अंजाना रास्ता सेक्स कहानी हिन्दी

अंजलि दीदी तो मस्ती भी खो कर किसी और ही दुनिया मे चली गयी थी..रेखा भाभी दीदी के बदन को अब बिना हिचाक यूज़ करने लगी. “सच मे अंजलि तू एक बार उसका लंड ले ले अपने चूत मे ….तेरी ज़िंदगी बन जाएगी…” कहते हुए रेखा भाभी दीदी के बदन पर झुक गयी ( जैसे की कुत्ता कुतेया को अपने अगले पेरो से पक्कड़ ता है ..कुतिया की चुदाई के वक्त ). “आहह..इससस्स….भाभिइ…..ऊहह..मा….भाभी…मे मर जाउन्गी…ऐशह….श्ह्ह्ह्ह” दीदी मस्ती मे बोली “फिर वो मेरी चुचियो को ऐस्से कस कस्स कर दबाता है कि मानो की उनका रस निकालना चाहता हो” भाभी अब झुकी हुई दीदी की लाटकी चुचिओ को टी=शर्ट के अंदर हाथ डाल कर उतनी ही तेज दबाने लगी..और अब उन्होने घोड़ी बनी दीदी के चुतदो पर धक्के मारना भी शुरू कर दिया था….. ” क्या तुझे चुदाई के वक्त गंदी गंदी गालिया सुनना अच्छा लगता है…बोल रांड़..अससह…” भाभी की भी अब आँखे बंद थी पर उनके धक्के अब बहुत तेज होने लगे थे.. दीदी ने कोई जवाब नही दिया..बस अपना मूह बूँद कर .मस्ती मे आती अपनी आहो को रोकने की नाकामयाब कोशिस करने लगी. दीदी को जवाब ना देता देख रेखा भाभी को थोड़ा गुस्सा आया और उन्होने दीदी की चूचियो पर तन चुके निपल्स को कस्स कर अपनी उंगली से दबा दिया..और बोली…” बेहन की लोदी बोल नाअ……मज़ा आता है तुझे मर्द से गंदी गंदी गालिया सुनकर ” इस हरकत ने दीदी की चुप्पी तोड़ दी और दर्द और मज़े मे वो बोल उठी.” आहह..भाभी….इतनी ज़ोर से मत दबाओ…हा. हा ..मुझे गंदी गंदी गलिया सुनना अच्छा लगता है……जब कोई मर्द मुझे गंदी गंदी गालिया देता है तो मेरी चूत मे एक आजीब सी कसाक उठ जाती है और चूत से पानी आने लगता है ” “चार..चररर .”.बेड की आवाज़ के साथ साथ रेखा और अंजलि दीदी की मस्ती मे आती आवाजो ने रूम को भर दिया था..ये सब देखता एख़्ता मे पागलो की तरह अपना लंड मसल रहा था…जिस तेज़ी से भाभी अब दीदी को घोड़ी बना कर चोद रही थी उन झटको से अंजलि दीदी के रेशमी बालो से बना जुड़ा भी खुल गया था और बॉल एक साइड से होते हुए नीचे बेड पर गिरे गिरे लहरा रहे थे..तभी दीदी के मूह से एक तीव्र आवाज़ निकली और उनकी टाँगे कापने लगी. दीदी को ऑर्गॅज़म हो गया था और वो निढाल हो कर बेड पर पीठ के बाल गिर पड़ी थी ..पर भाभी अब भी नही मान रही थी वो लगातार पीठ के बाल पड़ी दीदी के उपर चढ़ि अब भी दीदी के चूतादो पर अपनी चूत रगड़ रही थी…दीदी का बदन निर्जीव सा हो गया था..रुक रुक कर उनके मुहह से बुसस्स ‘उः..उः..” की आवाज़ ही आ रही थी..तभी इतनी भारी रगड़ान से भाभी की फूल चुकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया और रेखा भाभी ने अंजलि दीदी के बदन को कस कर दबोच लिया….दोस्तो अब इसको आप मेरी बाद किस्मती कहे या खुशकिस्मती की इस दौरान ये सब देखते देखते मैं मज़े मे इतना खो गया था कि मुझे ये भी ध्यान नही रहा कि कब मैं दरवाजा खोल रूम के थोड़ा अंदर घुस गया हू…मुझे अपनी इस नादानी का पता तब चला जब मेरी नज़र रेखा भाभी की हैरत मे फैली नज़रों से मिली. हालाकी अंजलि दीदी का चेहरा अब भी नीचे तकिये मे कही छिपा था. मुझे तो मानो ऐसा लगा कि मेरा शरीर एक पत्थर की मूर्ति बन गया है मैं चाहकर भी हिल नही पा रहा था ..मेरे पैर वही फर्श पर जाम हो गये थे..अब इसका कारण डर और शाराम थी या कुछ और….. तभी भाभी की नज़र मेरे चहरे से होती हुई सीधा नीचे मेरे फूले हुए लंड पर गयी..ना जाने क्यो पर मेरे लंड ने रेखा भाभी को अपनी तरफ़ इस तारह देखते हुए पाकर एक ज़ोर से झटका मारा . मेरे मूह से तो मस्ती मे आवाज़ ही निकली पर तभी रेखा भाभी ने अपने होटो पर एक उंगली रख ली मानो मुझे बोल रही हो कि अभी चूप रहो कोई शोर मत करो स्थिति की गंभीरता समझते हुए मैने अपनी भावनाओ पर काबोए रखने मे ही समझदारी समझी. ये सबकुछ इतना ज़ल्दी हो गया था कि मुझे कुछ सुझाई नही आ रहा था उपर से ये जान कर कि भाभी मेरे नंगे खड़े लंड को देख रही है..एक आजीब से कसाक मेरे बदन मे फैल्ल रही थी…तभी दीदी का बदन थोड़ा हिला मानो कि वो होश मे आ रही है…ये सब देख भाभी जो कि अभी भी दीदी के उप्पर लेटी थी मुझे इशारे से वाहा से जाने के लिए बोलने लगी..डर तो मे भी गया था सो मैं फटाफट अपनी पॅंट उठा कर उस रूम से बाहर आ गया . मेरा दिल तो मानो फटने ही वाला था पछले 10 मिनट के दोरान जो कुछ भी हुआ था वो सोच सोच कर. मैं अभी तक नही ज़्यादा (डिचांज) था सो लंड मे हलचल मोजूद थी. मुझे अब लग रहा था कि अगर मैने मूठ नही मारा तो मेरे अंदर इकट्ठी हो चुकी एग्ज़ाइट्मेंट से मे पागल हो जाउन्गा सो मे फटाफट नीचे बाथरूम की तरफ़ भागा मेरा लंड अब भी नंगा लटक रहा था. मेरे ज़ोर ज़ोर से चलने की वजा से वो काफ़ी जोरो से हिल हिल कर मेरी जाँघो पर लग रहा था. अगले कुछ मिनिट ही मे मैं बाथरूम मे नगा खड़ा अपने लंड की खाल (स्किन ) को जोरो से आगे पीछे कर रहा था..ये सोच सोच कर मे रेखा भाभी ने मेरा नंगा लंड देख लिया है मे पता नही मस्ती मे मैं पागल सा हो रहा था. तभी मैने पायल की छान छान सुनी ..वो पायलो की आवाज़ धीरे धीरे बाथरूम की तरफ़ आ रही थी..और इससे पहले के मैं कुछ समझ पाता बाथरूम का दरवाजा खुल गया . अब सीन कुछ ऐसा था की मैं नंगा खड़ा था मेर हाथ मे मेरा मस्ती मे फूला लंड था और गेट पर रेखा भाभी आ खड़ी हुई थी.. अगले 2 मिंट्स ताक कोई कुछ नही बोला . हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे देख रहे थे. दोस्तो मुझमे तो पता नही कहाँ से इतनी हिम्मत आ गयी थी. तभी भाभी ने अपना दुपट्टा उतार कर बाथरूम पर लगी खुट्टी (नेल ) पर टाँग दिया और बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया.. अब रेखा भाभी और मैं अकेले थे बाथरूम के अंदर रेखा भाभी भी मस्ती मे लग रही थी उनकी मोटी मोटी चुचिया उपर नीचे होने लगी थी..तभी भाभी आगे बढ़ी और अपने एक हाथ को सीधा मेरे मस्ती मे पागल हो चुके लंड पर रख दिया.. “थोड़ी देर भी सबर नही हुआ तुझे..है रे कितना गर्म है तेरा..पर छोटा है.. ” रेखा भाभी अपनी पतली उंगलियो से मेरा लंड शहलाति हुई बोली. दोस्तो भाभी के नरम नरम हाथो को स्पर्श अपने गरम लंड पर पाकर तो मैं क्या बताऊ…बिकुल मस्त हो गया था. और इस मस्ती मे मेरे मॅन से एक आआह भी निकल गयी’आह..इशह…” भाभी अब झुक कर नीचे बैठ गयी थी और उनके लो कट सूट से मुझे उनकी गोरी गोरी मोटी चुचिया नज़र आने लगी. “मज़ा आया था तुझे वो सब देख कर..बोल ना..” भाभी मेरे लंड पर उपर से नीचे मालिश करती बोली. इस मस्ती मे मैं पागल सा हो गया और मेरे मूह से निकला ” हा..भाभी” . मस्ती मे मेरी आँखे बंद हो चुकी थी . मैं तो बस भाभी के नरम नरम हाथो का जादू अपने लंड पर महसूस कर कर मज़े लेना चाहता था. “किसी को अपनी बड़ी बहन के बदन से खेलता देखना तुझे अच्छा लगता है ना….बोल मेरे राजा” भाभी अब एक हाथ को मेरे लंड पर उपर से नीचे घुमाती और दूसरे हाथ की उंगलियो से मेरे लटके हुए आंडो को मसलती बोली. ” कभी किसी लड़की ने तेरे लंड को पकड़ा है…तूने चोदा है किसी को अभी तक..” भाभी अपना मूह उपर मेरी तरफ कर मुझे देखते हुए बोली . मुझसे अब कंट्रोल नही हो रहा था और रेखा भाभी मुझे चिड़ा चिड़ा कर मस्त कर रही थी.मेरा शैतानी मन मुझे बार बार बोलने लगा कि ऐसा मौका तुझे अब कभी नही मिलेगा एक मस्त जवान औरत तेरे पास है फ़ायदा उठा ले इसका.. अब मैं पूरा मस्ती मे आ गया और मुझ मे नज़ाने कहा से ताक़त आई और मैने भाभी के फटाफट बाल पकड़ कर खड़ा किया और उनको धक्का देकर बाथरूम की दीवार से लगाया और पागलो की तरह उनसे लिपट कर उनकी मोटी मोटी चूचियो को दबा दबा भाभी के मूह मे अपनी ज़बान डाल कर उनको स्मूच करने लगा. मेरी इस हरकत से भाभी पूरी तरह से घबरा गयी थी..वो तो मुझे एक नादान …शर्मिला सा लड़का समझती थी ..पर मेरे अंदर छुपे हवस के शैतान से वो अंजान थी. शिकारी अब खुद शिकार बनने वाला था.रेखा भाभी अपने हाथो से मुझे अपने बदन से हटाने की कोशिस करने लगी पर मेरे अंदर के हवस के शैतान की ताक़त का सामने उस बेचारी औरत की कहा चलने वाली थी.. ये पहला वक्त था जब मैने किसी औरत के मदमस्त जिस्म को अपने कवारे बदन पर महसूस किया था…इस कश म कश मे कभी मेरा लंड रेखा भाभी के पेट पर लगता तो कभी उनकी जाँघो पर ..एक बार तो वो भाभी की जाँघो के बीच घुस कर उनकी सलवार के अंदर छुपी उनकी चूत पर भी लगा. हवस के चलते मैं भाभी को यहा वाहा काटने भी लगा था..तभी भाभी मूड गयी और अब उनका मूह बाथरूम के दरवाजे की तरफ था..मुझे गुस्सा तो आया था क्योंकि मैं भाभी की चूची चूसना चाहता था पर तभी मेरी नज़र नीचे झुकी और मुझे भाभी की उभरी हुई गांद दिखाई दी ..मेरे मूह मे पानी आ गया और मैने भाभी के बदन को पीछे से अपनी गिरफ़्त मे ले लिया और अपने दोनो हाथो को आगे बढ़ा कर भाभी की उछलती चूचिओ पर रख कर उन्हे मसलने लगा और नीचे से मैं अपना खड़ा लंड सलवार के उपर से ही भाभी की गांद की दरार मे घुसा कर ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगा..दोस्तो क्या मज़ा आ रहा था मुझे ऐसा मज़ा तो मुझे मूठ मारने पर भी नही आया था…मैं मस्ती मे भाभी की कमर पर पीछे से काटने लगा…

“एयेए.हह …मा…काटो मत ” भाभी दर्द से कराहती बोली. मैं कुछ नही बोल रहा था बस मन मे सिर्फ़ एक ही बात चल रही थी कि आज पहली बार एक औरत का जिस्म मिला है जितना फ़ायदा हो सके उठा लू. तभी मेरे कानो मे किसी के सीढ़ियो से उतरने की आवाज़ पड़ी. “भाभी.?” ये आवाज़ अंजलि दीदी की थी वो नीचे आ गयी थी . आवाज़ सुनते ही भाभी बहुत परेशान हो गयी और बोली ..” एयेए..अनुज..छोड़ दे अब तो…देख ले दोनो पकड़े गये तो बहुत बदनामी होगी” पर मे तो जोश मैं पागल था भाभी की नरम नरम चूतादो की गर्माहट से मेरे लंड मे मस्ती फैली हुई थी और मेरा पानी बस निकलने ही वाला था.. “देख अंजलि बाथरूम की तरफ़ ही आ रही है..आहह..इशह…..मान जा..अनुज” भाभी डरते हुए बाथरूम के दरवाजे मे बनी एक छोटी सी दरार से बाहर झाँकते हुए बोली. डर तो मुझे भी लग रहा था पर रेखा भाभी की उभरी हुई नरम गांद पर लंड रगड़ने मे जो मज़ा मिल रहा था उसने मेरा डर ख़तम कर दिया था..और मैं और ज़ोर से धक्के मारने लगा.मैं अब जल्दी से जल्दी लंड का पानी निकालना चाहता था. “भाभी क्या आप बाथरूम मे है” अंजलि दीदी अब बाथरूम के दरवाजे के ठीक बाहर आ चुकी थी ” छोड़ दे ..मुझे ..कुत्ते..आ…इश्ह्ह..अंजलि बाहर खड़ी है..आहह….”भाभी बोली और उन्होने अपने चूतड़ थोड़े और पीछे किए .मेरे फूले हुए लंड के लिए इतना काफ़ी था और लंड ने पानी की बोछर शुरू कर दी..मैं रेखा भाभी से कस कर चिपक गया …लंड रुक रुक कर पानी छोड़ रहा था ..ऐसा शानदार ऑर्गॅज़म मुझे आज तक नही हुआ था.. तकरीबन 5 मिनट तक मे पीछे से भाभी के बदन से चिपका रहा भाभी भी समझ चुकी थी कि मैने क्या किया है सो वो भी चुप रही..अंजलि दीदी बाहर खड़ी है..क्या उनको पता है कि मैं भाभी के साथ अंदर बाथरूम मे हू ?ये सोच सोच कर मेरा लंड लगातार पानी छोड़ रहा था..मुझे कुछ होश नही था मेरे लंड से आज तक इतना पानी कभी नही निकला था और अब तो मेरी टाँगे भी थक चुकी थी ..मैं अपनी पूरी बॉडी मे थकान महसूस कर सकता था. “भाभी जल्दी बाहर आ जाओ मुझे भी वॉशरूम जाना है..और ये अनुज पता नही कहा चला गया है” दीदी ड्रॉयिंग रूम की तरफ जाती हुई बोली. कुछ देर बाद मैं भाभी की बदन से अलग हुआ .मैने देखा की मेरे वीर्य से उनकी सारी सलवार पीछे से भीग चुकी है..उनकी सलवार देख कर लगता था कि मानो किसी ने उन पर बाल्टी भर के पानी डाल दिया हो…अपनी सलवार की ये हालत देख भाभी भी हैरान थी…पर अब वो क्या कर सकती थी ….उनके चेहरे पर जहा पहले मुझे देख कर शरारत वाली मुस्कान आती थी वाहा अब एक डर फैला हुआ था..एक पल के लिए उन्होने मुझे देखा और फिर फटाफट अपने दुपट्टे को उठा बाहर चली गयी. आज पूरा एक हफ़्ता हो गया था रेखा भाभी और मेरे बीच हुई उस घटना को. उस दिन के बाद एक दो बार ही भाभी हमारे घर आई थी. शरम का जो परदा मेरे और भाभी के बीच था वो अब ख़तम सा ही हो गया था उस घटना के बाद . शर्म तो ख़तम हो गयी थी पर हिम्मत नही आ पाई थी मुझ मे कि मैं कुछ कर सकू.अब मैं क्या करू मेरा स्वाभाव ही कुछ ऐसा था . हर रात या जब भी मैं घर पर अकेला होता तो मुझे भाभी के साथ बिताए वो हवस भरे पल याद आ जाते थे. दीदी कुछ दिनो के लिए बुआ जी के यहा गयी हुई थी क्योंकि बुआ जी की तबीयत खराब थी . अब घर पर मैं चाचा और चाची ही थे. रूम मे अकेला होने की वजह से मैं काफ़ी बोल्ड भी हो गया था और कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म लगा उसमे चुदवाती लड़की को देख देख कर खूब मूठ मारता था. पर दोस्तो जैसा अक्सर होता है अगर कोई चीज़ लगातार देखी गयी और करी गयी तो उससे मन हट जाता है और ऐसा मेरे साथ भी हुआ . मुझे अब भी भाभी का वो गरम और नरम बदन याद आता था…काश एक बार वो मुझे मिल जाय तो इस बार तो बस उनको चोदे बिना नही छोड़ूँगा.. मैं रात को बॅड पर लेटा हुआ अपना खड़ा लंड सहलाता सहलाता सोच रहा था. दोस्तो अगर कोई काम दिल से किया जाए तो वो ज़रूर होता है और अगले दिन भगवान ने मेरी सुन ली . हुआ ये था कि दोपहर को जब मैं स्कूल से आया तो चाची ने मुझे एक साडी दी और बोली कि वो साडी मैं रेखा भाभी को दे आऊ. ” मुझे एक मौका और मिला है …हे भगवान इस बार काम बनवा देना ” मैं मन मन मे बोला और भाभी के घर की तरफ चल पड़ा. ” घर पर अगर रेखा भाभी अकेली हुई तो मैं उनके साथ क्या क्या करूँगा ये सब सोच सोच कर मेरा लंड पागल होता जा रहा था..जैसे जैसे मे रेखा भाभी के घर के पास आता जा रहा था वैसे वैसे मेरे लोड्‍े मे हरकत बढ़ती जा रही थी. तकरीबन 10 मिनट मे मैं रेखा भाभी के घर की दरवाजे पर पहोच गया था. दोस्तो इससे पहले कि आगे क्या हुआ आ मैं आपको रेखा भाभी के घर के मेंबर्स के बारे मे बता दू…रेखा भाभी और उनके पति के अलावा उस घर पर भाभी की सास और उनकी ननंद (सिस्टर इन लॉ) सोनाली रहती थी. सोनाली मुझसे 2 साल बड़ी थी और वो बी.कॉम 2न्ड एअर मे पढ़ती थी. रंग तो उसका ज़्यादा सॉफ नही था ( पर सावला भी ना था ) पर बंदन गजब का था . सोनाली की हिगत लगभग 5’3″ के आस पास थी पर जो चीज़ सबसे ज़्यादा आकर्षक थी वो थी उसके 36 इंच के बूब्स . मैने भी कई बार उसकी बूब्स को सोच सोच कर मूठ मारा था. खैर मे अब स्टोरी पर वापिस आता हू. मैने उनके घर का दरवाजा खाट खटाया. मुझे इस बात का पूरा यकीन था कि रेखा भाभी ही दरवाजा खोलेगी मेरे दिल ये सोच सोच कर धड़ाक रहा था .कुछ देर बाद दरवाजा खुला . ” अरे अनुज बेटा कैसे आना हुआ..आओ अंदर आओ” दरवाजा भाभी की सास ने खोला था. मेरा तो दिल पर च्छुरी चल गयी थी .

मैं बहुत ही बेसबरा हो रहा था और मैने उनकी सास से पूछा ” रेखा भाभी कहाँ है मुझे उनको साडी देनी है” मैं रूम के हर कोने के तरफ़ नेहारता हुआ बोला. मानो की जैसे भाभी वही कही छुपी है. ” अरे रेखा तो मार्केट गयी हुई है 1 घंटे मे वापिस आएगी बेटा तू अंदर तो आ..” बुधिया बोली. मेरा सारा प्लान चोपट हो गया था..पता नही किस्मत मेरे पीछे उंगली लेकर क्यो पड़ी है..मैने मन मन मे सोचा. “आप ये साडी भाभी को दे देना मैं अब जाता हू” मैं उदास होता हुआ बोला. “अरे बेटा थोड़ा वेट तो कर ले..रेखा आ जायगी….और हा अब तू आया है तो एक काम भी कर दे…” बुढ़िया बोली “आहह..ठीक है बोलिए क्या करना है” मैं बोला और अब मैं बोल भी क्या सकता था..मेरा तो लंड भी ठंडा पड़ गया था ये जानकर की भाभी घर पर नही है. बुढ़िया फिर मुझे द्रवाईंग रूम के साथ वाले रूम मे ले गयी . रूम के अंदर पहुच कर मुझे पता चला कि वो रूम सोनाली का है. सोनाली करवट लेकर लेटी हुई थी..मेरी नज़र जैसे ही सोनाली पर पड़ी मेरी उदासी फ़ॉर्रन रफूचक्कर हो गयी . मैं सोनाली के बदन को अपनी आखो से नाप रहा था तभी अम्मा जी बोल उठी ” अरे आज इसकी तबीयत थोड़ी खराब है…सो नींद की गोली खाकर सोई है” अम्मा जी बोली पता नही क्यू पर ये बात सुनकर मेरे लंड मे एक कसक उठी और मेरे आँखो मे चमक आने लगी “अरे बेटा वो जो बेग रखा है उपर टांड पर उसको ज़रा उतार देना” बुढ़िया टांड की तरफ इशारा करते हुए बोली. “अच्छा अम्मा जी आप थोड़ा पीछे हो जाओ…” मे बॅड पर चढ़ता हुआ बोला मैं बॅड पर चढ़ उस काले से बॅग को उतारने लगा . दोस्तो मैं सोनाली के बदन के पास ही खड़ा था तभी मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया आया और मैने नीचे से अपने उल्टे पाव के तलवे को सोनाली के उभरे हुए कुल्हो के पास सरका दिया..मेरे पैरो की उंगलियो पर जैसे ही मुझे सोनाली की गांद की गर्मी महसूस हुई मेरे अंदर का शैतान जागने लगा..और मुझसे बोलने लगा कि ” एक दम कोरा माल है ये सोनाली तो…आज भाभी को छोड़ और इसकी चूत का मज़ा उठा ले…” मैं ये सब सोच ही रहा था कि नीचे खड़े अम्मा जी बोल उठी.. ” क्या ज़्यादा भारी है बॅग…इतना समय क्यो लगा रहा है बेटा” अब मैं बुढ़िया को क्या बोलू कि मैं उसकी लड़की के बदन की गर्मी ले रहा हू.मुझे फिर लगा कि कही बुढ़िया को शक ना हो जाय सो मैने बॅग उतार दिया और फिर पलंग से उतर कर नीचे खड़ा हो गया. “बेटा अब अगर तुझे जाना है तो चला जा..” अम्मा जी उस बॅग की चैन खोलते हुए बोली .”नही…मैंम्…म..मे… थोड़ा रुक कर ही जाउन्गा अब..वैसे भी बाहर बारिश का मोसाम हो रहा है” मैने अम्मा जी की बात काटते हुए उनको ज़ल्दी से जवाब दे दिया. ” चल ठीक है ..एक काम कर बेटा तू बाहर टीवी देख ले तब तक मुझे तो नींद आ रही है मैं थोड़ा सो लेती हू” फिर हम दोनो सोनालीके कमरे से बाहर आ गये. मुझे अब ऐसा सुनहिरा मौका नही छोड़ना है..बस थोड़ी सी हिम्मत दिखा अनुज….” मैं अपने आप को हिम्मत दिलाता हुआ बोला. मैं टीवी ज़रूर देख रहा था पर मेरा दिमाग़ आगे की प्लानिंग मे मशगूल था. मैने घड़ी देखी तो पाया कि 10 मिनट गुजर चुके है बुढ़िया को अपने रूम मे गये.. “क्या बुढ़िया सो चुकी होगी..क्या यही सही मॉका है” मैने अपने आप से सवाल किया. और फिर आख़िर वो पल आया और मैं हिम्मत जुटा सोनाली के रूम की तरफ बढ़ा मेरा दिल अब बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था दोस्तो ये सब करते हुए मुझे जितना रॉंमांच हो रहा था उसको मैं शब्दो मे बया नही कर सकता. सोनाली के रूम तक पहोच्ते पहोच्ते ही मेरा लोड्‍ा आधा (हाफ) खड़ा हो चुका था मेरे हाथ ना जाने क्यू काप से रहे थे और इन्ही कपते हाथो से मैने सोनाली के रूम का दरवाजा खोला. सोनाली सोती हुई किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी..अब वो पेट के बल सोई हुई थी..ना जाने लड़कियो को पेट के बल सोना क्यो अच्छा लगता है..सोनाली ने बादामी रंग का सूट और उसी रंग की पाज़ामी पहनी हुई थी..उल्टे लेटने से सोनाली की गांद काफ़ी उभर गयी थी..ये सब देखते देखते मैं पागल सा होने लगा था.फिर मैं ज़्यादा समय गवाए बिना कमरे मे घुस गया और फटाफट से अपने कपड़े उतार पूरा नंगा हो गया..किसी अंजाने घर मे किसी जवान लड़की के साथ उसी के रूम मे नंगा होने पर मस्ती की लहर जो मेरे बंदन मे उठी मैं उसको आपसे कैसे बयान करू दोस्तो.. मैं धीरे धीरे सोनाली के बॅड की तरफ़ बढ़ा . जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे ही मेरे दिल की धड़ कन तेज हो ती जा रही थी. मेरे लिए तो मानो वक्त जैसे थम सा गया था मुझे ना तो कोई शोर ना कोई और चीज़ सुनाई दे रही थी बस सिर्फ़ सोनाली की वो उभरी हुई गांद नज़र आ रही थी. और फिर वो वक्त आया जब मैने अपने काँपते हाथो को सोनाली की गांद पर रखा . अपनी कोरी गांद पर मेरा हाथ लगते ही सोनाली का बदन हल्का सा कपा पर फिर दोबारा शांत हो गया. एक लड़के का हाथ अपने गुप्तांगो पर लगने पर सोनाली का बदन अपने आप ही हरकत कर रहा था. पर दोस्तो सोनाली के चूतादो का वो नर्म अहसास पाते ही मानो मेरी पूरी बॉडी का खून मेरे लंड मे आ कर बहने लगा था और वो फूल कर इतना मोटा हो गया था कि अगर मैं उसे बाहर ना निकालता तो मानो वो फाट ही जाता .. मैने फटाफट अपनी पॅंट और अंडरवेार उतारे और एक हाथ से अपना लंड मसल्ने लगा और दूसरे से सोनाली के चूतद्ड . कपड़ो के उप्पर से सोनाली की पॅंटी को महसूस कर रहा था..मैं धीरे धीरे अपने आप पर काबू खोने लगा ..पर मन मे कही ये चल रहा था कि कही सोनाली जाग ना जाए ….पर वो जागे जी कैसे उसने तो नींद की गोली ली हुई है…मेरे अंदर का शैतान बोला..ये जानने के लिए कि सोनाली गहरी नींद मे है मैने उसका राइट चूतड़ को ज़ोर से दबाया पर सोनाली ने कोई प्रतिक्रिया नही दी अब मुझे यकीन हो चला था कि वो गोली के नसे मे है और उठेगी नही ..फिर क्या था मैने फाटाक से उसकी गांद को नंगा किया और उसके नंगे चुतदो कस कस कर दबाने लगा..मेरा जोश इतना बढ़ गया था कि कई बार तो मैने उसके गोरे चूतादो पर काट भी खाया ..अब सीन ये था कि सोनाली की सलवार और पॅंटी उसके घुटनो मे थी और मैं ..उस हसीना को फूली हुई चूत को चाट रहा था…वा क्या स्वाद था ..दोस्तो एक कवारी चूत का रस जो नशा करता है वैसा नशा दुनिया की किसी शराब मे नही होता..जिन लोगो ने कुँवारी चूत का रस पिया है वो ये बात अच्छे से जानते होंगे..मैं हवस मे इतना पागल हो गया था कि मुझे ये समझ नही आ रहा था कि आगे मे क्या करू…समय बीतता जा रहा था बुढ़िया कभी भी सो कर उठ सकती थी और ये भी हो सकता था कि कोई और भी उनके घर पर आ जाय..इसी कशमकस मे पेट के बल लेती सोनाली के बदन पर चढ़ गया और अपना लंड उसके चूतादो के दरार मे फसा उनको अपने लंड से रगड़ने लगा..नशे मे मेरी आँखे आधी खुली थी और आधी बंद ..आज मैं पहली बार एक लड़की के बदन पर लेटा था..और लड़की भी जवान और खूबसूरत . अब मैने सोनाली की गर्देन को पीछे से चाटना शुरू कर दिया था और दोनो हाथो को नीचे कर उसकी चुचियो को सूट के उप्पर से ही मसलने लगा था. हालाकी ज़्यादा जगह नही मिली थी क्योंकि सोनाली पेट के बल लेटी हुई थी पर फिर भी मैं उसकी चुचियो की नर्मी महसूस कर रहा था और जितना हो सके उनको दबा रहा था. मेरा लंड तो सोनाली की चूत मे नही गया था पर उप्पर से धक्के लगाने से उसकी चूत ज़रूर फूलने लगी थी.. जोश मे सोनाली के बदन को अपने बदन से इतना रगड़ रहा था कि कमरे मे सोनाली के पलंग की आवाज़े गूंजने लगी थी..पर मुझे इस बात की कोई परवाह नही थी अगर उस वक्त कोई भी वाहा आ जाता तो भी मैं रुकने वाला नही था..तभी अचानक मेरा बंदन आकड़ा और लंड ने पानी छोड़ दिया ..मुझे ओरगाम हो रहा था और मैने सोनाली के बदन को इतना जोरो से जाकड़ लिया था कि नींद मे भी सोनाली के मूह से एक कराह निकल गयी थी.. अब मैं उसके बदन पर मुर्दो के तारह पड़ा था और मेरे लंड से निकला पानी सोनाली के चूतादो से होता हुआ उसकी कुँवारी चूत को गीला करता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था..मुझे कुछ होश नही था ..पर तभी दीवार पर लगी घड़ी से आवाज़ हुई और मुझे पता चला कि शाम के 4 बज चुके है .कही इस आवाज़ से बुधिया ना जाग जाय मैं फटाफट सोनाली के बदन पर से उठा और अपनी पॅंट और अंडरवेार पहन लिया..तभी मेरी नज़र सोनाली की नंगी गांद पर पड़ी .मेरे ज़ोर दार रगड़ने और मेरे धक्को से उसके गोरे गोरे चूतड़ कई जगह से लाल हो गये थे ..उसका सूट पर भी कई झुरिया पड़ गये थी ..थोड़ा और करीब जाने पर मैने देखा कि सोनाली की गर्देन पर दांतो के निशान है जो के शायद मैने ही जोश मे आकर दिए थे..खैर मैने फटा फट उसके कपड़े ठीक किए और उसकी सलवार उसको दोबारा पहना दी ..और फिर मैं जल्दी से नीचे आ कर बैठ गया….

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