अजब प्रेम की गजब कहानी

चेतावनी ………..दोस्तो ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है

डिंपल, ओ डिंपल ये अवी कहाँ गया है आज उसको कहा था मैने की मेरी वर्दी मे प्रेस कर देना लेकिन मुझे कही दिखाई नही दे रही है, अरे समझ मैं नही आता कि जब उसको नही करना था तो जाकर धोबी के यहाँ से करवा लाता पर इस नालयक को आवारा गर्दि के अलावा कोई कम नही है, किसी दिन मेरे हाथ से पिट जाएगा और कुछ नही,

डिंपल- अरे पापा उसने प्रेस करके आप की ड्रेस अलमारी मे रख दी थी ये लो, आप तो बेकार मे बेचारे के उपर नाराज़ हो रहे है,

अनिल- अरे अपने इस बेचारे को समझा कि घूमना फिरना बंद करे इस बार 12थ की बोर्ड एग्ज़ॅम है अगर फैल हुआ तो कह देना कि इस घर मे आने की ज़रूरत नही है,

डिंपल- पापा हो जाएगा पास आप क्यो चिंता करते हो

अनिल- अरे क्या ना चिंता करू बड़ी मुश्किल मैं 10थ जैसे तैसे पास हुआ है और अब मैं कहता हू कि पोलीस भरती के लिए थोड़ी दौड़ धूप कर ले मैं एस पी साहेब से बात करके कोशिश कर लूँगा पर इतना नालयक है सुबह 10 बजे सो कर उठता है अब तू ही बता कौन भरती करेगा ऐसे लाड़ साहेब को, कहता है पापा मुझे नही बनना पोलीस वाला, सबसे गंदी नौकरी है वह, अब तू ही उसे कुछ समझा कमाई तो पोलीस वाले की ही खा रहा है और पोलीस की नौकरी को गंदा कहता है,

डिंपल- ऑफ हो पापा अब वह पोलीस मे नही जाना चाहता तो ना सही कुछ और कर लेगा

अनिल- क्या खाक कर लेगा 10 मैं थर्ड डिविषन पास हुआ है और 12 पास होने के कोई ठिकाने नही है, आज कल 80-80 पर्सेंट वालो को नौकरी नही मिलती इस 40 पेसेंट वाले को कोई चपरासी भी नही बनाएगा,

डिंपल- आपकी चाइ ठंडी हो रही है जल्दी पी लो

अनिल चाइ पीते हुए अपने पेर को जूते मे डाल कर, अच्छा डिंपल मैं चलता हू दो दिन बाद इनस्पेक्षन है थाने मे जाकर देखता हू डूटी कहाँ लगी है तू अवी से कह कर मेरे बाकी के कपड़े प्रेस करवा देना, अच्छा मैं जा रहा हू और फिर अनिल घर से निकल जाता है और डिंपल गाना गुनगुनाते हुए घर के कम मे लग जाती है,

वह अपना काम ख़तम करके अपने कॉलेज जाने के लिए दरवाजे तक पहुचती है तभी मनोज नाम का लड़का भागता हुआ उसके दरवाजे के पास आकर

मनोज- हॅयन्फ्ट हुए डिंपल दीदी, डिंपल दीदी,

डिंपल-घबरा कर क्या मनोज इतना घबराया हुआ क्यो है,

मनोज- दीदी वो अवी किसी लड़के को साइकल की चैन ही चैन से बुरी तरह मार रहा है

डिंपल- घबरा कर कहाँ

मनोज- वो सामने वाले चौराहे पर

डिंपल मनोज को साथ लेकर तू चल मेरे साथ और फिर डिंपल दौड़ लगा कर वहाँ पहुचती है तब तक वहाँ कोई नही होता है,

डिंपल- कहाँ है

मनोज- दीदी अभी इसी जगह अवी मार रहा था औ एक दूसरे लड़के से पूछते हुए क्यो अभी एक लड़का यहाँ किसी को मार रहा था ना,

लड़का- हाँ मार रहा था लेकिन पोलीस की गाड़ी को देख कर भाग गया और जो मार खा रहा था वह भी उठ कर भाग गया

उसकी बात सुन कर डिंपल अपना माथा पकड़ते हुए हे भगवान क्या करू इस लड़के का, कही पापा को पता लगा तो आज अवी की खेर नही है,

डिंपल वापस घर आकर अपने आप से बाते करती हुई, कितनी देर हो रही है अभी तक खाना भी नही बन पाया और फिर आज 11:30 पर कॉलेज मे प्रॅक्टिकल भी है और उपर से इस अवी का कोई ठिकाना नही स्कूल कह कर जाता है और फिर कही ना कही लड़ाई झगड़ा करता हुआ नज़र आता है, अगर यह इस साल 12 मे फैल हुआ तो पापा तो ज़रूर इसे घर से निकाल कर ही मानेगे, अभी कुछ देर मे ही स्वीटी भी आती ही होगी, चलो आज दाल चावल बना कर ही अवी के लिए रख देती हू पापा का तो कोई ठिकाना ही नही है वह कब आएगे और फिर डिंपल जल्दी से सब काम निपटा कर जैसे ही अपने कपड़े चेंज करने के लिए घर का गेट लगाने जाती है उसे सामने से अपनी स्कूटी मे स्वीटी आते हुए दिखाई देती है,

स्वीटी- गाड़ी खड़ी करती हुई ओ मेडम अभी तक तुम्हारा मेकप ही हो रहा था क्या आज कॉलेज जाने का इरादा नही है या फिर आज एमसी मे हो, रोज के रोज लेट आख़िर कब तक तेरे चक्कर मे मुझे भी लेट होना पड़ेगा,

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस दो मिनिट स्वीटी तू बैठ मैं अभी कपड़े बदल कर आती हू और स्वीटी वही चेर पर बैठ जाती है, डिंपल जल्दी से अपने कपड़े चेंज करने के बाद बाहर आती है और अपना बॅग उठाते हुए चल स्वीटी

स्वीटी- मुस्कुरा कर क्या बात है आज तो मेडम जीन्स और टीशर्त फसा कर जा रही है अगर किसी लोंडे ने तुम्हारी यह गदराई जवानी और भारी चूतादो को दबा दिया तो फिर मुझसे मत कहना

डिंपल-मुस्कुराते हुए, क्यो तू गदराई नही है, तेरे भी चूतड़ क्या कम फैले और उठे हुए है और उपर से जद्दि की साइज़ की तेरी यह स्कर्ट ज़रा खुद को देख आधी नंगी तो वैसे ही लग रही है और उस पर तेरी मोटी-मोटी जंघे पूरी नज़र आ रही है, लड़के मुझे नही तुझे पकड़ ले तो फिर मुझसे मत कहना,

डिंपल-चिंता मत कर तेरी मुराद भी पूरी हो जाएगी जब तू फस्ना चाहती है तो तुझे कोई नही रोक सकता

स्वीटी- मेरी जान कभी-कभी उल्टा हो जाता है जो फस्ना चाहती है उसे कोई नही फसाता और जो नही फस्ना चाहती है उसे ज़रूर कोई ना कोई फसा लेता है, कही ऐसा ना हो कि मुझसे पहले तुझे ही कोई फसा ले

डिंपल- अरे डिंपल को फसाने वाला अभी तक कोई पेदा नही हुआ है

स्वीटी- अरे मेरी जान वह पेदा भी हो गया होगा और तुझे फसा भी लेगा, या तो वह अभी तक तुझसे मिला नही होगा या फिर अगर वह तुझसे मिल लिया होगा तो तेरी गदराई जवानी पर उसकी नज़र नही पड़ी होगी

डिंपल- चल ठीक है देखते है तू भी यही है और मैं भी सब पता चल जाएगा कि कौन फस्ता है और कौन नही

स्वीटी- अच्छा एक बात बता कभी तू मूठ मारती है कि नही

डिंपल-मुस्कुराते हुए स्वीटी अब बंद भी कर अपनी बकवास

स्वीटी- अरे बता ना मुझसे क्यो शर्मा रही है

डिंपल- मुस्कुराते हुए नही मैने ऐसा काम कभी नही किया,

स्वीटी- अरे कुछ तो करती होगी जब तेरा मन करता होगा

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस ऐसे ही थोड़ा बहुत अपने हाथ से सहला लेती हू

स्वीटी- यार तू तो गजब है मैं तो जब 10 मे थी तब से ही अपने भैया और भाभी की चुदाई देख चुकी थी और तब से कई बार अपनी चूत मे ना जाने क्या-क्या ट्राइ कर चुकी हू सच जब आख़िरी मे निकलता है ना तो बहुत मज़ा आता है पता नही जब लड़को का मोटा लॅंड घुसता होगा तो कितना मज़ा आता होगा, मेरे पास तो कई सारी सेक्सी किताब भी है अगर तुझे चाहिए तो दे सकती हू

डिंपल- अपने पास ही रख अपनी किताब मुझे नही

देखना वैसे भी मेरे घर मे मेरा भाई और पापा रहते है कही किसी ने तेरी गंदी किताबो को देख लिया तो मुझे घर से ही निकल देंगे

स्वीटी- यार तू डरती बहुत है, अच्छा एक काम कर कंप्यूटर ही खरीद ले उसमे भी नेट चला कर तू मज़ा ले सकती है

डिंपल- देखा जाएगा अभी तो मुझे पढ़ने से ही फ़ुर्सत नही मिलती है उपर से पूरे घर का काम भी मुझे अकेले ही करना पड़ता है, इन सब के बाद टाइम ही कहाँ मिलता है इन सब बातो के लिए

स्वीटी- अच्छा तेरे घर मे तो दो ही बेडरूम है तू किसके साथ सोती है

डिंपल- मैं और अवी एक ही रूम मे सोते है मगर तू यह सब क्यो पूछ रही है

स्वीटी- मतलब तुझे अगर मूठ मारना हो तो तुझे बाथरूम मे ही जाना पड़ेगा तू तो अपने बेड पर पूरी नंगी होकर भी नही सो सकती है

डिंपल- क्यो तू अपने बेड पर रात को नंगी होकर सोती है क्या

स्वीटी- हाँ मैं तो कब से रोज रात को पूरी नंगी होकर ही सोती हू जब तक मैं अपनी चूत और दूध से पूरी नंगी होकर खेल नही लेती हू मुझे तो नींद ही नही आती है

डिंपल- और तू अपने भैया और भाभी के रूम मे भी झाँक कर देखती है ना

स्वीटी- हाँ मुझे उन दोनो को नंगे होकर चुदाई करते देखने मे बहुत मज़ा आता है

डिंपल- तुझे शर्म आना चाहिए ऐसी हरकते करते हुए

स्वीटी- अरे इसमे शर्म की क्या बात है, अगर तू किसी को चोद्ते हुए देखती तो ऐसी बात नही करती तू नही जानती कितना मज़ा आता है जब कोई किसी को चोद्ता है और हम अपनी चूत सहलाते हुए उन्हे चोद्ते देखते है

डिंपल- मतलब तू अपने भैया का लंड देखती है और उत्तेजित होती है

स्वीटी- अरे तो इसमे ग़लत क्या है मुझे अच्छा लगता है तो मैं देख लेती हू

डिंपल- फिर तो तुझे अपने भैया से भी चुदने का मन करता होगा

स्वीटी- देख यार मैने ऐसा कभी सोचा तो नही पर हाँ यह ज़रूर सच है की जब मैं मूठ मारती हू तो कभी-कभी मुझे अपने भैया का मोटा लंड याद आने लगता है और ऐसा लगने लगता है जैसे मेरे भैया ही मुझे नंगी करके चोद रहे हो,

डिंपल- छि तू कितनी गंदी है स्वीटी,

स्वीटी- अरे अब इसमे गंदी बात क्या है क्या किसी का लंड देखना गंदी बात है

डिंपल- किसी का लंड देखना गंदी बात नही है पर अपने बड़े भाई के लंड को सोच कर अपनी कल्पना मे चुदना गंदी बात है

स्वीटी- देख डिंपल हर इंसान की सोच समय के साथ बदल जाती है पहले मैं भी अपने भैया के बारे मे कभी ऐसा नही सोचती थी लेकिन एक दिन जब ग़लती से मैने उनका मोटा लंड देख लिया तो धीरे-धीरे मेरी सोच भी चेंज हो गई और अभी तुझे ऐसा लगता है कि यह ग़लत है हो सकता है कभी तू भी अपने भाई का लंड देख ले और तुझे उसके लंड से चुदने का मन होने लगे

डिंपल- मैं तेरी जैसी चुड़क्कड़ नही हू कि अपने भाई के लंड से ही चुद जाउ

स्वीटी- सब समय की बाते है मेरी जान वक़्त कब क्या करवा दे कोई नही जानता

डिम्पलाए- चल अब चले यहा से क्लास का टाइम हो रहा है और फिर दोनो उठ कर क्लास मे चली जाती है,

अवी- और क्या रघु भाई क्या हाल है

रघु- अरे आओ अवी भैया क्या बात है आजकल तो आपको हमारी याद ही नही आती बहुत दिनो मे हमारी दुकान पर आए हो

अवी- अरे ऐसी बात नही है रघु भाई थोड़ा बिज़ी था फिर आज सोचा कि चल के रघु भाई के यहा पान ही खा लिया जाए

रघु- तो फिर आ जाओ यहा काउंटर को थोड़ा सरका कर बैठो मैं अभी आपको बढ़िया बनारसी पत्ता बनाकर खिलाता हू

अवी- अरे रघु भाई वो सामने वाली भाभी ने आज अपनी शॉप नही खोली कही गई है क्या

रघु- मुस्कुराते हुए, आप भी ना अवी भैया जब तक उसके मतकते चूतादो को देख नही लेते आपका दिल नही लगता है,

अरे उधर देखो क्या माल जा रहा है क्या गदराई गंद है साली की

अवी- अरे रघु भाई बहुत ही मोटी गंद है उसकी तो क्या मस्त औरत है कितने साल की होगी

रघु- अरे अवी हैया होगी कम से कम 35-40 की

अवी- यार रघु भाई अपने यहा की औरतो के चूतड़ गजब भारी-भारी हो गये है बहुत ही मज़ा दे अगर चोदने को मिल

जाए तो

रघु- अपने लंड को पेंट के उपर से मसलता हुआ, मुस्कुरकर अवी भैया हमे आपकी यही बात तो सबसे अच्छी लगती है

आप 5 मिनिट के लिए भी हमारी दुकान पर आते हो तो हमारा लंड खड़ा किए बिना नही मानते हो

अवी- अरे रघु भाई तुम्हारी दुकान है ही ऐसी जगह पर कि अगर मैं यहाँ दिन भर बैठा रहू तो यहा से इतने गदराए हुए

माल निकलते है क मेरा लंड दिनभर खड़ा रहे पता नही तुम कैसे चुपचाप पान लगाते बैठे रहते हो

रघु- लो पान लो भैया हमारी तो आदत पड़ गई है, कभी-कभी तो इतने गदराए और भारी चूतादो वाली औरते दिख जाती है

की लगता है साला पेंट मे ही पानी निकल जाएगा,

रघु- अच्छा अवी भैया मैने सुना आज तुमने फिर किसी की धुनाई करदी

अवी- हा यार बहन्चोद तीन चार दिन से मेरी दीदी को लाइन मारने की कोशिश कर रहा था अब नही मा चुदायेगा अपनी जम कर बजाया है साले को आज

रघु- लेकिन अवी भैया तुम्हे कैसे पता चला कि वह डिंपल दीदी के चक्कर मे था

अवी- अरे मैं दीदी के कॉलेज मे नही पढ़ता तो क्या हुआ मेरे खबरी उसके कॉलेज मे भी मौजूद है मुझे उस कॉलेज की

हर खबर रहती है कि कब क्या हो रहा है और फिर बस इसी साल की बात है रघु भाई अगले साल से तो मैं खुद उस कॉलेज मे

चला जाउन्गा फिर देखना तुम कैसे मैया चोद्ता हू इन बहन्चोदो की

रघु- और थानेदार साहेब की ड्यूटी कहाँ लगी है आजकल

अवी- अरे पापा का क्या है उनके संबंध तो सीधे एसपी से है वह जब चाहे जहा चाहे ट्रान्स्फर भी ले सकते है या ड्यूटी भी

बदल सकते है वैसे अभी तो वह हमारे थाना क्षेत्रा के ही इंचार्ग है

अच्छा रघु भाई पान के पैसे खाते मे लिख लेना अब मैं चलता हू दीदी वेट कर रही होगी,

रघु- अरे अवी भैया आप बार-बार पैसो का कह कर हमे शर्मिंदा ना किया करो, आपसे पैसा माँगता कौन है

अवी- नही रघु भाई दोस्ती अपनी जगह और धंधा अपनी जगह होना चाहिए, ठीक है अब मैं चलता हू

रघु- अच्छा अवी भैया फिर आना

अवी- अपने घर की ओर पेदल-पेदल चल देता है और घर पहुच कर

डिंपल- आ गये लाड़ साहेब, पूरा दिन आवारा गार्दी के अलावा भी कुछ काम रहता है आपके पास

अवी- मुस्कुराता हुआ, कहाँ दीदी मैं तो ट्यूशन गया था

डिंपल- अपने चेहरे पर गुस्सा दिखाते हुए, झूठ मत बोल, तू क्या मुझे पागल समझता है, मैं सब जानती हू दिन भर

यहाँ वहाँ फिरने के अलावा और कुछ नही करता है और उपर से स्कूल से भी गायब रहता है, और आज किसके साथ मारपीट

कर रहा था, है बोलता क्यो नही

अवी- अरे दीदी वह तो बस ऐसे ही छोटी मोटी बात थी तुम तो बेकार परेशान हो रही हो

डिंपल- मुझे क्या करना है, जब पापा पूछेगे तब बताना उनको कि छोटी बात थी या बड़ी, वैसे भी वह तुझ पर सुबह से

ही भड़क रहे थे

अवी- क्यो अब मैने ऐसा क्या कर दिया

डिंपल- देख अवी अब बहुत मौज मस्ती कर ली तूने डिसेंबर भी ख़तम होने वाला है सिर्फ़ दो महीने है तेरी एग्ज़ॅम के

थोड़ा पढ़ ले तो कम से कम पास तो हो जाएगा, नही तो समझ ले अगर फैल हुआ तो पापा तुझे घर से ही भगा देंगे

अवी- डिंपल का हाथ पकड़ते हुए ठीक है अगर पापा भागाते है तो मैं चला जाउन्गा पर तुम्हे भी मेरे साथ चलना

होगा, क्यो कि मैं पापा के बगैर तो रह लूँगा पर तुम्हारे बिना कैसे रह पाउन्गा

डिंपल- मुस्कुराते हुए उसके गाल खींच कर चल अब ज़्यादा बाते ना बना जा जाकर हाथ मूह धो कर आ मैं तेरे लिए खाना

लगाती हू, अवी हाथ मूह धोकर आ जाता है और डिंपल सोफे के सामने नीचे आसान लगा कर अवी की थाली रख देती है और

खुद सोफे पर टिक कर अपने दोनो पेर मोड़ कर सोफे पर रख लेती है और अवी आकर उसके सामने आसान पर बैठ कर खाना

शुरू करता है फिर खाते हुए डिंपल की ओर देखता है और अचानक उसकी नज़र डिम्पल की सलवार पर पड़ती है जो उसकी

फूली हुई चूत के पास से फटा हुआ था और उसकी सफेद कलर की पेंटी उसकी चूत को फुलाए हुए साफ नज़र आ रही थी,

अवी

एक पल के लिए उसकी दोनो जाँघो के बीच देखने लगता है और डिंपल की नज़र उसके उपर पड़ती है और वह एक दम से झुक

कर अपनी जाँघो की जड़ो मे देखती है और अपनी फटी सलवार से झाँकती उसकी फूली हुई चूत को कसे हुए सफेद पेंटी पर

पड़ती है और फिर वह जैसे ही अवी को देखती है दोनो की नज़रे मिल जाती है और डिंपल एक दम से अपनी नज़रे नीचे करती हुई

अपने पेर नीचे कर लेती है और अवी अपनी बहन के शरमाये हुए चेहरे को देख कर अपनी नज़रे वापस थाली पर लगा कर

खाने लगता है,

कुछ देर बाद अवी डिंपल को देखता है और उनकी नज़रे फिर मिल जाती है और इस बार डिंपल अपनी नज़रे हटा कर उठ कर अपनी

गदराई गंद मतकाती हुई किचन की ओर जाने लगती है और अवी अपनी एक नज़र डिंपल की कसी हुई गदराई जवानी पर मारता है

और उसकी नज़रे अपनी बहन के भारी-भारी मटकते हुए चूतादो पर पहली बार एक अलग अंदाज से पड़ती है और उसका हाथ

उसकी थाली मे ही रुक जाता है और वह अपनी दीदी के मस्ताने मटकते चूतादो को घूर-घूर कर देखने लगता है तभी

अचानक डिंपल पलट कर अवी को देखती है और उसे अपने मोटे-मोटे चूतादो को घूरता हुआ पकड़ लेती है और दोनो की

नज़रे एक बार फिर से मिल जाती है और अवी जल्दी से अपनी नज़रे नीचे करके खाने लगता है और डिंपल उसको घुरती हुई किचन

मे चली जाती है और कुछ देर बाद प्लॅट मे रोटी लेकर आती है इस बार अवी उसको आते हुए देखता है और उसकी नज़रे अपनी दीदी की मोटे-मोटे दूध को देखने लगती है डिंपल उसकी नज़रो को ताड़ जाती है और अपनी नज़रे नीचे किए हुए आकर झुकती है और उसकी थाली मे रोटी रखने लगती है, इस बार अवी बिल्कुल करीब से अपनी दीदी की कमीज़ मे से झँकते बड़े-बड़े दूध को

देखने लगता है और जैसे ही डिंपल की आँखो मे देखता है उन दोनो की नज़रे बिल्कुल करीब से मिल जाती है और डिंपल

अपने चेहरे पर थोड़ा गुस्सा दिखाती है और अवी उसकी आँखो से अपनी नज़रे हटा कर वापस उसके दूध पर एक सरसरी नज़र मारते हुए अपनी थाली की ओर देखते हुए खाने लगता है,

डिंपल जैसे ही पलट कर जाने लगती है अवी फिर से उसके भारी-भारी मटकते हुए चूतादो को देखने लगता है और डिंपल

फिर से उसे जैसे ही पलट कर देखती है अवी को अपने चूतादो को देखता हुआ पाती है और उसे गुस्से से घूर कर देखती हुई

किचन मे घुस जाती है लेकिन किचन मे घुसते ही ना जाने क्यो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है.

डिंपल किचन से आवाज़ लगा कर अवी और कुछ लेना है

अवी- नही दीदी बस हो गया

डिंपल- एक रोटी और ला दू

अवी- नही दीदी बस

डिंपल किचन से बाहर आकर क्या बात है आज ठीक से खाना क्यो नही खा रहा है

अवी- अपनी नज़रे थाली मे ही गढ़ाए हुए बस दीदी आज ज़्यादा भूख नही है

डिंपल- अच्छी बात है और डिंपल वापस किचन मे चली जाती जाई, अवी खाना खाने के बाद वही सोफे पर बैठ जाता है और

डिंपल अपने लिए खाना लेकर अवी की जगह पर बैठ कर खाने लगती है और अवी अपनी बहन के खूबसूरत चेहरे को देखने

लगता है और अपने मन मे सोचने लगता है- दीदी कितनी खूबसूरत और जवान दिखती है, आज तक मेरी नज़र दीदी के इस मनमोहक हुस्न पर पड़ी क्यो नही, कितने सुंदर गाल और होंठ है और दीदी की आँखे कितनी खूबसूरत और नशीली है जब

दीदी ने गुस्से से मुझे अपनी नशीली आँखो से देखा था तब एक दम से दीदी का चेहरा देख कर मेरा तो लंड खड़ा सा हो

गया था, एक अलग ही कशिश है दीदी की आँखो मे, कितनी प्यारी है दीदी को देख कर तो मुझे ऐसा लगता है कि उसे अपनी गोद

मैं बैठा कर उसे खूब प्यार करू, उसके पूरे चेहरे को, होंठो को पागलो की तरह चुमू, कितनी सुंदर और सेक्सी है मेरी

दीदी,

डिंपल- क्या देख रहा है अवी इस तरह मुझे घूर कर

अवी- अपने ख्यालो से एक दम से बाहर आता हुआ, कुछ नही दीदी, देख रहा हू कि आप कितनी जल्दी-जल्दी खा रही हो लगता है

आपको बहुत भूख लगी थी,

डिंपल- मुस्कुराते हुए हाँ रे, आज सुबह दाल चावल बना कर चली गई थी और खाना भी नही खाया था फिर कॅंटीन मे

ही थोड़ा बहुत नाश्ता किया इसलिए इस वक़्त तक तो मेरे पेट मे चूहे कूदने लगे थे, तभी डिंपल को थस्का लग जाता है

और वह खांसने लगती है और अवी दौड़ कर किचन से पानी लेकर आता है और डिंपल को दे देता है और डिंपल पानी पी कर

मुस्कुराते हुए, क्या बात है आज बड़ी सेवा कर रहा है अपनी दीदी की

अवी- दीदी मे आपकी किसी भी काम मे कोई हेल्प नही करता हू ना और दिन भर आवारा जैसे घूमता रहता हू, लेकिन कल से मे

आपकी सभी काम मे हेल्प किया करूँगा

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