अंजानी डगर सेक्स कहानी हिन्दी

यह कहानी है हम 3 दोस्तो की. बबलू, विक्की और मैं आशु (निकनेम्स), हम तीनो देल्ही के साउत-एक्स इलाक़े मे पले- बढ़े हैं. हम तीनो ही अप्पर मिड्ल क्लास से थे. पैसे की कोई टेन्षन नही पर लिमिट भी थी. दिन मे स्कूल-कॉलेज फिर शाम को साउत-एक्स मार्केट मे तफ़री. हमारी मार्केट की खास बात है कि यहा सिर्फ़ हाई-फाइ लोग ही शॉपिंग करने आते है. यह अमीरो की मार्केट जो है. एक से एक सेक्सी कपड़ो मे सुन्दर-गोरी लड़किया ही मार्केट की रौनक थी. बाकी दुनिया मल्लिका सहरावत, नेहा धूपिया, एट्सेटरा. हेरोयिन्स को जिन कपड़ो मे सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देख पाते है, हम उन्हे अपनी आखों के सामने देखते थे. हर लड़की के साथ कोई ना कोई बाय्फ्रेंड ज़रूर होता था. कोई लीप किस कर रहा है तो कोई कमर मे हाथ डाल कर चल रहा है. इतने शानदार नज़ारो को देखते हुए रात के 10-11 बज जाते थे. ये जश्न तो उसके बाद भी चलता रहता था पर घर पर डाँट पड़ने का भी डर होता था, इसलिए हम 11 बजे तक घर पहुच जाते थे… ऐसे हस्ते खेलते आँखे सेकते लाइफ कट रही थी, पर अचानक हमारी जिंदगियो मे बवंडर आ गया. हम तीनो बी.कॉम के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम मे लटक गये. कॉलेज से रिज़ल्ट देख कर घर जाते समय हम एक ख़तरनाक फ़ैसला कर चुके थे… 4 दिन बाद हम तीनो मुंबई के वीटी स्टेशन पर उतरे. घर वालो का पता नही क्या हाल था. हम तीनो के पास अपने कुल 5500 रुपये थे. हमे पता था कि मुंबई मे ये 5-6 दिन से ज़्यादा नही चलेंगे. स्टेशन से सीधे हम विरार मे विक्की के दोस्त श्याम के पास पहुच गये. श्याम अपनी प्लेसमेंट एजेन्सी चलाता था. हमने उससे रहने की जगह का बंदोबस्त करने को कहा और नौकरी का भी इन्तेजाम करने को कहा. फिर हम निकल पड़े मुंबई नगरी के जलवे देखने. शाम को वापस पहुचने पर श्याम का चेहरा खिला हुआ था. विक्की- क्यो दाँत दिखा रहा है बे ? श्याम- अबे मैदान मार लिया. तुम तीनो सुनोगे तो मेरा मूह चूम लोगे. विक्की- कुत्ते तूने हमे गे समझ रखा है क्या ? तेरा मूह तोड़ देंगे. श्याम- अरे भड़क क्यो रहा है यार…मैने तुम्हारे लिए ऐसे कामो का इन्तेजाम किया है कि तुम जिंदगी भर मुझे याद रखोगे. ये लो जॉब कार्ड्स और कल सुबह 10 बजे तक अपनी-अपनी नौकरी पर पहुच जाना. मैने कहा- थॅंक यू श्याम भाई. फिर हम तीनो रात बिताने के लिए अपना समान उठाकर श्याम की बताए जगह पर पहुच गये. सुबह के 9.50 हो चुके थे और मैं अपनी नौकरी की जगह के सामने खड़ा था. जुहू मे एक शानदार सफेद रंग का बंग्लॉ था. मैं गेट और बिल्डिंग के बीच शानदार लॉन था जिस पर 1 छतरी, 2 कुर्सी और 1 मेज लगे थे. मैनगेट पर वॉचमन खड़ा था. उसके पास पहुच कर मैने जॉब कार्ड दिखाया और बोला- नौकरी के लिए आया हू. वॉचमन- मुंबई मे नये हो ? मैं (आशु)- हा. पहले देल्ही मे था. वॉचमन- फिर तो मुंबई मे टिक जाओगे, देल्ही तो मुंबई की बाप है. फिर उसने इंटेरकाम पर बात की और छोटा गेट खोल दिया और बोला- सीधे अंदर बिल्डिंग के पीछे चले जाओ. मेडम वही मिलेंगी. मैने अपना समान उठाया और बिल्डिंग के पीछे पहुच गया. बिल्डिंग के पीछे का नज़ारा आगे से भी शानदार था. वाहा भी हरियाली थी और बाउंड्री वॉल बहुत उँची थी. बिल्डिंग के साथ एक बहुत बड़ा स्विम्मिंग पूल बना था जिस पर सूरज रोशनी पड़ने से तेज चौंधा निकल रहा था. कुछ सुन-बात कुर्सी पड़ी थी और एक पर कुछ टवल जैसे कपड़े पड़े थे. एक कॉर्डलेस फोन भी पूल की मुंडेर पर रखा था. पर वाहा पर कोई मेडम नही थी. मैं वापस गेट के लिए मुड़ने ही वाला था कि अचानक पानी की आवाज़ आई. एक 30 साल की हसीना ने स्विम्मिंग पूल के पानी से अपना सिर बाहर निकाला और बोली- तुम ही केर टेकर की नौकरी के लिए आए हो? क्या नाम है तुम्हारा ? आशु- ज..जी म..मेरा नाम आशु है. मेडम- हकलाते हो क्या ? (हंसते हुए बोली) आशु- ज..जी नही. मेडम- ठीक है. अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर मे रख दो और 5 मिनिट मे मैं हॉल मे आ जाओ. देल्ही मे मैने आइटीआइ से हॉस्पिटालिटी, विक्की ने वीडियो फोटोग्रफी और बबलू ने टेलरिंग का कोर्स किया था. यही ट्रैनिंग आज हमारे काम आ रही थी. हमने श्याम को अपने सर्टिफिकेट दे दिए थे और उसने हमारे लिए वैसे ही काम ढूँढ दिए. उधर विक्की और बबलू भी अपनी-अपनी नौकरियो पर पहुच चुके थे. विक्की को एक फिल्म प्रोड्यूसर के पास असिस्टेंट कॅमरामेन जॉब के लिए गया था और बबलू एक टेलरिंग शॉप मे असिस्टेंट मास्टर के लिए. चलिए अपनी कहानी आगे बढ़ते हैं. फिर मैने (आशु) अपना समान उठाया और कनखियो से मेडम की तरफ देखा. पर मेडम फिर पानी मे गायब हो गयी थी. मैं सीधा वॉचमन के पास पहुचा और बोला- भाई अब ये सर्वेंट क्वॉर्टर कहा है. वॉचमन चाबी देते हुए बोला- तीसरा कमरा खाली है, वही तुम्हे मिलेगा. कमरे पर पहुच कर अपना समान रखा और नज़र कमरे को देखा और बाहर निकल गया. सीधे मैं हॉल मे पहुचा, पर वाहा कोई नही था. बिल्डिंग के अंदर क्या शानदार सजावट थी वो शब्दो मे नही बता सकता. एक खास बात थी कि बिल्डिंग की एंट्रेन्स से लेकर सब जगह आदमियो के न्यूड स्कल्प्चर्स (मूर्तिया) लगे थे. औरत की कोई नही थी. मैं हॉल से पीछे स्वीमिंग पूल का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा था. तभी स्विम्मिंग पूल से मेडम बाहर निकली… संगेमरमर मे तराशे हुए जिस्म पर पानी से तर-बतर छोटी सी बिकिनी मे मेडम अपने सुन्बाथ चेर के पास पहुचि. सूरज की रोशनी मे मेडम के अंगो का एक एक कटाव और भी गहरा लग रहा था. मेडम की लंबी गोरी टाँगे, बिकिनी से बाहर झाँकते 36डी के बूब्स, पूरी निर्वस्त्रा कमर पर केवल एक डोरी… ये सब देख कर मेरे पूरे शरीर मे कीटाणु रेंगने लगे. दिल धड़-धड़ कर बजने लगा और मेरा लंड बुरी तरह अकड़ गया. टट्टो मे दर्द होने लगा. मेरी पॅंट मे एक पहाड़ सा उभर आया. (आप लोग यकीन मानिए की मैं अब तक (18 साल) ब्रह्मचारी ही था. मेरा वीर्य-पात अब तक नही हुया था और ना ही मुझे इस बारे मे पता था. देल्ही मे माइक्रो-मिनी और ट्यूब-टॉप पहने आध-नंगी लड़कियो की मैं मार्केट मे लड़को के साथ चुहल-मस्ती देखकर भी हम तीन दोस्तो को कभी भी मूठ मारने ख़याल नही आया थी. इसका ही नतीजा था कि मेरा लंड जब खड़ा होता था तो पूरे 8″ का पत्थर बन जाता था. और कुछ ना करने पर भी कम से कम आधे घंटे बाद ही शांत होता था.) अब मेरे लिए भारी मुश्किल हो गयी थी. सामने मेडम ने अपना टवल गाउन पहन लिया था और अब मैं हॉल की तरफ आ रही थी. इधर मेरी पॅंट मेरे मन की दशा जग-जाहिर कर रही थी. मैने अपने लंड को शांत करने के लिए थोडा सहलाया पर इससे बेचेनी और बढ़ गयी. और कुछ ना सूझा तो, मैं एक सोफे की पीछे जाकर खड़ा हो गया. इससे मेरी पॅंट को उभार छिप गया था. मेडम मैं हॉल मे आ चुकी थी- पहले कभी कहीं काम किया है ? आशु- जी नही. मेडम- तुम मुंबई कब आए. आशु- जी 1 दिन पहले. मेडम- बड़े लकी हो की एक दिन मे ही जॉब मिल गया. आशु- जी. मेडम- इतनी दूर क्यों खड़े हो यहाँ आओ. मैं जैसे-तैसे वाहा बैठ गया. पता नही मेडम ने पॅंट को नोटीस किया या नही. मेडम- मैं ज़्यादा नौकर-चाकर नही रखती. जीतने ज़्यादा होते हैं उतना सिरदर्द. मुझे अपनी प्राइवसी बहुत पसंद है. वॉचमन को भी बिल्डिंग मे कदम रखने इजाज़त नही है. केवल तुम्हे ही बिल्डिंग मे हर जगह जाने की इजाज़त होगी. इसलिए तुम्हे ही पूरी बिल्डिंग की केर करनी होगी. बोलो कर सकोगे ? आशु- जी. मेडम- वैसे तो इस घर मे कुल 2 लोग ही रहते हैं, मैं और मेरे पति की बेटी दीपा. घर पर खाना नही बनता. इसके अलावा लौंडरी, चाइ-कॉफी, रख-रखाव जैसे छोटे मोटे काम करने होंगे. आशु- मेडम तन्खा कितनी मिलेगी ? मेडम मुस्कुराते हुए बोली- शुरू मे 20000 रुपये महीना मिलेगा. अगर तुम हमारे काम के निकले तो कोई लिमिट नही है. बोलो तय्यार हो ? आशु- ज..जी मेम . मेडम- ठीक है तो उपर दीपा मेडम का कमरा है, उसे जाकर जगा दो. फिर कॉफी लेकर मेरे लिविंग रूम मे पहुच जाना, एकदम कड़क चाहिए. आशु- जी. मैं तुरंत वाहा से निकल लिया. जान बची सो लखो पाए. किचन मे कॉफी मेकर मे कॉफी का समान डाल कर मैं उपर पहुच गया. वाहा 4 कमरे थे. 3 कमरे लॉक थे. मैने चौथे कमरे का दरवाजा नॉक किया, पर कोई रेस्पोन्स नही आया. थोड़ी देर बाद मैं दरवाजे का हॅंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया. अंदर एक दम चिल्ड था. एक गोल पलंग पर एक खूबसूरत सी लड़की सोई थी. एक दम गोरी-चित्ति, ये दीपा थी. उसके कपड़े देख कर देल्ही की याद ताज़ा हो गयी. वही ट्यूब टॉप और माइक्रो मिनी. पर यहा की बात ही अलग थी. वाहा देल्ही मे लड़कियो को डोर से देख कर ही आँखे सेक्नि पड़ती थी और यहा एक अप्सरा मेरे सामने पड़ी थी. आल्मास्ट सोने से दीपा के कपड़े अस्त-व्यस्त हो गये थे. उसकी ब्लू स्कर्ट तो कमर पर पहुच गयी थी और पूरी पॅंटी अपने दर्शन करा रही थी. उपर का वाइट टॉप भी उपर चढ़ गया था और सुन्दर सी ऑरेंज एमब्राय्डरी ब्रा दिखने लगी थी.

टॉप और ब्रा के बीच उसकी क्लीवेज भी सॉफ दिखाई दे रही थी. इस हालत मे मैने दीपा को जगाना ठीक ना समझा. मैने वापस गेट के बाहर जाकर पुकारा- दीपा मेम. पर कोई हलचल नही हुई. हिम्मत जुटा कर अंदर गया और पुकारा- दीपा मेम. फिर वही हालात. मैने दीपा को हल्के से हिलाकर फिर पुकारा. पर कोई फायेदा नही. दीपा का कमसिन जिस्म देखकर मेरी हालत फिर सुबह जैसी होती जा रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आ चुका था और बुरी तरह फदक रहा था. टट्टो मे भी दर्द बढ़ता जा रहा था. अब मैने दीपा को ज़ोर से हिलाया. पर वो तो जैसे बेहोश पड़ी थी. उसकी कलाईयो पर कई जगह छोटे-छोटे लाल निशान बने थे. अब मैं खुद को रोक नही पा रहा था. अब कोई चारा नही था. मैं बेड पर दीपा के बगल मे लेट गया. सब कुछ अपने आप हो रहा था. मेरी नज़र दीपा की क्लीवेज पर गढ़ी हुई थी. इतने साल जो चीज़ देख कर ललचाते थे, वो आज मेरे सामने पड़ा था. हिम्मत और डर दोनो बढ़ते जा रहे थे. फिर धीरे से अपनी उंगली दीपा की क्लीवेज पर फिरा दी. पहली बार उस जगह का स्पर्श पाकर मैं बहकने लगा. अब मेरे हाथो ने उसके बूब्स को कपड़ो के उपर से ढक लिया था. फिर मैं दीपा के योवन-कपोत (बूब्स) को धीरे-धीरे दबाने लगा. इधर मेरे हाथो का दबाव दीपा के बूब्स पर बढ़ता उधर मेरी साँसे और लंड फूलते जाते. फिर मैने उसके टॉप के स्ट्रॅप्स खोल दिए. अब दीपा केवल ब्रा मे थी. ऑरेंज रंग की ब्रा मे उसके बूब्स किसी टोकरी मे रखे सन्तरो की तरह लग रहे थे. मैने उसकी क्लीवेज पर अपनी जीभ फिरानी शुरू की. दोनो हाथो से उसके बूब्स भीच रहा था. थोड़ी देर तक उपर से दबाने के बाद मैं बदहवास सा हो गया था. मुझ बेचारे को क्या पता था कि बूब्स के अलावा भी एक लड़की के पास काम की चीज़े होती हैं. मैं तो इन्ही को देख-देख कर बड़ा हुआ था. इतना सब होने के बाद भी दीपा की तंद्रा (नींद) नही टूटी और मेरी हिम्मत और ज़ोर मारने लगी. अब मैने धीरे से अपना दाया हाथ दीपा की ब्रा मे सरकया. अंदर जाकर मेरे हाथ की उंगलियो के पोर (फिंगर-टिप) उसकी छोटी सी निपल से टकराया. थोड़ी देर मे उसका निपल मेरी दो उंगलियो के बीच फँसा था. मैं उस निपल को मसल्ने लगा. अपने निपल्स के साथ छेड़खानी दीपा सहन नही कर सकी और हरकत करने लगी. उसकी टाँगे मसल्ने लगी और मुँह से इश्स..स.सस्स की आवाज़े निकलने लगी. दीपा का हाथ अपनी जाँघ के बीच पहुच गया और धीरे-धीरे जाँघो के बीच मसलने लगा. जैसे-जैसे वो मसल्ति जाती वैसे-वैसे उसकी सिसकारिया तेज हो रही थी. अचानक एक तेज आवाज़ सुनाई दी- आशु…कॉफी… मैं एक झटके मे बेड से उछल कर खड़ा हो गया. और भागता हुआ किचन मे पहुचा. कॉफी मेकर का स्विच ऑन किया. 5 मिनिट बाद मैं कॉफी ट्रे मे लेकर मेडम के पास खड़ा था.

इसी तरीके से काम करोगे तो ज़्यादा दिन नही टिकोगे !- मेडम गुस्से से बोली. आशु- मेडम सॉरी..वो दीपा मेडम को काफ़ी उठाया…पर वो उठ ही नही रही. मेडम- हा अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद जो है..मैं ऑफीस जा रही हू…शाम तक घर साफ मिलना चाहिए. इतना कहकर मेडम बाहर निकल गयी. 11 बज चुके थे और पेट मे चूहो ने हंगामा कर रखा था. मैं सीधे किचन मे गया और खाने की चीज़ ढूँढने लगा. पूरे किचन के डब्बे खाली थे. ऐसे लग रहा था कि चाइ-कॉफी के अलावा यहा कभी कुछ नही बना. मैं बाहर ही निकलने वाला था की फ्रिड्ज पर नज़र गयी. फ्रिड्ज पूरा मालामाल था. मैने वाहा से 2 बर्गर उठाए और ओवेन मे डाल दिए. फिर गरमा-गरम बर्गर और चिल्ड जूस पीकर शांति मिली. फिर मैं सीधे अपने कमरे पर पहुचा. कमरा साफ करके अपना समान सेट किया. तभी गेट पर नॉक हुई. वॉचमन- और भाई सब ठीक-ठाक हो गया. आशु- हा यार. वॉचमन- अपना नाम तो बता दो यार. आशु- आशु. वॉचमन- मेरा नरेश है. पिछले 15 साल से यहा काम कर रहा हू. आशु- अच्छा..तुम्हारा बाकी परिवार कहा है? नरेश- सब गाव मे हैं. आशु- अच्छा नरेश भाई एक बात तो बताओ…ये मेडम के साब कहा है? नरेश- ….मुझसे ये नही पूछो तो अच्छा है. और कुछ भी पूछ लो. आशु- अच्छा कोई बात नही.. पर ये मेडम की उम्र तो 30 साल से ज़्यादा नही लगती…फिर ये 17-18 साल की बेटी कहा से पैदा हो गयी. नरेश- तुम सब पूछ कर ही मनोगे. दीपा मेडम दीपिका मेम की सौतेली बेटी है. दीपा मेडम के पापा ने दूसरी शादी की थी. आशु- ओह तो ये बात है. मैं दीपा मेडम को उठाने गया था पर वो उठी ही नही ? नरेश- किसी को बताना नही उसे कुछ दिन से ड्रग्स लेने की आदत पड़ गई है. अच्छा मैं गेट पर चलता हू. कोई दिक्कत हो तो इंटरकम पर बता देना. आशु- ओके अब मैं भी थोड़ा आराम करूँगा. बिल्डिंग मे दुबारा पहुचने मे 2 बज गये थे. घर की सफाई करने मे कब 6 बजे पता ही ना चला. तभी कार के रुकने की आवाज़ आई. मेडम ने अंदर आते हुए कहा- दीपा कहा है ? आशु- मेडम मैं दुबारा उपर नही गया. देखने जाउ ? दीपिका- नही, वो गयी होगी अपने दोस्तो के साथ. मेरे सिर मे काफ़ी दर्द है. तुम एक बढ़िया सी कॉफी बना कर आधे घंटे बाद मेरे बेड रूम मे ले आना. उससे पहले नहा ज़रूर लेना. कितनी गंदे लग रहे हो. आशु-जी. आधे घंटे बाद मैं कॉफी लेकर मेडम के बेडरूम के बाहर खड़ा था. नॉक करने पर अंदर से आवाज़ आई, दरवाजा खुला है.. अंदर आ जाओ. कमरे के अंदर जाते ही एक दिन मे तीसरी बार मेरा लंड भड़क गया. मेडम एक स्किन कलर की नेट वाली नाइटी पहने बाथरूम से बाहर निकल रही थी. नाइटी के नीचे से उनकी ब्लॅक ब्रा सॉफ दिखाई दे रही थी. नाइटी की लंबाई उनके हिप्स तक थी और छाती के पास केवल एक बटन लगा था. 36डी साइज़ के बूब्स के उभार के कारण उनकी नाइटी नीचे से खुल गयी थी और पूरे पेट और नाभि के दर्शन हो रहे थे. नीचे उन्होने ब्लॅक पॅंटी पहनी थी. पॅंटी के नीचे गोरी पूरी टाँगे एकदम नंगी थी. मेडम- कॉफी साइड टेबल पर रख दो और यहा आ जाओ. मेडम का अंदाज मादक था. पर मेरे कानो ने जैसे कुछ सुना ही नही था. मैं एकटक मेडम के बूब्स को ही देख रहा था. मेडम ने मेरे हाथ से ट्रे ले कर टेबल पर रखी और हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा दिया..मैं जैसे सपना देख रहा था. मेडम- क्या देख रहे हो. यह सुनकर मुझे झटका सा लगा और मे तुरंत उछल कर खड़ा हो गया. आशु- ज..जी सॉरी मेडम. मेडम- मेरी टाँगो मे बड़ा दर्द हो रहा है. क्या तुम थोड़ा दबा दोगे. आशु-जी मेडम. और मैं मेडम की टांगो के पास बैठ गया. मेडम की गोरी मखमली टाँगो पर एक भी बाल नही था. उनके बदन से भीनी-भीनी महक आ रही थी. मैने एक टांग को हाथो मे लेकर दबाना शुरू किया. तभी मेडम चीख पड़ी- क्या करते हो ? आराम से दबाओ और ये लो थोड़ा आयिल भी लगा दो. मैने वैसे ही हल्के हाथ से मालिश शुरू कर दी. मेडम आँखे बंद करके और घुटने मोड़ कर लेटी रही. मेरी नज़र फिर मेडम के मोटे-मोटे बूब्स पर जा टिकी जो ब्लॅक ब्रा के बाहर झाँक रहे थे. मेरे पूरे शरीर मे चीटिया सी रेंगने लगी थी. पर अबकी बार मैने अपने होश नही खोए. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब थोड़ा उपर करो. यह सुनकर मेरे हाथ मेडम के घुटनो पर पहुच गये. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. मैं मेडम के घुटनो से जाँघ की मालिश करने लगा. जब भी मेरे हाथ नीचे से उपर की ओर जाते थे. मेडम साँस रोक लेती थी. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. आशु- वाहा तो आपकी पॅंटी है, वो तेल से गंदी हो जाएगी. मेडम- तो फिर उसे उतार दो ना. मैने वैसा ही किया. अब मेडम बूब्स के नीचे से पूरी नंगी थी. 2 मिनिट बाद मेडम ने अपनी मुड़े हुए घुटने फैला दिए. जिस जगह पर हमारा लंड होता है वाहा पर मेडम का केवल एक हल्का सा उभार था, जो की बीच से कटा हुआ था. वाहा पर बाल एक भी नही था. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब ज..जाँघ को करो. मेरे दोनो हाथ मेडम की गोरी चित्ति जाँघो को धीरे से सहला रहे थे. हाथ जब भी मेडम के कटाव के पास पहुचते तो मेडम अपने दाँत भींच लेती. मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था. शायद मेडम बहुत थॅकी हुई थी और मेरी मसाज से उन्हे आराम मिल रहा था. मेडम (आँखे बंद किए हुए ही)- अब मेरी चिड़िया की भी मालिश करो. आशु- मेडम आपकी चिड़िया कहा है ? मेडम- अरे बुद्धू मेरी चूत के उपर जो दाना है वही चिड़िया है. आशु- मेडम ये चूत कहा होती है ? तब मेडम ने अपने दोनो हाथो से अपने कटाव की दोनो फांको को खोल दिया- ये चूत है. फिर अपनी उंगली चूत के उपर के दाने पर लगा कर कहा ये चिड़िया होतो है. अब इसकी मालिश करो. मैं मेडम की दोनो टाँगो के बीच बैठ गया और मेडम की चिड़िया को सहलाने लगा. थोड़ी देर मे ही मेडम की टाँगे मचलने लगी. मेडम-थोड़ा तेज करो…….थोड़ा तेज………और तेज….तेज. मैं मेडम के कहे अनुसार अपनी रफ़्तार और दबाव बढ़ता गया. मेडम- टाँगो पर तो बड़ा दम दिखा रहे थे. एक चिड़िया को नही मार सकते. थोड़ा तेज हाथ चलाओ ना. यह सुनकर मैने मेडम की चूत को अपने बाए हाथ की 2 उंगलियो से खोला और दाए अंगूठे मे आयिल लगा कर मेडम की चिड़िया को बुरी तरह रगड़ने लगा. अब मेडम बुरी तरह छटपटाने लगी. मुँह से इश्स..हा..स..हा निकल रहा था. टाँगे इधर उधर नाच रही थी. अपने हाथो से मेरे बालो को पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ दबाने लगी. मेडम जितना तेज सिसकती, मेरी बेरहमी उतनी ही बढ़ती जाती. अचानक मेडम के मूह से जोरदार चीख निकली-आआआआआआअहह और चूत से एक जोरदार पिचकारी निकल कर मेरे मूह पर आ पड़ी. मैने सोचा मेडम ने मेरे मूह पर यूरिन कर दिया है. थोड़ा मेरे मूह मे भी चला गया था. उसका स्वाद अजीब सा था पर स्वादिष्ट था. मेरी जीभ अपने आप ही बाहर निकल कर मेरे मूह को चाटने लगी. मेडम ने मेरे अब तक चल रहे हाथो को ज़ोर से पकड़ लिया और बोली- तेरे हाथ तो रैल्गाड़ी की तरह चलते है. तेरी मालिश ने तो मेरी टाँगो की सारी थकान निकाल दी. पर मुझे अनमना देख कर मेडम थोड़ा अटकी और पूछा – क्या हुआ ? आशु- क्या मेडम आप भी ना. अपने मेरे मूह पर ही यूरिन कर दिया. मेडम ज़ोर के खिलखिला उठी- पगले ये यूरिन नही स्त्री-रस होता है. केवल इस रस से ही पुरुषो की प्यास बुझ सकती है. आशु- ओह….हा इसका स्वाद तो बहुत अच्‍छा था. मेडम- मैने तेरी प्यास बुझाई अब तू मेरी भी बुझा. आशु- मेडम मेरे पास तो कोई चूत या चिड़िया नही है. आपकी प्यास कैसे बुझाउ. मेडम फिर खिलखिला उठी. वो उठी और मुझे बेड पर लिटा दिया. मेडम ने मेरी पॅंट उतार दी. मेरे अंडरवेर मे 8 इंच का उभार बना हुआ था. मेडम- अरे तुमने तो यहा एक तंबू भी लगा रखा हा. इस तंबू का बंबू कहा है? मैं शर्म के मारे कुछ नही बोला. मैं जिस बात को सुबह से छिपा रहा था, मेडम सीधे वहीं पहुच गयी थी. मैं बिना हिले दुले पड़ा रहा. अब मेडम ने मेरे अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया. मेडम एक दम सन्न रह गयी. फिर अगले ही पल मेरा अंडरवेर भी उतर गया. मेडम- ये क्या है. पत्थर का इतना मोटा मूसल लगा रखा है. मैने आज तक नही इतना मोटा नही देखा. इसे कौन सा तेल पिलाते हो. मैं चुप ही रहा पर मेरा लंड… मेरा लंड जुंगली शेर की तरह दहाड़े लगा रहा था. मेडम ने अपने कोमल हाथो से मेरे लंड को दोबारा नापा. अंडरवेर के अंदर उनको लंड की इतनी मोटाई का विश्वास नही हुआ था. लंड को हल्का सा सहलाने के बाद उन्होने उसे बीच से कस कर पकड़ लिया और नीचे खिचने लगी. मेडम का मूह मेरे लंड के ठीक उपर था और जीभ लप्लपा रही थी. जैसे -जैसे लंड की काली खाल नीचे जा रही थी एक चिकना-गोरा-बड़ी सी सुपारी जैसा कुछ बाहर निकल आया. आशु- मेडम ये क्या है. मेडम- इसको सूपड़ा कहते है. जैसे मेरी चिड़िया ने तेरी प्यास बुझाई थी वैसे ही मेरी प्यास इस से बुझेगी. यह कहकर मेडम ने मेरे लंड को सूँघा. पता नही कैसी स्मेल थी पर मेडम एक दम मदहोश हो गयी. फिर धीरे से उन्होने अपनी जीब मेरे सूपदे पर फिराई और चाटने लगी. पूरे लंड को उपर से नीचे तक चाटने के बाद, मेडम ने सूपदे के मूह पर अपना मूह लगा दिया. उनका मूह पूरा खुला हुआ था. उन्होने एक हाथ से खाल को नीचे खीचा हुआ था. फिर धीरे-धीरे मेडम मेरे लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते लंड का सूपड़ा मेडम के गले तक पहुच गया. अब भी मेरा लंड 2 इंच बाहर था. फिर मेडम ने मेरे लंड की लंबाई-चौड़ाई अपने मूह से नापने के बाद उसे बाहर निकाला. मेडम के मूह मे लार भर गयी थी जो उन्होने लंड पर उगल दी और एक गहरी साँस ली. अब मेरा लंड पूरा भीग गया था. मेडम उसे कुलफी की तरह चूसने लगी. बार बार मेरा लंड उनके मूह से बाहर आता फिर तुरंत अंदर चला जाता. मेडम की तेज़ी बढ़ती जा रही थी. बीच-बीच मे मेडम अपने बाए हाथ मे पकड़ी खाल को भी उपर नीचे कर देती थी. इस सब से मैं भी मदहोश हो रहा था. मैने सोचा ऐसे मेडम की प्यास तो पता नही कैसे बुझेगी, पर मेरी हालत अब काबू से बाहर थी. जो आवाज़े पहले मेडम निकाल रही थी, वैसी ही आवाज़े अब मेरे मूह से अपने आप निकल रही थी. टाँगे फदक रही थी और हाथ मेडम के सिर पर अपने आप पहुच गये थे. पर इस सब से मेडम को कोई फरक नही पड़ा था. पूरे 10 मिनिट तक चूसने के बाद मेडम ने मेरा लंड से मूह उठाया और फिर लंबी साँस ली और बोली- बड़ा स्टॅमिना है तेरे मे. पर मेरा नाम भी दीपिका है, मैं अपनी प्यास बुझा कर ही रहूंगी. अगले ही पल जोरदार चुसाई चालू हो गयी. मेडम को पता नही क्या जुनून था. पर इससे मुझे क्या, मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. अचनांक पता नही मेरे अंदर से कोई तूफान मेरे लंड की ओर बढ़ता सा लगा. अचनांक बहुत मज़ा सा आने लगा, जो शब्दो मे बताना असंभव है. म्‍म्म्ममममममममममममममममममममह – एक ज़ोर की आवाज़ निकली. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे इतना मज़ा इससे पहले कभी नही आया था. मेरा रोम-रोम निहाल हो रहा था. जिस शांति की तलाश मे मेरा लंड अब तक भटक रहा था वो अजीब सी शांति मेरे लंड को मिल रही थी. इधर मेडम ने भी उपर नीचे करके चूसना छोड़ कर अपने होंठ मेरे सूपदे पर कस लिए. वो पूरा ज़ोर लगा कर मेरे लंड को आम की तरह चूसने लगी. 5-7 सेकेंड तक मेरे लंड से कुछ निकलता रहा और मेडम उसे निगलती रही. अच्छी तरह लंड की खाल को उपर तक निचोड़ लेने के बाद ही मेडम ने अपना मूह मेरे लंड से हटाया. मेडम की आँखे बंद थी. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे नींद सी आने लगी थी. मेडम ने 1 मिनिट तक चुप रही फिर बाकी का भी निगल गयी. फिर मेडम ने मेरे लंड के सूपदे को चूमा और बोली- क्यो आया मज़ा ? आशु- मेडम क्या आपकी प्यास बुझ गयी. मेडम ने मादक अंगड़ाई लेकर कातिल नज़रो से मुझे देखा और बोली- पता नही बुझी या तूने और भड़का दी. तेरी रस का स्वाद कुछ अलग सा था एक दम ताज़ा. कोई खास बात है क्या ? आशु- मेडम आज से पहले मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया. मुझे तो पता भी नही था की मेरे अंदर भी कोई रस होता है. मेडम- यानी आज तेरा पहली बार का रस निकला है… तभी मैं कहु… मेडम की आँखे चमक उठी और कुछ सोचकर बोली -तू अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर से लाकर बगल वाले रूम मे रख ले ना. अब तू हमारे साथ ही रहेगा, पता नही कब कौन सा काम पड़ जाए. मैं हैरानी से एक टक मेडम को देखता रहा पर कुछ ना बोल सका. मेडम- अच्छा अब तेरी नौकरी भी पक्की और सॅलरी भी डबल. और बोल क्या चाहिए ? आशु- मेडम क्या आप मेरे काम से इतनी खुश है? मेडम- हा. और कुछ मन मे हो तो वो भी माँग ले. आशु- जी कुछ नही चाहिए. मेडम- तू बोल तो सही. आशु- रहने दीजिए…पर मेडम आपकी कॉफी तो ठंडी हो गई. मेडम- तेरा रस पी लिया तो कॉफी कौन पिएगा….चल तुझे एक खेल सिखाती हू…तूने कभी चूत लंड की लड़ाई देखी है… आशु- जी नही, कैसे खेलते है बताइए ना.

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