. दीपा के शरीर मे कोई हुलचल नही थी. मैने उसकी नब्ज़ चेक की, वो चल रही थी. मैने डॉक्टर को बुलाने के लिए फोन उठाया पर वो डेड पड़ा था. बाहर इक्लोति कार का भी आक्सिडेंट हो चुका था. बारिश मे कोई कन्वेयन्स मिलने की आशा नही थी. मेरी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू. अब मुझे भी ठंड लग रही थी, इसलिए मैने अपनी गीली टी शर्ट और जीन्स निकाल दी. अब मैं अंडरवेर और संडो मे ही था. मैने एक नज़र दीपा को देखा. वो बेचारी भी पूरी तरह भीगी हुई थी. उसके कपड़े बदलना ज़रूरी थे नही तो सरदी होने का ख़तरा था. मैने उसके कपड़ो को हाथ लगाया ही था कि किसी ताक़त ने मुझे रोक दिया. मैं बड़े धरम-संकट मे फँस गया था. दीपा ने मुझे कपड़े पहनाने के लिए इतना झाड़ दिया था कि अब उसके कपड़े उतारने की हिम्मत ही नही हो रही थी. दूसरी ओर दीपा को इस हालत मे भी नही छोड़ सकता था. थोड़ी देर था अंतर्द्वंद चलता रहा पर अंत मे दिमाग़ पर दिल की जीत हुई.
किचन मे ठंडा पानी पीकर मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हुआ. दीपा को डाँट तो दिया था पर मेरी समझ मे नही आ रहा था कि अब क्या करू. तब तो दिल दिमाग़ पर हावी हो गया था. पर अब मैं वास्तविकता मे वापस आ गया था. मेरी नौकरी जाना लगभग तय थी. मैने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी. मुझे क्या ज़रूरत थी दीपा से उल्टा-सीधा बोलने की…. मैं इसी उधेड़बुन मे था की दीपा की आवाज़ आई- मुझे कॉलेज जाना है, मेरा ब्रेकफास्ट ले आओ. मैने फ्रिड्ज मे से ऑरेंज जूस एक ग्लास मे भर कर किचन से बाहर चल दिया. दीपा डाइनिंग टेबल पर बैठी मुझे कातिल नज़रो से देख रही थी. मैं नज़रे नीची किए टेबल के पास पहुचा और ग्लास रख कर बोला- आप नाश्ते मे क्या लेंगी ? दीपा (नज़रे घुमा कर)- फ्रिड्ज मे बर्गर और क्रेअमरोल्ल रखे होंगे. वही ले आओ. आशु- जी बर्गर तो ख़तम हो गये, स्प्रिंग्रोल्ल और क्रेअमरोल्ल है, ले आउ ? दीपा- कैसे ख़तम हो गये….चलो वही ले आओ. दीपा की नज़र हटी तो मैने उसे एक पल को देखा. 2 दिन मे पहली बार दीपा इतनी सुंदर लग रही थी. वाइट सलवार-सूट और रेड दुपट्टा कयामत ढा रहे थे. वो इतनी शोख लग रही थी कि जो भी देखे तो बस देखता ही रह जाए. उसके बेदाग हुस्न ने एक पल को मुझे जड़ कर दिया. पर अगले ही पल सिर झटक कर मैं किचन मे चला गया. ओवन मे स्प्रिंग रोल रखे और उसे ऑन कर दिया. मैं सोच रहा था की इतनी सुंदर लड़की को ड्रग्स की लत कैसे लग गयी. ये ड्रग्स इसके जीवन को बर्बाद करके ही छोड़ेगी. ओवन की रिंग बजी तो मेरा ध्यान टूटा और मैने प्लेट मे स्प्रिंग्रोल्ल काट कर क्रेअमरोल्ल भी रख लिए. बाहर दीपा फिर वैसी ही नज़रो से मुझे देख रही थी. मैने नज़रे बचा कर ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया. दीपा- आज तो तुम्हारी लॉटरी लग गयी….क्यो ? ये सुन कर मैं सकपका गया.. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- मेरा टवल खिसक गया तो तुम्हारे तो भाग खुल गये..क्यो? दीपा ब्रेकफास्ट करते हुए ही ताने मार रही थी. आशु- आपका टवल खुल गया तो इसमे मेरी क्या ग़लती है. आपको कस कर बांधना चाहिए था. दीपा- टवल खुल गया तो तुम्हे मुझे बताना तो चाहिए था. मुझे इतनी देर तक ऐसे ही देखते रहे. आशु- जी मेरा मूह तो दूसरी तरफ था. जब मैं लास्ट मे घुमा तो आप पूरी नं…. ऐसे ही खड़ी थी. दीपा- तुम्हारा मूह दूसरी तरफ था पर मैं सब जानती हू कि नज़रे कहा थी. जब तुमने देख लिया कि मेरा टवल गिर गया है तो उसी वक्त क्यो नही बताया. आशु- ज…जी मैं क्या बताता, आपको टवल खिसकने का एहसास नही हुआ ? मैने तो देखा भी नही. दीपा के चेहरे पर मुस्कान साफ दिख रही थी पर आवाज़ वैसी ही तीखी थी. दीपा- बात मत घूमाओ. सच-सच बताओ कि तुम क्या देख रहे थे. आशु- जी मैने कुछ नही देखा. मैं सच बोल रहा हू. मैने जैसे ही आपको न्यूड देखा तो मैं शरमा गया था. इसलिए मैं तुरंत वाहा से चला गया. दीपा- तुम और शरम ? हा. कल रात को क्या कर रहे थे ? दीपा की बात की टोन मे अजीब सी कशिश थी. आशु- जी मैं समझा नही. दीपा- तुम इतने नासमझ तो नही दिखते. कल रात को भी तो तुमने मुझे न्यूड देखा था. आशु- ज…जी उसमे मेरी क्या ग़लती है. मैने तो आपको उन लड़को से बचाया था. दीपा- हा. पर उसके बाद क्या किया था तुमने ? आशु- ज…जी कमरे की सफाई. दीपा- हा. बहुत स्मार्ट हो, क्यो. दीपा मेरे ही अंदाज मे मुझे ताने मार रही थी और मैं चुपचाप सुन रहा था. दीपा- मुझे नंगा बेड पर पड़ा देख कर कुछ किया था ? आशु- जी आपके उपर चादर डाल दी थी. दीपा- ओह..हो तुमने मुझे छुआ क्यो था ? आशु- जी आपको कपड़े पहनाते वक्त छू गया होगा. दीपा- केवल चादर डाल देते. कपड़ो की क्या ज़रूरत थी. आशु- आप एकदम न्यूड पड़ी थी…कोई आ जाता तो. दीपा- मेरे शरीर को छूने के लिए तुमने मुझे कपड़े पहनाने का नाटक किया. मेरा टॉप पहनाते वक्त तुम्हारी नज़रे कहा थी और तुम्हारे हाथ क्या कर रहे थे, मैं सब जानती हू. आशु- ज..जी वो टॉप पहनाते समय हाथ लग गया होगा. दीपा- लग गया होगा क्या मतलब ? आशु- मैने एक हाथ से आपका टॉप पकड़ा था और दूसरे से …. दीपा- और दूसरे से मेरे बूब्स को छेड़ रहा था…क्यो ? आशु- जी आपका टॉप इतना छोटा था कि उसमे वो घुस ही नही रहे थे. इसलिए मुझे उन्हे दबा कर घुसाना पड़ा. दीपा- वाह. किसी लड़की की बूब्स को दबाने का क्या लेटेस्ट बहाना बनाया है. आशु- जी..सॉरी…आप तब क्या होश मे थी ? दीपा के चेहरे पर कातिल मुस्कान तेर गयी. पर वो इतने से ही नही मानी. दीपा- होश मे थी या नही, तुम ये देखो कि तुमने क्या किया. आशु- जी…सॉरी..आगे से नही होगा. दीपा- ठीक है, आगे देखते है कि क्या होगा और क्या नही. मैं कॉलेज जा रही हू. ये शब्द सुन कर मेरी जान मे जान आई. फिर दीपा उठकर बाहर जाने लगी और मैं उसके कुल्हो की हरकत देखता रहा. मैने कान पकड़े की आगे से दीपा से बच कर रहना है. दीपा के जाने के बाद मैं पूरे घर मे फिर अकेला था. मैने पूरे घर का मुआयना किया. घर मे एक से एक एलेक्ट्रॉनिक आइटम पड़ी थी. स्कल्प्चर्स और पेंटिंग्स भी हर दीवार पर थी. बाथरूम तो कमरो से ज़्यादा बड़े थे. हर एक मे जेक्यूज़ी था. इतने शानदार बंगले मे मालकिन के बगल के सूयीट मे रहना, 50000 की तन्खा और सबसे बढ़कर मेडम का शानदार जिस्म. मुझे बिन माँगे इतना मिल गया था कि अपनी किस्मत रश्क हो रहा था. मेडम का ख़याल आते ही लंड मे जोश भरने लगा. ये मेडम ही थी जिन्होने मेरी जिंदगी मे इतने रंग भर दिए थे. उन्होने ही मुझे लड़के से आदमी बनाया था. मेरा पहला वीर्यापात उनकी ही कृपा से हुआ था. अचानक ही उस पहले वीर्यापात के पल को याद करके मेरे शरीर मे एक मीठी सी चीस मार गयी. ये सब सोचते हुए मैं दीपा के कमरे मे पहुच चुका था. वाहा दीपा की बड़ी सी तस्वीर देख कर उसके हुस्न मे खो गया. ऐसा बेदाग सौन्दर्य मैने अपने जीवन नही देखा था. उसकी आवाज़ की खनक मेरे कानो मे गूँज रही थी. सफेद सलवार सूट मे उसके चित्र को मेरे मन ने सज़ा लिया था. पर मैं उसके त्रिया-चरित्र को समझ नही पा रहा था. अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मेरी शुक्रगुज़ार होने की बजाए उसने मुझे ही कटघरे मे खड़ा कर दिया था. दीपा की इज़्ज़त को बचाते वक़्त मेरे मन मे वासना का रत्ती भर भी ख़याल नही था. उसे नंगी देख कर भी मेरा मन नही डोला था. पता नही मुझे क्या हुआ था…. इन्ही ख़यालो मे खोया हुआ मैं अपने नये कमरे मे जाकर सो गया. पता नही इस घर मे आकर मुझे इतनी नींद क्यो आ रही थी. या मैं ही इतने ऐश-ओ-आराम पाकर आलसी हो गया था. जब भी खाली होता हू तो सोने का मन करता. दीपा के जाने के बाद आँख लगी तो सीधे शाम के 6 बजे खुली. इतना सोने के बाद भी आलस आ रहा था. दीपा का ख़याल आया तो मैं उठ कर दीपा के कमरे मे गया वो खाली था. फिर मैने इंटरकम से नरेश को बात की. आशु- अरे यार वो दीपा मेडम अभी तक नही आई है. नरेश- तुझे क्यो चिंता हो रही है. दीपा अभी नही आएगी. वो रात को 10 बजे के बाद ही आती है. आशु- अच्छा ठीक है. ये कौन सा कॉलेज है जो सुबह से रात तक चलता है. फिर मुझे ख़याल आया कि वो गयी होगी अपने नशे की प्यास के लिए. सुबह मैने उसका माल तो गायब कर दिया था. मैने कुछ रुपये उठाए और किचन आदि का सामान लेने बाजार चल दिया. वापस आने मे 9 बज गये थे और बादल भी गरज रहे थे. मैं तेज कदम बढ़ने लगा. मैं मेनगेट से करीब 50 मीटर की दूरी पर था कि अचनांक तेज बरसात पड़नी शुरू हो गयी. तभी एक गाड़ी सीधे गेट के साथ वाले पेड़ से जा टकराई. जोरदार आवाज़ थी पर सड़क सुनसान थी. मैं भाग कर वाहा पहुचा. नरेश पहले ही गेट खोल कर बाहर आ चुका था. अंदर एक लड़की ड्राइविंग सीट पर बैठी थी और स्टियरिंग वील पर बेहोश पड़ी थी. एरबॅग्स खुल गये थे नही तो बचना मुश्किल था. मैने उसकी हालत देखने को ज़रा सा पलटा, वो दीपा थी. मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. मैने उसे हिलाने डुलाने की कोशिश की पर वो होश मे नही आई. गनीमत थी की कही से खून नही निकला था. मैने तुरंत उसे अपनी दोनो बाँहो मे उठाया और बिल्डिंग की और भागा. दीपा एकदम फूल की तरह हल्की थी. उसका वेट 45 केजी से ज़्यादा नही था. तेज बरसात हो रही थी. मेनगेट से बिल्डिंग लगभग 150 मीटर दूर थी. बरसात की बूंदे दीपा के चेहरे पर पड़ रही थी. मैने उसका चेहरा ढकने के लिए उसका दुपट्टा उपर कर दिया. पर शायद मुझसे ग़लती हो गयी थी. अब बरसात से उसका सूट भीगने लगा. बिल्डिंग तक पहुचते-पहुचते हम दोनो पूरी तरह भीग चुके थे. मैं सीधे उसे उसके कमरे मे ले गया. बेहोशी मे भी उसका चाँद सा चेहरा दमक रहा था. मैने पानी के छींटे उसके चेहरे पर मारे पर कोई फायेदा नही हुआ. दीपा के शरीर मे कोई हुलचल नही थी. मैने उसकी नब्ज़ चेक की, वो चल रही थी. मैने डॉक्टर को बुलाने के लिए फोन उठाया पर वो डेड पड़ा था. बाहर इक्लोति कार का भी आक्सिडेंट हो चुका था. बारिश मे कोई कन्वेयन्स मिलने की आशा नही थी. मेरी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू. अब मुझे भी ठंड लग रही थी, इसलिए मैने अपनी गीली टी शर्ट और जीन्स निकाल दी. अब मैं अंडरवेर और संडो मे ही था. मैने एक नज़र दीपा को देखा. वो बेचारी भी पूरी तरह भीगी हुई थी. उसके कपड़े बदलना ज़रूरी थे नही तो सरदी होने का ख़तरा था. मैने उसके कपड़ो को हाथ लगाया ही था कि किसी ताक़त ने मुझे रोक दिया. मैं बड़े धरम-संकट मे फँस गया था. दीपा ने मुझे कपड़े पहनाने के लिए इतना झाड़ दिया था कि अब उसके कपड़े उतारने की हिम्मत ही नही हो रही थी. दूसरी ओर दीपा को इस हालत मे भी नही छोड़ सकता था. थोड़ी देर था अंतर्द्वंद चलता रहा पर अंत मे दिमाग़ पर दिल की जीत हुई.
दीपा- क्या बात है. तुम्हारी गन तो फिर से लोड हो गयी. ऑटोमॅटिक है क्या ? आशु- मेडम जी. एक तो पहले ही आप इस बिकिनी मे कहर ढा रही हो , उपर से आपकी ये कातिल अदाए. उफ्फ. गन तो रिलोड होनी ही थी. दीपा अपनी तारीफ सुन कर फूली नही समा रही थी, जो उसके खिल उठे चेहरे से जाहिर था. दीपा- ओह. तो तुम्हारी गन मेरे कारण लोड हो गयी है. ये बस ऐसे ही लोड होती रहती है या कभी चलाई भी है. आशु- पहले कभी चलाई तो नही, पर मुझे पता है कि कैसे चलती है. आपको सीखना है क्या ? मैने सच को छुपाना ही ठीक समझा. दीपा- ह..हा..वही सीखने तो तुम्हारे पास आई हू. प्लीज़ सीखा दो ना. आशु- मेडम जी. ये इतना आसान नही है. दीपा- तो मैं कब मना कर रही हू. मुश्किल चीज़े सीखने मे ही तो असली मज़ा है. आशु- मेडम जी. आपको बहुत दर्द होगा. दीपा- तुम्हे अपना बनाने के लिए मैं कुछ भी सहन कर लूँगी. आशु- आप समझ नही रही. इतना दर्द होता है कि जान ही निकल जाती है. दीपा- एक लड़की के लिए उसकी इज़्ज़त जान से बढ़ कर होती है. जब मैं वही तुम पर लूटा रही हू तो जान की किसे परवाह. आशु- तो तुम पक्का फ़ैसला करके आई हो. दीपा- हा..अब ज़बान नही अपनी गन चला कर दिखाओ मेरी जान. दीपा मेरी बगल मे आकर लेट गयी और मेरी पहल का इंतेजार करने लगी. मैं डरते हुए उसकी टाँगो के बीच पहुच गया. दीपा का शानदार हुस्न देख कर सारा डर मेरे दिमाग़ से गायब हो गया. मैं बस बिकिनी टॉप और शॉर्ट जीन्स मे से बाहर झाँकते दीपा के अनुपम सौंदर्या को निहारने लगा. दीपा बेसब्री से मेरा इंतेजर कर रही थी. दीपा- क्या हुआ…कुछ करो ना. मैं दीपा के उपर आ गया पर उसे तो छुआ नही. फिर मैने उसकी बिकिनी मे उभरे हुए एक निपल को होंठो मे दबा लिया. मेरी इस पहली हरकत से ही उसकी आँखे बंद होने लगी. धीरे-धीरे मेरे होठ और जीभ उसके दोनो बूब्स के हर उतार-चढ़ाव का रासा-स्वादन करने लगे. इसी बीच पता नही कब, बेचारी छोटी सी बिकिनी के दोनो कप साइड मे सरक गये और दीपा के गुलाबी निपल उजागर हो गये. मेरी जीभ दीपा के छोटे से निप्पलो से खेलने लगी. कभी उपर नीचे चाटती तो कभी बेरेहमी से दबा देती. निप्पलो पर हुए प्रहारो से दीपा जबरदस्त गरम हो गयी थी. उसकी टाँगे एक दूसरे को मसल रही थी और मूह से सिसकारिया निकल रही थी. दीपा- प्लीज़ इनको दबाओ ना. दीपा के सॉलिड बूब्स मे कुलमुलाहट हो रही थी, जो केवल बुरी तरह मसल्ने से ही मिट सकती थी. पर मैने उन्हे छुआ तक नही और उन्हे उसी हालत मे छोड़ दिया. फिर उसके जिस्म को चाटते हुए नीचे की और जाकर दीपा की नाभि (नेवेल) को चाटने लगा. मैं और नीचे उसके तालपेट (लोवर स्टमक) को चाटने लगा. अब आगे दीपा की शॉर्ट जीन्स थी. मैने उसका बटन खोल कर ज़िप नीचे कर दी. उसके बाद जीन्स दीपा के घुटनो पर पहुच गयी. दीपा की चूत एकदम गीली थी. चूत पानी से चमक रही थी. उसकी गुलाबी चूत के दर्शन कर के मैं एक बार फिर धन्य हो गया था. मेरा लंड बार-बार फन्फना कर दीपा की चूत को सलामी दे रहा था. अब मुझे कोई रोक नही सकता था. मैने उसकी जीन्स को निकाल कर फेंक दिया और उसकी टाँगो को पूरी तरह खोल दिया. उसकी चिड़िया एकदम लाल हो चुकी थी. मैने दीपा की चूत के छेद मे अपनी एक उंगली डालनी चाही पर वो एक इंच से ज़्यादा अंदर नही घुस पाई. मैं उसकी मखमली चूत की कोमलता पर ज़ोर-आज़माइश नही कर पा रहा था. पर मेरी इस हरकत ने दीपा की चूत की आग को बुरी तरह भड़का दिया. वो अपनी गंद उछाल कर मेरी उंगली को चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी. दीपा- इंतेजार किसका कर रहे हो ? अरे डरो नही एक ज़ोर का धक्का दो और अपनी गन लेकर मेरी प्रेम-गली मे घुस जाओ ना. मैं दीपा की बात पर मुस्कुरा उठा और अपनी उंगली को उसकी चूत मे थोड़ा अंदर कर दिया. दीपा- क्यो तड़पा रहे हो. प्लीज़ करो ना. दीपा उत्तेजना की अतिरेक्ता से बहाल हुए जा रही थी. पर मुझे पता था की ये सब इतना आसान नही होगा. जब दीपिका मेडम जैसी एक्सपीरियेन्स्ड औरत का बुरा हाल हो गया था तो दीपा की क्या बिसात है. उसकी चूत के छेद मे तो उंगली घुसने की जगह है नही, मेरा लंड कैसे घुसेगा. आशु- मेमसाहब, आपकी प्रेम-गली ये मेरी गन नही उंगली फँसी हुई है. आपके छेद मे मेरी गन के लिए जगह नही है. दीपा ने हैरानी से अपनी आँखे खोली और अपनी चूत की तरफ देखने लगी. दीपा- हा. तो तुम मुझसे मज़े ले रहे हो. गन-वन चलानी नही आती तो लोड क्यो करते हो. हाए कितनी शानदार गन है…पता नही तुन्हे कैसे मिल गयी. अब तुम रहने दो और यहा पर लेट जाओ और इस गन को इधर लाओ. मैं खुद ही चला लूँगी. यह सुन कर मुझे दीपिका मेडम वाला सीन याद आ गया. फिर मैने सोचा इस बेचारी को भी अपने मन की पूरी कर लेने दो भाई. आशु- अच्छा एक बात तो बता दो…ये आक्सिडेंट कैसे हो गया ? दीपा- वो तो बस नाटक था…तुम्हारी नीयत को टेस्ट करने के लिए. आशु- अच्छा जी. टेस्ट का क्या रिज़ल्ट निकला ? दीपा- वो मैं तुम्हे बता चुकी हू. तुम फर्स्ट क्लास फर्स्ट आए हो. आशु- ठीक है तो मेरा इनाम कहा है ? दीपा- इनाम तुम्हे अवॉर्ड सेरेमनी मे दिया जाएगा. आशु-अब ये सेरेमनी कब ऑर्गनाइज़ होगी. दीपा- वही तो ऑर्गनाइज़ कर रही हू मेरी जान. यह कह कर दीपा मेरे उपर सवार हो गयी. दीपा- तुम्हारी इस गन का नाम तो बता दो. तुम इसे क्या कहते हो ? आशु- मेरा नाम तो पूछा नही मेरी गन का नाम क्यो पूछ रही हो. दीपा- तुम्हारा इनाम इसी गन के द्वारा ही तो दिलवाया जाएगा ना, इसीलिए. आशु- इसको लंड कहते है जानेमन. आपके छेद का नाम पूछ सकता हू ? दीपा- मैने तो कोई नाम नही रखा पर मेरी फ्रेंड्स इसको चूत कहती है. छी ! कितना गंदा सा नाम है ना. आशु- जो है सो है. वैसे आपके इन कबूतरो को किस नाम से पुकारा जाता है, वो भी बता ही दो ? दीपा- हा इनका नाम तो तुम पूछोगे ही. सब मर्दो की नज़र चेहरे से पहले इन्ही का साइज़ तो चेक करती है. सब इन्ही पर मरते है. कोई इन्हे बूब्स कहता है कोई मुम्मे. और भी बहुत नाम है, इनके. आशु- ठीक है. चलो अब सो जाते है. बहुत रात हो गयी है. दीपा- ये तो धोखा है. मैने इनाम देने के लिए पूरी सेरेमनी ऑर्गनाइज़ कर दी है. अब तुम भाव खा रहे हो. . आशु- मेरी जान तुम्हे बहुत दर्द होगा. दीपा- मेरी सब फ्रेंड्स अपने बाय्फरेंड्स के साथ सेक्स करती है. उन्हे तो बड़ा मज़ा आता है. उनकी बाते सुन-सुन कर मेरे पागल हो गई हू. सब की चूत मे उनके बाय्फरेंड्स के लंड डेली घुसते है. उन्हे तो कभी दर्द नही होता फिर मेरी चूत मे क्या कमी है. आशु- तुम शर्त लगा लो. तुम्हारी चूत मे मेरा लंड नही घुसेगा. दीपा- ठीक है अगर तुम जीते तो जो तुम कहोगे वो दूँगी. हारे तो जो मैं कहूँगी वो देना पड़ेगा. आशु- मैं तो अब तुम्हारा हो गया हू. मेरा क्या है जो मैं दूँगा. दीपा- ज़यादा बाते नही. बोलो शर्त लगाते हो. आशु- चलो डन. इसके बाद दीपा बेड से उतर कर बाथरूम मे गयी और एक बॉटल ले आई. उसने उसकी कॅप खोली और तेल मेरे लंड पर उडेल दिया. थोड़ा उसने अपनी उंगली से अपनी चूत के अंदर भी लगा लिया. दीपा- ये शर्त तो मैं जीत कर रहूंगी. दीपा फिर मेरे उपर चढ़ गयी और अपनी चूत मेरे लंड पर टीका दी. फिर उसने अपने दाँत कस कर भीच लिए और अपने शरीर का भार मेरे लंड पर छोड़ दिया. आआआआआआआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययईईईईईईईईईईई-एक कानफ़ादू चीख आई. एक ही झटके मे मेरा लंड दीपा के अंदर 3 इंच तक घुस चुका था. आयिल की चिकनाई से लंड चूत के कुछ अंदर तक फिसल गया था. पर 3 इंच तक जाने के बाद चूत के अंदर किसी दीवार ने उसका रास्ता रोक लिया. दीपा की मस्त टाइट चूत मे घुस कर मेरा लंड निहाल हो गया था. उधर दीपा की आँखे अपने कटोरो से बाहर निकलती सी लग रही थी. उसकी साँस भी रुक सी गयी थी. वो बिना हीले 2 मिनिट तक ऐसे ही चढ़ि रही. मेरा लंड चारो और से पड़ रहे दबाव से झानझणा रहा था. थोड़ी देर बाद दीपा का दर्द कम हुआ तो उसकी जान मे जान आई. आशु- क्या हुआ ? दर्द हो रहा है. दीपा- तुम तो चुप ही रहो. देखो घुसा कि नही. ऐसे घुसाते है. अब ये ट्रैनिंग याआद रखना. आशु- तुम्हारी हिम्मत की तो दाद देनी पड़ेगी. तुम्हे दर्द होगा इसलिए मैं हिचकिचा रहा था. पर तुमने तो एक झटके मे ही… दीपा मेरे मूह पर हाथ रख कर बोली- ज़्यादा बाते नही…अब मैने इतना घुसा दिया है. बाकी काम तुम करो. आशु- क्यो ? दीपा- मैने अपना हाइमेन अपने पति के लिए सलामत रखा था. आशु- अब ये हाइमेन क्या है ? दीपा- ये हर लड़की की चूत मे होती है. उसके वर्जिन होने की निशानी. आशु- मैं समझा नही. दीपा- ऊफफो…तुम बस ये समझो कि ये लाल-किले का दरवाजा है, जो तुम्हे अपनी गन से तोड़ना है. बसस्स. ये कह कर दीपा बेड पर टाँगे फैला कर लेट गयी. दीपा- चलो अब शुरू भी हो जाओ.