प्यासी माँ ने बेटे को दिया सेक्सी मज़ा

हेलो दोस्तों, मेरा नाम गौरव है। मैं हिमाचल के शिमला का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 19 साल है, और मैं अभी-अभी स्कूल के फाइनल एग्जाम देकर फ्री हुआ हूँ। मेरी माँ, जिनका नाम रीना है, 40 साल की हैं। माँ के बारे में क्या बताऊँ? उनका फिगर 36-30-34 का है, और वो इतनी हॉट हैं कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। उनकी आँखों में एक अलग सी चटक मस्ती है, होंठ गुलाबी, और जब वो चलती हैं तो उनकी गोल-मटोल गांड का उछाल देखकर कोई भी पागल हो जाए। माँ की स्किन गोरी है, और उनके लंबे काले बाल उनकी कमर तक लहराते हैं। उनकी मुस्कान में एक शरारत भरी मासूमियत है, लेकिन उनकी जिस्मानी प्यास उनके चेहरे पर साफ दिखती थी।

ये कहानी एक साल पुरानी है। मेरे पापा मेरे बचपन में ही गुजर गए थे। तब से माँ ने मुझे अकेले पाला। हम दोनों एक छोटे से घर में अकेले रहते थे। माँ ने कभी दूसरी शादी नहीं की, शायद बदनामी के डर से। लेकिन उनकी जिस्म की भूख मैं धीरे-धीरे समझने लगा था। माँ अपनी प्यास को मूली, गाजर या कभी-कभी कैंडल से बुझाती थीं। कई बार मैंने देखा कि वो रात को अपने कमरे में अकेले सिसकियाँ लेती थीं। उनके पीछे मोहल्ले के कई मर्द पड़े थे, लेकिन माँ ने हमेशा खुद को संभाला।

एक दिन की बात है, मैं बाथरूम में नहा रहा था। गलती से दरवाजा खुला रह गया था। मैं पूरी तरह नंगा था, और मेरा 7 इंच का लंड पूरा तना हुआ था। अचानक माँ बाथरूम में आ गईं। उनकी नजर मेरे लंड पर पड़ी, और वो एक पल को ठिठक गईं। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो कुछ देर मेरे लंड को घूर रही हों। फिर वो हड़बड़ाकर बोलीं, “सॉरी बेटा!” और जल्दी से बाहर चली गईं। मुझे शर्मिंदगी हुई, लेकिन कहीं न कहीं मुझे लगा कि माँ को मेरा लंड पसंद आया था।

उस दिन के बाद माँ का व्यवहार बदलने लगा। वो मुझे बार-बार चोरी-छिपे देखने लगीं। कभी मैं कपड़े बदल रहा होता, तो वो मेरे कमरे के पास से गुजरतीं और आँखों के कोने से मुझे ताकतीं। कभी बाथरूम का दरवाजा हल्का खुला छोड़ देतीं, ताकि मैं उन्हें देख सकूँ। एक दिन मैंने एक सेक्स स्टोरी पढ़ी, जिसमें माँ और बेटे की चुदाई थी। उस स्टोरी ने मेरे दिमाग में आग लगा दी। मैंने पहली बार माँ को उस नजर से देखा। उनकी मोटी-मोटी जांघें, भरे हुए बूब्स, और गोल गांड मेरे दिमाग में बस गई।

एक बार मैंने माँ को बाथरूम में नहाते देख लिया। वो जमीन पर लेटी थीं, पूरी नंगी। उनकी चूत में एक मोटी सी कैंडल अंदर-बाहर हो रही थी। वो अपने बड़े-बड़े बूब्स को जोर-जोर से दबा रही थीं, और उनकी सिसकियाँ “आह्ह… ओह्ह…” मेरे कानों में गूंज रही थीं। उनकी चूत गीली थी, और रस टपक रहा था। मैं बाहर खड़ा था, और मेरा लंड पैंट में तंबू बना रहा था। उस दिन मैंने बाथरूम में जाकर माँ के नाम की तीन बार मुठ मारी, तब जाकर लंड को चैन आया।

माँ भी अब जानबूझकर मुझे उकसाने लगी थीं। वो घर में टाइट कुर्ती और पतली सलवार पहनतीं, जिसमें उनके बूब्स और गांड साफ दिखते। रात को वो सेक्सी नाइटी पहनने लगीं, जो इतनी पतली होती कि उनके निप्पल तक नजर आते। मेरा लंड हर वक्त खड़ा रहता, और माँ मेरी हालत देखकर मुस्कुरातीं।

एक दिन मैं बाथरूम में माँ की पैंटी सूंघ रहा था। उसकी खुशबू ने मुझे पागल कर दिया था। मैं लंड हिलाते हुए मस्ती में डूबा था कि अचानक माँ आ गईं। उन्होंने मुझे पकड़ लिया। पहले तो वो गुस्से में बोलीं, “गौरव! ये क्या कर रहा है? तुझे शर्म नहीं आती अपनी माँ की पैंटी सूंघते हुए?” उनकी आवाज में गुस्सा था, लेकिन आँखों में शरारत थी। मैं डर गया और उनके पैरों में गिरकर माफी माँगने लगा, “माँ, सॉरी! मैं… मैं बस…”

माँ ने मुझे उठाया और शरारती नजरों से देखा। उनकी नजर मेरे तने हुए लंड पर थी, जो मेरी पैंट में साफ दिख रहा था। उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया। मेरा लंड उनकी सलवार पर रगड़ रहा था। उनके होंठ मेरे होंठों के इतने करीब थे कि उनकी साँसें मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थीं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं कुछ बोलने ही वाला था कि माँ ने मेरे होंठों को अपने होंठों से लॉक कर दिया। वो पागलों की तरह मुझे चूमने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, और वो मेरे होंठों को चूस रही थीं। मैं भी खो गया। मेरा सपना सच हो रहा था।

कुछ देर बाद माँ ने अपने होंठ हटाए और मेरी आँखों में देखा। उनकी आँखों में वासना की आग जल रही थी। वो बोलीं, “गौरव, बेटा, मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ। तेरी माँ की चूत सालों से प्यासी है। तू ही इसकी प्यास बुझा सकता है।” उनकी बात सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उन्हें कसकर बाहों में जकड़ लिया और कहा, “माँ, आप जैसी सेक्सी औरत मैंने कभी नहीं देखी। मैं आपका दीवाना हूँ।”

माँ ने मुझे और कसकर गले लगाया। मैंने उनके बूब्स को उनके कुर्ते के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। माँ के मुँह से सिसकियाँ निकलीं, “आह्ह… गौरव… ओह्ह…” वो बोलीं, “बेटा, पहले कपड़े तो उतार दे।” मैंने झट से उनका कुर्ता उतार दिया। माँ ने काले रंग की सेक्सी ब्रा पहनी थी, जिसमें उनके बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे। माँ ने अपनी ब्रा खोली और उसे मेरी तरफ फेंक दिया। फिर उन्होंने अपनी सलवार नीचे खींच दी। उनकी गुलाबी पैंटी पूरी गीली थी।

मैंने कहा, “माँ, आपकी पैंटी मैं अपने दाँतों से उतारना चाहता हूँ।” माँ ने शरारती मुस्कान दी और मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर लगा दिया। उनकी चूत की खुशबू ने मुझे पागल कर दिया। छोटे-छोटे बालों वाली उनकी गुलाबी चूत से रस टपक रहा था। मैंने दाँतों से उनकी पैंटी नीचे खींची और अपनी जीभ उनकी चूत पर रख दी। मैं उनका रस चूसने लगा, जैसे कोई भूखा शेर शिकार पर टूट पड़ता है। माँ की सिसकियाँ तेज हो गईं, “आह्ह… ओह्ह… गौरव, चूस ले बेटा… अपनी माँ की चूत का सारा रस पी जा… आह्ह… ओह्ह…” वो मेरे सिर को अपनी चूत में दबा रही थीं। मैं अपनी जीभ अंदर-बाहर कर रहा था, और माँ मस्ती में “हाय… ऊऊ… जोर से चूस बेटा…” चिल्ला रही थीं।

कुछ देर बाद माँ ने मुझे खड़ा किया और मेरे होंठों को फिर से चूसने लगीं। वो मेरे पूरे जिस्म पर चूम रही थीं। फिर वो नीचे झुकीं और मेरे लंड को पकड़ लिया। वो बोलीं, “हाय गौरव, इतना मस्त लंड घर में था, और मैं बाहर भटक रही थी। आज मैं अपनी सारी ख्वाहिशें पूरी करूँगी।” उन्होंने मेरे लंड को चाटना शुरू किया। उनकी गर्म जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी। फिर उन्होंने पूरा लंड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। मैं मस्ती में बोल रहा था, “वाह माँ, तुम क्या मस्त चूसती हो… आह्ह… मैं तेरा दीवाना हो गया…”

माँ अब गंदी गालियाँ देने लगीं, “मादरचोद, आज अपनी माँ की चूत फाड़ दे… अपने लंड से मेरी बुर को मसल दे…” मैं भी जोश में आ गया और बोला, “हाँ माँ, आज तेरी चूत को चोद-चोदकर शांत करूँगा।” मैंने माँ को बाहों में उठाया और बेडरूम में ले गया। मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया और उनके जिस्म से खेलने लगा। मैं उनके बूब्स को चूस रहा था, उनके निप्पल्स को काट रहा था। माँ की सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं, “आह्ह… ओह्ह… गौरव, चूस ले… मेरे बूब्स को मसल दे…”

मैंने माँ की चूत को और गीला किया। मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। माँ चिल्लाईं, “बेटा, अब डाल दे… अपनी माँ को अपनी रंडी बना ले…” मैंने एक जोरदार झटका मारा, और मेरा लंड उनकी चूत में घुस गया। माँ जोर से चिल्लाईं, “हरामजादे, आराम से… तेरी माँ की चूत कब से चुदी नहीं है…” मैंने धीरे-धीरे झटके मारने शुरू किए। माँ मजे ले रही थीं, “हाय… गौरव… चोद बेटा… जोर से चोद…” उनकी चूत इतनी गीली थी कि हर झटके के साथ “पच… पच…” की आवाज आ रही थी।

कुछ देर बाद माँ ने मुझे लेटाया और मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने अपने बूब्स मेरे मुँह में ठूंस दिए और मेरे लंड पर बैठ गईं। वो ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनके बूब्स मेरे मुँह में हिल रहे थे। मैं उनके निप्पल्स को चूस रहा था, और वो “आह्ह… ओह्ह… चोद बेटा… अपनी माँ को और जोर से चोद…” चिल्ला रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी। मैंने उनकी गांड को पकड़ा और जोर-जोर से झटके मारने लगा।

फिर मैंने माँ को घोड़ी बनाया। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनकी चूत में पीछे से लंड डाला और जोर-जोर से चोदने लगा। माँ की सिसकियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “हाय… गौरव… फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह… ओह्ह…” उनकी चूत का रस मेरे लंड पर लिपट रहा था। मैंने उनकी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, और वो और जोश में आ गईं, “हाँ बेटा, मार… अपनी माँ को और जोर से चोद…”

पूरी रात हमने अलग-अलग पोजीशन में चुदाई की। कभी माँ मेरे ऊपर, कभी मैं उनके ऊपर। हर बार माँ की सिसकियाँ और गंदी बातें मुझे और गर्म कर रही थीं। सुबह जब हम थक गए, तो माँ ने मुझे प्यार से गले लगाया और कहा, “गौरव, तूने अपनी माँ की सारी प्यास बुझा दी।” मैंने उन्हें चूमा और कहा, “माँ, मैं हमेशा तुम्हें खुश रखूँगा।”

उस दिन के बाद हम पति-पत्नी की तरह रहने लगे। जब भी मन करता, हम खूब चुदाई करते। माँ की चूत को चोदने का मज़ा ही अलग है। अब हम हर रात एक-दूसरे की बाहों में सोते हैं और एक-दूसरे की प्यास बुझाते हैं।

आखिर में बस इतना कहूँगा, अपनी माँ को चोदने का मज़ा दुनिया में कहीं नहीं। तुम्हें क्या लगता है, ऐसी चुदाई का मज़ा कैसा होता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताओ।

मैं मादरचोद बन गया अपनी मम्मी और चाची की चूत और गांड चोद कर!

दोस्तो, मैं मादरचोद विक्की हूँ. मेरी उम्र अभी 23 साल है. मेरी पढ़ाई अभी अभी ही खत्म हुई है.

मैं पहले हॉस्टल में पढ़ा करता था.

अब जब मेरी पढ़ाई खत्म हुई, तो मैं अपने घर वापस आ गया.

मेरे घर में मेरे विधवा मम्मी और मेरी चाची और चाचा रहते हैं.

मेरे पिता की मौत 10 साल पहले हो गयी थी. मेरी पढ़ाई का खर्च मेरे चाचा उठाते हैं.

मेरे चाचा के कोई बच्चा नहीं है इसलिए वो मुझे अपने बच्चे की तरह देखते हैं.

मेरी मम्मी का नाम स्वाति है, चाची का नाम ज्योति है और चाचा का नाम आकाश है.

ये मादरचोद कहानी अभी 2 महीने पहले की है. जब मैं घर वापस आया, तब मेरी मम्मी, चाची और चाचा बहुत खुश हुए. मैं भी बहुत खुश था.

मुझे मेरी मम्मी और चाची बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थीं.

मैं जब सबसे गले मिल रहा था, तब मेरी मम्मी और चाची के बड़े बड़े बूब्स मेरे सीने में टच हो रहे थे.

मैंने महसूस किया कि चाची ने मुझे कुछ ज्यादा ही जोर से अपने सीने में जकड़ लिया था.

मुझे कुछ अजीब सा तो लगा पर न जाने क्यों मजा भी बहुत आया. उस समय मुझे अपने लंड में कुछ तनाव भी महसूस हुआ.

वैसे मैं बता दूं कि मेरे लंड का साइज बड़ा है … और बड़ा लंड किसी भी औरत गर्म कर देती है. मेरे लंड से कोई भी औरत मुझसे चुदने के लिए राजी हो सकती है.

जब उन दोनों की चूचियां मेरी छाती में टच हो रही थीं, तब मेरा लंबा लंड खड़ा होने लगा था.

चाची के बाद जब मैं मम्मी से गले लग कर मिला तो मेरा लंड मेरी मम्मी की चूत के पास ही लग रहा था.

मेरी मम्मी की चूचियां बहुत बड़ी हैं जबकि चाची की चूचियां थोड़ी छोटी हैं, पर उनकी गांड बड़ी है.

शायद चाचा, चाची की गांड बहुत ज्यादा चोदते होंगे.

मैं खाना खाकर शाम को पांच बजे आराम करने के लिए चला गया.

थकान थी तो मैं कुछ देर के लिए सो गया था.

लगभग नौ बजे मेरी नींद खुली तो मुझे प्यास लगी तो मैं उठ कर पानी पीने आ गया.

जब मैं पानी पीकर आ रहा था कि मुझे मम्मी के कमरे से हल्की हल्की हल्की आवाज़ सुनाई दी.

मैंने सोचा कि ये क्या हो रहा है.

जब मैंने की-होल में से झांकने की कोशिश की तो मेरी पैर के नीचे से जमीन खिसक गई.

मैंने देखा कि मेरे चाचा चाची और मम्मी तीनों नंगे थे.

चाचा मम्मी की चूत को चोद रहे थे, चाची अपनी चूत को मम्मी के मुँह के ऊपर रखकर रगड़ रही थीं और सिसकारियां ले रही थीं.

तभी मम्मी ने कहा- आकाश बहुत दिन से तुमने मेरी गांड नहीं चोदी है आज मेरी गांड में खुजली हो रही है. क्या तुम मेरी गांड को अभी चोदोगे?

चाचा ने कहा- हां बिल्कुल स्वाति रंडी, सच है मैंने बहुत दिनों से तुम्हारी गांड नहीं मारी है. सिर्फ ज्योति की गांड मार रहा हूँ. आज तुम्हारी बारी है.

जब ये सब मैंने सुना, तब समझ आया कि इसीलिए चाची की गांड इतनी बड़ी है.

अब चाचा ने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला.

मैंने देखा कि उनका लंड काफी बड़ा था और मोटा भी!

मेरी मम्मी ने कुतिया की तरह अपनी गांड चाचा के आगे हिलाई, तो चाची ने मम्मी के गांड में थोड़ा थूक लगा दिया और उसी के बाद चाचा ने अपना लंड मम्मी की गांड में पेल दिया.

एक ही धक्के में उनका पूरा लंड मम्मी की गांड में समा गया.

मम्मी की तेज आह निकली और चाचा ने मम्मी के मम्मे पकड़ कर जोर जोर से उनकी गांड मारनी शुरू कर दी.

चाचा पूरी ताकत से धक्के मार रहे थे.

मम्मी ‘आह आह ऊह ऊह हाय मर गयी हाय …’ कहती हुई मजा ले रही थीं.

दूसरी तरफ ज्योति चाची अपनी चूत को मम्मी के मुँह के सामने रखी और बोलीं- स्वाति दीदी, चाटो न इसे … आंह चाटो.

मम्मी चाची की चूत चाटने लगीं और चाची के कंठ से सेक्सी सिसकारियां ‘आह आह ऊह ऊह हाय आ मजा आ गया आह …’ निकलने लगीं.

अब चाचा ने मम्मी की गांड छोड़ दिया और चाची की गांड की तरफ आ गए.

चाची ने चाचा को देखा तो वो तुरन्त डॉगी पोज में आ गईं.

चाचा ने भी चाची की गांड में पूरा लंड पेला और चोदना चालू कर दिया.

करीब बीस मिनट बाद चाचा झड़ गए.

कुछ देर बाद चाचा के मोबाइल पर एक फोन आया.

फोन पर बात करने के बाद चाचा ने मेरी मम्मी स्वाति और ज्योति चाची से कहा- मुझे एक आवश्यक काम आ गया है. मैं एक हफ्ते के लिए काम से शहर से बाहर जा रहा हूँ.

यह सुनकर मम्मी स्वाति ने कहा- अगर तुम चले जाओगे तो हमारा क्या होगा? मैं तो एक दिन भी बिना चुदे रह नहीं सकती.

ज्योति- हां दीदी, मैं भी एक दिन बिना लंड के नहीं रह सकती और आकाश बोल रहे हैं कि एक हफ्ता के लिए बाहर जा रहे हैं.

ज्योति- सात दिन तक मैं अपनी चूत को कैसे शांत कर पाऊंगी और गांड को भी बिना लंड लिए चैन नहीं मिलेगा. मैं क्या करूंगी?

आकाश ने मेरी मम्मी को चूमते हुए कहा- तो फिर तुम दोनों विक्की से चुदवा लेना, आखिर उसे भी तो चूत गांड का स्वाद दिलाना है.

ये सुन कर मम्मी ने कहा- अरे यार आकाश … विक्की मेरा बेटा है, मैं उससे कैसे चुद सकती हूँ?

चाची ने भी कहा- हां यार, वो अभी 23 साल का ही तो हुआ है. वो अकेला हम दोनों को कैसे शांत करेगा.

चाचा ने कहा- अरे वो जवान लौंडा है, जैसे मैं तुम दोनों को शांत करता हूँ, वो भी तुम दोनों को ठंडा कर देगा. मैंने देखा है कि उसका लंड भी बड़ा है. जब वो तुम दोनों को गले लगा रहा था, तब उसका लंड तन गया था और मैंने उसके खड़े होते लंड को देख लिया था.

मम्मी ने कहा- हां उसका लंड मुझे भी बड़ा लग तो रहा था.

चाचा- हां भाभी, उसका लंड खड़ा होने लगा था. इसका मतलब ये हुआ कि वो भी तुम दोनों रंडियों को चोदना चाहता है.

ये सब बातें मैं सुनकर मन ही मन खुश हो गया और सोचा कि अभी जाकर स्वाती और ज्योति रंडी को चोद लूं!

पर मैंने अपने आप पर काबू रखा और उनकी बातें सुनता रहा.

चाची फिर से बोलीं- मेरे पास एक योजना है. हम दोनों उसको खेल के बहाने अपने पास बुलाएंगी और उसके सामने अपनी ब्लाउज, पैंटी और ब्रा को खोल देंगे. जब वो गर्म हो जाएगा तो हम दोनों को चोद देगा.

यह सुनकर मम्मी और चाचा राज़ी हो गए.

अब काफी रात हो गयी थी.

उसी रात में चाचा की ट्रेन थी. उन्होंने अपने कपड़े और सामान पैक कर लिए और वो अपने काम से बाहर निकलने लगे.

सब लोग कमरे से बाहर आ गए.

चाची ने मुझे आवाज दी और बताया कि चाचा बाहर जा रहे हैं.

चाचा जाने लगे थे तो मेरी मम्मी और चाची, चाचा के गले लग गईं और उनके लंड को दोनों ने दबा कर सहला दिया.

ये सब मैंने देख लिया पर मैं चुप बैठा रहा.

चाचा के जाते ही मेरे घर की दोनों रंडियां मेरे करीब आईं और मेरे सामने बैठ गईं.

चाची मुझसे बोलीं- विक्की, खाने के बाद क्या तुम हमारे साथ एक खेल खेलोगे.

मैंने अनजान बन कर हां में सिर हिला दिया.

चाची मुझे अपनी चूचियां दिखाती हुई बोलीं- थोड़ा बोल्ड गेम है … मगर बड़ा मजा आता है.

मैंने भी उनके मम्मे देख कर कहा- हां चाची, मुझे भी इसी तरह के खेल खेलना पसंद हैं. आप दोनों शायद ये खेल चाचा जी के साथ भी खेलती हैं.

चाची ने चूचियां हिलाईं और बोलीं- सही पकड़े हो … हम दोनों तुम्हारे चाचा के साथ खूब मस्ती करती हैं.

मैंने भी उनकी चूचियों को देख कर कहा- हां मैं अभी कुछ देर पहले देखा था.

चाची ने आंख दबा दी और बोलीं- मतलब लौंडा जवान हो गया.

मैंने भी कह दिया- ऐसी जवानी किस काम कि जो किसी को खुश ही न कर सके.

चाची मेरे सीने पर हाथ फेरती हुई बोलीं- चिंता न करो विक्की, आज तुम भी खुश हो जाओगे और हम दोनों भी तुमसे खुश हो जाएंगी.

मैंने हंस कर उनका हाथ दबा दिया.

चाची ने कहा- चलो अब तुम खाना खाकर कमरे में आ जाना. हम दोनों रूम में तुम्हारा इंतज़ार करेंगी.

ये कह कर वो दोनों कमरे में चली गईं.

मैंने फटाफट खाना खत्म किया और उनके पास कमरे में चला गया.

कमरे में चाची ने मुझे देख कर कहा- क्या तुम्हें ताश खेलना आता है?

मैंने कहा- हां चाची.

मैं उनके पास जाकर बैठ गया.

चाची और मम्मी ने कहा- यहां पर एक रूल है कि तुम जितनी बार हारोगे, हम दोनों तुमसे उतनी ही चीजें मांगेंगे, क्या तुम राज़ी हो?

मैंने कहा- हां.

अब हमारा खेल चालू हो गया.

मैं पहला राउंड हार गया.

चाची और मम्मी ने मेरी शर्ट मांगी.

मैंने अपनी शर्ट उतार कर उनकी तरफ फैंक दी.

चाची मेरे चौड़े सीने को देख कर मुस्कुरा दीं और बोलीं- विक्की बड़ा मस्त सीना बना लिया है.

मैंने हंस कर कहा- हां चाची, कसरत करने से बन गया है.

चाची- लड़कियां तो मरती होंगी तुम पर?

मैंने कहा- लड़कियों की बात तो छोड़ो चाची, आपकी उम्र की भाभियां और आंटियां भी आहें भरती हैं.

मेरी इस तरह कि बिंदास बातों से कमरे में सेक्स का माहौल बनने लगा था.

अब फिर से खेल शुरू हुआ तो इस बार के राउंड में मैं जीत गया और चाची और मम्मी की तरफ देखने लगा.

चाची ने इठला कर पूछा- बोलो क्या चाहिए?

मैंने उन दोनों की चूत की तरफ देख कर आंख दबा दी.

चाची समझ गईं, उन्होंने अपनी सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया और टांगों से निकालते हुए मेरी मम्मी से कहा- दीदी आप भी अपनी सलवार उतारो न … अपना विक्की शर्मा रहा है.

उन दोनों ने मुझे अपनी अपनी सलवार दे दी.

मैंने देखा कि मम्मी और चाची ने छोटी छोटी सी पैंटी पहनी हुई थीं.

उन दोनों की जांघें बड़ी ही मस्त दिख रही थीं.

मैं चाची की जांघों को देखने लगा तो चाची ने बड़ी अदा से अपनी जांघ खुजला कर मुझे गर्म करना शुरू कर दिया.

मैंने अपनी नजरें अपनी मम्मी की जांघों की तरफ की तो उन्होंने अपनी कुर्ती से अपनी जांघें ढांक लीं.

अब फिर से खेल शुरू हो गया.

मैं फिर से जीत गया और इस बार मैंने उन दोनों से उनकी पैंटी मांगी.

उन दोनों ने अपनी अपनी पैंटी मुझे दे दी.

अब वो दोनों नीचे से नंगी हो गई थीं.

फिर से एक और राउंड हुआ और इस बार मैं हार गया.

चाची ने मेरी पैंट मांगी, तो मैंने उनको दे दी.

अगली बार मैं जीत गया और मैंने दोनों की कुर्तियां माँग लीं.

अब वो दोनों पूरी नंगी हो गई थीं और मुझे उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी.

फिर मैं अगले राउंड में हार गया और दोनों ने मेरी चड्डी मांग ली.

मैं उतारने वाला ही था कि चाची मेरे पास आ गईं और खुद उतारने लगीं.

उन्होंने मेरी चड्डी निकाल दी और दोनों रंडियां मेरे खड़े लंड को देख कर हैरान हो गईं.

मेरा लंड फूल कर अपनी औकात में आ गया था ये काफी लंबा और मोटा हो गया था.

चाची ने लंड देखते हुए कहा- बड़ा मस्त है.

मैं हंस दिया.

चाची अपनी चूचियां हिलाती हुई बोलीं- देखो अब अंतिम राउंड है.

मैंने कहा- काहे का अंतिम राउंड चाची … अब मुझसे और नहीं रुकना हो पाएगा.

मैं लंड हिलाते हुए उठा और चाची के मुँह में अपना लंड दे दिया.

चाची ने लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

मम्मी मुझे लंड चुसवाते देख कर अपनी चूत को मसलने लगीं और चाची की चूत को चाटने लगीं.

दस मिनट बाद में चाची के मुँह में झड़ गया.

इसी बीच चाची और मम्मी भी अपनी चूत से पानी छोड़ चुकी थीं.

मैंने अपना लंड चाची के मुँह से बाहर निकाला और मम्मी के मुँह में दे दिया.

मैं अपनी मम्मी के मुँह को चोदने लगा.

जल्द ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

मैंने मम्मी को उल्टा लिटाया और उनकी गांड में एक ही झटके में पूरा लंड घुसेड़ दिया.

चूंकि मम्मी की गांड पहले से खुली हुई थी, इसीलिए मैं जोर जोर से धक्के देने लगा था.

कुछ देर बाद मैंने मम्मी की गांड से लंड निकाल कर उनकी चूत में पेल दिया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.

मम्मी जल्द ही थक गईं और नीचे लेट गईं.

मैं अभी पूरे जोश में था. मैंने चाची को इशारा किया और खुद ही बेड के ऊपर लेट गया.

चाची मेरे ऊपर आ गईं और अपनी गांड को लंड में सैट करके ऊपर नीचे होने लगीं.

कुछ ही देर में चाची जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगीं.

मैंने कहा- चाची, गांड में बहुत हो गया, अभी मुझे आपकी चूत चाहिए.

चाची लौड़े से उठीं और अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर लगा कर ऊपर नीचे होने लगीं.

फिर हम दोनों ने आसन बदल लिया.

अब चाची को घोड़ी बना कर उनकी चूत में लंड ठोकने लगा.

उनके मम्मों को मैं जोर जोर से भींच रहा था और चुदाई का मजा ले रहा था.

करीब 15 मिनट के बाद मैं चाची की चूत में झड़ गया और नीचे लेट गया.

इस चुदाई में चाची अब तक तीन बार झड़ गयी थीं.

अब हम तीनों थक कर सो गए.

ऐसे ही हमारा ये खेल एक हफ्ते तक चला.

घर में हम सब नंगे ही घूमते थे.

मैं जिसकी चाहे उसकी चूत में लंड पेल कर उसे चोद देता था.

फिर चाचा घर आ गए और हम चारों मजा लेने लगे.

अब हम दोनों चाचा भतीजे मिलकर हर रोज़ ज्योति और स्वाति रंडी की चूत का भोसड़ा बनाते हैं

माँ को चोद कर उसकी चीखें निकाली

हाय दोस्तों, मैं विजय, एक बार फिर आपके लिए एक नई सेक्सी कहानी लेकर आया हूँ। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी ये कहानी बहुत पसंद आएगी। कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में थोड़ा बता देता हूँ। मेरा नाम विजय है, मेरी उम्र 22 साल है, और मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ। मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है, और मैं दिखने में भी काफी अच्छा हूँ। मेरे लंड का साइज़ 8 इंच है, जो किसी भी चूत को फाड़ने के लिए काफी है।

मैं अब तक करीब 8 लड़कियों, 3 आंटियों और 2 भाभियों को चोद चुका हूँ। और इन सब रंडियों में मेरी अपनी सगी माँ भी शामिल है। जी हाँ, मैंने अपनी माँ को पहले भी कई बार चोदा है, जैसा कि मैंने अपनी पिछली कहानी में बताया था। मेरी माँ का रंग गोरा है, और अगर मैं उनके फिगर की बात करूँ तो शायद आप यकीन ही न करें। मेरी माँ का फिगर 38-34-40 है। 38 की उम्र में ऐसा फिगर और उनकी जवानी, ये दोनों मिलकर बिस्तर पर आग लगा देती हैं। उनकी चूचियाँ इतनी रसीली और भारी हैं कि उन्हें देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। उनकी गांड इतनी भारी और गोल है कि हर कदम पर लचकती है, और उनकी चूत… उफ़, उसका रस तो बस पीने लायक है।

ये कहानी भी मेरी माँ की चुदाई की है। मैं पिछले दो साल से अपनी माँ को चोद रहा हूँ, लेकिन अब तक मैंने उन्हें सिर्फ एक बार ही जी भरकर चोदा था, वो भी तब जब मैंने पहली बार उनकी चूत फाड़ी थी। उस दिन मैंने सुबह से शाम तक उन्हें लगातार चोदा था। उनकी चीखें, उनकी सिसकियाँ, और उनकी वो हालत, सब कुछ आज भी मेरे दिमाग में ताज़ा है। उस दिन के बाद माँ हर हफ्ते 2 से 4 बार मुझसे चुदवाती हैं, लेकिन अब मैं उन्हें ज्यादा से ज्यादा 15-20 मिनट ही चोद पाता हूँ, क्योंकि पापा ज्यादातर घर पर ही होते हैं।

उस दिन मैंने माँ की चूत और गांड का ऐसा हाल किया था कि पापा को शक होने लगा था। मैंने उनकी चूत का भोसड़ा बना दिया था, और उनकी गांड इतनी सूज गई थी कि वो दो दिन तक ठीक से चल भी नहीं पाई थीं। इसीलिए माँ अब मुझे ज्यादा देर तक चोदने नहीं देतीं, डरती हैं कि कहीं मैं फिर वैसा हाल न कर दूँ और पापा को शक हो जाए। लेकिन मेरी प्यारी माँ को कौन समझाए कि मैं और मेरा लंड तो उन्हें 3-4 घंटे तक चोदना चाहते हैं।

माँ मेरे लंड की इतनी दीवानी हो चुकी हैं कि जब भी मैं उनकी चुदाई करता हूँ, वो बोलती हैं, “विजय, तेरे बाप का लंड तो तेरे लंड से बहुत छोटा है। तू जब मेरे ऊपर चढ़ता है, तो उतरने का नाम ही नहीं लेता।” कभी-कभी तो वो कहती हैं, “जब तेरी शादी हो जाएगी, तब भी मैं तेरे लंड से चुदूँगी। और अगर तूने अपनी इस चुदक्कड़ माँ को चोदना बंद किया, तो मैं तेरी बीवी को उसके मायके भेजकर तुझसे जबरदस्ती चुदवाऊँगी।” उनकी ऐसी बातें सुनकर मेरा लंड और सख्त हो जाता है।

माँ के इस रसीले जिस्म का कारण पापा ही थे। पहले पापा उन्हें चोद-चोदकर हका देते थे। मैंने कई बार पापा को माँ को चोदते देखा था, लेकिन अब उनकी बैटरी डाउन हो चुकी है। अब तो हालत ये है कि माँ जैसे ही पापा का लंड अपने हाथ में लेकर ऊपर-नीचे करती हैं, उनका पानी पिचकारी की तरह छूट जाता है। लेकिन अब मेरी और मेरे लंड की जिम्मेदारी है कि माँ और उनकी चूत को चोद-चोदकर उनकी नानी याद दिला दूँ। मैं उनकी चूत में अपना पूरा लंड एक ही झटके में पेलकर उनकी चूत फाड़ देता हूँ।

एक दिन पापा को किसी काम से शहर से बाहर जाना था। उनकी ट्रेन शाम को थी। जैसे ही शाम हुई, पापा स्टेशन जाने के लिए तैयार हो गए। मैं भी उन्हें ड्रॉप करने चला गया, लेकिन रास्ते भर मेरे दिमाग में बस माँ की चुदाई का प्रोग्राम बन रहा था। मैं सोच रहा था कि आज रात माँ को इतना चोदूँगा कि वो चल भी न पाएँ। पापा ट्रेन में बैठे ही थे कि मैं तेजी से घर की ओर भागा।

घर पहुँचते ही मैंने अपनी चुदासू माँ को ढूँढना शुरू किया। माँ किचन में खाना बना रही थीं। मैं पीछे से गया और उन्हें ज़ोर से दबोच लिया। मेरे हाथ उनकी कमर पर गए, और मैंने उनकी गांड को अपनी तरफ दबाया। माँ ने हँसते हुए कहा, “हरामी, तेरा बाप अभी गया भी नहीं और तू अपनी माँ को चोदने चला आया? चल, पहले खाना खा ले, मैं तो पूरी रात यहीं हूँ।”

खाना खाने के बाद मैंने माँ की चूचियों की तरफ इशारा करके कहा, “मम्मी, खाने के बाद मीठे में क्या है?” माँ ने मेरी तरफ शरारती मुस्कान दी और बोली, “चल, तू नहा ले, फिर जो तू देख रहा है, उसे तेरे मुँह में डालकर तेरा मुँह मीठा करवाती हूँ।” उनकी बात सुनकर मेरा लंड तन गया। मैं उठा और सीधा बाथरूम में चला गया। नहाते वक्त मैंने अपने लंड की पूरी ग्रूमिंग की, उसे माँ की चुदाई के लिए तैयार किया।

बाथरूम से बाहर आकर मैं सिर्फ़ अंडरवियर में माँ के बेड पर लेट गया और अपने मोबाइल में पॉर्न देखने लगा। करीब 15 मिनट बाद माँ कमरे में आईं। आते ही उन्होंने पूरे कमरे की लाइट्स बंद कर दीं और मोमबत्तियाँ जलाने लगीं। मैं ये सब देखकर सोच रहा था कि माँ ये क्या कर रही हैं। सारी मोमबत्तियाँ जलने के बाद माँ मेरे सामने खड़ी हो गईं और मुझे देखने लगीं। फिर उन्होंने अपनी नाइटी उतार दी। जैसे ही नाइटी उतरी, मेरे मुँह से निकला, “क्या चीज़ हो मम्मी! आज तो तुम मेरी जान ले लोगी!”

उस वक्त अगर आप मेरी माँ को देखते, तो आपके मुँह से भी पानी टपकने लगता। माँ ने काले रंग की ट्रांसपेरेंट ब्रा और पैंटी पहनी थी। ब्रा इतनी छोटी थी कि उनकी चूचियों का आधा हिस्सा बाहर लटक रहा था। उनकी निपल्स साफ दिख रही थीं, जो ब्रा के ऊपर से उभरे हुए थे। पैंटी तो बस नाम की थी, सामने से थोड़ा कपड़ा और पीछे सिर्फ़ एक पतला सा धागा, जो उनकी मोटी गांड के बीच में फँसा हुआ था। माँ ने गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई थी, जो उनके होंठों को और रसीला बना रही थी।

मैं उनको देखकर पागल हो गया। मैंने तुरंत उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया और उनके होंठों को चूसने लगा। उनके नरम, रसीले होंठ मेरे मुँह में थे, और मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था। तभी मुझे उनकी जीभ मेरे मुँह में महसूस हुई। मैंने उनकी जीभ को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगा। माँ भी मेरे होंठों को चूस रही थीं, और उनकी साँसें गर्म हो रही थीं। “उम्म… आह…” माँ की हल्की सिसकियाँ मेरे कानों में गूँज रही थीं।

मैंने उनके होंठ चूसते-चूसते उनकी ब्रा में हाथ डाला और उसे फाड़ दिया। फिर मैंने उनकी पैंटी को दोनों तरफ से पकड़ा और ज़ोर से खींचकर उसे भी फाड़ डाला। माँ अब पूरी नंगी मेरे सामने थीं। मैंने उन्हें बेड पर धकेल दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। उनकी भारी चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने एक चूची को अपने मुँह में लिया और उसे पागल कुत्ते की तरह चूसने लगा। “आह… विजय… धीरे… उफ़…” माँ की सिसकियाँ तेज हो गईं। मैंने उनकी दूसरी चूची को अपने हाथ से दबाया, उनके निपल्स को उंगलियों से मसला। उनकी चूचियाँ इतनी नरम और भारी थीं कि मैं पागल हो रहा था।

फिर मैं नीचे की ओर बढ़ा। उनकी चूत पहले से ही गीली थी, उसका रस टपक रहा था। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत पर रखी और उसे चाटना शुरू किया। “आह… ओह… विजय… उफ़…” माँ की सिसकियाँ अब चीखों में बदल रही थीं। मैंने उनकी चूत के होंठों को अपनी जीभ से अलग किया और उनके दाने को चूसने लगा। माँ की चूत का स्वाद मेरे मुँह में घुल रहा था। मैंने उनकी चूत को इतना चाटा कि उनका पानी मेरे मुँह में आ गया। मैंने सारा रस पी लिया।

मैंने माँ को बेड पर उल्टा किया और उनकी गांड को अपने सामने किया। उनकी गांड इतनी मोटी और गोल थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने उनकी गांड पर एक ज़ोरदार चपत मारी। “आह… हरामी… धीरे…” माँ ने सिसकारी भरी। मैंने उनकी गांड के दोनों हिस्सों को अपने हाथों से पकड़ा और उन्हें अलग किया। उनकी गांड का छेद मेरे सामने था। मैंने अपनी जीभ वहाँ रखी और उसे चाटना शुरू किया। माँ की सिसकियाँ अब और तेज हो गईं, “उफ़… विजय… ये क्या कर रहा है… आह…”

मैंने फिर माँ को सीधा किया और अपने लंड को उनके मुँह के पास ले गया। माँ ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगीं। “कितना मोटा है तेरा लंड, विजय…” माँ ने कहा और उसे अपने मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को चूस रही थीं, उनकी जीभ मेरे लंड के सुपाड़े पर घूम रही थी। “उम्म… आह…” मैं सिसक रहा था। माँ ने मेरे लंड को अपने थूक से गीला कर दिया।

मैंने माँ की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपना 8 इंच का लंड उनकी चूत पर सेट किया। मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा, और मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। “आह… उफ़… विजय… धीरे…” माँ चीख पड़ीं। मैंने उनकी चूत में धक्के मारने शुरू किए। “पच… पच… पच…” मेरे लंड और उनकी चूत के टकराने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। माँ की सिसकियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं, “आह… ओह… चोद मुझे… और ज़ोर से… उफ़…”

मैंने माँ को घोड़ी बनाया और उनकी गांड में अपना लंड डाला। उनकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरा लंड अंदर जाने में थोड़ा रुका। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे, और फिर ज़ोर-ज़ोर से उनकी गांड चोदने लगा। “आह… विजय… फाड़ दे मेरी गांड… उफ़…” माँ चीख रही थीं। मैंने उनकी गांड को चोद-चोदकर लाल कर दिया।

पूरी रात मैंने माँ को अलग-अलग पोज़ में चोदा। कभी उनकी चूत, कभी उनकी गांड, तो कभी उनके मुँह को चोद-चोदकर मैंने उन्हें अपने लंड के पानी से नहला दिया। माँ की चीखें, उनकी सिसकियाँ, और उनकी वो हालत, सब कुछ मेरे लिए जन्नत जैसा था।

दोस्तों, आपको मेरी ये सेक्सी कहानी, जो मेरी माँ को चोदकर उनकी चीखें निकालने की थी, कैसी लगी? अपनी राय ज़रूर बताएँ।