मां का इनकार

मेरा नाम राहुल है मेरी उम्र 21 साल है और मेरी मां की उम्र 46 साल है और मेरी एक बहन है.

मेरी मां का शरीर थोड़ा मोटा 70 किलो का है और उसकी लंबाई 5 फुट 4 इंच और रंग गोरा है और मेरी बहन की दोस्त जो कि पड़ोस में रहती है उसका नाम महिमा है प्यार से उसे हम माही बुलाते हैं.

एक दिन उसके घर वाले किसी इमरजेंसी काम से कहीं बाहर जा रहे थे तो उन्होंने कहा की माही एक दिन के लिए आप लोगों के पास रुक जाएगी और हम शाम तक वापस आ जाएंगे मेरी मम्मी ने कहा “हां ठीक है”.

यह सुनते ही मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि बहुत दिनों बाद वह हमारे साथ रहने आ रही थी.

सुबह के 7:00 रहे थे वह हमारे घर आई उसे देखते ही मम्मी ने उससे कहा ” अरे माही तुम और राहुल नाश्ता कर लो और मैं स्कूल जा रही हूं”. फिर माही ने उनसे पूछा कि मेरी बहन भी साथ में जा रही है क्या.

मम्मी ने कहा ” हां मैं इसे भी साथ ले जा रही हूं क्योंकि आते समय इसे कुछ सामान खरीदना है तो मैं वहीं से इसे लेते आऊंगी”.

अब घर में सिर्फ मैं और माही अकेले थे. वह बहुत ही खूबसूरत थी सबके चले जाने के बाद माही ने मुझसे बोला ” हम पूरे दिन क्या करेंगे”

मैंने कहा “तुम बोलो क्या करना है”. तो उसने कहां की क्यों ना हम कोई खेल खेलें मैंने उत्सुकता से उससे पूछा कौन सा खेल वह बोली “चलो लूडो खेलते हैं” मैं भी हां कहा.

फिर हम थोड़ी देर तो खेलें लेकिन वह बहुत बोरिंग सा था तो मैंने कहा चलो कोई मूवी देखते हैं.

तो मैं एक मूवी लगाई, मूवी बहुत इंटरेस्टिंग थी पर उसमें अचानक से एक रोमांटिक सीन आया जिसमें हीरो हीरोइन को किस कर रहा था.

यह देख माही शर्मा गई और मुझसे पूछा “किस करने में इतना क्या मजा आता है”

मैंने कहा “यह तो ट्राई करने के बाद ही पता चलेगा”. उसका चेहरा और लाल हो गया और जो मैंने सोचा नहीं था वह उसके आंखों में दिख रहा था जैसे वह सच में किस का एहसास करना चाहती थी.

उसने धीमी आवाज में मुझसे कहा ” क्यों ना हम एक बार किस करके देखें”

यह सुनकर मैं हैरान हो गया और बेचैनी बढ़ने लगी. हम दोनों एक दूसरे के काफी करीब बैठे हुए थे बिना कुछ सोचे समझे दूसरे को चूमना चालू कर दिया. उसके होंठ जैसे गुलाब की पंखुड़ी जैसे थे. हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ लिए लेकिन हम यह भूल गए दरवाजा खुला ही था सिर्फ पर्दा लगा हुआ था मेरा एक हाथ उसकी पीठ को रगड़ रहा था दूसरा हाथ ब्रेस्ट को सहला रहा था उसे भी मजा आने लगा था. हमें यह करते करीब 10 मिनट हुए थे क्या अचानक मम्मी और मेरी बहन दोनों आ गई हम जल्दी से डर के मारे एक दूसरे से अलग हुए पर उन दोनों ने एक सेकंड के लिए यह सब होते हुए देख लिया था.

मम्मी के चेहरे पर अजीब सा गुस्सा था क्योंकि माही के घर वाले भरोसे पर छोड़कर गए थे और वह भी मेरी बहन की दोस्त थी. और मेरी बहन भी यह सब देखकर दंग रह गई और माही के चेहरे का रंग भी उड़ा हुआ था. मैं सोच में पड़ गया कि अब क्या होगा, मम्मी का सामना करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.

मैंने मम्मी को देखा कि वह नॉर्मल बिहेव कर रही थी क्योंकि वह माही को नहीं जताना चाहती थी कि उसके घर में उसके साथ कुछ गलत हुआ है. शाम को माही के मम्मी पापा घर आए और उसे ले गए.

मैं उसे वक्त सामने भी नहीं गया और मेरी बहन पढ़ने चली गई अपने कमरे में तभी मम्मी मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ के स्टोर रूम में ले गई रूम का दरवाजा काफी पुराना था इसमें जगह-जगह पर लकड़िया टूटी हुई थी और कई जगह पर छेद भी थे जिससे इस तरफ से उसे तरफ देखा जा सकता था. जब मम्मी मुझे अंदर ले गई इसका मतलब हुआ वह शायद मेरी बहन के सामने यह सब बात नहीं करना चाहती थी. उसने स्टोर रूम का लाइट चलाया जो की बहुत हल्की रोशनी दे रहा था उसे बंद कमरे में मम्मी मानो ऐसी लग रही थी जैसे बहुत गुस्से में हो.

मम्मी ने मुझसे पूछा “क्या हो रहा था तुम दोनों का”. मैं डरा हुआ था मैंने धीमी आवाज में कहा ” कुछ भी नहीं हम बस मूवी देख रहे थे”. मम्मी बोली ” मुझे क्या बेवकूफ़ समझा है तुम दोनों चुम्मा चाटी कर रहे थे, उसके ब्रेस्ट को दबा रहे थे और मुझे मालूम नहीं चलेगा”.

सच में मम्मी के मुंह से ऐसे शब्द मैंने पहली बार सुना था वह बहुत स्ट्रिक्ट थी और मम्मी का ब्रेस्ट दबाने का कहना मेरे दिमाग में बैठ गया अचानक मेरी नजर पता नहीं क्यों मम्मी के बदन पर पढ़ने लगी उसका ब्रेस्ट बहुत बड़ा था गोरी कमर हल्की रोशनी में इतना सुंदर दिख रहा था मन कर रहा था पकड़ लूं.

वह मेरी तरफ हैरानी से देख रही थी क्योंकि उसकी बातों का मुझ पर फर्क होना बंद हो चुका था क्योंकि मेरा ध्यान उसके शरीर पर जा रहा था.

मम्मी ने लाल कलर की ब्लाउज और ब्लू कलर की साड़ी पहनी थी वह जैसे किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी घने लंबे बाल और चेहरे की सुंदरता.

वह बोली ” मैं तुझे कुछ पूछ रही हूं और तु मेरी तरफ ऐसे क्यों देख रहा है, तुझे थोड़ी भी शर्म नहीं आई तेरी बहन ने देखा होगा तो क्या सोचा होगा”.

मैंने बिना सोचे समझे मम्मी का हाथ पकड़ लिया और कहने लगा पास जाकर बोला “मम्मी मुझसे गलती हो गई आप ही बताओ मैं क्या करूं उसने भी मुझसे किस करने को कहा था”.

मैं और आगे बड़ा मम्मी को दीवार से लगा दिया और बोला “मम्मी जितनी पास अभी आप हो इतनी पास आकर उसने मुझसे कहा था मैं कैसे रोक पता अपने आप को”.

मैं मम्मी के इतने करीब जा चुका था उसकी गर्माहट महसूस कर सकता था और उसके बदन की खुशबू बहुत प्यारी थी.

मम्मी ने तुरंत धक्का देकर कहा ” दूर हो जा मेरे पास से अब क्या अपनी मां को भी नहीं छोड़ेगा बेशर्म”. मैं फिर से मम्मी का हाथ पकड़ लिया और दीवार से लगा दिया वह चौंक गई ” यह तुझे क्या हो गया है मैं मां हूं तेरी”. उसका नशा मेरे सर पर चढ़ गया था उसकी खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी मैं सारा डर भूल गया.

मैंने कहा ” मम्मी एक बार आपको चुम्मा लेने दो बहुत मन कर रहा है और हम दोनों के अलावा इस कमरे में कौन है किसी को पता नहीं चलेगा”.

मम्मी ने कहा ” दूर हट जा मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा ऐसा निकलेगा”

फिर मैं मम्मी को समझने की कोशिश करने लगा ” आप भी तो हर समय अकेले रहती हो पापा तो साल में एक बार आते हैं वह भी चार-पांच दिन के लिए क्या आपका मन नहीं करता रोमांस का”. मम्मी ने तुरंत बोल “इसका क्या मतलब है अपने बेटे से काम चला लूं और तू यह कैसी पागलों जैसी बातें कर रहा है”.

मैं एक चीज तो समझ गया था अगर इस वक्त मैं अपनी मम्मी को बाहों में जो करके चूमलूं तो भी यह किसी को नहीं बताएगी क्योंकि यह रिश्ता अलग है इसके बारे में किसी से जिक्र भी नहीं करेगी. तो मैं मेरी मम्मी को कमर से पकड़ लिया और दीवार से फिर से लगा दिया और उसके गर्दन को चूमने लगा और हाथों से उसके बड़े चूची को मसलने लगा वह बहुत कोशिश कर रही थी मुझसे पीछा छुड़ाने का पर मैं भी नहीं रुक रहा था मुझे लगा कि शायद मैंने उसे गर्म कर दिया है पर मैं गलत था उसने मुझे जोर से धक्का दिया और बोली “तू सच में बेशर्म हो गया है” और जैसे तैसे अपनी साड़ी को संभाल कर दरवाजा खोली और चली गई.

मैं भी सोचने लगा कि शायद मैंने जो किया वह सही नहीं था क्योंकि जो इतना समझाने पर भी नहीं समझी तो हो सकता है नहीं गलत हूं.

रात को मम्मी और बहन दोनों कमरे में सोने चले गए और मैं बाहर हाल में ही सो गया.

अगले दिन सुबह मम्मी ने आंखें भी नहीं मिलाई और नाश्ता टेबल पर रखकर स्कूल के लिए चली गई. एक बार मेरा मन फिर से मां के बारे में सोचने लगा. हमारा घर छोटा ही था एक कमरा जिसमें मम्मी और बहन सोई थी और एक हाल और किचन और साथ में एक स्टोर रूम. मैं हाल में ही सोया करता था और मैं उसके कमरे में चला गया फिर मेरा मन उसकी चड्डी और ब्रा देखने को हो रहा था, मैंने अलमारी खोला तो देखा की मम्मी के पास हर कलर की पैंटी थी हाथों में लेकर सुंघा तो उसमें से मम्मी की बुर की खुशबू आ रही थी जिसने अंदर से मुझे और बेचैन कर दिया अब फिर से वह स्टोर रूम वाली बातें याद आने लगी जब मैं मम्मी को पकड़ा था और अब बस यही मन कर रहा था कि उसका बुर कैसे देखना है,कैसे चाटना है और कैसे चोदना है. और जब मैं दूसरा दरवाजा खुला अलमारी का तो मैंने देखा मेरी बहन की पेंटि भी वहां पर थी मैं मम्मी की और मेरी बहन की पेंटि बारी-बारी से सूंघने लगा मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और अब रहा नहीं जा रहा था. शाम को जब मम्मी और बहन वापस आई तो मैंने देखा मम्मी फिर से नॉर्मल बिहेव कर रही है. मैं मन ही मन में यह समझ गया की अब गुस्सा उतर चुका है. रात का खाना हम सब साथ बैठकर खा रहे थे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और पावर कट भी हो गया.

मम्मी ने उठकर मोमबत्ती जलाई और बोली “आज हम सब साथ सोएंगे क्योंकि पावर कट है और अंधेरे में किसी को कोई जरूरत पड़ी तो पास रहेंगे तो अच्छा रहेगा”.

यह मैंने क्या सुना क्या सच में मम्मी ने साथ में सोने को कहा है पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि हम साथ कैसे सोएंगे मम्मी तो मुझसे नाराज थी फिर मैं कहां सोऊंगा.

जब सोने की बारी आई तब मम्मी ने कहा “बेटा तू मेरे बाएं तरफ सो जा कोई दिक्कत तो नहीं” मैंने तुरंत कहा “नहीं मम्मी आपने कहा है तो क्या दिक्कत होगी”. यह सुनकर मम्मी ने मेरी तरफ आंखों में आंखें डालकर देखा मैं थोड़ा सा घबरा गया कि मैं कुछ गलत तो नहीं बोल दिया पर मम्मी ने और कुछ रिएक्ट नहीं किया, मेरी बहन को दाएं और सोने को कहा.

बारिश बहुत तेज थी बिजली भी कड़क रही थी और हम सब एक ही बिस्तर पर सोने के लिए तैयार थे सबसे पहले मेरी बहन उसके बाद मेरी मम्मी और उसके बाद मैं. मम्मी ने एक चादर को हम सबके कमर तक रख दिया ताकि ठंड ना लगे पर मौसम ठंडा था मैं मम्मी के पीछे लेता हुआ था मम्मी ने मेरी तरफ कमर कर दिया जल्दी मेरी बहन सो गई. मम्मी ने मुझे जगाया और बोली की एक मोमबत्ती ले ले मुझे वॉशरूम जाना है उधर काफी अंधेरा है. मैंने मोमबत्ती लिया और उसे जलाकर मम्मी के आगे आगे चलने लगा वॉशरूम आते ही मम्मी ने कहा

“तू यहीं रुक मैं टॉयलेट करके आ रही हूं” तो मैंने कहा “मम्मी अगर मैं बाहर तो अंदर पूरा अंधेरा हो जाएगा आपको कुछ नहीं दिखेगा”.

मम्मी- ” दरवाजा खुला रहने दे और अपना मुंह उसे तरफ घुमा”

मैं-“हां ठीक है” दबी हुई आवाज में.

पर मैं उसे देखे बिना कैसे रह पाता मैं सुबह से यही तो देखना चाहता था उसने पीठ मेरी और घुमाई साड़ी को कमर तक उठाया उसने रेड कलर की पैंटी पहनी थी उसकी गोरी गोरी जाएंगे साफ दिखाई दे रही थी और टॉयलेट के लिए बैठने के लिए जा रही थी उसने अपना पैंटी को नीचे किया और उसका गांड साफ-साफ दिखाई दे रहा था दरवाजा खुला था और उसके मुतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी मन तो कर रहा था जो कि उसकी बुर और कैसे चोदना है. और जब मैं दूसरा दरवाजा खुला अलमारी का तो मैंने देखा मेरी बहन की मेरी बहन की पेंटि भी वहां पर थी मैं मम्मी की और मेरी बहन की पेंटि बारी-बारी से सूंघने लगा मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और अब रहा नहीं जा रहा था. शाम को जब मम्मी और बहन वापस आई तो मैंने देखा मम्मी फिर से नॉर्मल बिहेव कर रही है. मैं मन ही मन में यह समझ गया की अब गुस्सा उतर चुका है. रात का खाना हम सब साथ बैठकर खा रहे थे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और पावर कट भी हो गया.

मम्मी ने उठकर मोमबत्ती जलाई और बोली “आज हम सब साथ सोएंगे क्योंकि पावर कट है और अंधेरे में किसी को कोई जरूरत पड़ी तो पास रहेंगे तो अच्छा रहेगा”.

यह मैंने क्या सुना क्या सच में मम्मी ने साथ में सोने को कहा है पर मैं समझ नहीं पा रहा था कि हम साथ कैसे सोएंगे मम्मी तो मुझसे नाराज थी फिर मैं कहां सोऊंगा.

जब सोने की बारी आई तब मम्मी ने कहा “बेटा तू मेरे बाएं तरफ सो जा कोई दिक्कत तो नहीं” मैंने तुरंत कहा “नहीं मम्मी आपने कहा है तो क्या दिक्कत होगी”. यह सुनकर मम्मी ने मेरी तरफ आंखों में आंखें डालकर देखा मैं थोड़ा सा घबरा गया कि मैं कुछ गलत तो नहीं बोल दिया पर मम्मी ने और कुछ रिएक्ट नहीं किया, मेरी बहन को दाएं और सोने को कहा.

बारिश बहुत तेज थी बिजली भी कड़क रही थी और हम सब एक ही बिस्तर पर सोने के लिए तैयार थे सबसे पहले मेरी बहन उसके बाद मेरी मम्मी और उसके बाद मैं. मम्मी ने एक चादर को हम सबके कमर तक रख दिया ताकि ठंड ना लगे पर मौसम ठंडा था मैं मम्मी के पीछे लेता हुआ था मम्मी ने मेरी तरफ कमर कर दिया जल्दी मेरी बहन सो गई. मम्मी ने मुझे जगाया और बोली की एक मोमबत्ती ले ले मुझे वॉशरूम जाना है उधर काफी अंधेरा है. मैंने मोमबत्ती लिया और उसे जलाकर मम्मी के आगे आगे चलने लगा वॉशरूम आते ही मम्मी ने कहा

“तू यहीं रुक मैं टॉयलेट करके आ रही हूं” तो मैंने कहा “मम्मी अगर मैं बाहर तो अंदर पूरा अंधेरा हो जाएगा आपको कुछ नहीं दिखेगा”.

मम्मी- ” दरवाजा खुला रहने दे और अपना मुंह उसे तरफ घुमा”

मैं-“हां ठीक है” दबी हुई आवाज में.

पर मैं उसे देखे बिना कैसे रह पाता मैं सुबह से यही तो देखना चाहता था उसने पीठ मेरी और घुमाई साड़ी को कमर तक उठाया उसने रेड कलर की पैंटी पहनी थी उसकी गोरी गोरी जाएंगे साफ दिखाई दे रही थी और टॉयलेट के लिए बैठने के लिए जा रही थी उसने अपना पैंटी को नीचे किया और उसका गांड साफ-साफ दिखाई दे रहा था दरवाजा खुला था और उसके मुतने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी मन तो कर रहा था जो कि उसकी बुर को चाटलू और जब मैं उसकी तरफ देख रहा था उसने अचानक नजरे घुमाई तो उसने देखा कि मैं उसकी तरफ देख रहा हूं. वह झट से पेंटि को ऊपर उठाई और साड़ी संभालते हुए बाहर निकली वह समझ गई थी कि मैं उसे देख रहा था उसने और उसे भी पता था कि मेरा लंड निकर के अंदर तना हुआ था. उसने मुझसे कहा ” जा तुझे भी जाना है तो चले जा फिर रात को मुझे जागना मत” ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरी लंड को देखना चाहती हो इसलिए मैं भी देर नहीं किया मैं अंदर गया और अपना लंड निकर से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से खड़ा था यह देखकर वह दंग रह गई. उसे अंदाजा लग गया था मेरे इरादे का मैं भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखा वह नीचे मुंह कर ली. मैंने एक बार फिर हिम्मत दिखाइए मैं बाहर निकला और मम्मी को लेकर बाथरूम में चला गया इस बार उसने धीमी आवाज में कहा “यहां क्यों लाया है मुझे”.

मैं- “मम्मी अब तो मान जाओ”

मम्मी-” पर यह सही नहीं है किसी को हम दोनों के बारे में अगर पता चल गया तो?”.

मैं-” इस बाथरूम में मेरे और आपके अलावा और है कौन जो किसी को पता चलेगा”

मम्मी-” तेरी बहन बाहर सो रही है अगर जाग गई तो?”

मैं- “नहीं जागेगी, आप भी जानती हो वह गहरी नींद में सोती है”.

मम्मी-” पर करना क्या चाहता है तू?”

मैं-” आपको चोदना”

मम्मी-” थोड़ा तो शर्म कर मां से कोई ऐसी बात करता है”.

मैं-“जब मां इतनी सेक्सी हो तो बेटा कैसे रोक पाएगा अपने आप को”.

और मम्मी की होठों को चूसने लगा मोमबत्ती की हल्की की रोशनी मैं उसकी लिप्स और चमक रहे थे. क्या गर्माहट थी और लिप्स की मानो पूरे बदन में करंट सा लग रहा हो. मैंने उसकी ब्लाउज की बटन को खोल दिया मम्मी ने ऊपर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी. मुझे यकीन नहीं हो रहा था क्या यह वही मां है जो कि अपने बेटे को डांट रही थी और आज अपने आप को मेरे हवाले कर दिया. मैंने जोर से मम्मी के ब्रा को पीछे से खोलना शुरू किया और वह बेचैन होने लगी जल्दी से उसने खुद अपने ब्लाउस को उतारा और फिर ब्रा को मेरे सामने मेरी मां का पूरा नंगा स्तन था. मैं तुरंत उसकी चूची को अपने मुंह में भर के चूसने लगा वह बेचैन होती जा रही थी मैं चुस रहा था बहुत रसीला था मम्मी का दूध.

मम्मी ने अचानक मेरे मुंह को हटाया घुटने के बल पर बैठ गई और मेरे पेंट को नीचे किया और मेरा लंड के छेद के चुम्मा दिया और फिर दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे लंड को मुंह में घुसाने लगी.

मैं-” लंड कैसा लगा मम्मी?”.

मम्मी-” सोचा नहीं था इतना मजा आएगा”(कांपते हुए आवाज में).

मम्मी देर तक चुस्ती रही मेरे लंड को मुझे लगा अगर और देर तक चुस्ती रही तो मेरा पानी निकल जाएगा मैं इतना जल्दी खेल खत्म होने नहीं देना चाहता था, पहली बार था उसके होठों को छूते ही आग लग चुकी थी.

मैं-” मम्मी अपना बुर दिखाओ ना”.

मम्मी-” उसे दिन माही का नहीं देखा था क्या”.

मैं-” देखने वाला था पर तभी आप आ गई उसका ना सही आपका तो अब देख सकता हूं.”

मम्मी -“क्या करेगा देखकर”

मैं-” उसे जी भर कर चाटना है”

मम्मी-“ओ हां हां आज चाट ले अपनी मम्मी का बुर”. यह बोलकर मम्मी ने जल्दी से अपनी पैंटी उतारकर नीचे लेट गई. जैसे ही मैंने टांगों को थोड़ा सा फैलाया उसके बुर के होठों का उभार मुझे और पागल करने लगा और मैं तुरंत उसके बुर को अपने मुंह मे भर लिया वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी उसके बुर का रस मेरे मुंह में आ रहा था वह क्या स्वाद था उसका. चाट चाट के उसका बुर साफ कर दिया. उसके छोटे-छोटे झाँट के बाल

उसके छोटे-छोटे झाँट के बालों की खुशबू मेरे नाक में आ रही थी. मैं उसके बुर को चाटता रहा और वह सिसकियां भर रही थी साथी आह की आवाज.

मम्मी-“आह आ..आह अब मत चाट बेटा पूरा पानी निकल गया है”. एक बार अपना लंड घुसा दे अंदर.”

मैं-“ओह मम्मी, सच में अब रहा नहीं जा रहा टांगों को थोड़ा सा फैला लो मम्मी.”

मम्मी ने पूरी मेहनत की और अपने पैरों को चौड़ा किया मेरा लंड लेने के लिए अपने आप को तैयार किया मैं एक चीज तो जानता था कुछ भी हो है तो मेरी मां मेरे से तो ज्यादा एक्सपीरियंस है इसका मैंने अपने लंड के ऊपर के हिस्से को मम्मी के बुर से रगड़ना शुरू कर दिया लंड को छूते ही वह थरा गई उसकी सांसे और तेज चलने लगी और वही हाल मेरा भी था और क्यों ना हो पहली बार अपनी मां की बुर में लंड को घुसने जा रहा था. मैंने अपने लंड का निशाना मां की बुर की छेद पर किया धीरे से धक्का देने की कोशिश की मैंने देखा मेरा लंड थोड़ा सा मम्मी के अंदर जाने लगा था पर अभी भी एक मोटा लंबा हिस्सा बाहर था और मम्मी का इतने में ही आह निकल रहा था.

मम्मी-“आह..आह बेटा थोड़ा धीरे करना”

मैं-” क्या हुआ मम्मी आपको तो इस चीज का एक्सपीरियंस होगा फिर क्यों डरती हो”.

मम्मी-” ऐसा नहीं है साल में एक बार तेरे पापा आते हैं उसमें क्या एक्सपीरियंस और अब मैं जवान भी तो नहीं हूं जो तेरी जोर-जोर के झटके बर्दाश्त कर पाऊं”.

मैं-” कोई बात नहीं मम्मी आपकी बुर को ध्यान से चोदूंगा धीरे-धीरे” और यह कहकर मैं अपना लंड लेकर अपनी मां की बुर में अंदर तक घुसता जा रहा था.

मम्मी-” बस बेटा ओ…हो..हो.आह..आह धीरे-धीरे.”

मैं-” क्या करूं मम्मी अब रहा नहीं जा रहा है कुछ नहीं होगा कर लेने दो जोर-जोर से”.

मम्मी-“सारी ताकत ताजी निकाल देगा क्या”.

मैं-” आपके लिए तो हर दिन तैयार रहूंगा आप टेंशन मत लो बस आज जी भर कर चोद लेने दो” मैं और तेज चोदता रहा मम्मी को और वह सिसकियां भरती रही. मम्मी ने जोर से मुझे पकड़ कर अपनी बाहों में भर लिया मैं अपना पूरा लंड मम्मी के बुर में घुसा दिया और उसकी गर्मी मेरे लंड का पानी निकलने वाला था तभी मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर मम्मी की चूची पर अपना पानी निकाल दिया. हम दोनों की हालात एक जैसी थी ऐसी बारिश और ठंडा मौसम में भी पसीने से भीग चुके थे और वही फर्श पर सोए हुए थे. मैंने इसी बहाने से पूछ लिया.

मैं-” मम्मी कल तो इतना नाराज हुई थी मुझसे, डांट रही थी फिर आज अचानक ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों यहां तक आ गए.”

मम्मी-” क्या करूं मैं आज पूरे दिन स्कूल में यही सोचती रही अगर हम दोनों मैं कोई ऐसा रिश्ता बन जाता है जो किसी को पता ही ना चले तो बुरा ही क्या है.”

हम इस तरह एक दूसरे की बाहों में लिपटी ही थे तभी अचानक मेरे बहन की आवाज आने लगी बाहर से ढूंढ रही थी. और अब हम दोनों डरे हुए थे हमने तुरंत कपड़े पहनना शुरू किया और फिर जल्दी से प्लान बनाया कि पहले मम्मी बाहर जाएगी और उसकी बातों में मिल जाएगी और मैं धीरे से निकल लूंगा पीछे से पर यह प्लान फेल हो गया जैसे ही मम्मी ने दरवाजा खोला तो देखा मेरी बहन दरवाजे पर ही खड़ी थी बाहर निकली वह तुरंत अंदर आ गई बोलते हुए कि उसे टॉयलेट करना है.