मैं बहुत ही बेसबरा हो रहा था और मैने उनकी सास से पूछा ” रेखा भाभी कहाँ है मुझे उनको साडी देनी है” मैं रूम के हर कोने के तरफ़ नेहारता हुआ बोला. मानो की जैसे भाभी वही कही छुपी है. ” अरे रेखा तो मार्केट गयी हुई है 1 घंटे मे वापिस आएगी बेटा तू अंदर तो आ..” बुधिया बोली. मेरा सारा प्लान चोपट हो गया था..पता नही किस्मत मेरे पीछे उंगली लेकर क्यो पड़ी है..मैने मन मन मे सोचा. “आप ये साडी भाभी को दे देना मैं अब जाता हू” मैं उदास होता हुआ बोला. “अरे बेटा थोड़ा वेट तो कर ले..रेखा आ जायगी….और हा अब तू आया है तो एक काम भी कर दे…” बुढ़िया बोली “आहह..ठीक है बोलिए क्या करना है” मैं बोला और अब मैं बोल भी क्या सकता था..मेरा तो लंड भी ठंडा पड़ गया था ये जानकर की भाभी घर पर नही है. बुढ़िया फिर मुझे द्रवाईंग रूम के साथ वाले रूम मे ले गयी . रूम के अंदर पहुच कर मुझे पता चला कि वो रूम सोनाली का है. सोनाली करवट लेकर लेटी हुई थी..मेरी नज़र जैसे ही सोनाली पर पड़ी मेरी उदासी फ़ॉर्रन रफूचक्कर हो गयी . मैं सोनाली के बदन को अपनी आखो से नाप रहा था तभी अम्मा जी बोल उठी ” अरे आज इसकी तबीयत थोड़ी खराब है…सो नींद की गोली खाकर सोई है” अम्मा जी बोली पता नही क्यू पर ये बात सुनकर मेरे लंड मे एक कसक उठी और मेरे आँखो मे चमक आने लगी “अरे बेटा वो जो बेग रखा है उपर टांड पर उसको ज़रा उतार देना” बुढ़िया टांड की तरफ इशारा करते हुए बोली. “अच्छा अम्मा जी आप थोड़ा पीछे हो जाओ…” मे बॅड पर चढ़ता हुआ बोला मैं बॅड पर चढ़ उस काले से बॅग को उतारने लगा . दोस्तो मैं सोनाली के बदन के पास ही खड़ा था तभी मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया आया और मैने नीचे से अपने उल्टे पाव के तलवे को सोनाली के उभरे हुए कुल्हो के पास सरका दिया..मेरे पैरो की उंगलियो पर जैसे ही मुझे सोनाली की गांद की गर्मी महसूस हुई मेरे अंदर का शैतान जागने लगा..और मुझसे बोलने लगा कि ” एक दम कोरा माल है ये सोनाली तो…आज भाभी को छोड़ और इसकी चूत का मज़ा उठा ले…” मैं ये सब सोच ही रहा था कि नीचे खड़े अम्मा जी बोल उठी.. ” क्या ज़्यादा भारी है बॅग…इतना समय क्यो लगा रहा है बेटा” अब मैं बुढ़िया को क्या बोलू कि मैं उसकी लड़की के बदन की गर्मी ले रहा हू.मुझे फिर लगा कि कही बुढ़िया को शक ना हो जाय सो मैने बॅग उतार दिया और फिर पलंग से उतर कर नीचे खड़ा हो गया. “बेटा अब अगर तुझे जाना है तो चला जा..” अम्मा जी उस बॅग की चैन खोलते हुए बोली .”नही…मैंम्…म..मे… थोड़ा रुक कर ही जाउन्गा अब..वैसे भी बाहर बारिश का मोसाम हो रहा है” मैने अम्मा जी की बात काटते हुए उनको ज़ल्दी से जवाब दे दिया. ” चल ठीक है ..एक काम कर बेटा तू बाहर टीवी देख ले तब तक मुझे तो नींद आ रही है मैं थोड़ा सो लेती हू” फिर हम दोनो सोनालीके कमरे से बाहर आ गये. मुझे अब ऐसा सुनहिरा मौका नही छोड़ना है..बस थोड़ी सी हिम्मत दिखा अनुज….” मैं अपने आप को हिम्मत दिलाता हुआ बोला. मैं टीवी ज़रूर देख रहा था पर मेरा दिमाग़ आगे की प्लानिंग मे मशगूल था. मैने घड़ी देखी तो पाया कि 10 मिनट गुजर चुके है बुढ़िया को अपने रूम मे गये.. “क्या बुढ़िया सो चुकी होगी..क्या यही सही मॉका है” मैने अपने आप से सवाल किया. और फिर आख़िर वो पल आया और मैं हिम्मत जुटा सोनाली के रूम की तरफ बढ़ा मेरा दिल अब बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था दोस्तो ये सब करते हुए मुझे जितना रॉंमांच हो रहा था उसको मैं शब्दो मे बया नही कर सकता. सोनाली के रूम तक पहोच्ते पहोच्ते ही मेरा लोड्ा आधा (हाफ) खड़ा हो चुका था मेरे हाथ ना जाने क्यू काप से रहे थे और इन्ही कपते हाथो से मैने सोनाली के रूम का दरवाजा खोला. सोनाली सोती हुई किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी..अब वो पेट के बल सोई हुई थी..ना जाने लड़कियो को पेट के बल सोना क्यो अच्छा लगता है..सोनाली ने बादामी रंग का सूट और उसी रंग की पाज़ामी पहनी हुई थी..उल्टे लेटने से सोनाली की गांद काफ़ी उभर गयी थी..ये सब देखते देखते मैं पागल सा होने लगा था.फिर मैं ज़्यादा समय गवाए बिना कमरे मे घुस गया और फटाफट से अपने कपड़े उतार पूरा नंगा हो गया..किसी अंजाने घर मे किसी जवान लड़की के साथ उसी के रूम मे नंगा होने पर मस्ती की लहर जो मेरे बंदन मे उठी मैं उसको आपसे कैसे बयान करू दोस्तो.. मैं धीरे धीरे सोनाली के बॅड की तरफ़ बढ़ा . जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे ही मेरे दिल की धड़ कन तेज हो ती जा रही थी. मेरे लिए तो मानो वक्त जैसे थम सा गया था मुझे ना तो कोई शोर ना कोई और चीज़ सुनाई दे रही थी बस सिर्फ़ सोनाली की वो उभरी हुई गांद नज़र आ रही थी. और फिर वो वक्त आया जब मैने अपने काँपते हाथो को सोनाली की गांद पर रखा . अपनी कोरी गांद पर मेरा हाथ लगते ही सोनाली का बदन हल्का सा कपा पर फिर दोबारा शांत हो गया. एक लड़के का हाथ अपने गुप्तांगो पर लगने पर सोनाली का बदन अपने आप ही हरकत कर रहा था. पर दोस्तो सोनाली के चूतादो का वो नर्म अहसास पाते ही मानो मेरी पूरी बॉडी का खून मेरे लंड मे आ कर बहने लगा था और वो फूल कर इतना मोटा हो गया था कि अगर मैं उसे बाहर ना निकालता तो मानो वो फाट ही जाता .. मैने फटाफट अपनी पॅंट और अंडरवेार उतारे और एक हाथ से अपना लंड मसल्ने लगा और दूसरे से सोनाली के चूतद्ड . कपड़ो के उप्पर से सोनाली की पॅंटी को महसूस कर रहा था..मैं धीरे धीरे अपने आप पर काबू खोने लगा ..पर मन मे कही ये चल रहा था कि कही सोनाली जाग ना जाए ….पर वो जागे जी कैसे उसने तो नींद की गोली ली हुई है…मेरे अंदर का शैतान बोला..ये जानने के लिए कि सोनाली गहरी नींद मे है मैने उसका राइट चूतड़ को ज़ोर से दबाया पर सोनाली ने कोई प्रतिक्रिया नही दी अब मुझे यकीन हो चला था कि वो गोली के नसे मे है और उठेगी नही ..फिर क्या था मैने फाटाक से उसकी गांद को नंगा किया और उसके नंगे चुतदो कस कस कर दबाने लगा..मेरा जोश इतना बढ़ गया था कि कई बार तो मैने उसके गोरे चूतादो पर काट भी खाया ..अब सीन ये था कि सोनाली की सलवार और पॅंटी उसके घुटनो मे थी और मैं ..उस हसीना को फूली हुई चूत को चाट रहा था…वा क्या स्वाद था ..दोस्तो एक कवारी चूत का रस जो नशा करता है वैसा नशा दुनिया की किसी शराब मे नही होता..जिन लोगो ने कुँवारी चूत का रस पिया है वो ये बात अच्छे से जानते होंगे..मैं हवस मे इतना पागल हो गया था कि मुझे ये समझ नही आ रहा था कि आगे मे क्या करू…समय बीतता जा रहा था बुढ़िया कभी भी सो कर उठ सकती थी और ये भी हो सकता था कि कोई और भी उनके घर पर आ जाय..इसी कशमकस मे पेट के बल लेती सोनाली के बदन पर चढ़ गया और अपना लंड उसके चूतादो के दरार मे फसा उनको अपने लंड से रगड़ने लगा..नशे मे मेरी आँखे आधी खुली थी और आधी बंद ..आज मैं पहली बार एक लड़की के बदन पर लेटा था..और लड़की भी जवान और खूबसूरत . अब मैने सोनाली की गर्देन को पीछे से चाटना शुरू कर दिया था और दोनो हाथो को नीचे कर उसकी चुचियो को सूट के उप्पर से ही मसलने लगा था. हालाकी ज़्यादा जगह नही मिली थी क्योंकि सोनाली पेट के बल लेटी हुई थी पर फिर भी मैं उसकी चुचियो की नर्मी महसूस कर रहा था और जितना हो सके उनको दबा रहा था. मेरा लंड तो सोनाली की चूत मे नही गया था पर उप्पर से धक्के लगाने से उसकी चूत ज़रूर फूलने लगी थी.. जोश मे सोनाली के बदन को अपने बदन से इतना रगड़ रहा था कि कमरे मे सोनाली के पलंग की आवाज़े गूंजने लगी थी..पर मुझे इस बात की कोई परवाह नही थी अगर उस वक्त कोई भी वाहा आ जाता तो भी मैं रुकने वाला नही था..तभी अचानक मेरा बंदन आकड़ा और लंड ने पानी छोड़ दिया ..मुझे ओरगाम हो रहा था और मैने सोनाली के बदन को इतना जोरो से जाकड़ लिया था कि नींद मे भी सोनाली के मूह से एक कराह निकल गयी थी.. अब मैं उसके बदन पर मुर्दो के तारह पड़ा था और मेरे लंड से निकला पानी सोनाली के चूतादो से होता हुआ उसकी कुँवारी चूत को गीला करता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था..मुझे कुछ होश नही था ..पर तभी दीवार पर लगी घड़ी से आवाज़ हुई और मुझे पता चला कि शाम के 4 बज चुके है .कही इस आवाज़ से बुधिया ना जाग जाय मैं फटाफट सोनाली के बदन पर से उठा और अपनी पॅंट और अंडरवेार पहन लिया..तभी मेरी नज़र सोनाली की नंगी गांद पर पड़ी .मेरे ज़ोर दार रगड़ने और मेरे धक्को से उसके गोरे गोरे चूतड़ कई जगह से लाल हो गये थे ..उसका सूट पर भी कई झुरिया पड़ गये थी ..थोड़ा और करीब जाने पर मैने देखा कि सोनाली की गर्देन पर दांतो के निशान है जो के शायद मैने ही जोश मे आकर दिए थे..खैर मैने फटा फट उसके कपड़े ठीक किए और उसकी सलवार उसको दोबारा पहना दी ..और फिर मैं जल्दी से नीचे आ कर बैठ गया….
“आहह….आन..अनुज..मार इसे…है मा….ओकचझहह”
दोस्तो मैं क्या बताऊ जब दीदी की तनी हुई चुचिया मेरे सीने पर लगी तो जो फिलिंग मुझे आई..उसको मैं बया नही कर सकता..
“आ….मम्मी…अनुज..वो मेरी टी-शर्ट मे घुस रहा है…” दीदी चिल्लाति हुई बोली.
ऐसा मौका मुझे बार बार नही मिलने वाला था ..ना जाने क्यो ये सोच ते हुए मेने दीदी को कस्स कर अपने बदन से चिपका लिया . मेरा लंड दीदी के बदन की चुअन से तन चुका था और वो ठीक दीदी के पाजामे के अंदर से उनकी चूत पर लग रहा था..मे तो ये सब महसूस करने मे लगा था पर दीदी का पूरा ध्यान कॉकरोच पर ही केंद्रित था. इस लिपटा लिपटी मे कॉकरोच नीचे गिर कर भागने लगा पर ये बात सिर्फ़ मुझे पता थी अंजली दीदी को नही…. वो अब भी मुझसे लिपटी हुई थी और इसी हड़बड़ाहट का फयडा उठाते हुए मेने अचानक अपने एक हाथ को उईपर लाकर दीदी की एक चूची पर रख दिया..जब मेरा हाथ अंजलि दीदी की लेफ्ट चूची के उपर था तब मेरे हाथो की उंगलियो को ये पता चला कि दीदी ने अंदर ब्रा नही पहनी है.वाह..क्या गोलाई लिए हुई थी वो चूची .इतनी नर्म नर्म चीज़ पर हाथ रखते ही मुझसे कंट्रोल ना हुआ और मेने उनको कस कर दबा दिया..
“अहिस्स्स्शह..…..” दीदी के मूह से एक सीत्कार निकल गयी..
मैं डर गया कही दीदी को मेरी चालाकी का पता तो नही चल गया..पर दीदी अब भी मेरे बदन से उसी तरह चिपकी खड़ी थी…उन्होने शायद सोचा था कि कॉकरोच को भागाते हुए मेरा हाथ ग़लती से उनके उभारो पर लग गया होगा. तभी अचानक मुझे लगा कि कोई उपर रूम मे आ रहा है..मैं स्थिति की गंभीरता समझते हुए दीदी से बोला कि दीदी कॉकरोच भाग गया है. और फिर दीदी मुझसे अलॅग हुई .
तकरीबन ½ घंटे बाद मे बाथरूम मे खड़ा था मेरा अंडरावर और पाजामा मेरे गुटनो मे था ..और मेरी आँखे बंद..मेरा हाथ तेज़ी से मेरे तने हुए लंड पर चल रहा था…और आज जो भी हुआ था वो सारी बाते मुझे याद आ रही थी…राज की वो दीदी के साथ सेक्स करने वाली बात…क्या वो सच बोल रहा था? क्या वो वाकई मेरी बड़ी बेहन के साथ सेक्स करना चाहता है ?..दीदी की चूचियो की नर्माहट मेने आज महसूस कर ली थी….तब कैसा लगेगा जब राज अपने कड़े हाथो से अंजली दीदी की इन नरम नरम और सुडोल चुचियो को कस कस कर दबाएगा..क्या अंजली दीदी उसका साथ देंगी ? इन्न सब सवालो ने मुझे इतना एक्सिट कर दिया था कि मेरे लंड से एक ज़ोर दार धार निकल सामने पड़े दीदी के सूट पर जा गिरी..
उस रात मैं इसी कसमा-कस मे था कि मुझे राज की बात माननी चाहिए या नही. पर जो भी हो एक बात तो पक्की थी कि जब जब भी मैं राज को दीदी के साथ सोचता था ना जाने क्यो मेरे अंडर एक अजीब तरह की तरंगे उमड़ने लग जाती थी और दिल मे एक कसक सी उठी थी कि क्या अंजली दीदी भी राज का साथ देंगी.? मुझे भगवान ना जाने क्यो दीदी को किसी और मर्द के साथ छुप छुप कर देखने मे एक अल्लग ही मज़ा आने लगा था…पता नही वो फीलिंग क्या थी पर जब भी ऐसा हुआ था उस वक्त पेदा हुई एक्सिटमेंट को मैं शब्दो मे बया नही कर सकता. मेने राज का लंड देखा था कितना बड़ा और सख़्त था वो ऐसा मोटा और मांसल लंड जब अंजली दीदी की गोरी और कुँवारी चूत का मांथान करेगा तो कैसा लगेगा.. इन सब बातो को सोचते सोचते ही मेरा लंड आधा खड़ा हो चला था और फिर मेने डिसाइड कर लिया कि मैं राज की बात मानूँगा.
मैं अब बस मोके की तलाश मे था और मोका मुझे दो दिन के बाद मिल भी गया. हुआ ये था कि चाचा जी की तबेयात थोड़ी खराब हो गयी थी और उनको दोसरे शहर एक बड़े हॉस्पिटल मे अड्मिट करना पड़ गया था. दीदी और मेरी तो पढ़ाई चल रही थी सो चाचा जी के साथ चाची का हॉस्पिटल मे रहना तय हुआ. और इतेफ्फाक से उस्दिन सनडे था. मॉर्निंग मे ही चाची जी हॉस्पिटल की तरफ़ रवाना हो गयी. अब घर पर रह गये मे और अंजली दीदी. यही मोका है मेरे दिल ने मुझे कहा मैं फटाफट फोन के पास गया और राज का नंबर डायल करने ही वाला था कि तभी मेरे हाथ एक बार फिर रूके और मेने सोचा के क्या मैं सही कर रहा हू..पर अगले ही पाल मेरे अंदर छुपे शैतान ने मेरे दिमाग़ पर काबू कर लिया और मेने राज को फोन मिला दिया. दो बार बॅल बाजी और तभी दोसरे तरफ़ से राज के आवाज़ आई.
“हेलो”
“राज..मे..मे अनुज बोल रहा हू” मैं कपकपाति आवाज़ मे बोला मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था.
मेरी आवाज़ सुनते ही राज खुश हो गया और सीधा बोला..” मैं 10 बजे तेरे घर आ रहा हू..”
“नही 10 बजे तो ज़्यादा जल्दी हो जाएगा” मे बोला
“अबे कोई जल्दी नही होगा….मैं अब रुक नही सकता…”
वो शायद सब कुछ समझ चुका था.उसकी खुशी का तो ठिकाना ही नही था क्योकि उसके मन के मुराद पूरी होने जा रही थी..
मेने धड़कते दिल के साथ फोन नीचे रखा ही था कि तभी पीछे से आवाज़ आई.” किसको जल्दी हो जाएगी..अनुज तू कही जा रहा है क्या” दीदी रूम मे आते हुए बोली.
अब मे उन्हे क्या बताता कि उनका प्यारा छोटा भाई उनका शरीर लुटवाने की तैयारी कर रहा है.
“दीदी वो राज आने के लिए बोल रहा था..उसको आक्च्युयली मेद्स के कुछ नोट्स लेने है” मैं बात संभाल ता हुआ बोला.
“अनुज मुझे वो लड़का कुछ सही नही लगता ..तूने उसे घर पर क्यो बुलाया..” दीदी बोली
“नही नही दीदी ऐसी कुछ बात नही ..हा वो थोड़ा आवारा है पर दिल का बहोत अच्छा है.” मे बोला
“चल कुछ भी हो उसको ज़ल्दी से चलता कर ना “ बोल कर दीदी नीचे किचन की तरफ़ चली गयी.
दीदी को तो राज मे ज़रा भी इंटेरिस्ट नही है..तो बात आगे कैसे बढ़ेगी….ये सारी बाते मेरे दिमाग़ मे चल रही थी. कुछ देर मे दीदी और मेने नीचे डाइनिंग टेबल पर नाश्ता किया ..फिर दीदी टीवी देखने लगी और मे उपर रूम मे आ गया..मेने घड़ी पर नज़र डाली तो पाया कि 10 बजने मे 10 मिनिट्स बाकी थी..जैसे जैसे टाइम बीत रहा था वैसे वैसे ही मेरी नेरवीऔस नेस्स बढ़ती जा रही थी..तभी अचानक डोर बेल बजी ..मे फटा फॅट डोर खोलने के लिए रूम से बाहर आया ही था कि मेने देखा कि दीदी ने डोर खोल दिया है और जैसे मेने सोचा था सामने राज खड़ा था..दीदी अभी भी अपने नाइट ड्रेस याने लूज टी-शर्ट ओर पयज़ामे मे ही थी.रात को दीदी ब्रा नही पहनती थी सो उनके बूब्स टी-शर्ट के उपर से बेहद ही ज़्यादा सेक्सी लग रहे थे..
“ नमस्ते दीदी…” राज सीधा टी-शर्ट मे तनी खड़ी दीदी की चूचियो को देखता हुआ बोला.
“नमस्ते…” दीदी ने भी राज को अपनी खड़ी चूचियो की तरफ़ ऐसे देखता हुआ पाकर थोड़ा सकपका सी गये थी..फिर वो जल्दी से बोली.” वो अनुज उप्पर रूम मे है”.
“आप तो नाराज़ सी लग रही हो..शायद आपको मेरा यह आना अच्छा नही लगा..”राज दीदी के मासूम चेहरे की तरफ़ देखता हुआ बोला.
“नही..नही..ऐसी कोई बात नही.” दीदी थोड़ा शरमाती हुई बोली.
“ तो बताइए ना आप कैसी हो..” राज बोला
“मे ठीक हू…अंदर आ जाओ”दीदी बोली.
राज ने आते ही अपना काम शुरू कर दिया था. तभी दीदी की नज़र मुझ पर गयी..और वो बोली “ अनुज तुम्हारा दोस्त आ गया है” उनकी बॉडी लानुगएज से मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो वो बोलना चाहती हो कि “ फटा फॅट इसको नोट्स देकेर चलता करो”
कुछ मिनिट्स बाद राज और मे उपर रूम मे थे ..दीदी नीचे टीवी देख रही थी.
“ राज कुछ ब्लू फिल्म्स की सीडी भी लाया था. वो सीडी कंप्यूटर मे लगाने लगा तो मैने उसको मना किया
“ नही यार नीचे दीदी है..कही वो आ गयी तो मारे जाएँगे” मे बोला
“अबे बेहन्चोद तू डरता बहोत है ..आज तो तुझको मैं लाइव ब्लू फिल्म दिखाउन्गा..”
उसकी ये बात सुनकेर मेरे बदन मे करेंट दौड़ गया.
हम कुछ 5 मिनट तक मूवी देखते रहे फिर राज बोला तू यही बैठ मेरा मन टीवी देखने का कर रहा है. मुझे उसकी बातो से पता चल रहा था कि उसका क्या मतलब है.
“नही अभी नही यार..प्ल्स रुक तो सही” मे बोलता ही रह गया और राज नीचे चला गया .
राज को नीचे गये हुए10 मिनट से ज़्यादा हो चुके थे मेरा ध्यान अब उस ब्लू फिल्म मे नही था जिसको मे देख रहा था. राज को ऐसे अंजली दीदी के साथ अकेला सोच सोच कर मेरे अंदर एक अज्जीब सी हालचाल मची हुई थी.. जब मुझसे सबर ना हुआ तो मे चुप चाप रूम से बाहर आया और नीचे जहा वो दोनो बैठे थे .छुप कर उधर देखने लगा .. राज सोफे पर बैठा था और दीदी उसके एक साइड मे रखे बड़े सोफे पर
वो दीदी से कुछ बाते कर रहा था और दीदी कभी कभी उसके बातो पर हंस भी देती थी..दीदी की नज़र तो टीवी पर थी मगर राज रह रह कर दीदी के बदन को घूर रहा था और कयी कयी बार तो वो ओपन्ली अपने लंड को पॅंट के उप्पर से ही खुजा देता था…दीदी भी शायद उसकी इस हरकत से वाकिफ्फ थी उनकी भी नज़र कयी बार राज के पॅंट मे बने तंबू पर चली जाती थी..दीदी का जवान बदन भी शायद अब राज के लंबे लंड से निकलती गर्मी को महसूस करने लगा था…किसी ने सही कहा है मोटा और लंबा लंड हर औरत और लड़की को दीवाना बना देता है..अंजली दीदी को अपनी पॅंट मे बने तंबू की तरफ़ देखती हुई पाकर …राज का जोश भी बढ़ने लगा था..अब वो दीदी केतरफ़ देखता हुआ ओपन्ली अपने पॅंट मे बने उस उभरे हुए हिस्स्से को धीरे धीरे सहलाने लगा..और फिर उसने अंजली दीदी को कुछ बोला और उठ कर दीदी के पास उनके सोफे पर बैठ गया..दीदी का चेहरा शर्म से लाल होने लगा था और उनकी साँसे तेज़ी से चल रही थी जिसका बयान उनकी अब तक तन चुकी चुचिया टी-शर्ट्स के अंदर से ऊपर नीचे होकेर दे रही थी…