अंजाना रास्ता सेक्स कहानी हिन्दी

हुआ ये था कि जैसे ही अंकल अपना लंड दीदी की चूत मे डालने वाला था तभी दीदी का हाथ साइड मे रखी शराब की बॉटल पर आ गया और उन्होने वो बॉटल अंकल के सर पर दे मारी थी…दीदी फटाफट अपनी पाजामी पहनने लगी…मैं भी अब वकाई मे घबरा गया था..सो मैं भी अपने छुपी हुई जगह से बाहर आगेया और दीदी की तरफ़ बढ़ा. मैं जैसे ही झुगी के गेट पर पहुचा..दीदी बाहर आ रही थी फिर वो मेरे पास आई और बोली अनुज ज़ल्दी चल यहा से…मैने कुछ और नही पूछा और फिर फटाफट हम वाहा से निकल कर अपने घर आ गये..पर घर आते आते भी मेरे दिमाग़ मे एक सवाल चल रहा था..कि..आख़िर वो कोन था जो दरवाजे से अंदर झाक कर ये सब देख रहा था…. “अरे अंजलि तुम्हारा सरवे कैसा रहा आज” चाचा जी रोटी का टुकड़ा तोड़ते हुए बोले. हम सब रात का खाने खा रहे थे. “जीई…जी अच्छा था” दीदी हकलाती ज़बान से बोली. “अरे बेटा तुम इतनी परेशान क्यू लग रही हो..तबीयत तो ठीक है ना तुम्हरी’ चाचा जी दीदी की तरफ़ देखते हुए बोले. “हाँ..हॅंजी..पापा..जी.. बस मुझे थोड़ा सा सर मे दर्द है” दीदी नज़रे नीची करती हुई बोली. ” और तुम्हारी गर्दन पर ये निशान कैसा है” चाचा जी दीदी की गर्दन के निचले हिस्से पर पड़े निशान की तरफ़ इशारा करते हुए बोले. आप लोग तो अब समझ ही गये होंगे के वो निशान किसने दीदी को दिया था. दीदी तो मानो सुन्न ही पड़ गयी थी. “जी वो एयेए…वाहा काफ़ी गंदगी थी इसी वजह से कोई कीड़ा काट गया था” दीदी निशान को अपने हाथो से छुपाते हुए बोली. मैं ये सब चुप चाप देख रहा था और खाना खा रहा था. ” भाई. मैने ये भी सुना है तुम्हरे छोटे भाई ने तुम्हारी बहुत मदद की आज सरवे मे ‘ चाचा जी मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखते हुए बोल रहे थे. “हा.. बहुत मुदद की मैने ..उस शराबी गंदे बुढ्ढे को अपने जवान बहन थाली मे परोस कर दे दी थी आज…बलात्कार होता होता बचा था आज दीदी का..”…मैने मन मन मे अपने आप से कहा.और फिर मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया. दीदी सूप पीते पीते मुझे देख रही थी. मानो कि जान ना चाहती हो कि मैं क्या जवाब दूँगा.. “पापा मेरे सर मे बहुत दर्द हो रहा है मैं दवाई ले कर सोने जा रही हू” दीदी नॅपकिन से अपना हाथ पोछ्ते हुए बोली और उठी कर उपर रूम मे चली गयी कुछ देर बाद मैं भी सोने के लिए रूम मे आ गया. “अनुज तुझसे एक बात पूछूँ..प्ल्स सच सच बताना” दीदी की आवाज़ मेरे कानो मे आई. रूम की लाइट्स बंद थी और रात के शायद 11 बज रहे थे. मैं डर गया और सोचने लगा कही दीदी जानती तो नही है कि मैने उनका वो नंगा नाच देखा है. “आ..हा हाजी दीदी पूछो” मैं झिझकते हुए बोला. “तूने इतनी देर क्यो लगाई थी वाहा आने मे..और तू कब वापस आया था” दीदी भी थोड़ा हिचकिचाते हुए बोली “मैं तभी तभी ही आया था दीदी”मैने फटाक से जवाब दिया. “पर तेरे पास कोल्ड ड्रिंक तो नही थी” दीदी बोली अब मैं फस गया ….मैने अपने आप से कहा . पर फिर मैने समय की गंभीरता को समझते हुए जवाब दिया ” दीदी सभी दुकाने बंद थी ..मैं बहुत घुमा पर कही भी कोल्ड ड्रिंक नही मिली थी. सो खाली हाथ वापस आ गया .” दीदी को अब शायद यकीन हो गया था कि मैने वो सब नही देखा था क्योंकि फिर दोबारा उन्होने कोई सवाल नही किया. और दिन की बात याद करते करते मुझे ना जाने कब नींद आ गयी पता ही ना चला.

अगले दो दिन नॉर्मल रहे और कुछ ख़ास्स नही हुआ..तीसरे दिन मैं स्कूल से घर आया तो मुझे किसी के ज़ोर ज़ोर से हस्ने की आवाज़ आई. आवाज़ उपर रूम से आ रही थी..मैं उपर जाने लगा . रूम मे पहूच कर मैने देखा की चाची , दीदी और रेखा भाभी रूम मे बैठी है और किसी बात पर हसी मज़ाक चल रहा है. रेखा भाभी हमारे पड़ोस मे ही रहती थी. रूप रंग उनका भी कुछ कम ना था उनकी उम्र 30-32 के आस पास होगी. उनके पति जतिन किसी MणC कंपनी मे काम करते थे और अक्सर वो काम के सिलसिले मे बाहर जाते रहते थे. मैने रेखा भाभी के बारे मे कुछ बाते सुनी थी कि उनका चाल चलन अच्छा नही है पर मुझे ऐसा कुछ नही लगता था क्योंकि वो मुझसे बड़े अच्छे से बात करती थी और कभी कभी हसी मज़ाक भी कर लेती थी. उनके रूप रंग को देख कई औरते उनसे जलती थी शायद उन्होने ही ये अफवाह फैलाई थी. खैर हमारे घर पर कोई भी इन अफवाहॉ पर ध्यान नही देता था सो हमारे घर भाभी का आना जाना लगा ही रहता था. “आओ जी मिस्टर शर्मीले कैसे हो…” रेखा भाभी मुझे चिड़ाते हुए बोली. अब तीन्नो लोग मेरी तरफ़ देख कर हस्ने लगे. मैं शर्मा गया और अपना स्कूल बॅग अपने बॅड पर रखने लगा.. “भाभी आप मेरे भाई को ऐसे मत चिड़ाया करो…देखो उसका मूह टमाटर की तारह लाल हो गया है ” दीदी मुस्कुराते हुए मेरी वकालत करते हुए बोली. “ओह..हो क्या प्यार है भाई बेहन का..देखो जी कही मेरी नज़र ना लग जाय” रेखा भाभी अपने आँखे मतकाते हुए बोली. “अरे भाई मैं चलती हू ….. अनुज का खाना लगा दो..बेचारा कितना भूका लग रहा है….” चाची वाहा से उठती हुई बोली. फिर चाची नीचे चली गयी और मैं भी नीचे बाथरूम मे फ्रेश होने के लिए चला गया. मैं खाना खा रहा था . दीदी और भाभी उप्पर रूम मे ही थी. तभी चाची मेरे पास आई और मेरे सर को प्यारसे सहलाते हुए बोली ..”बेटा अनुज मैं शर्मा आंटी के साथ शॉपिंग पर जा रही हू..उनकी बेटी की शादी है ना अगले हफ्ते” फिर चाची चली गयी. मैं खाना खाकर टीवी देखने लगा फिर तकरीबान 10 मिनट बाद ब्रेक हुआ तो मुझे याद आया कि मुझे कुछ नोट्स की फोटोकॉपी कराना है सो मैं फटा फॅट उपर रूम की तरफ़ बढ़ चला. रूम का दरवाजा थोड़ा झुका हुआ था. रूम से आती धीमी धीमी आवाजो ने मेरा ध्यान खिचा “अरे उसका बहुत लंबा है..” भाभी की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी. “सच मे …कितना ..लंबा हाई” दीदी की आवाज़ धीरे से आई. अब मैं वही रुक गया और कान लगाकर कर सुनने लगा. “तेरी कभी थुकाइ हुई है ..” भाभी दीदी की तरफ़ देखते हुए बोली . “थुकाइ …कहा पर ” दीदी कन्फ्यूज़ होती बोली तभी रेखा भाभी मुस्कुराइ और उन्होने पाजामी के उपर से दीदी की चूत को अपने हाथो से दबा दिया और बोली ” यहा पर ” दीदी को तो मानो करेंट लग गया अपनी इज़्ज़त पर इसतरह से हमला होते देख वो सकपका गयी और भाभी का हाथ अपनी चूत से हटाती हुई बोली ” क्या करती हो भाभी….नीचे मम्मी और अनुज है” “अरे नीचे ही तो है ना …तू डरती बहुत है..अरी मैं जब तेरी उम्र की थी तो मुहल्ले के सारे मर्दो का लंड खड़ा करवा कर रखती थी. इतनी भरी जवानी को ऐसे मत बर्बाद कर अंजलि…” “अच्छा अपनी फिगर बता तू..” भाभी अपने सूट पर से चुननी को हटा साइड मे रखते हुए बोली. “जी..34-26-36…” दीदी बोली “वाह वाह…तुझे मेरी फिगर पता है क्या है….” भाभी बोली “जीई..नही..और मुझे जाननी भी नही है..” दीदी थोड़ा घबराती हुई बोली “अरे तू डरती क्यू है मैं तेरी बड़ी बहन की तरह हू…मुझसे तू बाते शेर नही करेगी तो किससे करेगी पग्ली..”रेखा भाभी दीदी को कन्विन्स करने के कोशिश करते हुए बोली. मुझसे अब रहा नही जा रहा था और मैने अंदर झाँकना शुरू कर दिया था साइड से चुपके चुप्पके. रेखा भाभी और अंजलि दीदी आमने सामने बैठी थी बेड पर . “तेरे इन्न आमो को किसी ने दबा दबा कर इनका रस पीया है क्या” भाभी ने अपने दोनो हाथो को टी-सीर्ट के उप्पर से दीदी की तन्नी हुई दोनो चुचियो पर रख दिया . घबराहट और शर्म से अपने आप ही दीदी के दोनो हाथ अपने खाजने की रक्षा करने के लिए उठ गये और दीदी ने भाभी का हाथ पक्कड़ लिया.. “अब ये मत बोलना कि तूने इनको अभी तक नही मसलवाया है” भाभी ताना सा मारते हुए बोली. दीदी को शायद अब जलन होने लगी थी रेखा भाभी की इस बात पर और उनके दिमाग़ मे वो बॅंक वाली और उस बुढ्ढे अंकल वाली बात आ गयी. पर वो ये बात भाभी को कैसे बताती सो कसमसाकर चुप हो गयी. रेखा भाभी के हाथ अब भी अंजलि दीदी की दोनो चूचियो पर रखे थे. “चल कोई बात नही मैं तो हू ना तेरी हिल्प के लिए” और भाभी ने दीदी की चुचियो को टी-शर्ट के उप्पर से सहलाना शुरू कर दिया. दीदी का गोरा चेहरा फिर से लाल पड़ने लगा था. हलाकी दूसरी लड़की का हाथ अपने बदन पर ईस्तरह से चलते देख उनको बड़ा आजीब लग रहा था पर इस से मस्ती की जो लहर पैदा हो रही थी वो सीधा उनकी टाँगो के बीच छिपी उनकी योनि मे खलबली मचाने लगी थी. “भाभी..बस करो…नीचे सब है…आहह.इसस्स्शह..…” दीदी की आँखे तो मस्ती मे बंद होने लगी थी पर उनका दिमाग़ उनको बार बार ये बता रहा था कि वो लोग अकेले नही है. “रुक मैं दरवाजा बंद करते हू” भाभी बेड से उठती हुई बोली. मुझमे भी मस्ती छाने लगी थी और इस मस्ती की खुमारी थोड़ी अलग थी क्योंकि इस बार दीदी के साथ कोई आदमी ना होकर एक औरत थी..रूम का दरवाजा बंद हो गया..पर वो कहते है ना जहा चाह वाहा राह..मुझे भी अंदर देखने के लिए के होल मिल गया था.मैने फटाफट अपना लंड बाहर निकाला और उस पर अपना हाथ फिराते हुए अंदर झाँकने लगा…अंदर का सीन देखते ही मेरा आधा खड़ा लंड पूरा खड़ा हो गया..भाभी ने दीदी के दोनो हाथ अपने खरबूजे के आकार वाली चूचियो पर रखे हुए थे और खुद के हाथ दीदी के आम के आकार वाली चुचियो पर.. “दबा इन्हे..” भाभी बोली “ये कितनी बड़ी और नरम है भाभी” दीदी भाभी की चूचियो को दबाती हुई बोली “अरे इन पर ही तो आदमी लोग मरते है ….औरत के बदन पर यही तो आदमी को सबसे ज़्यादा उत्तेजित करती है ” भाभी दीदी की अब तक मस्ती मे आकर फूल चुकी चूचियो को थोड़ा ज़ोर से दबाते हुए बोली “आपके पति तो बाहर रहते है…तो….एयेए..आप…” दीदी शायद कुछ बोलन चाहती थी पर चूप हो गयी. “शर्मा मत ….तो मैं किस से चुदवाती हू…यही पूछना चाहती है ना तू..” भाभी के चेहरे पर हवस की मस्ती छाने लगी थी. चुदाई का नाम सुनते ही दीदी के बदन मे एक झुरजुरी सी हुई..और उनकी चूत पन्याने लगी.. “हा जीई…” दीदी शरमाती हुई बोली “देख किसी को बताना मत.. वो हमारी गली के कोने मे जो बिजली की दुक्कान है ना….जो आदमी वाहा बैठता है…क्या नाम है उसका….हा …जावेद…उससे करवाती हू…साला बहुत लाइन मारता था मुझ पर…” भाभी बोली “क्याअ…पर .पर वो तो मुस्लिम है…और आप ब्रामिन” दीदी चोकते हुए बोली. “अरे पगली तुझे क्या पता ..अरे मुस्लिम आदमी का लंड बहुत तगड़ा होता है…बड़ा मस्त कर कर चुदाई करते है वो… ” और भाभी ने इसी के साथ अपना एक हाथ नीचे कर अंजलि दीदी के पाजामे मे छुपी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे वो उसको सहलाने लगी. दीदी की फिर से आँख बंद हो चुकी थी और अचानक ही उनके मूह से निकल गया..”कितना लंबा है जावेद का…..” दीदी की ये बात सुनते ही रेखा भाभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी और उन्होने अपना हाथ जो कि दीदी की चूत के साथ खेल रहा था पाजामे के उप्पर से अपनी मुथि मे कस कर पकड़ लिया और बोली “पूरा गधे (डोंकी) के जितना है …9 इंच का “.घोड़ी बन-ना अंजलि दीदी को रोमांचित भी कर रहा था और आगे भाभी क्या करने वाली है उसको सोच सोच कर उनकी लटकती चुचिया सख़्त हो गयी थी और निपल्स खड़े होने लगे थे…रेखा भाभी मन ही मन खुश हो रही थी कि वो दीदी को सिड्यूस करने मे कामयाब हो रही है. अंजलि दीदी घोड़ी बनी अपनी चूत को रेखा भाभी के मुट्ठी मे दबा होने से दीदी के मूह से कराह निकल गयी”अहह….इस्सह” “तुझे बटाऊ वो मुझे कैसे चोदता है “. रेखा भाभी भी मस्ती मे आ गयी थी. दीदी ने कोई जवाब नही दिया और देती भी कैसे उन पर तो सेक्स की खुमारी छाने लगी थी.तब रेखा भाभी खड़ी हुई और उन्होने अंजलि दीदी को घोड़ी(फीमेल हॉर्स ) बना दिया . अब रेखा भाभी दीदी के साथ क्या करेंगी ये सब सोचते सोचते मैं अपने फूल कर सख़्त होते लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा..दोस्तो मैं जो मस्ती फील कर रहा था उस वक्त मे आपको शब्दो मे बता नही सकता…. बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी. उनके उभरे हुए कूल्हे मेरे खड़े लंड को पागल कर रहे थे. मेरा मन कर रहा था कि अभी अंदर जाकर उनकी गांद मे लंड डाल कर उनकी सेक्सी गांद मार लू. अब रूम का सीन्न कुछ ऐसा था कि दीदी झुकी हुई घोड़ी बनी खड़ी थी बॅड पर और रेखा भाभी दीदी की सेक्सी बॉडी को निहारती निहारती अपने हाथ को अपनी सलवार के उपर से अपनी चूत पर रख उसको सहला रही थी..मुझे भाभी को ये सब करते देख यकीन हो गया था कि दीदी का बदन अदमिओ को ही नही बल्कि औरतो को भी उत्तेजित करता है. “इतनी सेक्सी है तू …ना जाने अब तक तू चूदी क्यो नही….क्या तेरा कोई बॉय फ्रेंड नही है..” भाभी अपनी चूत को थोड़ा ज़ोर से दबाते हुए बोली “नही ..भाभी..” दीदी बंद दरवाजे की तरफ देखते हुए बोली..मानो कि ये पक्का करना चाहती हो कि वाहा कोई उन्हे देख तो नही रहा है. पर उनको क्या पता था कि कोई और नही बल्कि उनका छोटा भाई ही उनके ये कारनामे देख देख कर मूठ मार रहा है. “ज़…ज़ल्दी..बताओ भाभी…जावेद कैसे करता है..” दीदी घोड़ी बने बने ही पीछे मूड कर देखती हुई बोली. “बड़ी बेचैन हो रही है…रानी..सच मे अगर मैं कोई मर्द होती तो तुझे आज जम कर चोदती” भाभी दीदी की तरफ बढ़ती हुई बोली. फिर वो दीदी के पास बेड पर चढ़ कर घुटनो के बल खड़ी हुई और दीदी की कमर को सहलाते हुए बोली. ” जावेद मुझे घोड़ी बना कर ऐसे मेरी कमर सहलाता है…” “फिर ऐसे वो मेरे चूतड़ को दबाता है” भाभी अब दीदी के उभरे हुए चुतदो को दबाने लगी.. दीदी की तो मज़े मे आँखे बंद हो गयी उनके चूतड़ अपने आप ही आगे पीछे हिलने लगे.. “आअहह..इसस्शह..भाभी….फिर क्या करता है वो…” दीदी अपने बदन मे करेंट महसूस करते हुए बोली. फिर रेखा भाभी दीदी के ठीक पीछे आ गयी . “फिर वो इसको अपने हाथो से सहला सहला कर मसलता है ” भाभी दीदी की चूत को पाजामा के उपर से सहलाते हुए बोली.. रेखा भाभी अब कभी कभी अंजलि दीदी की चूत को अपने मुथि मे भर कर कस कर दबा भी देती थी.. “और फिर वो पता है क्या करता है..” रेखा भाभी दीदी को तड़पाती बोली “हाई…रेखा भाभी अब बोलो भी….” दीदी बदहवासी मे अपने झुके बदन को हिलाती बोली. इसके के साथ भाभी ने पीछी से दीदी के मस्ती मे थिराक्ते चुतदो को उनके कपड़ो के उपर से ही चाटना शुरू कर दिया और अपने हाथो से वो अपनी चूत को अपने सलवार के उप्पर से ही सहलाने लेगिइ. “आहह…भब…भाभी…इष्ह” भाभी की ज़बान अपने चूतड़ की दरारो पर महसूस करते ही दीदी के होठ खुल गये और एक तेज सिसकारी उनके खुले मूह से निकल गयी. दोस्तो जितना ये नया अनुभव अंजलि दीदी के लिए अनोखा था उसी तारह मेरे लिए भी. एक औरत एक लड़की की चूत चाट रही थी हलाकी वो सिर्फ़ कपड़ो के उपर से ही चाट रही थी फिर भी..मेरे लिए ये नज़ारा बहुत अनोखा था. दोनो हसिनाओ को सेक्स की ये अनोखी मस्ती चढ़ चुकी थी..और फिर अचानक मैने देखा कि रेखा भाभी अब दीदी को कमर से पकड़ कर खड़ी हुई और फिर अपने अगले हिस्से ( यानी अपनी चूत को ) अंजलि दीदी की गांद पर रगड़ने लगी.. “फिर जावेद मेरे साथ ऐसे करता है..” और भाभी अपनी चूत को जोरो से दीदी की गांद पर रगड़ने लगी’

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