माँ, बेटा और मालिश

मैं अपने कमरे में किताबों के ढेर के बीच डूबा हुआ था, रात का सन्नाटा और टेबल लैंप की हल्की रोशनी मेरे साथ थी। तभी अचानक मम्मी की दबी-सी चीख सुनाई दी। मैं चौंककर किताबें छोड़कर बाहर भागा। देखा तो मम्मी फर्श पर गिरी पड़ी थीं, उनके चेहरे पर दर्द की लकीरें साफ दिख रही थीं। मैंने फौरन उनकी तरफ लपका, उनके कंधों को सहारा देकर उठाया और चिंता से पूछा, “मम्मी, क्या हुआ? आप ठीक तो हैं?”

“अरे, फर्श पर पानी पड़ा था, मैंने ध्यान नहीं दिया और फिसल गई,” मम्मी ने कराहते हुए कहा, उनकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।

“चोट तो नहीं लगी?” मैंने उनकी टांगों की तरफ देखते हुए पूछा।

“टांग मुड़ गई, बेटा। दर्द हो रहा है,” मम्मी ने कहा, अपनी दाहिनी टांग को हल्का-सा हिलाने की कोशिश की, लेकिन दर्द से उनका चेहरा सिकुड़ गया।

“चलो, पहले आपको बिस्तर पर लेटाते हैं। हल्दी वाला दूध पी लो, आराम मिलेगा,” मैंने सुझाव दिया।

“नहीं, दूध की जरूरत नहीं। बस टांग में दर्द है, लगता है नस पर नस चढ़ गई,” मम्मी ने धीमी आवाज में कहा।

“ठीक है, आप लेट जाओ। मैं आपको कमरे तक ले चलता हूँ,” मैंने कहा और उन्हें सहारा देकर उनके बेडरूम तक ले गया। मम्मी को बिस्तर पर लिटाते हुए मैंने कहा, “अब कोई काम नहीं करना, बस आराम करो।”

“हाय राम, टांग तो हिल भी नहीं रही,” मम्मी ने कराहते हुए कहा, उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, जिससे उनकी गोरी कमर हल्की-सी नजर आई।

“मम्मी, मैं आपकी टांग दबा दूँ? शायद थोड़ा आराम मिले,” मैंने पूछा, उनकी तकलीफ देखकर दिल में बेचैनी सी हो रही थी।

“हाँ, थोड़ा दबा दे,” मम्मी ने सहमति दी, उनकी आवाज में थकान और दर्द का मिश्रण था।

मैं उनके पैरों के पास बैठ गया और उनकी दाहिनी टांग को हल्के-हल्के दबाने लगा। उनके पैरों की नरम त्वचा मेरे हाथों के नीचे थी, और मैं धीरे-धीरे उनके पंजों से लेकर घुटनों तक मालिश करने लगा। मम्मी की साड़ी घुटनों तक थोड़ी ऊपर सरक गई थी, और उनकी गोरी, चिकनी टांगें देखकर मेरा ध्यान थोड़ा भटकने लगा।

“कुछ आराम मिल रहा है, मम्मी?” मैंने पूछा, उनकी तरफ देखते हुए।

“हाँ, बेटा, थोड़ा बेहतर लग रहा है,” मम्मी ने आँखें बंद करते हुए जवाब दिया।

“मम्मी, मेरा ख्याल है तेल की मालिश करें तो जल्दी आराम मिलेगा। मेरे पास वो बॉडी ऑयल है, वही लगा दूँ?” मैंने सुझाव दिया।

“हाँ, ठीक है। जा, ले आ,” मम्मी ने कहा, उनकी आवाज में अब थोड़ा सुकून था।

मैं अपने कमरे से तेल की शीशी लेकर आया। मम्मी ने अपनी साड़ी को घुटनों तक और ऊपर खींचने की कोशिश की, लेकिन दर्द की वजह से वो ज्यादा नहीं कर पाईं। मैंने हिचकते हुए कहा, “मम्मी, अगर आपको बुरा न लगे तो मैं तेल लगा दूँ?”

तभी फोन की घंटी बजी। मैंने फोन उठाया तो पापा का कॉल था। “बेटा, मैं आज रात खाना खाने नहीं आ पाऊँगा। देर हो जाएगी,” पापा ने जल्दी-जल्दी कहा और फोन रख दिया।

“किसका फोन था?” मम्मी ने पूछा।

“पापा का। बोले आज वो खाना खाने नहीं आएँगे,” मैंने जवाब दिया।

“अच्छा,” मम्मी ने हल्के से कहा, जैसे उन्हें इसकी परवाह न हो।

“तो मम्मी, तेल लगा दूँ?” मैंने फिर पूछा।

“हाँ, लगा दे,” मम्मी ने कहा, उनकी आवाज में अब थोड़ा विश्वास था।

मैंने उनके पैरों से लेकर घुटनों तक तेल लगाना शुरू किया। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि मेरे हाथ अपने आप उनकी चिकनी टांगों पर फिसल रहे थे। कुछ देर बाद मम्मी बोलीं, “बेटा, दर्द तो घुटनों से ऊपर है, जांघ में ज्यादा हो रहा है।”

“ठीक है, मम्मी। एक काम करते हैं। आप कम्बल ओढ़ लो, मैं कम्बल के अंदर हाथ डालकर आपकी जांघ की मालिश कर दूँगा,” मैंने सुझाव दिया, थोड़ा हिचकते हुए।

“नहीं, मैं खुद लगा लूँगी,” मम्मी ने थोड़ा संकोच करते हुए कहा।

“मम्मी, आप दर्द में हैं। मुझे करने दो, जल्दी आराम मिलेगा,” मैंने जिद की।

“ठीक है, अलमारी से कम्बल निकाल दे,” मम्मी ने आखिरकार हामी भर दी।

मैंने कम्बल लाकर उनके ऊपर डाल दिया। फिर धीरे से कम्बल के अंदर हाथ डाला और उनकी साड़ी को थोड़ा और ऊपर सरकाया। मम्मी की साड़ी अब उनकी जांघों के ऊपर थी, और उनकी चिकनी, गोरी जांघें मेरे सामने थीं। मैंने तेल लेकर उनकी जांघों पर मालिश शुरू की। उनकी त्वचा इतनी नरम थी कि मेरे हाथों को जैसे कोई जादू सा छू रहा था। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं, और उनकी साँसें थोड़ी भारी होने लगीं।

“मम्मी, कहाँ तक तेल लगाऊँ?” मैंने धीरे से पूछा, मेरा गला थोड़ा सूख रहा था।

“थोड़ा और ऊपर, जांघों पर,” मम्मी ने धीमी आवाज में कहा।

मैंने तेल उनकी जांघों की अंदरूनी सतह पर लगाना शुरू किया। मम्मी ने अपनी टांगें हल्की-सी फैला लीं, और मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मेरे हाथ अनायास ही उनकी पैंटी के पास चले गए, और मैंने हल्के से उनकी चूत के ऊपर से हाथ फेरा। मम्मी की साँसें और तेज हो गईं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। मैं कम्बल के अंदर और करीब चला गया, उनकी टांगें मेरी कमर के पास थीं।

“मम्मी, अगर आप पेट के बल लेट जाएँ तो मैं पीछे से भी मालिश कर दूँगा,” मैंने सुझाव दिया, मेरी आवाज में अब हल्की-सी कँपकँपी थी।

“ठीक है,” मम्मी ने कहा और धीरे-से पलट गईं। उनकी साड़ी अब पूरी तरह से ऊपर थी, और उनकी पैंटी साफ दिख रही थी। मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया और उनकी जांघों और हिप्स पर तेल लगाने लगा।

“मम्मी, कुछ आराम मिल रहा है?” मैंने पूछा।

“हम्म,” मम्मी ने हल्के से जवाब दिया, उनकी आवाज में अब सुकून के साथ कुछ और भी था।

“मम्मी, एक बात बोलूँ?” मैंने हिम्मत जुटाकर कहा।

“बोल,” मम्मी ने आँखें बंद रखते हुए कहा।

“आपकी जांघें… बहुत मुलायम हैं, जैसे मखमल,” मैंने धीरे से कहा, मेरे हाथ अब उनकी हिप्स पर तेल मल रहे थे।

मम्मी चुप रहीं, लेकिन उनकी साँसें और गहरी हो गईं। मैंने हिम्मत करके कहा, “मम्मी, आपकी हिप्स को छूकर… मन करता है बस इन्हें छूता रहूँ, मसलता रहूँ। आपकी त्वचा तेल से भी ज्यादा चिकनी है। क्या आपकी कमर भी ऐसी ही है?”

“तुझे नहीं पता? खुद देख ले,” मम्मी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा।

मैंने मम्मी को फिर से पीठ के बल लेटने को कहा। वो पलट गईं, और मैंने उनके पेट और कमर पर हाथ फेरना शुरू किया। उनकी नाभि छोटी और गहरी थी, और उनकी कमर इतनी मुलायम थी कि मेरे हाथ अपने आप वहाँ रुक गए।

“बेटा, मैं अब मोटी हो रही हूँ, ना?” मम्मी ने हल्के से पूछा, उनकी आवाज में शरारत थी।

“नहीं मम्मी, आप पहले से ज्यादा… सेक्सी लग रही हो,” मैंने हिचकते हुए कहा।

“सेक्सी?” मम्मी ने हँसते हुए पूछा, “ये क्या होता है?”

“सेक्सी… मतलब कामुक,” मैंने कहा, मेरी नजर उनकी आँखों पर थी।

“सच्ची? मैं तुझे कामुक लगती हूँ?” मम्मी ने थोड़ा शरमाते हुए पूछा।

“हाँ, मम्मी। आपकी हिप्स, आपकी जांघें… इतनी चिकनी हैं कि कोई भी पागल हो जाए। क्या मैं आपकी हिप्स पर किस कर सकता हूँ?” मैंने हिम्मत करके पूछा।

“क्या?” मम्मी ने चौंककर कहा, लेकिन उनकी आँखों में हल्की-सी चमक थी।

“प्लीज, मम्मी, बस एक बार,” मैंने अनुरोध किया।

“ठीक है, लेकिन किसी को बताना नहीं,” मम्मी ने गंभीरता से कहा।

“प्रॉमिस,” मैंने कहा और धीरे से उनकी हिप्स पर किस किया। मेरे होंठ उनकी चिकनी त्वचा पर टच हुए, और मैंने हल्के से अपनी जीभ से उनकी हिप्स को चाटा। मम्मी की साँसें और तेज हो गईं।

“बेटा, कम्बल हटा दे,” मम्मी ने धीरे से कहा।

मैंने कम्बल हटाया। उनकी साड़ी अब पूरी तरह से ऊपर थी, और उनकी पैंटी साफ दिख रही थी। “मम्मी, आपकी हिप्स तो मक्खन से भी मुलायम हैं,” मैंने कहा।

“अच्छा?” मम्मी ने हल्के से हँसते हुए कहा।

“मम्मी, क्या मैं आपकी नाभि पर किस कर सकता हूँ?” मैंने पूछा, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

“नहीं, बेटा। तूने हिप्स पर कहा था, वो मैंने करने दिया। अब और नहीं,” मम्मी ने थोड़ा सख्ती से कहा।

“प्लीज, मम्मी। जब हिप्स पर कर लिया तो नाभि से क्या फर्क पड़ता है?” मैंने जिद की।

“तो तू आखिर चाहता क्या है?” मम्मी ने पूछा, उनकी आवाज में अब थोड़ा गुस्सा और थोड़ा उत्साह था।

“मम्मी, मैं आपकी जांघों को चूमना चाहता हूँ। आपकी जांघें इतनी खूबसूरत हैं कि मेरा मन ललचा रहा है। आपकी पैंटी आपकी कमर पर इतनी फिट है कि… मेरे मुँह में पानी आ रहा है। क्या मैं आपकी जांघों पर किस कर सकता हूँ?” मैंने एक साँस में कह डाला।

“पता नहीं तूने मुझमें क्या देख लिया,” मम्मी ने हल्के से हँसते हुए कहा। “ठीक है, लेकिन जो भी करेंगे, सिर्फ आज करेंगे। और इसके बाद कभी इस बारे में बात नहीं करेंगे। प्रॉमिस?”

“प्रॉमिस,” मैंने तुरंत कहा।

“तो ठीक है, मेरी साड़ी पूरी उतार दे,” मम्मी ने धीरे से कहा।

मैंने उनकी साड़ी को धीरे-धीरे खींचकर उतारा। अब मम्मी सिर्फ पैंटी और ब्लाउज में थीं। उनकी गोरी, चिकनी त्वचा चाँदनी की तरह चमक रही थी। मैंने उनकी नाभि पर किस किया, फिर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं और हल्की-सी सिसकारी भरी, “आह्ह…”

मैंने उनकी जांघों को दबाना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे चूमने लगा। उनकी त्वचा इतनी गर्म और मुलायम थी कि मेरा शरीर सिहर उठा। मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत पर हल्का-सा किस किया। मम्मी ने जोर से सिसकारी भरी, “आह्हह… बेटा, ये क्या… बहुत अच्छा लग रहा है।”

“मम्मी, मैं आपकी चूत चखना चाहता हूँ,” मैंने धीरे से कहा, मेरी आवाज में उत्साह और हिचक दोनों थे।

“क्या चखना चाहता है?” मम्मी ने शरारत से पूछा।

“आपकी चूत,” मैंने साफ कहा।

“चूत क्या होती है?” मम्मी ने हँसते हुए पूछा, जैसे वो मुझसे मजाक कर रही हों।

“चूमकर बताऊँ?” मैंने कहा और फिर से उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा। मम्मी ने जोर से सिसकारी भरी, “आआह्हह… बेटा, मेरी चूत को और चूम।”

“पैंटी के ऊपर से?” मैंने पूछा।

“नहीं, पैंटी उतार दे,” मम्मी ने गहरी साँस लेते हुए कहा।

मैंने उनकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उनकी चूत साफ और गीली थी, जैसे कोई फूल खिल रहा हो। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया। मम्मी की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं, “ईईस्स… आआह्ह… बेटा, तेरी जीभ… हाय, कितना मजा आ रहा है।”

मैंने उनकी चूत को और गहराई से चाटा, मेरी जीभ उनकी गीली त्वचा पर फिसल रही थी। मम्मी की साँसें तेज हो रही थीं, और वो अपनी जांघों को और फैला रही थीं। मैंने उनकी चूत के होंठों को हल्के से चूसा, और मम्मी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदलने लगीं, “आआह्ह… बेटा, और कर… हाय, मेरी चूत में आग लग रही है।”

मैंने अपनी उंगलियों से उनकी चूत को हल्के से खोला और जीभ को और गहराई तक ले गया। मम्मी का शरीर काँप रहा था, और वो मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ दबा रही थीं। “ईईस्स… बेटा, तूने ये कहाँ से सीखा… आआह्ह… मेरी चूत को और चाट,” मम्मी की आवाज में अब पूरी तरह से वासना थी।

कुछ देर बाद मेरा लंड मेरे पैंट में तन गया। मैंने कहा, “मम्मी, मेरा लंड अब बेचैन हो रहा है।”

“लंड क्या होता है?” मम्मी ने शरारत से पूछा, उनकी आँखों में चमक थी।

मैंने अपना पैंट उतारा और मेरा 7 इंच का लंड उनके सामने था। “मम्मी, इसे कहते हैं लंड,” मैंने कहा।

“हाय राम, इतना बड़ा… तू कब से इतना गंदा हो गया?” मम्मी ने चौंकते हुए कहा, लेकिन उनकी नजर मेरे लंड पर टिकी थी।

“मम्मी, मेरा लंड आपकी चूत के लिए मचल रहा है,” मैंने हिम्मत करके कहा।

“नहीं, बेटा। माँ की चूत में बेटे का लंड नहीं जा सकता। ये गलत है,” मम्मी ने कहा, लेकिन उनकी आवाज में हल्का-सा संकोच था।

“क्यों, मम्मी? आप पहले एक औरत हैं, और मैं एक मर्द। एक मर्द का लंड औरत की चूत में नहीं जाएगा तो कहाँ जाएगा?” मैंने तर्क दिया।

“लेकिन… ये पाप है,” मम्मी ने हिचकते हुए कहा।

“मम्मी, जब मैंने आपकी चूत चाट ली, तो अब चुदाई में क्या गलत है?” मैंने पूछा।

“चुदाई?” मम्मी ने हल्के से हँसते हुए पूछा। “ये क्या होता है?”

“मम्मी, चुदाई मतलब मेरा लंड आपकी चूत में,” मैंने साफ कहा।

मम्मी चुप हो गईं, लेकिन उनकी साँसें तेज थीं। “बेटा, मेरी चूत इस वक्त लंड की भूखी है। लेकिन कहीं बच्चा न हो जाए,” मम्मी ने चिंता जताई।

“नहीं, मम्मी। मैं अपना माल आपकी चूत में नहीं गिराऊँगा। प्रॉमिस,” मैंने विश्वास दिलाया।

“ठीक है, तो अपनी माँ की चूत की आग बुझा दे,” मम्मी ने गहरी साँस लेते हुए कहा।

मैंने मम्मी को बिस्तर पर बैठाया और खुद नीचे लेट गया। “मम्मी, मेरे लंड पर बैठ जाओ,” मैंने कहा।

मम्मी धीरे-धीरे मेरे ऊपर आईं। उनकी चूत मेरे लंड के ऊपर थी। मैंने धीरे से अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और एक हल्का धक्का मारा। “आआह्ह…” मम्मी की सिसकारी निकली। उनकी चूत गीली थी, लेकिन टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को उनकी चूत में डाला। मम्मी की आँखें बंद थीं, और वो जोर-जोर से सिसकार रही थीं, “ईईस्स… बेटा… हाय, कितना मोटा है तेरा लंड।”

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ मम्मी की चूत मेरे लंड को और कस रही थी। “आआह्ह… बेटा, और जोर से… मेरी चूत को फाड़ दे,” मम्मी की आवाज में वासना और मस्ती थी। मैंने अपने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्के के साथ “फच… फच…” की आवाज कमरे में गूँज रही थी।

मम्मी मेरे ऊपर झुक गईं, और मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया। हमारी जीभें एक-दूसरे से मिल रही थीं, और मम्मी की सिसकारियाँ मेरे मुँह में घुल रही थीं। “ऊऊऊ… बेटा, तेरे लंड में जादू है… मेरी चूत को और चोद,” मम्मी ने कहा।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। मम्मी की चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल रही थी। “आआह्ह… मम्मी, आपकी चूत कितनी टाइट है… जैसे मेरे लंड के लिए बनी हो,” मैंने कहा।

“हाँ, बेटा… मेरी चूत तेरे लंड के लिए ही है… और जोर से चोद,” मम्मी ने सिसकारते हुए कहा।

हमारी चुदाई अब अपने चरम पर थी। मम्मी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं, “आआह्ह… ईईस्स… बेटा, मेरी चूत में आग लग रही है… और जोर से…” मैंने अपनी पूरी ताकत से धक्के मारे। फच… फच… की आवाज के साथ मम्मी का शरीर काँप रहा था।

“मम्मी, मेरा माल निकलने वाला है,” मैंने साँस फूलते हुए कहा।

“मेरा भी… बेटा, रुकना मत… और चोद… आआह्ह…” मम्मी की आवाज काँप रही थी।

“मम्मी, मैं लंड बाहर निकालूँ?” मैंने पूछा।

“नहीं… नहीं… मेरी चूत में ही चोद… तेरे लंड में मेरी जान है,” मम्मी ने जोर से चीखते हुए कहा।

मैंने और तेज धक्के मारे। मम्मी की चूत मेरे लंड को कस रही थी, और आखिरकार हम दोनों एक साथ झड़ गए। “आआआह्ह… ऊऊऊ…” मम्मी की चीख और मेरी सिसकारी कमरे में गूँज रही थी। मैंने अपना माल उनकी चूत के बाहर निकाला, और हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर लेट गए।

“बेटा, ये… गलत था, लेकिन… इतना मजा आया,” मम्मी ने हाँफते हुए कहा।

“मम्मी, आपकी चूत में मेरे लंड की जान है,” मैंने हँसते हुए कहा।

सोती हुए बीवी के सामने उसकी माँ की चुदाई

हाय दोस्तो, मेरा नाम लकी है। मैं पंजाब के लुधियाना का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मैं मध्यम कद का हूँ, गठीला बदन, हल्की दाढ़ी, और चेहरे पर एक ठहराव जो मेरी बीवी को खूब भाता है। मेरा होजरी का कारोबार है, और मेरी फैक्ट्री घर से बस एक मिनट की पैदल दूरी पर है। मेरी बीवी, प्रिया, 26 साल की है। वो गोरी, पतली, लंबे काले बालों वाली, और चेहरे पर एक मासूम-सी मुस्कान लिए रहती है, लेकिन उसकी आँखों में शरारत झलकती है। हमारी बेटी, रिया, 3 साल की है, और घर में उसकी शरारतों से हमेशा रौनक रहती है। मेरे पापा, 55 साल के, गंभीर मिजाज के, और अक्सर अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताते हैं। मेरी सास 45 साल की हैं। उनका कद छोटा, रंग सांवला, और शरीर थोड़ा भरा हुआ है। उनके बूब्स ज्यादा बड़े नहीं, लेकिन उनकी आँखों में एक गहराई है जो कभी-कभी मुझे बेचैन कर देती है। मेरे ससुर को गुजरे 10 साल हो चुके हैं, और तब से सास अकेली रहती हैं।

ये कहानी तब की है जब मेरी शादी को 6 महीने ही हुए थे। पापा कुछ दिनों के लिए काम से बाहर गए थे। प्रिया ने अपनी माँ, यानी मेरी सास, को कुछ दिन हमारे साथ रहने बुलाया था। मैंने कभी सास के बारे में गलत नहीं सोचा था। मेरे लिए वो बस प्रिया की माँ थीं, जिनका मैं सम्मान करता था। लेकिन उस एक हफ्ते में कुछ ऐसा हुआ कि मेरे मन में अजीब-सी उथल-पुथल मच गई।

पहले दिन मैं शाम को फैक्ट्री से लौटा तो देखा सास रसोई में प्रिया के साथ खाना बना रही थीं। मैंने नहाकर कपड़े बदले और ड्राइंग रूम में बैठ गया। सास ने मुझे देखकर मुस्कुराया, और उनकी मुस्कान में कुछ था–शायद एक अनकही जिज्ञासा। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रात को हमने खाना खाया। रिया सो चुकी थी। हम तीनों एक ही बेड पर सोने की तैयारी करने लगे। प्रिया बीच में लेटी, मैं एक तरफ, और सास दूसरी तरफ। रात को नींद नहीं आ रही थी। प्रिया की साँसें सुनाई दे रही थीं, लेकिन मेरे दिमाग में सास की वो मुस्कान बार-बार आ रही थी। मैंने खुद को समझाया कि ये मेरा वहम है।

अगली सुबह मैं नाश्ता करके फैक्ट्री चला गया। शाम को प्रिया का फोन आया कि वो जन्माष्टमी के लिए पड़ोस में जा रही है, और सास घर पर अकेली हैं। मैं जल्दी घर लौटा। नहाने के बाद मैं सिर्फ बनियान और अंडरवियर में था। मैं अपने कमरे में कपड़े बदलने गया, तभी सास अचानक कमरे में आ गईं। मैंने जल्दी से पैंट पहनी, लेकिन उनकी नजर मेरे अंडरवियर पर टिक गई थी। वो एक पल रुकीं, फिर बोलीं, “बेटा, चाय पियोगे?” उनकी आवाज में कुछ था–एक अजीब-सी गर्मजोशी। मैंने हाँ में सिर हिलाया, और वो चाय बनाने चली गईं। मेरे मन में हलचल मच रही थी। क्या वो सचमुच मेरी तरफ देख रही थीं? मैंने सोचा, शायद मैं ज्यादा सोच रहा हूँ।

सास चाय लेकर आईं। मैंने चाय पीते हुए उनसे इधर-उधर की बातें की–रिया की शरारतें, लुधियाना का मौसम, बाजार का हाल। लेकिन उनकी नजर बार-बार मेरी पैंट पर जा रही थी। मेरे मन में शरारत जागी। मैंने जानबूझकर अपनी जांघ पर हाथ फेरा, जैसे खुजली हो। उनकी आँखें मेरे हाथों को फॉलो कर रही थीं। मैंने धीरे-से पैंट के ऊपर से अपने लंड को सहलाया। सास की साँसें जैसे तेज हो गईं। वो कुछ नहीं बोलीं, बस चाय का कप टेबल पर रखकर रसोई में चली गईं। तभी प्रिया घर लौट आई। हमने खाना खाया और सोने की तैयारी की।

रात को नींद नहीं आ रही थी। प्रिया गहरी नींद में थी। सास भी शायद सो रही थीं। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन मेरा मन बेचैन था। सास की वो नजरें मेरे दिमाग में घूम रही थीं। मेरा लंड अंडरवियर में तनने लगा। मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन मन नहीं माना। मैं बाथरूम जाने के बहाने उठा और बाहर गया। थोड़ी देर बाद वापस लौटा। मेरा दिमाग शरारत भरा था। मैं धीरे-से प्रिया और सास के बीच में लेट गया। सास को शायद नहीं पता था कि मैं वहाँ हूँ। मैंने धीरे-से उनकी तरफ करवट बदली। अचानक उनकी आँख खुल गई। वो चौंककर मुझे देखने लगीं। “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” उनकी आवाज में घबराहट थी, लेकिन वो चुप रहीं। मैं डर गया और चुपचाप लेटा रहा, सोने का नाटक करने लगा।

सुबह होने से पहले मैं वापस अपनी जगह लेट गया। सुबह सास ने मुझसे पूछा, “रात को तुम बीच में क्या कर रहे थे?” मैंने हँसकर टाल दिया, “क्या सास जी, मैं तो सो रहा था। आप क्या बात कर रही हैं?” और मैं फैक्ट्री चला गया। लेकिन मेरे मन में एक अजीब-सा तूफान उठ रहा था।

शाम को घर लौटा तो सास घर पर थीं। प्रिया वॉशरूम गई थी। मैंने कमरे में कपड़े बदलने शुरू किए। मैं जानबूझकर सिर्फ अंडरवियर और बनियान में रहा। मैंने अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाना शुरू किया। सास की नजर मेरी तरफ थी। वो हल्का-हल्का देख रही थीं। मेरा लंड धीरे-धीरे अकड़ने लगा। सास ने अचानक कहा, “ये क्या कर रहे हो?” मैंने हँसकर कहा, “बस खुजली हो रही थी, सास जी।” वो चुप हो गईं, लेकिन उनकी आँखों में कुछ था। मैंने पैंट पहनी और लॉबी में बैठ गया। सास बाहर आईं और बोलीं, “क्या हुआ, बेटा?” मैंने कुछ नहीं कहा और कमरे में चला गया।

रात को खाना खाने के बाद प्रिया बर्तन रखने गई। मैंने फिर से जानबूझकर अपने लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया। सास ने देखा और बाहर चली गईं। रात को सोते वक्त मेरा मन फिर बेचैन था। प्रिया और सास दोनों सो चुकी थीं। मैंने धीरे-से अपना लंड नाइट पैंट से बाहर निकाला। सास की तरफ देखते हुए मैं उसे सहलाने लगा। अचानक मुझे लगा कि सास की आँखें खुली हैं। वो मेरे लंड को देख रही थीं। मैं डर गया और जल्दी से लंड को कपड़ों में छुपाया। लेकिन सास की नजर मुझ पर टिकी रही। मैंने सोने का नाटक किया और आँखें बंद कर लीं।

रात के करीब 4 बजे मेरी नींद खुली। सास सो रही थीं। मैंने हिम्मत करके फिर से उनके और प्रिया के बीच लेट गया। मेरा लंड पैंट में लोहे की तरह सख्त था। मैंने धीरे-से सास के पैरों को अपने पैरों से छुआ। वो सीधी लेट गईं। मैंने फिर से देखा, वो सो रही थीं। मेरे मन में डर था, लेकिन जोश भी था। मैंने धीरे-से अपना लंड पैंट से बाहर निकाला और सास के हाथ से छुआ। मुझे मजा आने लगा। सास सो रही थीं। मैंने हिम्मत करके अपना लंड उनके हाथ पर रगड़ा। अचानक उनका हाथ हिला। मैं डर गया, लेकिन वो सोती रहीं। मैंने फिर से लंड उनके हाथ पर रगड़ा। अचानक मुझे लगा कि उनका हाथ टाइट हो रहा है। मैंने देखा, सास ने मेरे लंड को पकड़ लिया था। उनकी आँखें बंद थीं, लेकिन उनका हाथ मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए था। मैं स्तब्ध रह गया।

कुछ पल बाद सास ने धीरे-से आँखें खोलीं। वो चुप थीं, लेकिन उनके हाथ की पकड़ और सख्त हो गई। मैंने कुछ नहीं कहा। मेरे दिल की धड़कन तेज थी। सास ने धीरे-से मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। मैं सिहर उठा। उनका हाथ गर्म था, और उनकी हरकतें जैसे मुझे पागल कर रही थीं। मैंने धीरे-से उनके कंधे पर हाथ रखा। वो चौंकी नहीं। बस चुपचाप मेरे लंड को सहलाती रहीं। मैंने हिम्मत करके उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके बूब्स को छुआ। वो नरम थे, और उनकी साँसें तेज हो गईं। मैंने धीरे-से उनका ब्लाउज ऊपर किया और उनके बूब्स को दबाया। सास ने एक हल्की-सी सिसकारी भरी।

मैंने अपना लंड उनके हाथ में और जोर से रगड़ा। वो अब खुलकर मेरे लंड को हिलाने लगीं। मैंने उनके पेटीकोट को ऊपर सरकाया और उनकी जांघों को सहलाया। उनकी त्वचा गर्म थी। मैंने धीरे-से उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को छुआ। वो गीली थी। सास ने एक गहरी साँस ली और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में वासना थी, लेकिन साथ में एक डर भी। मैंने धीरे-से उनकी पैंटी नीचे सरकाई और अपनी उंगलियाँ उनकी चूत पर फिराईं। वो सिहर उठीं। मैंने अपनी एक उंगली अंदर डाली। सास ने मेरे कंधे को कसकर पकड़ लिया।

मैंने धीरे-से अपना लंड उनकी चूत के पास ले गया। प्रिया पास में सो रही थी, और हम दोनों सावधान थे। मैंने धीरे-से अपना लंड उनकी चूत में डाला। सास ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक हल्की-सी सिसकारी भरी। मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा। उनकी चूत गर्म और टाइट थी। मैंने धीरे-से उनकी कमर पकड़ी और अपनी रफ्तार बढ़ाई। सास ने अपने होंठ काटे और मेरे कंधे को और जोर से पकड़ लिया। मैंने उनके बूब्स को मुँह में लिया और चूसने लगा। वो अब खुलकर सिसकारियाँ ले रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे, ताकि प्रिया न जागे।

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि मेरा माल निकलने वाला है। मैंने सास के कान में फुसफुसाया, “सास जी, मैं झड़ने वाला हूँ।” उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीरे-से बोलीं, “अंदर मत करना।” मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला और उनके पेट पर झड़ गया। सास ने एक गहरी साँस ली और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में संतुष्टि थी, लेकिन साथ में एक अजीब-सा डर भी।

हम दोनों चुपचाप अपनी-अपनी जगह लेट गए। सुबह होने से पहले मैं अपनी जगह वापस चला गया। सुबह सास ने मुझसे कुछ नहीं कहा, बस उनकी नजरें मुझसे मिलने से बच रही थीं। मैं भी चुप रहा। लेकिन मेरे मन में एक तूफान मचा हुआ था। ये सब गलत था, लेकिन उस रात का मजा मेरे दिमाग से निकल नहीं रहा था।

सगी माँ की चूत में मोटा लंड दिया और कसकर चोदा

हेल्लो दोस्तों, मैं मिट्ठू लाल, बहराइच जिले का रहने वाला हूँ। उम्र 18 साल, जवान, हट्टा-कट्टा, गठीला जिस्म और ठीक-ठाक चेहरा। मेरी माँ, राधा, 35 साल की हैं, गोरी, भरा हुआ बदन, 34 इंच के कसे हुए मम्मे, पतली कमर और गोल-मटोल चूतड़, जो किसी का भी लंड खड़ा कर दें। माँ अभी भी जवान और चुदने लायक माल हैं। मेरे पापा शराबी थे, सारी दौलत शराब में उड़ा दी और जवानी में ही मर गए। माँ ने मुझे बड़े प्यार से पाला, लेकिन घर में सिर्फ हम दो लोग थे। उनकी जवानी की आग मेरे सामने छुप नहीं पाती थी। आज मैं अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मेरी माँ और मेरे बीच की है। ये कहानी रसीली, मस्त और गर्म है, उम्मीद है आपको जरूर पसंद आएगी।

एक सुबह की बात है, मैं देर से उठा। माँ बाथरूम में नहा रही थीं। दरवाजा हल्का खुला था, शायद माँ को लगा मैं सो रहा हूँ। मैंने चुपके से झाँका। माँ पूरी नंगी थीं, पानी की बौछारों के नीचे उनका गोरा जिस्म चमक रहा था। उनके मम्मे, गोल और भरे हुए, पानी से भीगे हुए और भी मस्त लग रहे थे। उनकी चूत पर हल्की-हल्की झाँटें थीं, जो उन्होंने कुछ दिन पहले साफ की थीं। मैंने माँ को पहली बार ऐसे देखा, मेरा 8 इंच का लंड तुरंत पैंट में तंबू बना गया। दिल में बस एक ही ख्याल था–माँ को अभी पकड़कर चोद दूँ। मैं खिड़की के पास छुप गया और चुपके से देखने लगा।

माँ लक्स साबुन अपने जिस्म पर मल रही थीं। पहले अपने मम्मों पर, धीरे-धीरे साबुन को गोल-गोल घुमाते हुए। उनके निप्पल्स सख्त हो गए थे, और वो साबुन को जाँघों पर ले गईं। फिर धीरे-धीरे अपनी चूत पर साबुन मलने लगीं। “आआह्ह… ऊऊऊ… सी सी…” माँ की मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं, चेहरा लाल हो रहा था। “हाय… काश कोई मुझे चोद दे… मोटा लंड चाहिए… सी सी… ऊऊऊ…” वो बड़बड़ा रही थीं। उनकी उंगलियाँ चूत के पास रुकीं, और वो धीरे-धीरे उसे रगड़ने लगीं। उनकी चूत गीली हो चुकी थी, और वो उंगली अंदर-बाहर करने लगीं। माँ के चूतड़ हल्के-हल्के हिल रहे थे, जैसे वो किसी लंड की तलाश में हों। मेरा लंड पैंट में तड़प रहा था, लेकिन मैं चुपके से देखता रहा।

माँ ने बड़ी देर तक अपनी चूत में उंगली की। फिर बाल्टी से पानी डालकर अपने जिस्म को साफ किया। तौलिये से पहले अपने मम्मे पोंछे, फिर चूत और चूतड़। उनकी चूत अब गुलाबी और चिकनी लग रही थी, जैसे अभी चोदने के लिए तैयार हो। माँ जब बाथरूम से बाहर निकलीं, मैं चुपके से अपने कमरे में भाग गया। उस दिन के बाद माँ को चोदने का ख्याल मेरे दिमाग में घर कर गया। उनकी रसीली चूत, गोल मम्मे, और वो सिसकारियाँ मुझे पागल कर रही थीं। मैंने कई बार उनकी नंगी तस्वीर दिमाग में लाकर मुठ मारी।

एक रात, करीब 11 बजे, मैं सो नहीं पाया। माँ को चोदने की तलब इतनी बढ़ गई कि मैं उनके कमरे में चला गया। माँ साड़ी और टाइट ब्लाउज में सो रही थीं। उनका ब्लाउज इतना टाइट था कि मम्मे आधे बाहर झाँक रहे थे। उनके निप्पल्स ब्लाउज के ऊपर से हल्के-हल्के दिख रहे थे। मैं उनके बगल में लेट गया और धीरे से उनके गाल पर चूम लिया। वो नहीं जागीं। मेरे हाथ धीरे-धीरे उनके मम्मों पर चले गए। मैंने हल्के से दबाया, फिर जोर से। उनके मम्मे इतने नरम और भरे हुए थे कि मेरा लंड पैंट में तड़पने लगा। “उम्म…” माँ की हल्की सी सिसकी निकली, लेकिन वो सोती रहीं।

अचानक माँ की आँखें खुल गईं। “मिट्ठू! ये क्या कर रहा है तू? रात को मेरे कमरे में क्या कर रहा है?” वो हड़बड़ाकर उठ बैठीं। मैं घबरा गया, लेकिन हिम्मत करके बोल दिया, “माँ, मैं आपको चोदना चाहता हूँ।” माँ का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। “क्या बकवास है ये? तेरा दिमाग खराब हो गया है?” और तुरंत मेरे गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। मेरा सिर झनझना गया। “बेशर्म! नालायक! मैंने तुझे ये सिखाया है? स्कूल में यही पढ़ता है?” माँ गुस्से में बड़बड़ाने लगीं। करीब 20 मिनट तक वो मुझे डाँटती रहीं, लेकिन मैं चुपचाप बैठा रहा।

फिर माँ शांत हुईं। “ये चुदाई की बात तुझे कैसे पता चली? किसी लड़की को चोदा है तूने?” माँ ने शांत होकर पूछा। मैंने हिम्मत करके सब बता दिया–कैसे मैंने उन्हें बाथरूम में उंगली करते देखा, कैसे वो चिल्ला रही थीं कि कोई उन्हें चोद दे। माँ चुप हो गईं, शायद शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं। मैंने मौका देखकर अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे सरका दिया। मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया, जो पूरी तरह खड़ा था। माँ की नजर मेरे लंड पर पड़ी, और वो एकटक देखने लगीं। “नहीं बेटा… ये गलत है। मैं तेरी माँ हूँ,” माँ ने परेशान होकर कहा। उनकी आवाज में हिचक थी, लेकिन उनकी आँखें मेरे लंड से हट नहीं रही थीं।

“माँ, आप जवान हो, मैं जवान हूँ। घर की बात घर में रहेगी। कौन जानेगा?” मैंने कहा और उनके पास और करीब सरक गया। माँ “नहीं… नहीं…” कहती रहीं, लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़कर चूम लिया। धीरे-धीरे मैंने उन्हें अपनी बाहों में लिया और उनके गाल पर चूमने लगा। माँ थोड़ी हिचक रही थीं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनके होंठ रसीले और गर्म थे, जैसे शहद में डूबे हों। धीरे-धीरे माँ भी मेरे चुम्बन का जवाब देने लगीं। “उम्म… मिट्ठू…” उनकी सिसकी निकली। हम दोनों बिस्तर पर बैठे थे, एक-दूसरे की बाहों में।

मैंने माँ को धीरे से लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। हमारा लिपलॉक और गहरा हो गया। मेरी जीभ उनके मुँह में थी, और उनकी जीभ मेरे मुँह में। “उम्म… आह्ह…” माँ की सिसकारियाँ शुरू हो गईं। मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए। उनके मम्मे आजाद हो गए–गोल, भरे हुए, और निप्पल्स सख्त। मैंने एक मम्मा मुँह में लिया और चूसने लगा। “आआह्ह… मिट्ठू… उह्ह…” माँ की आवाज में अब शर्म की जगह मजा था। मैंने उनके निप्पल्स को दाँतों से हल्का सा काटा, फिर जीभ से चाटा। माँ तड़प रही थीं, उनकी कमर हल्की-हल्की हिल रही थी। “सी सी… हाय… और चूस… बेटा…” माँ सिसक रही थीं।

मैंने उनकी साड़ी खींच दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थीं। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींचा, और वो नीचे सरक गया। माँ की चिकनी, गुलाबी चूत मेरे सामने थी। मैंने उनकी जाँघें फैलाईं और उनकी चूत पर मुँह लगा दिया। “उंह… उंह… मिट्ठू… ये क्या कर रहा है?” माँ सिसक रही थीं। मैंने उनकी चूत को जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी चूत गीली थी, और उसका स्वाद मुझे पागल कर रहा था। “आआह्ह… सी सी… हाय… चाट बेटा… और चाट…” माँ ने कहा। मैंने उनकी चूत की फाँकों को जीभ से अलग किया और अंदर तक चाटने लगा। उनकी क्लिट को जीभ से सहलाया, और माँ की सिसकारियाँ बढ़ती गईं। “उंह… उंह… हूँ… हूँ… अई… अई…”

मैंने उनकी चूत में एक उंगली डाली और अंदर-बाहर करने लगा। माँ अपने चूतड़ उठाने लगीं। “आआह्ह… मिट्ठू… और तेज… उह्ह…” मैंने दो उंगलियाँ डालीं और तेजी से चोदने लगा। उनकी चूत गीली हो चुकी थी, और हर धक्के के साथ फच-फच की आवाज आ रही थी। “सी सी… हा हा… चोदो… और चोदो…” माँ चिल्ला रही थीं। मैंने उनकी चूत को और तेजी से उंगली से चोदा, और साथ में उनके मम्मों को दबाता रहा। माँ की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल रही थीं। “आआह्ह… मिट्ठू… मेरी चूत फाड़ दे… उह्ह…”

मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा। “माँ, अब लंड डालूँ?” मैंने पूछा। “हाँ… डाल दे… अपनी माँ की चूत चोद दे…” माँ ने हाँफते हुए कहा। मैंने धीरे से अपना 8 इंच का मोटा लंड उनकी चूत में डाला। “आआह्ह… उह्ह… कितना मोटा है… हाय…” माँ सिसक रही थीं। उनकी चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से लंड आसानी से अंदर चला गया। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। फच-फच… फच-फच… की आवाज कमरे में गूँज रही थी। “उंह… उंह… हा हा… मिट्ठू… और जोर से…” माँ चिल्ला रही थीं।

मैंने स्पीड बढ़ा दी। मेरा लंड उनकी चूत की गहराइयों में जा रहा था, और हर धक्के के साथ उनके मम्मे उछल रहे थे। मैंने उनके मम्मों को फिर से दबाना शुरू किया। “आआह्ह… सी सी… हाय… चोद बेटा… अपनी माँ की चूत फाड़ दे…” माँ पागल हो रही थीं। मैंने माँ को कुतिया की तरह घुमाया और पीछे से उनकी चूत में लंड डाला। “उह्ह… हाय… ये क्या मोटा लंड है… उंह… उंह…” माँ के चूतड़ मेरे धक्कों से थरथरा रहे थे। मैंने उनके चूतड़ों पर हल्का सा थप्पड़ मारा। “आह्ह… मार और… चोद और…” माँ चिल्लाई।

मैंने और जोर-जोर से धक्के मारे। फच-फच-फच की आवाज तेज हो गई। माँ की चूत से पानी निकल रहा था, जो मेरे लंड को और चिकना कर रहा था। “आआह्ह… मिट्ठू… मैं झड़ने वाली हूँ… उह्ह… सी सी…” माँ चीख रही थीं। मैंने और तेजी से चोदा। “उंह… उंह… आआआ… मैं मर गई… हाय…” माँ झड़ गईं, और उनकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया। मैंने और 10 मिनट तक उन्हें चोदा। मेरा लंड अब फूल चुका था। “माँ… मैं झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा। “अंदर ही छोड़ दे… अपनी माँ की चूत में…” माँ ने कहा। मैंने तेज-तेज धक्के मारे और अपना माल उनकी चूत में छोड़ दिया। “आआह्ह… उह्ह… कितना गर्म है…” माँ सिसक रही थीं।

हम दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर लेट गए। माँ ने मुझे अपनी बाहों में लिया और मेरे माथे पर चूमा। “बेटा… तूने आज अपनी माँ को जन्नत दिखा दी…” माँ ने कहा। हम दोनों थककर सो गए। सुबह 4 बजे मेरी आँख खुली। माँ नंगी सो रही थीं। उनकी चूत अभी भी गीली थी। मैंने चादर हटाई और उनकी चूत पर मुँह लगा दिया। “उंह… मिट्ठू… फिर से?” माँ जाग गईं। “हाँ माँ… तुम्हारी चूत मारने का फिर से मन है…” मैंने कहा। “चोद ले… सुबह की चुदाई का मजा ही अलग है…” माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।

मैंने 15 मिनट तक उनकी चूत चाटी। फिर माँ ने मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगीं। “उम्म… कितना मोटा है तेरा लंड…” माँ ने कहा। मैंने माँ को फिर से कुतिया बनाया और पीछे से उनकी चूत मारी। “आआह्ह… चोद… और चोद…” माँ चिल्ला रही थीं।

दोस्तों, क्या आपको मेरी माँ की चुदाई की कहानी पसंद आई? अपनी राय जरूर बताएँ।

गाव जाकर मॉं की सेक्स वासना शांत की

आज मैं अपनी एक माँ बेटे की सेक्स स्टोरी आपको बताने जा रहा हूं. काफी दिन हो गये थे मुझे अपने गांव गये हुए. पुणे में रोज मां और पापा फोन करके कहते थे कि कुछ दिन के लिए गांव आ जा. हमारा भी मन लग जायेगा.

दरअसल पुणे में चाचा और चाची देखभाल के मामले में मां-पापा की कमी महसूस ही नहीं होने देते थे. वो मुझे अपने बेटे की तरह रख रहे थे. फिर भी मां की याद तो आती ही थी. 2 साल हो गये थे मैं अपनी मां से नहीं मिला था. कुछ दिन का समय निकाल कर मैं मां से मिलने गांव चला गया.

मेरी मां का नाम मधुरा है. मेरी मां ने काफी दिनों तक मेकअप आर्टिस्ट का काम किया है. उसके बाद वो घर की जिम्मेदारियों में उलझ गयीं और फिर मेकअप का काम बंद कर दिया. अब वह एक हाउसवाइफ है. मगर मेकअप करना उसे बहुत पसंद है.

दोस्तो, मेरा गांव काफी छोटा है. वहां पर न तो घूमने के लिहाज से कोई अच्छी जगह है और न ही कोई मार्केट या मॉल। जब मैं गांव पहुंचा तो मैंने मां और पापा को भी नहीं बताया था कि मैं आ रहा हूं.

जैसे ही मैं घर पहुंचा तो मां मुझे देख कर चौंक गयी. मुझे देखते ही उसकी आँखों में पानी भर आया. उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे बालों को प्यार से सहलाने लगी.

उसका गला भर आया और वो मुझे रोते हुए हल्का डांटने लगी. वो बोली- इतने दिन से तुझे मेरी याद नहीं आई क्या? एक ही तो बेटा है मेरा और वो भी इतनी दूर रहता है मुझसे। चल अंदर आ जा. हाथ मुंह धो ले. मैं तेरे लिए खाना लगा देती हूं.

मां जज्बातों में मुझे दुलार रही थी और मेरा ध्यान मेरी मां के जिस्म पर जा रहा था. जब मैं गांव से पुणे गया था तो उस समय मां काफी सिम्पल और सादे कपड़ों में रहती थी. मगर आज तो उसका रूप ही बदला हुआ लगा मुझे.

वो काफी मॉडर्न हो चुकी थी. उसने एक पीले रंग की जालीदार साड़ी पहनी हुई थी जिसका ब्लाउज काफी डीप गले का था. ब्लाऊज वैसे तो मां ने अपने दूधों को छुपाने के लिए डाला हुआ था लेकिन वो मेरी मां के स्तनों को संभाल नहीं पा रहा था.

मैं घर के अंदर चला गया और मैंने बैग एक तरफ रख दिया. मैं हाथ मुंह धोने बाथरूम में चला गया. फिर फ्रेश होकर कपड़े चेंज किये और खाना खाने किचन में गया.

पिछले दो सालों में घर में कई नई चीजें दिखाई दे रही थीं. नया फ्रिज, नया एसी, नयी डाइनिंग टेबल. मैं तो सोच में पड़ गया था कि दो साल में ऐसा क्या हो गया कि इतनी सारी नयी चीजें खरीद ली गयीं?

मैंने मां से पूछा- मां, ये सब नयी चीजें कैसे? पापा की दुकान से तो इतनी आमदनी नहीं है, फिर ये सब कैसे मां?

वो बोली- नहीं, दुकान अब काफी बढ़ गयी है. मैं भी कई लड़कियों को मेकअप का काम सिखा रही हूं. इसलिए घर की आमदनी भी बढ़ गयी है।

दोस्तो, जब से मैं घर में दाखिल हुआ था तब से मैं मां को ही घूर रहा था. आज वो बहुत सुंदर लग रही थी. मेरी मां का साइज भी 36 — 30 — 34 का हो गया था. जालीदार पीली साड़ी में क्या कमाल लग रही थी वो आज!

हम डायनिंग टेबल पर खाना खाने बैठ गए. मां मेरे आगे की तरफ बैठ गई. हम खाना खाने लगे. मेरा ध्यान खाने में कम और मां की ओर ज्यादा था. 2 साल बाद मिले थे इसलिए बातों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था.

मेरी मां का सेक्सी फिगर मुझे बार बार उनकी ओर देखने पर मजबूर कर रहा था. बढ़ते बढ़ते वासना इतनी बढ़ गयी कि मेरा मन मां के बारे में सोच कर मुठ मारने का करने लगा.

इसके लिए मेरे दिमाग में एक आइडिया आया. मैंने मां से कहा कि मैं उसके साथ एक सेल्फी लेना चाहता हूं. मां भी तैयार हो गयी. जब मैं मां के साथ सेल्फी ले रहा था तो मैंने खुद का फ्रेम काट दिया और मां को ज्यादा फ्रेम में लिया.

सेल्फी में मां का सेक्सी फिगर और उसके स्तनों की घाटी साफ साफ दिख रही थी. सेल्फी लेकर मैं बाथरूम में चला गया. वहां पर मोबाइल निकाला और मां की फोटो को जूम करके देखने लगा. मैंने उसके स्तनों पर जूम किया और पैंट की चेन खोल कर लंड को बाहर निकाल लिया.

मां के स्तनों को देखते हुए मैं लंड की मुठ मारने लगा. मुठ मारते हुए मेरे मुंह से हल्की कामुक आवाजें आने लगीं- आह्ह … मधुरा … आह्ह … सेक्सी … आई लव यू … आह्ह … स्सस … आह्ह।

मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी और मैं तेजी से लंड पर हाथ चला रहा था.

दो-तीन मिनट में ही मेरे लंड से वीर्य छूट पड़ा. कई पिचकारी निकाल कर मेरा लंड धीरे धीरे शिथिल होता चला गया. बहुत दिनों के बाद वीर्य छोड़कर मजा आ रहा था. बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर मैं बाथरूम से बाहर आ गया. शाम के 7 बज गये थे और मैं काफी थका हुआ महसूस कर रहा था. मैं आराम करने के लिए अपने रूम की ओर चला. मैंने मां से कह दिया कि मैं सोने जा रहा हूं. जब पापा आ जायेंगे तो मुझे उठा देना.

रूम में जाकर मोबाइल चलाते हुए मुझे कब नींद लग गयी मुझे पता नहीं चला. जब मेरी नींद खुली तो रात के 2 बज रहे थे. मैं पानी पीने के लिए उठा और किचन की तरफ बढ़ा.

मैंने देखा कि मां के रूम की लाइट अभी भी ऑन थी. मैंने सोचा कि मां और पापा की चुदाई चल रही होगी. मेरा मन भी करने लगा कि मैं मां और पापा को सेक्स करते हुए देखूं. मैंने रूम में झांका तो अंदर केवल मां ही थी.

मां कोई किताब पढ़ रही थी और चादर ओढ़ कर बैठी हुई थी.

फिर उसको शायद गर्मी महसूस हुई और एकदम से मां ने वो चादर हटा दी. मैं सामने का नजारा देख कर स्तब्ध रह गया. मां ने केवल ब्लाउज ही पहना हुआ था.

उसके स्तनों को छोड़ कर बदन का बाकी हिस्सा पूरा नंगा था. न साड़ी और न पेटीकोट और न ही पैंटी. उसने अपनी टांगों को फैला रखा था जिसमें जांघों के बीच वाले भाग में कुछ बाल दिख रहे थे और उनके पीछे छुपी थी मेरी मां की चूत।

चूत देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं वहीं पर लंड को सहलाने लगा. मैंने मन ही मन ठान ली थी कि अबकी बार पुणे जाने से पहले मां की चुदाई करके ही जाऊंगा. फिर मैंने किचन में जाकर पानी पीया और मेरी उत्तेजना थोड़ी शांत हुई.

उसके बाद मैं अपने रूम में जाकर सो गया.

अगली सुबह मां ने मुझे उठाया. उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो काफी सुंदर लग रही थी.

उठने के बाद मैंने नाश्ता किया और फिर मां के साथ गप्पें मारने लगा.

मैंने पूछा- रात को पापा नहीं आये क्या?

वो बोली- रात में देर से आये थे और फिर बाहर टीवी देखते देखते ही सो गये. आज शायद जल्दी आ जायेंगे तुम्हारे लिये।

मैं खुश हो गया. फिर ऐसे ही बातों ही बातों में दिन ढल गया और रात हो गई. आज भी पापा जल्दी नहीं आए. इसलिए मैं और मां खाना खाकर अपने अपने रूम में सोने चले गए.

रात को 11:30 बजे मेरी नींद खुल गई. मैं बाहर आ गया. बाहर हॉल में देखा तो पापा सो गए थे और मां के रूम की लाइट भी ऑफ थी. शायद आज मां जल्दी सो गई थी। मैं धीरे से मां के रूम की तरफ बढ़ा।

मैंने धीरे से रूम का दरवाजा खोला. मां दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी. मैं धीरे से अंदर चला गया और रूम का दरवाजा लगा दिया. फिर आहिस्ता से मां के बेड पर लेट गया और सो गया. लेटे हुए पांच मिनट ही हुए थे कि लाइट चली गयी. इतने में ही मां ने करवट बदल ली और मेरे बदन पर हाथ रख दिया.

मां ने नींद के नशे में बड़बड़ाया- आप कल बाहर ही सो गये … आज भी आपने आने में इतनी देर कर दी … राहुल भी घर में है और आप बाहर सो जाते हैं. उसके रहते बाहर सेक्स कैसे कर सकते हैं? थोड़ा जल्दी आ जाया करो ना जान!

ऐसा बोलते हुए मां ने मेरी पैंट का बटन खोलना शुरू कर दिया. मेरे सीने में धक धक हो रही थी. मैं बुरी तरह से फंस गया था. फिर भी मैं चुपचाप शांति से लेटा रहा. मां मेरी पैंट उतारने लगी और मैंने गांड उठा कर उनको जगह दे दी पैंट खींचने के लिए।

पैंट नीचे करके मां ने मेरी अंडरवियर में हाथ दे दिया और मेरे लंड को पकड़ लिया. डर के मारे मेरा लंड खड़ा भी नहीं हो रहा था.

मेरा सोया हुआ लंड हाथ में लेकर मां बोली- क्या बात है, आप बात भी नहीं करते हो, आपका लंड भी खड़ा नहीं हो रहा है?

मैंने कोई जवाब नहीं दिया. सांस रोक कर शांति से लेटा रहा.

मां बोली- ठीक है, जैसा आप चाहो, अब मैं इसको खुद ही खड़ा कर लूंगी और अपनी चूत में ले लूंगी.

मां ने मेरे लंड को हिलाना और सहलाना शुरू कर दिया. अब मुझे भी उत्तेजना होने लगी और मेरे लंड खड़ा होने लगा. कुछ पल के अंदर ही मेरा लंड बड़ा होकर 7 इंच का हो गया और सलामी देने लगा.

वो मेरे लंड को कस कर भींचते हुए बोली- आह्हह … आज तो ये बड़ा बड़ा सा लग रहा है … काफी सख्त भी है. इसको तो मैं अपने मुंह में लेकर चूस लूंगी.

मां ने झट से मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मेरा लंड मां अपने मुंह में अंदर तक ले रही थी. मुझे बहुत मजा आ रहा था. फिर अचानक से मां रुक गयी.

मुझे लगा कि मां को शायद ये पता न चल गया हो कि बेड पर उनके पति नहीं बल्कि उनका बेटा है. तभी अचानक मेरे दूसरी बगल में किसी ने पांव रख दिया. जब वो उठ कर मेरे ऊपर आयी तो मुझे तब पता लगा कि वो मां ही है.

मां ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया. उसकी चूत के होंठ मेरे लंड के सुपारे को छू रहे थे और मेरे बदन में सेक्स की एक आग लगी जा रही थी. मन कर रहा था कि मां की चूत में लंड घुसा कर उसे पटक पटक कर चोद दूं.

फिर अचानक से वो मेरे लंड पर बैठ गयी और मेरा लंड मेरी मां की चूत को फाड़कर अंदर घुस गया. मां चिल्लाई और उठने लगी लेकिन मैंने मां को पकड़ लिया. उसकी कमर से पकड़ कर मैंने उसे फिर से नीचे की ओर दबाकर बिठा लिया.

अब मेरा लंड पूरा मेरी मां की चूत के अंदर था. धीरे धीरे वो शांत हो गयी. दर्द के मारे शायद उसको होश भी नहीं था और वो शरीर को छूकर भी नहीं पहचान पा रही थी कि मैं उसका पति नहीं हूं.

फिर वो अपनी गांड को हिलाते हुए मेरे लंड पर आगे पीछे होने लगी. मुझे मजा आने लगा. मां भी चुदाई का मजा लेने लगी. हिम्मत करके मैंने मां के स्तनों को पकड़ लिया.

मुझे नहीं मालूम था कि पापा मेरी मां की चुदाई कैसे करते हैं. उस वक्त मैं केवल एक दांव खेल सकता था, सो मैंने खेला. वो ब्लाउज में थी और मैंने उसके स्तनों को सहलाते हुए उसके ब्लाउज को खोलने की कोशिश की.

पहले मैंने एक हुक खोला, फिर दूसरा और फिर तीसरा. ऐसे करके मैंने पांचों हुक खोल दिये. मैंने ब्लाउज निकाल दिया. उसने नीचे से जालीदार ब्रा पहनी हुई थी. मैंने उसकी ब्रा में अंदर दो उंगली डाल कर उसके निप्पल को मसल दिया.

मां ने झट से मेरा हाथ निकाला और अपनी चूची को बाहर करके बिना हुक खोले ही मेरे मुंह पर रख दिया. मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया. मां के बदन की खुशबू लेते हुए मैं उसकी चूची को जोर जोर से चूसने लगा.

उसके स्तन को चूसते हुए मैं इतनी उत्तेजना में आ गया कि मैंने उसकी दूसरी चूची को भी ब्रा के ऊपर से ही खींचकर बाहर निकाल लिया और दोनों स्तनों के साथ चूस चूस कर खेलने लगा. ऊपर से मैं स्तनों को चूस रहा था और नीचे से मां अपनी गांड हिला कर मेरे लंड को और तेज धक्के लगाने पर मजबूर कर रही थी.

अपनी गांड हिलाते हिलाते ही वो एकदम से मेरे लंड को सुपारे तक अपनी चूत के बाहर तक लाती और फिर गच्च से अंदर कर लेती. मां की योनि बहुत ज्यादा गर्म थी. जितना मजा मुझे उस वक्त आ रहा था वो मैं यहां शब्दों में नहीं बता सकता.

आधे घंटे तक चोदने के बाद मुझे लगने लगा कि अब मैं किसी भी वक्त झड़ जाऊंगा. मगर मैंने मां को नहीं रोका और न ही उनको अपने से अलग किया. मां मुझे अपना पति समझ कर प्यार किये जा रही थी.

वो मस्ती में सिसकारते हुए कह रही थी- आह्ह … मुझे रोज ऐसे शांत किया कीजिये. मैं आपके लंड से ऐसे ही चुदा करूंगी. आई लव यू जी।

इतना सुनते ही मैं मां की चूत में अंदर ही झड़ गया. मां अपने पैरों को चौड़े करके मेरे लंड को और अंदर तक ले जाने की कोशिश कर रही थी.

फिर वो भी मुझ पर निढाल हो गयी. मैं भी सो गया और मां भी मेरे ऊपर ही सो गयी.

सुबह के पांच बजे मेरी नींद टूटी. मेरा लंड मां की चूत में ही था. वो मेरे ऊपर लिपट कर सो रही थी. उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. लाइट भी आ गयी थी लेकिन बल्ब छोटा था इसलिए रोशनी बहुत ही कम थी.

फिर वो आंखें खोलने लगी लेकिन मैंने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा. मां ने धीरे से मेरा लंड अपनी चूत के बाहर निकाला।

मां ने मेरा लंड अपनी पैंटी से साफ किया. उस पर थोड़ा थूक लगाया और धीरे से उसे अपने मुंह में ले लिया। हल्का हल्का चूस कर उसे अच्छे से साफ किया और बेड पर से उठ गई।

उसने मुझे चादर ओढ़ा दी. मुझे फिर से नींद आ गयी. फ्रेश होकर मां ने कपड़े पहने और मेरे रूम में गयी. मैं वहां पर उनको नहीं मिला. उसके बाद ढूंढते हुए हॉल तक आई. उसने सोचा कि मैं हॉल में सो रहा हूं.

जैसे ही मां ने हॉल की लाइट जलाई तो चौंक गयी. हॉल में पापा सो रहे थे. मेरी आंख 10 बजे खुली और मैंने पाया कि मेरे बदन पर मेरी अंडरपैंट और बनियान थी. मैं उठ कर बाहर आया.

मैं अपने रूम में नहाने गया और तैयार होकर बाहर आया. मैंने देखा कि मां डाइनिंग टेबल पर बैठ कर रो रही थी. मैंने उसे रोते हुए देखा तो बहुत बुरा लगा. मैं उसके पास गया तो उसने मुझे गुस्से से दूर हटा दिया.

मुझे डांटते हुए कहने लगी- तुझे शर्म नहीं आयी अपनी मां के साथ ऐसा करते हुए? तूने जो किया है वो एक बहुत बड़ा पाप है. आज तक किसी बेटे को देखा है तूने, जो सारी रात अपनी मां के साथ बिना कपड़ों के सोया हो? लोगों को पता चलेगा तो क्या कहेंगे?

मैंने मां से शांत होने के लिए कहा और बोला- मां मुझे खुद नहीं पता कि मैं आपके रूम में कैसे आया? शायद मैं नींद में चल कर आ गया था. जब तक मुझे कुछ समझ में आया तब तक आप उछल रही थीं।

नींद में होने के कारण मैं कुछ नहीं कर पाया लेकिन आपके मुंह से लगातार यह निकल रहा था ‘आह्ह … बहुत मजा आ रहा है … आह्ह … ओह्ह …’ आपके मजे के कारण मैं कुछ नहीं बोला और बस लेटा रहा.

मां बोली- मगर हमारे बीच जो कुछ हुआ वो कोई नहीं करता. तुम्हारा 7 इंची हथियार रात भर मेरे अंदर था. अब मुझे पाप लगेगा.

ये कहते हुए मां फिर से रोने लगी.

मैं मां को समझाने की कोशिश कर रहा था।

मैंने मां से कहा- आप इतना मत सोचिए. किसी को नहीं पता चलेगा कि आप और मैं कल रात भर बिना कपड़ों के सोए थे. मैं आपका बेटा हूं. बचपन में मैं आपका दूध पीता ही था. वैसे ही कल पी रहा था. इससे आपको कोई पाप नहीं लगेगा.

जब मां मेरे समझाने के बाद भी नहीं मानी तो मैं बोला- मां, अब ये बातें शहरों में बहुत नॉर्मल हो गयी हैं. बड़े शहरों में हर कोई अपनी मां के साथ रात भर कपड़े खोल कर सोता है.

उनको अभी भी मेरी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था. मैंने झट से अपने मोबाइल पर फेक मां बेटे के कुछ पोर्न वीडियो मां को दिखाए और मां को शांत किया. मां को मैंने तसल्ली दिलाई कि हमने कुछ ग़लत नहीं किया।

मां को उस दिन मैंने कई सारे पोर्न वीडियो दिखाए। मां और बेटे के बीच चुदाई, बहन और भाई की चुदाई, पापा और बेटी के बीच चुदाई, मां और बेटी का सेक्स आदि।

उसके बाद मां मुझसे काफी खुल गई थी।

इसी बीच मैंने मां से पूछा- मां, क्या पापा आपको रोज नहीं चोदते?

वो थोड़ी शांत होकर बोली- बेटा वो काम करके थक जाते हैं और अब उनकी उम्र भी हो रही है.

ये कहते हुए मां की आंखें गीली हो रही थीं.

फिर मैंने मां को अपने गले से लगाया. उसे अपने रूम में लेकर गया। उसको समझाते हुए कहा- आपके लिये मैं हूं ना … मैं आपको कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा. आपकी हर खुशी का ख्याल रखूंगा।

इतना कह कर मैंने मां के ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया. मां ने भी विरोध नहीं किया. धीरे धीरे करके मां के सारे कपड़े मैंने उतार दिए। बेड पर लिटाकर उसको चूमा और जो भी वीडियो उसके दिखाये थे वो सारी की सारी की पोज बना कर मैंने मां को चोदा.

उस पूरे दिन में मैंने मां को कई बार चोदा. अब मां के साथ रोज चुदाई होने लगी. मुझे गांव में आये हुए एक महीना हो गया था और इसी बीच मां को पीरियड हो गया.

पीरियड के दिनों को छोड़ कर मां इन दो महीनों में मेरे साथ दिनभर नंगी ही सोयी.

बेटे ने फ़ार्म हाउस में मम्मी को दो मर्दों से चुदते देखा

मेरे पुरखों ने काफी संपत्ति छोड़ी थी, पापा की मृत्यु छह-सात साल पहले हो चुकी थी, अब सिर्फ मम्मी और उनके मैनेजर ही सारा कारोबार संभालते थे। मेरा फार्महाउस शहर से बीस-बाईस किलोमीटर दूर था, वो मेरी ऐशगाह था, वहाँ मैं दोस्तों के साथ खुलकर पार्टियाँ करता, दारू पीता, लड़कियाँ बुलाता। मम्मी कभी उस तरफ नहीं आती थीं। मैं कॉलेज में था, बस किसी तरह पास हो जाता था। मम्मी का घर में एक अलग हिस्सा था, जहाँ वो अपने खास लोगों के साथ बंद कमरों में काम करती थीं।

एक सुबह कॉलेज जाने से पहले मुझे मम्मी से पाँच हजार रुपये चाहिए थे, मैं बिना बताए उनके हिस्से में चला गया। लगा कोई नहीं है, लेकिन अचानक हल्की-हल्की हँसी और सिसकारियाँ सुनाई दीं। मैं चुपके से पिछले कमरे की खिड़की के पास पहुँचा, पर्दा थोड़ा खुला था। जो नजारा दिखा, मेरी साँस रुक गई।

मम्मी पूरी नंगी खड़ी थीं, वर्मा जी आगे से उनकी चूत में लण्ड पेल रहे थे और मेहता जी पीछे से मम्मी की गाण्ड मार रहे थे, दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे, मम्मी के मुँह से लगातार आवाजें निकल रही थीं, आह्ह्ह ओह्ह्ह ह्ह्हीईई आअह्ह्ह मम्मी दोनों लण्डों के बीच झूल रही थीं, उनके बड़े-बड़े दूध हिल रहे थे, वो खुद कमर उचका-उचकाकर चुदवा रही थीं, आनंद से उनकी आँखें बंद थीं। अचानक मम्मी की नजर मुझ पर पड़ी, मैं डर गया और भागकर अपने कमरे में लेट गया।

कुछ देर बाद मम्मी मेरे कमरे में आईं, उनके चेहरे पर घबराहट थी, “बेटा, जो तूने देखा, किसी को मत बताना, प्लीज।” मैं चुप रहा। मम्मी ने आँखों में आँसू भरकर कहा, “तेरे पापा जल्दी चले गए, मैं दूसरी शादी कर सकती थी पर नहीं की, फिर शरीर की भूख मुझसे रही नहीं गई, वर्मा जी और मेहता जी मेरे हमराज बन गए, मुझे माफ कर दे।”

मैंने उनकी हालत समझ ली, उठकर उन्हें गले लगा लिया, “मम्मी, मुझे कोई शिकायत नहीं, आप जैसा चाहें वैसा करें, बस अब मैं आपको फोन करके ही आऊँगा।” मम्मी ने मुझे गाल पर किस किया, मेरा दिल हल्का हो गया। मैंने पैसे लिए और फार्महाउस पर दोस्तों के साथ पार्टी करने चला गया।

शाम तक दारू-कबाब चले, फिर प्लान बना, कॉलेज की चार चालू लड़कियाँ — राखी, चन्दा, मधु और नीतू — को भांग पिलाकर फार्महाउस पर ले आएँगे और सब मिलकर चोदेंगे। मैंने मम्मी को अपनी योजना बताई, पहले तो उन्होंने बहुत डाँटा, लेकिन जब मैंने उनकी चुदाई की बात याद दिलाई तो वो मान गईं, बोलीं, “ठीक है, मैं भी आऊँगी, लड़कियाँ मेरे सामने आसानी से मान जाएँगी।”

सन्डे को सुबह-सुबह दोनों गाड़ियाँ लड़कियों को लेने गईं, मम्मी को देखकर किसी के माँ-बाप ने मना नहीं किया। फार्महाउस पहुँचते-पहुँचते एक बज गया। सबने मिलकर पकौड़े बनाए, कुछ पकौड़ों में भांग डाल दी गई। बाहर रिमझिम बारिश शुरू हो गई, मौसम एकदम सेक्सी हो गया।

राखी और राहुल गायब हो गए, सब समझ गए टाँका भिड़ गया। चन्दा तिरछी निगाहों से धीरज को देख रही थी। मधु नशे में लॉन में लेटकर हरी घास पर लोटने लगी, उसकी टाइट जीन्स गीली हो गई, उरोज उभरे हुए थे। मैं उसके पास गया, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी छाती से चिपका लिया, मैंने उसके भरे हुए मम्मे दबाए, वो सिहरकर हँस पड़ी, ओह्ह्ह संजूू।

उसने मुझे दूसरी तरफ इशारा किया, झाड़ी के पीछे राखी पूरी नंगी लेटी थी, राहुल उसकी टाँगें कंधे पर रखकर जोर-जोर से चोद रहा था, राखी चिल्ला रही थी, आह्ह्ह ह्ह्हीईई और जोर से राहुल्ल्ल ओह्ह्ह फाड़ दो आज। पास ही चन्दा दीवार से सटकर खड़ी थी, धीरज ने उसकी स्कर्ट ऊपर की और खड़े-खड़े लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था, चन्दा की आँखें बंद थीं, ओह्ह्ह धीरज्ज्ज आअह्ह्ह और गहरा।

दूर लॉन में विवेक ने मम्मी को घोड़ी बनाया हुआ था और उनकी गाण्ड में लण्ड पेल रहा था, मम्मी आगे झुककर आनंद ले रही थीं, आह्ह्ह विवेक बेटा और जोर से, मम्मी की गाण्ड मारो। मम्मी ने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया, मैंने भी जवाब में स्माइल दी।

मधु ने मेरी पैंट खोल दी, मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, लार टपक रही थी। फिर वो घोड़ी बन गई, “संजू, गाण्ड दस हजार, चूत एक हजार, बोल?” मैंने हँसते हुए कहा, “पन्द्रह हजार दोनों के, पहले गाण्ड ही मारता हूँ।” उसने हँसकर गांड ऊँची कर दी, मैंने एक ही झटके में पूरा लण्ड उसकी टाइट गाण्ड में उतार दिया, मधु चीखी, आआअह्ह्ह्ह मादरचोद्द्द फट गयीीी ओह्ह्ह्ह फिर खुद कमर हिलाने लगी, मैंने उसकी गांड के गोले थापड़ मारते हुए जोर-जोर से ठोका।

नीतू अकेली नंगी घूम रही थी, अपने मम्मे मसल रही थी, कभी धीरज के पास जाकर चूचियाँ चुसवाती, कभी राहुल की गांड में उंगली डाल देती। आखिर मेरे पास आई, मैंने मधु को छोड़ा और नीतू को घास पर लिटा दिया। वो शर्मा कर बोली, “संजू भैया ये तो सिर्फ कैलाश के लिए है।” मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं और लण्ड चूत पर रगड़ा, “आज मुझे ही कैलाश समझो जानू।” मधु चिल्लाई, “छोड़ो उसे, मुझे चोदो ना।” नीतू ने मुझे कसकर जकड़ लिया और बोली, “चोद दे भैया जल्दी।”

मैंने एक जोरदार झटका मारा, पूरा लण्ड उसकी गीली चूत में समा गया, नीतू की चीख गूँजी, आआह्ह्ह्ह्ह्ह संजूूूू मर गयीीी ओह्ह्ह फिर खुद कमर ऊपर उठाकर चुदवाने लगी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह और तेज संजूू। मैंने उसकी टाँगें कंधे पर रखकर मिशनरी में पेला, फिर घोड़ी बनाकर गांड भी मारी, नीतू पागलों की तरह चिल्ला रही थी, ऊईईई माँँँ फाड़ दी तूने आज्ज्ज। बारिश की फुहारें हमारे नंगे बदनों पर पड़ रही थीं, हम दोनों सातवें आसमान पर पहुँच गए, मैंने उसकी चूत में झड़ दिया, वो काँपकर मेरे ऊपर गिर पड़ी।

जैसे ही मैं उठा, सबने तालियाँ बजाईं, सब हमारे चारों ओर घेरा बनाकर खड़े थे, कैलाश पता नहीं कब आ गया था और पास में मधु को चोद रहा था। मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “शर्माओ मत बच्चो, जो आज नहीं तो कल होना ही है, खुलकर मस्ती करो, मेरी तरफ से हर लड़की को पच्चीस-पच्चीस हजार, और जो मेरे बेटे से चुदवाएगी उसे बोनस तीस हजार।” सब उछल पड़े, दो लड़कियों ने मम्मी के मम्मे दबाए, गांड मसल दी। धीरज इतना खुश हुआ कि मम्मी को फिर लिटाकर चोदने लगा, मम्मी आह्ह्ह ओह्ह्ह भर रही थीं, चुदाई पूरी होते ही मम्मी ने अपना सोने का हार धीरज के गले में डाल दिया।

शाम ढले हम होटल में रुके, खाना खाया, फिर मम्मी हर लड़की को घर छोड़ने गईं और उनके माँ-बाप को शुक्रिया कहा। उस दिन के बाद फार्महाउस पर ऐसी पार्टियाँ आम हो गईं।

आंटी की तंग योनि फिर से खुल गई

दिल्ली का जून महीना था, लू चल रही थी, पंखा भी हाँफ रहा था। रोहिणी की उस पुरानी बिल्डिंग में मैं अकेला कमरे में पड़ा-पड़ा बोर हो रहा था। नौकरी का नामोनिशान नहीं, जेब खाली, मन उदास। कबीर मेरा बचपन का दोस्त था, उसी बिल्डिंग में अपनी माँ संतोष के साथ रहता था। कबीर की उम्र मेरे बराबर चौबीस साल, पर उसकी माँ संतोष अभी भी पूरी जवान लगती थीं। गाँव की थीं, सोनीपत के पास का कोई गाँव, गोरा-गोरा रंग, कद पाँच फुट छह इंच, और चूचियाँ इतनी बड़ी कि चुन्नी भी नहीं छिपा पाती थी। लोग कहते थे कि पन्द्रह साल की उम्र में शादी हुई, सोलह में कबीर को जन्म दिया, फिर सात साल बाद पति की सड़क हादसे में मौत। उसके बाद बस बच्चों को पालती रहीं, कभी दूसरी शादी नहीं की।

उस दिन ग्यारह बज चुके थे। बिल्डिंग सुनसान, सब काम पर गए थे। मैं पंखे के नीचे लेटा था, पसीना छूट रहा था, लंड भी सुस्त पड़ा था। सोचा चलो कबीर के कमरे में टीवी देख लेता हूँ, कम से कम आंटी से दो बातें हो जाएँगी। मैं सिर्फ़ शॉर्ट्स और बनियान में था, दरवाजा खटखटाया। अंदर से आंटी की मोटी-मुलायम आवाज़ आई, “कौन बेटा?” मैं बोला, “आंटी मैं राज।” वो बोलीं, “हाँ बेटा, दो मिनट रुकना, अभी दरवाज़ा खोलती हूँ।”

दो मिनट बोला था, पर मुझे लगा बहुत देर हो रही है। मैंने की-होल में आँख लगाई। जो नज़ारा दिखा, मेरा लंड एकदम से साँय-साँय करके खड़ा हो गया। आंटी सिर्फ़ गहरी नीली सलवार में थीं, ऊपर कुछ नहीं, दोनों भारी-भरकम चूचियाँ पूरी नंगी, हल्की-हल्की झूल रही थीं। वो कोई क्रीम या तेल मल रही थीं, दोनों हाथों से चूचियों को ऊपर उठा-उठा कर मल रही थीं, निप्पल एकदम गुलाबी और तने हुए। चालीस साल की उम्र में भी चूचियाँ इतनी मस्त कि लगता था अभी-अभी किसी कॉलेज की लड़की की हों। मैंने अपना लंड शॉर्ट्स में ही दबाया, पर वो था कि फटने को हो रहा था।

फिर आंटी ने जल्दी-जल्दी कमीज पहनी आईं, बिना ब्रा के। कमीज में निप्पल साफ़ दिख रहे थे। दरवाज़ा खोला तो मुस्कुराईं, “आ जा बेटा, अंदर आ, गर्मी बहुत है ना?” मैं अंदर गया, सोफे पर उनके बिल्कुल बगल में बैठ गया। आंटी ने पानी का गिलास दिया, पीते वक़्त उनकी चुन्नी सरक गई, कमीज में दोनों चूचियाँ उभरी हुई दिख रही थीं। मैंने कहा, “आंटी, बोर हो रहा था, सोचा आपके पास बैठूँ, टीवी देख लूँ।” वो हँसीं, “अरे बेटा, तू तो कभी भी आ जा, मैं तो अकेली ही बैठी रहती हूँ।”

फिर आंटी ने मेरे सिर पर हाथ फेरा, “क्या बात है बेटा, अभी तक नौकरी नहीं लगी?” मैंने उदास होकर कहा, “नहीं आंटी, तीन महीने हो गए, कुछ समझ नहीं आ रहा।” मैंने जानबूझकर आँखें भर लीं। आंटी का ममता भरा दिल पिघल गया, वो मुझे अपनी छाती से लगा लिया, “अरे मेरा राज बेटा, रो मत, सब ठीक हो जाएगा, भगवान पर भरोसा रख।” उनकी चूचियाँ मेरे गालों से सट गईं, गर्मी और खुशबू से मेरा दिमाग फिर गया। मैंने भी उन्हें कसकर पकड़ लिया, सिर उनकी छाती पर टिका दिया।

आंटी मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थीं, सहला रही थीं। मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया, फिर ऊपर सरकाकर चूची के ठीक नीचे। आंटी की साँसें तेज़ हो गईं। उनका हाथ भी मेरी पीठ पर से होता हुआ नीचे आया और अचानक मेरे तने हुए लंड पर पहुँच गया। जैसे ही उंगलियाँ लंड से टकराईं, दोनों के बदन में करंट दौड़ गया। आंटी ने हाथ हटाने की कोशिश की, पर मैंने उनकी चूची पर हाथ रख दिया, हल्के से दबाया। आंटी के मुँह से “आह्ह्ह…” निकला और उनका हाथ फिर मेरे लंड पर आ गया, इस बार सहलाने लगा।

कुछ देर ऐसे ही चला, फिर मैंने उठने का बहाना किया और जानबूझकर उनकी दाहिनी चूची को जोर से दबाया। आंटी चिहुँक उठीं, “आह्ह्ह राज… क्या कर रहा है बेटा…” पर आवाज़ में गुस्सा नहीं था, बस कामुकता थी। मैंने कहा, “आंटी, मुझे जाना है।” वो घबराईं, चेहरा लाल, “हाँ बेटा… जा… मुझे भी कुछ काम है।” मैं बाहर निकला, पर दरवाज़ा बंद होते ही फिर की-होल में झाँका। आंटी ने सलवार का नाड़ा खोला, सलवार नीचे की और बिस्तर पर लेट गईं। टाँगें चौड़ी कीं और दो उंगलियाँ अपनी काली झांटों वाली चूत में डालकर जोर-जोर से चलाने लगीं, मुँह से “आह्ह्ह ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊईई माँ… कित्ते दिन हो गए…” निकल रहा था।

मैंने फिर दरवाज़ा खटखटाया। आंटी घबराकर उठीं, सलवार ऊपर की और दरवाज़ा खोला। चेहरा पसीने से भरा था। मैं अंदर घुसा, दरवाज़ा बंद किया, बोला, “आंटी, आपकी परेशानी मैं दूर कर दूँ?” वो सकपकाईं, “कैसी परेशानी बेटा?” मैंने उन्हें दीवार से सटाया, होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले तो धक्का देने की कोशिश की, फिर खुद ही होंठ चूसने लगीं। मैंने जीभ अंदर डाली, वो भी पूरा साथ देने लगीं।

मैंने उनकी कमीज ऊपर उठाई, दोनों भारी चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने एक चूची मुँह में लेकर चूसने लगा, “ग्ग्ग्ग गी गी गों गों” की आवाज़ करते हुए, निप्पल को दाँतों से काटा। आंटी के मुँह से “आह्ह्ह्ह इह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह राज… मेरा राजा… चूस ले… पूरा दूध पी ले” निकलने लगा। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को चुटकी काट रहा था। आंटी ने मेरा सिर पकड़कर चूची पर दबाया, “और जोर से बेटा… आज तक किसी ने ऐसे नहीं चूसा… हाय रे… मर गई…”

फिर आंटी ने खुद मेरी बनियान उतारी, शॉर्ट्स नीचे की। मेरा आठ इंच का मोटा लंड बाहर आया। आंटी की आँखें चमक उठीं, “हाय राम… इतना मोटा… कित्ता बड़ा है रे…” वो घुटनों पर बैठ गईं, लंड को हाथ में लिया, ऊपर-नीचे करने लगीं, फिर मुँह में लेकर चूसने लगीं, “ग्ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग…” पूरा लंड गले तक ले जा रही थीं। लार टपक रही थी, आँखें लाल। मैं उनकी चूचियाँ दबा रहा था, “चूस आंटी… पूरा खा जा… आज तेरी भूख मिटा दूँगा।”

पाँच-सात मिनट तक लंड चूसने के बाद आंटी खड़ी हुईं, बोलीं, “बेटा अब और नहीं सहन होता… चोद दे मुझे… सोलह साल हो गए… आज ये चूत फिर से लंड खाएगी।” मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोला, सलवार नीचे गिरी। कोई पैंटी नहीं थी। काली घनी झांटें, चूत से रस टपक रहा था। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया, टाँगें चौड़ी कीं। पहले झांटें सहलाईं, फिर जीभ से चूत चाटने लगा। आंटी उछल पड़ीं, “अरे राज… ये क्या कर रहा है… गंदा है रे…” मैं बोला, “आंटी ये अमृत है… तेरी चूत की खुशबू से पागल हूँ…” और फिर क्लिटोरिस को जीभ से रगड़ने लगा, दो उंगलियाँ अंदर-बाहर। आंटी का बुरा हाल, “आह्ह्ह्ह ऊईईई माँ… मर गई… हाय रे… चाट ले बेटा… पूरा रस पी ले… आह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह…”

फिर आंटी ने मेरे सिर को चूत पर दबा दिया, कमर ऊपर उठाई और झटके देने लगीं। एकदम से पूरा रस मेरे मुँह पर छोड़ दिया। मैं सब पी गया। आंटी सुस्त पड़ीं। मैं ऊपर आया, लंड उनके मुँह में दिया, फिर दो मिनट चुसवाया। अब आंटी फिर से गर्म हो गईं, बोलीं, “बेटा अब डाल भी दे… तेरी आंटी की चूत जल रही है।” मैंने लंड चूत पर रखा, पहले सुपारा अंदर किया। आंटी चीखीं, “आराम से राज… बहुत साल हो गए… टाइट हो गई है…” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर किया। चूत एकदम कुंवारी जैसी टाइट थी।

फिर शुरू हुआ असली खेल। मैं धीरे-धीरे धक्के मारने लगा, आंटी नीचे से गाँड उठा-उठा कर ले रही थीं, “आह्ह्ह्ह और जोर से मेरी जान… फाड़ दे आज इस रंडी को… सोलह साल से तरस रही है… आह्ह्ह्ह ऊईई मर गई… हाँ वैसे ही… और गहराई तक पेल…” मैंने स्पीड बढ़ाई, दोनों चूचियाँ मसलते हुए जोर-जोर से ठोकने लगा। कमरे में चाप-चाप चाप-चाप की आवाज़ और आंटी की चीखें गूंज रही थीं। आधे घंटे तक चुदाई चली। आंटी तीन बार झड़ीं, हर बार चिल्लाईं, “हाय मैं मर गई… आ गया… फिर आ गया…”

अंत में मैं बोला, “आंटी कहाँ निकालूँ?” वो बोलीं, “अंदर ही बेटा… आज इस चूत को वीर्य पिलवा दे… सोलह साल बाद लंड का माल पिएगी…” मैंने आखिरी दस-पन्द्रह जोरदार धक्के मारे और पूरा माल उनकी चूत में उड़ेल दिया। आंटी ने मुझे इतनी जोर से जकड़ लिया कि साँस रुकने लगी। दस मिनट तक हम नंगे लिपटे रहे। आंटी की आँखों में आँसू थे, बोलीं, “राज बेटा… तूने आज मेरी जिन्दगी फिर से जवान कर दी…”

मैं लेटा-लेटा सोच रहा था, कबीर का दोस्त था, आज उसकी माँ को चोदकर उसका बाप बन गया। अगर कबीर को पता चला तो सच में गाएगा, दोस्त दोस्त ना रहा…

अजब प्रेम की गजब कहानी

चेतावनी ………..दोस्तो ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है

डिंपल, ओ डिंपल ये अवी कहाँ गया है आज उसको कहा था मैने की मेरी वर्दी मे प्रेस कर देना लेकिन मुझे कही दिखाई नही दे रही है, अरे समझ मैं नही आता कि जब उसको नही करना था तो जाकर धोबी के यहाँ से करवा लाता पर इस नालयक को आवारा गर्दि के अलावा कोई कम नही है, किसी दिन मेरे हाथ से पिट जाएगा और कुछ नही,

डिंपल- अरे पापा उसने प्रेस करके आप की ड्रेस अलमारी मे रख दी थी ये लो, आप तो बेकार मे बेचारे के उपर नाराज़ हो रहे है,

अनिल- अरे अपने इस बेचारे को समझा कि घूमना फिरना बंद करे इस बार 12थ की बोर्ड एग्ज़ॅम है अगर फैल हुआ तो कह देना कि इस घर मे आने की ज़रूरत नही है,

डिंपल- पापा हो जाएगा पास आप क्यो चिंता करते हो

अनिल- अरे क्या ना चिंता करू बड़ी मुश्किल मैं 10थ जैसे तैसे पास हुआ है और अब मैं कहता हू कि पोलीस भरती के लिए थोड़ी दौड़ धूप कर ले मैं एस पी साहेब से बात करके कोशिश कर लूँगा पर इतना नालयक है सुबह 10 बजे सो कर उठता है अब तू ही बता कौन भरती करेगा ऐसे लाड़ साहेब को, कहता है पापा मुझे नही बनना पोलीस वाला, सबसे गंदी नौकरी है वह, अब तू ही उसे कुछ समझा कमाई तो पोलीस वाले की ही खा रहा है और पोलीस की नौकरी को गंदा कहता है,

डिंपल- ऑफ हो पापा अब वह पोलीस मे नही जाना चाहता तो ना सही कुछ और कर लेगा

अनिल- क्या खाक कर लेगा 10 मैं थर्ड डिविषन पास हुआ है और 12 पास होने के कोई ठिकाने नही है, आज कल 80-80 पर्सेंट वालो को नौकरी नही मिलती इस 40 पेसेंट वाले को कोई चपरासी भी नही बनाएगा,

डिंपल- आपकी चाइ ठंडी हो रही है जल्दी पी लो

अनिल चाइ पीते हुए अपने पेर को जूते मे डाल कर, अच्छा डिंपल मैं चलता हू दो दिन बाद इनस्पेक्षन है थाने मे जाकर देखता हू डूटी कहाँ लगी है तू अवी से कह कर मेरे बाकी के कपड़े प्रेस करवा देना, अच्छा मैं जा रहा हू और फिर अनिल घर से निकल जाता है और डिंपल गाना गुनगुनाते हुए घर के कम मे लग जाती है,

वह अपना काम ख़तम करके अपने कॉलेज जाने के लिए दरवाजे तक पहुचती है तभी मनोज नाम का लड़का भागता हुआ उसके दरवाजे के पास आकर

मनोज- हॅयन्फ्ट हुए डिंपल दीदी, डिंपल दीदी,

डिंपल-घबरा कर क्या मनोज इतना घबराया हुआ क्यो है,

मनोज- दीदी वो अवी किसी लड़के को साइकल की चैन ही चैन से बुरी तरह मार रहा है

डिंपल- घबरा कर कहाँ

मनोज- वो सामने वाले चौराहे पर

डिंपल मनोज को साथ लेकर तू चल मेरे साथ और फिर डिंपल दौड़ लगा कर वहाँ पहुचती है तब तक वहाँ कोई नही होता है,

डिंपल- कहाँ है

मनोज- दीदी अभी इसी जगह अवी मार रहा था औ एक दूसरे लड़के से पूछते हुए क्यो अभी एक लड़का यहाँ किसी को मार रहा था ना,

लड़का- हाँ मार रहा था लेकिन पोलीस की गाड़ी को देख कर भाग गया और जो मार खा रहा था वह भी उठ कर भाग गया

उसकी बात सुन कर डिंपल अपना माथा पकड़ते हुए हे भगवान क्या करू इस लड़के का, कही पापा को पता लगा तो आज अवी की खेर नही है,

डिंपल वापस घर आकर अपने आप से बाते करती हुई, कितनी देर हो रही है अभी तक खाना भी नही बन पाया और फिर आज 11:30 पर कॉलेज मे प्रॅक्टिकल भी है और उपर से इस अवी का कोई ठिकाना नही स्कूल कह कर जाता है और फिर कही ना कही लड़ाई झगड़ा करता हुआ नज़र आता है, अगर यह इस साल 12 मे फैल हुआ तो पापा तो ज़रूर इसे घर से निकाल कर ही मानेगे, अभी कुछ देर मे ही स्वीटी भी आती ही होगी, चलो आज दाल चावल बना कर ही अवी के लिए रख देती हू पापा का तो कोई ठिकाना ही नही है वह कब आएगे और फिर डिंपल जल्दी से सब काम निपटा कर जैसे ही अपने कपड़े चेंज करने के लिए घर का गेट लगाने जाती है उसे सामने से अपनी स्कूटी मे स्वीटी आते हुए दिखाई देती है,

स्वीटी- गाड़ी खड़ी करती हुई ओ मेडम अभी तक तुम्हारा मेकप ही हो रहा था क्या आज कॉलेज जाने का इरादा नही है या फिर आज एमसी मे हो, रोज के रोज लेट आख़िर कब तक तेरे चक्कर मे मुझे भी लेट होना पड़ेगा,

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस दो मिनिट स्वीटी तू बैठ मैं अभी कपड़े बदल कर आती हू और स्वीटी वही चेर पर बैठ जाती है, डिंपल जल्दी से अपने कपड़े चेंज करने के बाद बाहर आती है और अपना बॅग उठाते हुए चल स्वीटी

स्वीटी- मुस्कुरा कर क्या बात है आज तो मेडम जीन्स और टीशर्त फसा कर जा रही है अगर किसी लोंडे ने तुम्हारी यह गदराई जवानी और भारी चूतादो को दबा दिया तो फिर मुझसे मत कहना

डिंपल-मुस्कुराते हुए, क्यो तू गदराई नही है, तेरे भी चूतड़ क्या कम फैले और उठे हुए है और उपर से जद्दि की साइज़ की तेरी यह स्कर्ट ज़रा खुद को देख आधी नंगी तो वैसे ही लग रही है और उस पर तेरी मोटी-मोटी जंघे पूरी नज़र आ रही है, लड़के मुझे नही तुझे पकड़ ले तो फिर मुझसे मत कहना,

डिंपल-चिंता मत कर तेरी मुराद भी पूरी हो जाएगी जब तू फस्ना चाहती है तो तुझे कोई नही रोक सकता

स्वीटी- मेरी जान कभी-कभी उल्टा हो जाता है जो फस्ना चाहती है उसे कोई नही फसाता और जो नही फस्ना चाहती है उसे ज़रूर कोई ना कोई फसा लेता है, कही ऐसा ना हो कि मुझसे पहले तुझे ही कोई फसा ले

डिंपल- अरे डिंपल को फसाने वाला अभी तक कोई पेदा नही हुआ है

स्वीटी- अरे मेरी जान वह पेदा भी हो गया होगा और तुझे फसा भी लेगा, या तो वह अभी तक तुझसे मिला नही होगा या फिर अगर वह तुझसे मिल लिया होगा तो तेरी गदराई जवानी पर उसकी नज़र नही पड़ी होगी

डिंपल- चल ठीक है देखते है तू भी यही है और मैं भी सब पता चल जाएगा कि कौन फस्ता है और कौन नही

स्वीटी- अच्छा एक बात बता कभी तू मूठ मारती है कि नही

डिंपल-मुस्कुराते हुए स्वीटी अब बंद भी कर अपनी बकवास

स्वीटी- अरे बता ना मुझसे क्यो शर्मा रही है

डिंपल- मुस्कुराते हुए नही मैने ऐसा काम कभी नही किया,

स्वीटी- अरे कुछ तो करती होगी जब तेरा मन करता होगा

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस ऐसे ही थोड़ा बहुत अपने हाथ से सहला लेती हू

स्वीटी- यार तू तो गजब है मैं तो जब 10 मे थी तब से ही अपने भैया और भाभी की चुदाई देख चुकी थी और तब से कई बार अपनी चूत मे ना जाने क्या-क्या ट्राइ कर चुकी हू सच जब आख़िरी मे निकलता है ना तो बहुत मज़ा आता है पता नही जब लड़को का मोटा लॅंड घुसता होगा तो कितना मज़ा आता होगा, मेरे पास तो कई सारी सेक्सी किताब भी है अगर तुझे चाहिए तो दे सकती हू

डिंपल- अपने पास ही रख अपनी किताब मुझे नही

देखना वैसे भी मेरे घर मे मेरा भाई और पापा रहते है कही किसी ने तेरी गंदी किताबो को देख लिया तो मुझे घर से ही निकल देंगे

स्वीटी- यार तू डरती बहुत है, अच्छा एक काम कर कंप्यूटर ही खरीद ले उसमे भी नेट चला कर तू मज़ा ले सकती है

डिंपल- देखा जाएगा अभी तो मुझे पढ़ने से ही फ़ुर्सत नही मिलती है उपर से पूरे घर का काम भी मुझे अकेले ही करना पड़ता है, इन सब के बाद टाइम ही कहाँ मिलता है इन सब बातो के लिए

स्वीटी- अच्छा तेरे घर मे तो दो ही बेडरूम है तू किसके साथ सोती है

डिंपल- मैं और अवी एक ही रूम मे सोते है मगर तू यह सब क्यो पूछ रही है

स्वीटी- मतलब तुझे अगर मूठ मारना हो तो तुझे बाथरूम मे ही जाना पड़ेगा तू तो अपने बेड पर पूरी नंगी होकर भी नही सो सकती है

डिंपल- क्यो तू अपने बेड पर रात को नंगी होकर सोती है क्या

स्वीटी- हाँ मैं तो कब से रोज रात को पूरी नंगी होकर ही सोती हू जब तक मैं अपनी चूत और दूध से पूरी नंगी होकर खेल नही लेती हू मुझे तो नींद ही नही आती है

डिंपल- और तू अपने भैया और भाभी के रूम मे भी झाँक कर देखती है ना

स्वीटी- हाँ मुझे उन दोनो को नंगे होकर चुदाई करते देखने मे बहुत मज़ा आता है

डिंपल- तुझे शर्म आना चाहिए ऐसी हरकते करते हुए

स्वीटी- अरे इसमे शर्म की क्या बात है, अगर तू किसी को चोद्ते हुए देखती तो ऐसी बात नही करती तू नही जानती कितना मज़ा आता है जब कोई किसी को चोद्ता है और हम अपनी चूत सहलाते हुए उन्हे चोद्ते देखते है

डिंपल- मतलब तू अपने भैया का लंड देखती है और उत्तेजित होती है

स्वीटी- अरे तो इसमे ग़लत क्या है मुझे अच्छा लगता है तो मैं देख लेती हू

डिंपल- फिर तो तुझे अपने भैया से भी चुदने का मन करता होगा

स्वीटी- देख यार मैने ऐसा कभी सोचा तो नही पर हाँ यह ज़रूर सच है की जब मैं मूठ मारती हू तो कभी-कभी मुझे अपने भैया का मोटा लंड याद आने लगता है और ऐसा लगने लगता है जैसे मेरे भैया ही मुझे नंगी करके चोद रहे हो,

डिंपल- छि तू कितनी गंदी है स्वीटी,

स्वीटी- अरे अब इसमे गंदी बात क्या है क्या किसी का लंड देखना गंदी बात है

डिंपल- किसी का लंड देखना गंदी बात नही है पर अपने बड़े भाई के लंड को सोच कर अपनी कल्पना मे चुदना गंदी बात है

स्वीटी- देख डिंपल हर इंसान की सोच समय के साथ बदल जाती है पहले मैं भी अपने भैया के बारे मे कभी ऐसा नही सोचती थी लेकिन एक दिन जब ग़लती से मैने उनका मोटा लंड देख लिया तो धीरे-धीरे मेरी सोच भी चेंज हो गई और अभी तुझे ऐसा लगता है कि यह ग़लत है हो सकता है कभी तू भी अपने भाई का लंड देख ले और तुझे उसके लंड से चुदने का मन होने लगे

डिंपल- मैं तेरी जैसी चुड़क्कड़ नही हू कि अपने भाई के लंड से ही चुद जाउ

स्वीटी- सब समय की बाते है मेरी जान वक़्त कब क्या करवा दे कोई नही जानता

डिम्पलाए- चल अब चले यहा से क्लास का टाइम हो रहा है और फिर दोनो उठ कर क्लास मे चली जाती है,

अवी- और क्या रघु भाई क्या हाल है

रघु- अरे आओ अवी भैया क्या बात है आजकल तो आपको हमारी याद ही नही आती बहुत दिनो मे हमारी दुकान पर आए हो

अवी- अरे ऐसी बात नही है रघु भाई थोड़ा बिज़ी था फिर आज सोचा कि चल के रघु भाई के यहा पान ही खा लिया जाए

रघु- तो फिर आ जाओ यहा काउंटर को थोड़ा सरका कर बैठो मैं अभी आपको बढ़िया बनारसी पत्ता बनाकर खिलाता हू

अवी- अरे रघु भाई वो सामने वाली भाभी ने आज अपनी शॉप नही खोली कही गई है क्या

रघु- मुस्कुराते हुए, आप भी ना अवी भैया जब तक उसके मतकते चूतादो को देख नही लेते आपका दिल नही लगता है,

अरे उधर देखो क्या माल जा रहा है क्या गदराई गंद है साली की

अवी- अरे रघु भाई बहुत ही मोटी गंद है उसकी तो क्या मस्त औरत है कितने साल की होगी

रघु- अरे अवी हैया होगी कम से कम 35-40 की

अवी- यार रघु भाई अपने यहा की औरतो के चूतड़ गजब भारी-भारी हो गये है बहुत ही मज़ा दे अगर चोदने को मिल

जाए तो

रघु- अपने लंड को पेंट के उपर से मसलता हुआ, मुस्कुरकर अवी भैया हमे आपकी यही बात तो सबसे अच्छी लगती है

आप 5 मिनिट के लिए भी हमारी दुकान पर आते हो तो हमारा लंड खड़ा किए बिना नही मानते हो

अवी- अरे रघु भाई तुम्हारी दुकान है ही ऐसी जगह पर कि अगर मैं यहाँ दिन भर बैठा रहू तो यहा से इतने गदराए हुए

माल निकलते है क मेरा लंड दिनभर खड़ा रहे पता नही तुम कैसे चुपचाप पान लगाते बैठे रहते हो

रघु- लो पान लो भैया हमारी तो आदत पड़ गई है, कभी-कभी तो इतने गदराए और भारी चूतादो वाली औरते दिख जाती है

की लगता है साला पेंट मे ही पानी निकल जाएगा,

रघु- अच्छा अवी भैया मैने सुना आज तुमने फिर किसी की धुनाई करदी

अवी- हा यार बहन्चोद तीन चार दिन से मेरी दीदी को लाइन मारने की कोशिश कर रहा था अब नही मा चुदायेगा अपनी जम कर बजाया है साले को आज

रघु- लेकिन अवी भैया तुम्हे कैसे पता चला कि वह डिंपल दीदी के चक्कर मे था

अवी- अरे मैं दीदी के कॉलेज मे नही पढ़ता तो क्या हुआ मेरे खबरी उसके कॉलेज मे भी मौजूद है मुझे उस कॉलेज की

हर खबर रहती है कि कब क्या हो रहा है और फिर बस इसी साल की बात है रघु भाई अगले साल से तो मैं खुद उस कॉलेज मे

चला जाउन्गा फिर देखना तुम कैसे मैया चोद्ता हू इन बहन्चोदो की

रघु- और थानेदार साहेब की ड्यूटी कहाँ लगी है आजकल

अवी- अरे पापा का क्या है उनके संबंध तो सीधे एसपी से है वह जब चाहे जहा चाहे ट्रान्स्फर भी ले सकते है या ड्यूटी भी

बदल सकते है वैसे अभी तो वह हमारे थाना क्षेत्रा के ही इंचार्ग है

अच्छा रघु भाई पान के पैसे खाते मे लिख लेना अब मैं चलता हू दीदी वेट कर रही होगी,

रघु- अरे अवी भैया आप बार-बार पैसो का कह कर हमे शर्मिंदा ना किया करो, आपसे पैसा माँगता कौन है

अवी- नही रघु भाई दोस्ती अपनी जगह और धंधा अपनी जगह होना चाहिए, ठीक है अब मैं चलता हू

रघु- अच्छा अवी भैया फिर आना

अवी- अपने घर की ओर पेदल-पेदल चल देता है और घर पहुच कर

डिंपल- आ गये लाड़ साहेब, पूरा दिन आवारा गार्दी के अलावा भी कुछ काम रहता है आपके पास

अवी- मुस्कुराता हुआ, कहाँ दीदी मैं तो ट्यूशन गया था

डिंपल- अपने चेहरे पर गुस्सा दिखाते हुए, झूठ मत बोल, तू क्या मुझे पागल समझता है, मैं सब जानती हू दिन भर

यहाँ वहाँ फिरने के अलावा और कुछ नही करता है और उपर से स्कूल से भी गायब रहता है, और आज किसके साथ मारपीट

कर रहा था, है बोलता क्यो नही

अवी- अरे दीदी वह तो बस ऐसे ही छोटी मोटी बात थी तुम तो बेकार परेशान हो रही हो

डिंपल- मुझे क्या करना है, जब पापा पूछेगे तब बताना उनको कि छोटी बात थी या बड़ी, वैसे भी वह तुझ पर सुबह से

ही भड़क रहे थे

अवी- क्यो अब मैने ऐसा क्या कर दिया

डिंपल- देख अवी अब बहुत मौज मस्ती कर ली तूने डिसेंबर भी ख़तम होने वाला है सिर्फ़ दो महीने है तेरी एग्ज़ॅम के

थोड़ा पढ़ ले तो कम से कम पास तो हो जाएगा, नही तो समझ ले अगर फैल हुआ तो पापा तुझे घर से ही भगा देंगे

अवी- डिंपल का हाथ पकड़ते हुए ठीक है अगर पापा भागाते है तो मैं चला जाउन्गा पर तुम्हे भी मेरे साथ चलना

होगा, क्यो कि मैं पापा के बगैर तो रह लूँगा पर तुम्हारे बिना कैसे रह पाउन्गा

डिंपल- मुस्कुराते हुए उसके गाल खींच कर चल अब ज़्यादा बाते ना बना जा जाकर हाथ मूह धो कर आ मैं तेरे लिए खाना

लगाती हू, अवी हाथ मूह धोकर आ जाता है और डिंपल सोफे के सामने नीचे आसान लगा कर अवी की थाली रख देती है और

खुद सोफे पर टिक कर अपने दोनो पेर मोड़ कर सोफे पर रख लेती है और अवी आकर उसके सामने आसान पर बैठ कर खाना

शुरू करता है फिर खाते हुए डिंपल की ओर देखता है और अचानक उसकी नज़र डिम्पल की सलवार पर पड़ती है जो उसकी

फूली हुई चूत के पास से फटा हुआ था और उसकी सफेद कलर की पेंटी उसकी चूत को फुलाए हुए साफ नज़र आ रही थी,

अवी

एक पल के लिए उसकी दोनो जाँघो के बीच देखने लगता है और डिंपल की नज़र उसके उपर पड़ती है और वह एक दम से झुक

कर अपनी जाँघो की जड़ो मे देखती है और अपनी फटी सलवार से झाँकती उसकी फूली हुई चूत को कसे हुए सफेद पेंटी पर

पड़ती है और फिर वह जैसे ही अवी को देखती है दोनो की नज़रे मिल जाती है और डिंपल एक दम से अपनी नज़रे नीचे करती हुई

अपने पेर नीचे कर लेती है और अवी अपनी बहन के शरमाये हुए चेहरे को देख कर अपनी नज़रे वापस थाली पर लगा कर

खाने लगता है,

कुछ देर बाद अवी डिंपल को देखता है और उनकी नज़रे फिर मिल जाती है और इस बार डिंपल अपनी नज़रे हटा कर उठ कर अपनी

गदराई गंद मतकाती हुई किचन की ओर जाने लगती है और अवी अपनी एक नज़र डिंपल की कसी हुई गदराई जवानी पर मारता है

और उसकी नज़रे अपनी बहन के भारी-भारी मटकते हुए चूतादो पर पहली बार एक अलग अंदाज से पड़ती है और उसका हाथ

उसकी थाली मे ही रुक जाता है और वह अपनी दीदी के मस्ताने मटकते चूतादो को घूर-घूर कर देखने लगता है तभी

अचानक डिंपल पलट कर अवी को देखती है और उसे अपने मोटे-मोटे चूतादो को घूरता हुआ पकड़ लेती है और दोनो की

नज़रे एक बार फिर से मिल जाती है और अवी जल्दी से अपनी नज़रे नीचे करके खाने लगता है और डिंपल उसको घुरती हुई किचन

मे चली जाती है और कुछ देर बाद प्लॅट मे रोटी लेकर आती है इस बार अवी उसको आते हुए देखता है और उसकी नज़रे अपनी दीदी की मोटे-मोटे दूध को देखने लगती है डिंपल उसकी नज़रो को ताड़ जाती है और अपनी नज़रे नीचे किए हुए आकर झुकती है और उसकी थाली मे रोटी रखने लगती है, इस बार अवी बिल्कुल करीब से अपनी दीदी की कमीज़ मे से झँकते बड़े-बड़े दूध को

देखने लगता है और जैसे ही डिंपल की आँखो मे देखता है उन दोनो की नज़रे बिल्कुल करीब से मिल जाती है और डिंपल

अपने चेहरे पर थोड़ा गुस्सा दिखाती है और अवी उसकी आँखो से अपनी नज़रे हटा कर वापस उसके दूध पर एक सरसरी नज़र मारते हुए अपनी थाली की ओर देखते हुए खाने लगता है,

डिंपल जैसे ही पलट कर जाने लगती है अवी फिर से उसके भारी-भारी मटकते हुए चूतादो को देखने लगता है और डिंपल

फिर से उसे जैसे ही पलट कर देखती है अवी को अपने चूतादो को देखता हुआ पाती है और उसे गुस्से से घूर कर देखती हुई

किचन मे घुस जाती है लेकिन किचन मे घुसते ही ना जाने क्यो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है.

डिंपल किचन से आवाज़ लगा कर अवी और कुछ लेना है

अवी- नही दीदी बस हो गया

डिंपल- एक रोटी और ला दू

अवी- नही दीदी बस

डिंपल किचन से बाहर आकर क्या बात है आज ठीक से खाना क्यो नही खा रहा है

अवी- अपनी नज़रे थाली मे ही गढ़ाए हुए बस दीदी आज ज़्यादा भूख नही है

डिंपल- अच्छी बात है और डिंपल वापस किचन मे चली जाती जाई, अवी खाना खाने के बाद वही सोफे पर बैठ जाता है और

डिंपल अपने लिए खाना लेकर अवी की जगह पर बैठ कर खाने लगती है और अवी अपनी बहन के खूबसूरत चेहरे को देखने

लगता है और अपने मन मे सोचने लगता है- दीदी कितनी खूबसूरत और जवान दिखती है, आज तक मेरी नज़र दीदी के इस मनमोहक हुस्न पर पड़ी क्यो नही, कितने सुंदर गाल और होंठ है और दीदी की आँखे कितनी खूबसूरत और नशीली है जब

दीदी ने गुस्से से मुझे अपनी नशीली आँखो से देखा था तब एक दम से दीदी का चेहरा देख कर मेरा तो लंड खड़ा सा हो

गया था, एक अलग ही कशिश है दीदी की आँखो मे, कितनी प्यारी है दीदी को देख कर तो मुझे ऐसा लगता है कि उसे अपनी गोद

मैं बैठा कर उसे खूब प्यार करू, उसके पूरे चेहरे को, होंठो को पागलो की तरह चुमू, कितनी सुंदर और सेक्सी है मेरी

दीदी,

डिंपल- क्या देख रहा है अवी इस तरह मुझे घूर कर

अवी- अपने ख्यालो से एक दम से बाहर आता हुआ, कुछ नही दीदी, देख रहा हू कि आप कितनी जल्दी-जल्दी खा रही हो लगता है

आपको बहुत भूख लगी थी,

डिंपल- मुस्कुराते हुए हाँ रे, आज सुबह दाल चावल बना कर चली गई थी और खाना भी नही खाया था फिर कॅंटीन मे

ही थोड़ा बहुत नाश्ता किया इसलिए इस वक़्त तक तो मेरे पेट मे चूहे कूदने लगे थे, तभी डिंपल को थस्का लग जाता है

और वह खांसने लगती है और अवी दौड़ कर किचन से पानी लेकर आता है और डिंपल को दे देता है और डिंपल पानी पी कर

मुस्कुराते हुए, क्या बात है आज बड़ी सेवा कर रहा है अपनी दीदी की

अवी- दीदी मे आपकी किसी भी काम मे कोई हेल्प नही करता हू ना और दिन भर आवारा जैसे घूमता रहता हू, लेकिन कल से मे

आपकी सभी काम मे हेल्प किया करूँगा

कुंवारी माँ की शादी और सुहागरात

हैल्लो दोस्तों, यह मेरी पहली कहानी है, जो में आप सबके सामने रख रहा हूँ. यह मेरे जीवन की सच्ची घटना है, जिसने मेरे सारे सपने पूरे कर दिए और आज में एक कुशल जिंदगी जी रहा हूँ, जो कि सेक्स और मस्ती से भरपूर है. दोस्तों मेरा नाम दीपक है और में पंजाब लुधियाना का रहने वाला हूँ, मेरी हाईट 6 फुट 2 इंच है, मेरा रंग सांवला और बॉडी मस्त है. यह कहानी मेरी और मेरी कुँवारी माँ की है.

आप सब हैरान होंगे कि में कुँवारी क्यों लिख रहा हूँ? इस बात का जवाब आपको कहानी में आगे मिलेगा. मेरी उम्र 25 साल है और मेरी माँ की उम्र 39 साल है. दोस्तों मेरी माँ रीता एक भरपूर जिस्म की मालकिन है, उसकी हाईट 5 फुट 2 इंच है और वो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है. में अपने माँ बाप की इकलौती औलाद हूँ, मेरा बाप बहुत ही अमीर आदमी है, जिसके पास बहुत पैसा है.

दोस्तों यह कहानी आज से 2 साल पहले शुरू हुई, जब मेरा 23वां बर्थ-डे था. में शुरू से ही अपनी माँ को कभी माँ की नज़र से नहीं देखता था, बस शुरू से मुझे उसको पाने का जूनून था. मेरी यह इच्छा इस साईट की स्टोरी पढ़कर और बलवान हो गयी और पूरी हुई आज से 2 साल पहले, जब भगवान ने मुझे ताजी कसी हुई बिना फटी चूत वाली माँ मेरी पत्नी के रूप में दी. हुआ यूँ कि मेरे 23 बर्थ-डे पर में मम्मी के कमरे में गया तो मैंने देखा कि मम्मी अपने कमरे में नहीं थी और उनकी डायरी बेड पर खुली पड़ी थी. मम्मी मेरे लिए गिफ्ट लेने के लिए गयी हुई थी. अब में उनकी पर्सनल डायरी उठाकर पढ़ने लगा, जिसे पढ़कर मेरे होश उड़ गये. उस डायरी के ज़रिए मुझे पता चला कि में अपने माँ, बाप की असली औलाद नहीं था, उनको में सड़क पर मिला था.

सुंदर सा जुड़ा बालों पर हो, जाली वाली ब्रा, फूलों वाली अंडरवेयर, महंगी साड़ी लाल रंग की, लंबी बिंदी, फुल ब्राइडल मेकअप करवा दो, ताकि मेरी जानेमन मम्मी दुनिया की सबसे सुंदर दुल्हन लगे और में तुम दोनों को लेने के लिए गाड़ी भेज दूँगा.

फिर मैंने उसके पति को अपना बेडरूम सुहागरात के लिए तैयार करने को बोल दिया. फिर ठीक 6 बजे वो सुहागरात का कमरा तैयार करके मेरे पास आ गया और मैंने एक गाड़ी मम्मी और शीला को लेने के लिए भेज दी और राम सिंह (नौकर) और में मंदिर की तरफ चल पड़े. फिर ठीक 7 बजे मम्मी और शीला भी वहाँ आ गयी. अब पंडित जी पूरी तैयारी कर चुके थे. फिर उन्होंने मुझसे रिंग्स माँगी, तो मैंने उन्हें रिंग दे दी. फिर उन्होंने मंतर जाप के बाद मम्मी को बुलाया, तो मम्मी लंबा घुंघट ओढ़कर आई. फिर उन्होंने एक अंगूठी मम्मी को दी, जिस पर मेरा नाम लिखा था और दूसरी रिंग मुझे दी और कहा कि अब एक दूसरे को पहना दो. फिर मैंने मम्मी को और मम्मी ने मुझे अंगूठी पहना दी. फिर पंडित जी ने कहा कि तुम लोग अब एक दूसरे को वरमाला पहना दो, तो हमने एक दूसरे को वरमाला पहना दी.

मैं मेरी माँ और वसीयत

माई और मेरा परिवार शुरू से ही बहुत आनंद के साथ रहते थे। मेरे पिता जी एक एमएनसी में इंजीनियर के पद पर कर्जारत थे और मेरी माँ एक डिग्री कॉलेज में लेक्चरर थे। माई घर पर अकेला था और इसलिए मुझको बचपन से दोनों का ढेर सारा प्यार मिला। अचानक एक घटना से हमारे परिवार का ऐसा चैन छिन गया। पिताजी एक बार बीमार हुए और डॉक्टर ने काफी टेस्ट के बाद पिताजी को कैंसर के इलाज के लिए बुलाया। डॉक्टरनो ने पिता जी को सिर्फ कुछ महीने का समय दिया और कहा

आप नौकरी ही कर्म चाहते हैं कर डालिये क्योंकि आपके पास समय नहीं है। एह समय हमसब लोगों के लिए बहुत भयंकर था, लेकिन धीरे-धीरे हम लोगों ने इस बात को मान लिया और समय पर सब कुछ छोड़ दिया। एक रात खाना खान एके बुरे पिता जी ने हमको अपने कामरे में बुलाया। पिताजी कामरे में जाकर लेट गए और मुझसे पास में बैठने के लिए कहा। माँ भी पिताजी के पास बैठें। हमलोगन ने बहुत सारी बातें की। पिताजी ने मुझसे मेरे भविष्य के बारे में पूछा और मुझे अपना भविष्य का प्लान बताया। पिता जी ने अपना दुख भी जताया कि कुछ ही दिनों में वो इस संसार से चले जाएंगे और उनका सपना अधूरा रह जाएगा। पिताजी ने एह भी विश्वास जताया कि उन्हें एह उम्मीद है कि मैं उनका सारा का सारा सपना पूरा करूंगा। पिताजी ने फिर कहा, “बेटा तुम मुझसे वादा करो कि मेरे जाने के बाद तुम अपनी माँ का ख्याल रखोगे और उनको कभी भी कोई चीज़ नहीं मिलेगी।” माई बिना सोचे समझे पिता जी को अपना वचन दे दिया। पिताजी फिर कुछ देर चुप रहे. फिर अचानक पिता जी मुझसे बोले। “बेटा तुम मुझको एह बताओ क्या तुम्हारी माँ एक सुंदर औरत है?” मेरे लिए यह कोई मुश्किल सवाल नहीं था और मैंने पिता जी से बोला, ” “हां पिता जी मां बहुत ही सुंदर है।” “तो तुम्हें लगता है कि तुम्हारी मां सच में सुंदर है?” पिता जी ने मुझसे कहा। फिर पिता जी ने मुझसे पूछा, “क्या तुम्हारी मां सेक्सी लगती है?” मैं बहुत शर्मा गया और चुपचाप आंखें नीचे करके बैठा रहा। माई मां की तरफ देखने लगा, लेकिन मां बिल्कुल खामोश बैठी थीं।” अरे शर्माओ मत” पिताजी मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर मुझसे बोले बहुत सेक्सी लगती है” माई पिता जी से आंख चुराते हुए कहा। “क्या तुम अपनी मां के साथ सेक्स करना चाहते हो? बोलो बेटा बोलो क्या तुम अपनी माँ को चोदना चाहते हो?” पिताजी ने मुझसे धीरे से पूछा। मैं बिल्कुल स्थिर रह गया। मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। हलांकी, माई बहुत दिनों से अपनी माँ को चोदना चाहता था और काई बार उनका नाम लेकर मैंने मुठ भी मर राखी थी, लेकिन मैंने कभी एह सोचा भी नहीं था कि मेरा क्वैश कभी इस तरह से पूरा होगा।

चुतर का कुछ ना पूछो, गोल गोल थोरा फैला हुआ और एकदाम करी। मेरी मां की तांगे बहुत ही सुंदर और साथ में उनकी जंघे बिल्कुल तरस गई। मेरी मां के शरीर पर बाल कुछ ज्यादा ही है जो बदन के नीचे उससे मैं और भी ज्यादा है। लेकिन उनके बाल ज्यादा होने से कुछ फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ज्यादा से वो और भी सेक्सी लग रही थीं। “तुम नौकरी ही देख रहो, क्या तुम्हें पसंद है?” मा ने मुझसे पूछा. थोरा रुक कर मा ने फिर पूछा, “क्या तुम्हें इस बदन से मजा मिलेगा, क्या तुम्हें हमारी एह नंगा बदन पसंद है?” माई माँ को हेयरानी से देखता रहा। मुझे एह समझ में नहीं आ रहा था कि कहीं मां मुझसे मजाक नहीं कर रही है? जब कि आँखों में देखा तो पाया कि माँ बहुत सीरियस है। मेरी माँ बहुत घबरा भी रही है। मेरे को लगा कि माँ और पिताजी आपस में एह सब बातें चर्चा कर लिया था औरा बी माँ उन बातों पर अमल कर रही हैं। लेकिन माँ को एह पता नहीं था कि मैं उनकी बातों पर क्या कहूँगा और इसलिए जो घबरा रही थी। बुरे में माँ ने मुझे बताया था कि अगर मैं उस दिन उनकी बातों पर ना कर देता तो पिताजी और खास कर माँ को बहुत धक्का लगता।

चुड़वाऊंगी। बोल बेटा बोल, क्या हमको अपने पिता के सामने चोदेगा?” माई माँ को चोदते चोदते कहा, “माँ पिताजी के सामने क्यों, मैं तो टिमको सबके सामने चोद सकता हूँ। तू बस ऐसे ही मेरे सामने अपनी चूत खोले परी रहना। हाँ, कल से तुम जब तक घर पर रहोगी नंगी ही रहना। मैं भी नंगा ही रहूँगा। बहुत मजा आएगा।” इस तरह से माई माँ और मैं चोदते रहे और थोरी देर के बाद एक जोर दार धक्का मार कर अपनी माँ की चूत के अंदर अपना लंड जार तक डाल कटकर झर गए। मेरे झरने के साथ माँ भी झर गयी और निधल हो कर बिस्तर पर परी रहें। काफी देर तक मैं और मेरी मा बिस्तर चुप चाप एक दूसरे के बाहों में लेते रहे। और जब हमलोग का सांस ठीक हुआ तो मेरी मां उठ कर चली गई।
जाते समय मां मुझसे कह गई, “मुझे तुम्हारे पिता को देखना है। वैसे तुम्हें धन्यवाद देता हूं कि आज बहुत दिनों के बाद मेरी चूत की प्यास बुझी और मैं तुमसे वादा करता हूं कि आज के बुरे तुम जब भी चाहोगे मेरी चूत चोद सकते हो। मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए हमेशा खुली रहेंगी।”लेकिन मुझको तुम्हारे पिताजी के पास जाना है और जब तक मैं औं टिम चुप चाप सो जाओ। माई भी बिस्तर पर से उठ कर माँ को अपने हाथों में लेकर उनको चूमते हुए बोला, “मैं जानता हूँ कि इस समय पिता जी को तुम्हारी बहुत ज़रूरत है। मैं तब तक तुमसे कुछ नहीं कहूँगा जब तुम मुझसे फिर से चुदवाना नहीं चाहती।” माँ मुझसे बोली, “मैं जानती हूँ कि तुम मुझको बहुत प्यार करते हो और मैं तुमको और तुम्हारे पिताजी दोनों को प्यार करती हूँ।” और एह कह कर मा ने अपनी साड़ी अपने ऊपर लपेट लिया, और चली गयी। माँ की ब्रा, पेटीकोट और पैंटी सब हमारे कमरे में ही परी हैं। माई उठ कर माँ की पैंटी और ब्रा उठा लिया और अपनी नाक पर उनको रख कर उनकी खुशबू सुंघने लगा। मुझसे अपनी माँ की चूंची और चूत की सुगंध मिल रही थी। मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया, लेकिन मेरी जरूरत बहुत ही गहरी थी

अगले दिन सुबह जब मेरा खुला चाहिए तो मैंने अपने आप को बहुत ताज़ा बनाया। फिर मेरे दिमाग़ में कल रात की साड़ी घाटा घूम गई और मेरा लंड फिर से ख़राब होने लगा। खैर, मुझको स्कूल जाना था और उसकी तैयारी करनी थी। माई एह सोच रहा था कि कल रात के बाद मा मुझसे कैसा व्यवहार करेगी और मैं अपने ध्रकते दिल के साथ सुबह नाश्ता करने के लिए नाश्ते की मेज पर आ गया। टेबल पर नाश्ता रखा हुआ था और रोज़ की तरह मा मेरा टेबल पर मेरा इंतज़ार कर रहे थे। माई मां की तरफ देखा और मां नेब ही मुझको मुस्कुराते हुए देखी। फिर माँ ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा, “कल रात को दर्द चाहिए?” “हां मां कल रात को जरूरत बहुत अच्छी ऐ” मैंने मां से नजरें ना मिलते हुए कहा। “ख़ूब ऐ की ज़रूरत है?” मा ने फिर हंसे के पूछे. थोरी देर के बाद फिर हमसे बोली, “मुझे मालूम नहीं था कि तुम्हारा लंड इतना लंबा और मोटा होगा। कल रात को मुझे तुमसे चुदवा कर बहुत मजा मिला। मैं समझती हूं कि मुझे यही मजा रोज रात को मिलेगा।” माई फ़ौरन मा से कहा, “मा रोज़ रात को ही क्यों, अगर तुम चाहो मैं तुमको चुदाई का ऐसा अभी इसी वक़्त दे सकता हूँ। तुम बस एक बार कह कर तो देल्हो।” माँ मुझसे बोली, “नहीं, अभी नहीं, अभी मेरा बहुत सा काम पर हुआ है, और कल रात की तुम्हारी जबरदस्त चुदाई से मेरी चूत अभी तक कल्ला रही है। आज रात को मैं फिर से तुम्हारे कमरे में आऊँगी और तुम्हारा लंड अपने मुँह और चूत से खाऊँगी।” माई को उनकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “माँ चूत से लंड खाना तो माई समझ गया लेकिन मन से लंड खाना माई नहीं समझ।” माँ अपने आप को मुझसे चुराते हुए बोली, “रात तक सब्र करो, मैं आज रात को मैं तुम्हें सब समझ दूँगी” और जोरो से हंस परी।
माँ अपने आप को हमसे चुराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैंने उनको कस कर रखा हुआ था। थोरी देर के मा मुझसे लिपट गई और मेरे माथे पर एक चुम्मा दिया। फिर माँ ने मेरे होठों पर भी चुम्मा दिया। फिर मैं अपना जीव माँ के कुन्ह में डाल दिया और मेरे जीव को चूसने लगी। थोरी जीव चूसने के बाद मा मुझसे बोली, “तुम मुझको पागल बना दोगे और अभी तुम्हें कॉलेज जाना है।” फिर माँ ने अपने आप को चुराए हुए और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे बोली, “बस अब तुम कॉलेज जाओ और मैं तुम्हारे पास रात को आऊँगी।” लेकिन उस दिन चूहे को और ना ही अगले काई चूहे को मा मेरे कमरे में नहीं आई। मुझे मकुम था माँ मेरे पिता जी की सेवा में लगी हुई हैं और इसलिए मैंने भी कुछ नहीं बोला। मैं अपनी माँ को मुझसे चुदाई के लिए अपने काम में परेशान नहीं करना चाहता था। करीब एक हफ्ते एके खराब पिता जी की हालत खराब हो गई। माई और मां दोनों दिन-रात पिता जी की देखबहल में लगे रहे। पिता जी को हॉस्पिटल ले जाना और हॉस्पिटल से आना बराबर था, क्योंकि डॉक्टर लोग कोशिश कर रहे थे। हर रात
को माँ पिता जी की हालत देख कर और अपने दुःख से रोओ। माई रोज़ रात अपनी माँ को समझाता था और उनको अपनी बाहों में भर कर शांत करता था। मा थोरी डेर मी हाय मेरे बाहों मी सो जति थे।

आख़िर में करीब दो महेनो के बुरे अपने बीमार से लड़ते हुए मेरे पिता जी चल बेस। माँ पूरी तरह से टूट गई और उनको इंजेक्शन देने की जरूरत है। एह हम लोगों के लिए बहुत ही परेशानी का समय था। हमारा पूरा का पूरा घर अपने रिश्तेदार और रिश्ते से भरा हुआ था। सब कोई आ कर हमको और माँ को शांत करने में लगे हुए थे। पिता जी की अंतिम क्रिया करम, श्राद्ध और शती पथ के बुरे रिश्तेदार सब अपने-अपने घर चले गए। मा भी इतने समय में थोरी बहुत संभल गई। मा अब एह मन लिया था पिता जी वाकाई में चल दिए थे। हमारी मौसी फिर भी कुछ और दिन तक हमारे घर पर बने रहे और हम लोगों को सहारा दिया। पिता जी के देहांत के करीब-करीब एक महीने के बाद हमारा घर फिर से खाली हो गया। अब घर पर सिर्फ मैं और मेरी माँ थे और हम एक दूसरे को सहारा दे रहे थे। माँ अभी भी पिता जी के मरने से दुख खा जा रहे थे। माँ चूहे को उठ कर पिता जी का नाम ले ले कर रोटी रखता था और मैं उनको शांत करने की कोशिश करता रहता था। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ मां शांत हो जाएगी और धीरे-धीरे सामान्य जीवन पर वापसी आने लगेगी। जैसे माँ सामान्य होने लगी, माँ को अपने साथ सुलाने के लिए और चोदने के लिए इंतज़ार करने लगा। माई कभि कभि मा किन अम लेकर रट को मुत्थे मर लेता था।
पिता जी के गुजरे के करीब तीन महीने बाद एक दिन रात को माई और मां डिनर कर रहे थे की मां मुझसे बोली, “बेटा खाना के खराब सोते समय नहा लेना।” माई फ़ौरन समझ गया कि माँ के दिमाग में क्या है। तीन महीने में माँ और मैंने कुछ नहीं किया था। खाना खान एके बुरा माई थोरी देर तक टीवी देखा और फिर नहा लिया। नहाते समय माई अपन बालों में सजंपू लगया और शेव भी किया और अपने आप को चूहे के लिए तैयार कर लिया। मुझे मालूम है कि चूहे को क्या होने वाला है। जब नहा रहा था तो मुझे बाथरूम के दरवाजे से माँ की आवाज़ सुनाई दी, “बेटा नहा कर नये कपरे पहन लेना, मैं तुम्हारे लिए नये कपरे निकाल कर जा रही हूँ और फिर मेरी आवाज़ की प्रतीक्षा करना।” नहा कर बाथरूम से एक बुरा मैंने देखा कि माँ मेरे लिए बिस्टर पर एक जोरा नया क्रीम रंग का कुर्ता पायजामा निकल कर रख गई हैं। मैंने उन्हें पहन लिया और थोड़ा सा परफ्यूम भी लगा लिया। क़रीब आधे घंटे के बाद मुझे कि माँ की आवाज़ सुनाई दे, “बेटा मेरे कमरे में आ जाओ।” मेरा दिल जोर जोर से डर रहा था और नौकरानी धीरे धीरे माँ के कमरे की तरफ चला गया। मैजाब मा के कमरे में घुसा तो मैं चौंक गया और मेरी आंखे फिर-फिर कर देखने लगा। कमरा पूरा का पूरा फूलों से सजा हुआ था और माँ का बिटर पूरा का पूरा खुशबू वाली फूलों से सजा हुआ था। मा बिस्तर पर दुल्हन की तरह से सजी बैठी हुई थे। माँ अपने शेड के समय के साड़ी और ब्लाउज पहने हुए थे। मा ने अपने सारे गहने भी पहने हुए थे। माँ इस समय मुझको बहुत सुंदर लग रही थी और उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा। मा ने मेरी तरफ देखी और मुस्कुरा कर आंखें ही आंख से मुझे अपने पास बुला लिया।
माई कमरे में घुस गया और जा कर माँ के पास बैठ गया। मा बिस्टर पर चुप चाप बैठे थे। उनकी आंखें नीचे झुकी हुई थीं और धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थीं। मेरे को लगा कि माँ एह चाहती है कि जैसे पहली रात को कोई मर्द अपनी बीवी के पास जाता है और उसको नंगी करके चोदता है, मैं भी माँ को वैसी ही नंगी करके चोदू। माई धीरे-धीरे मां के शरीर से उनके गहनें उतार लिया और उनके सिर से साड़ी का पल्लू उतार दिया। फिर माई माँ का चेहरा अपने हाथों में लेकर उनको धीरे धीरे चूमने लगा। सब से पहले मैं उनके होठों को चूमा फिर उनको चूमा। फिर मैं गरम होकर उनके चेहरे, नाक, गाला और गार्डन पर अपना चुम्मा दिया। माँ मेरे चुम्मो से गरम हो गयी और सिस्कारी मरने लगी और मुझको चूमने लगी। माँ मेरे शुद्ध चेहरे को चूम रही हो। हम लोग एक दूसरे को चूमते हुए बिस्टर पर लेट गए औरलेटे वक्त पर माँ के ऊपर था। माई ऊपर हो कर मां के होठों को जोर जोर से चूमने लगा और इतना जोर लगाया कि मां के होंठ उनके दांत से काटने लगे। हमारे जीव एक दूसरे से टकरा रहे थे और हम लोग एक दूसरे की जीव चूसे हुए एक दूसरे को प्यार कर रहे थे। हमलोग अपना-अपना जीव एक दूसरे के मुंह के अंदर डाल कर घुमा रहे थे। फिर धीरे-धीरे हमने एक दूसरे के कपरे उतारने लगे। माई और माँ कपरे के नीचे कोई भी अंडरवियर नहीं पहनने हुआ था। थोड़ी देर में हम एक दूसरे का नंगे बदन पर हाथ फेर रहे थे और एक दूसरे की नंगे बदन की हर इंच में अपना अपना चुम्मा दे रहे थे। अब तक हमारे नंगे बदन पर चुम्मा और कटने का निशान पर चुक्का था। मा ने मेरा सारा प्यार कर अपनी चूत की तरफ ढकेल दिया। माई समझ गया कि मा मुझसे अपनी चूत की गुंडी।

कहा। उन्हें भी कहा कि अगर तुमसे चुदवाती हूं तो एह हम दोनों के लिए सुखद होता है और उनको भी इस बल्ले से शकुन रहेगा कि मेरी चूत एक सही आदमी के हाथ में है। मुझको तुम्हारे पिता जी की बात सही लगने लगी। मुझको लगी कि अगर मैं एह बात को भूल जाऊं कि तू मेरा बता है तो मुझको तेरे अलावा दुनिया में ऐसा कोई नहीं है कि जिससे मैं अपनी चूत चुदवा सकूं। मुझको तो जब जब एह बात हमारे दिमाग में आती है कि मैं तुमसे चुदवाऊंगी तो मेरी चूत में पानी भर जाता था। इसलिए मैंने तुम्हारे पिता जी से अपने मन की बात बोल दिया। लेकिन तुम्हें पिता जी बोले कि पहले मुझे अपने बेटे से बात करनी है, क्योंकि मैं खुद से एह बात तुमसे ना कह पाऊंगी। भगवान जानता है कि जब तुम्हारे पिताजी तुमसे मेरे बारे में बात कर रहे थे तो मैं कितना घबरा गया था। अगर तुमने पिता जी की बात ना माना हो तो मैं बिल्कुल से टूट जाती हूं।”
माई मां की सब बातें सुन कर फिर से गरम हो गई और मेरा लंड फिर से खराब होने लगा। माई मां के होठों पर अपना चुम्मा जर्ते हुए बोला, “मा कैसे तुमने एह समझ लिया कि माई तुम्हारी जैसी सुंदर और सेक्सी औरत को चोदने से मन कर सकता हूँ?” माई फिर से माँ की चूंची से खेलते हुए बोला, “माँ, मैं फिर से तुमको चोदना चाहता हूँ। मैं तुमको अभी चोदना चाहता हूँ। माई बार बार तुम्हारी खुबसूरत चूत में अपना लंड डालना चाहता हूँ।” “हे भगवान! क्या तू सच में मुझको फिर से चोदना चाहता है? अभी तो सिर्फ आधा घंटा ही हुआ है तू मेरे मुँह में अपना लंड डाल कर अपना पानी निकला था। वाह मैं कितना खुशनसीब हूं, अब मेरे पास तेरा जवान लंड है जो मुझको जब तब चोद सकता है। मैं तो बस अब यही सोचती हूं कि मैं तेरे जैसा चुदक्कड़ के साथ हमें दे पाउंगी की नहीं। चल जब तुझे चोदना है तो चोद ले, लेकिन इस बार जरा आराम आराम से चोदना।
माई अपनी माँ की खोली टांगों के कुतिया बैठ कर अपना लंड माँ की चूत के ऊपर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने लगा। माँ की चूत इस समय मुझको थोरी टाइट लग रही थी, लेकिन मैं धीरे-धीरे अपने हाथों से उनकी चूत सहलाता रहा और उनकी गांड में अपनी उंगली डालने लगा। थोरी देर तक गांड में उंगली करने के बाद माँ की चूत से पानी निकलने लगा और चूत गिला हो गया। माँ चूत को गिला होते देख कर एक झटका के साथ अपना लंड पूरा का पूरा जार तक घुसा दिया। चूत के अंदर जाते ही मा अपनी कमर उठना शुरू कर दिया और मैं भी झटके दे दे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। हम लोग एक दूसरे को चूम रहे थे और ऊपर नीचे से धक्का मार मार कर चोदते और चुदवाते रहे। चोदते और चुदवाते समय हम एक दूसरे से मीठी मीठी बातें भी कर रहे हैं। “ओह, मेरा राजा बेटा,” माँ बोली, मैं कितना खुशनसीब हूँ कि मेरी चूत तेरा लंड झा रहा है और तेरा लंड खा खा कर खुश हो रहा है। तेरा लंड बिल्कुल मेरी चूत की साइज़ का है।” “माँ तुम मेरे लिए ही बनी हो और हमेंशा रहोगी” माई माँ की चूची को पकड़ कर धक्का मारते हुए बोला। “मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि मैं एक दिन तुम्हारी चूत अपना लंड डाल कर तुम्हें चोद सकूँगा” माई माँ से फिर से बोला। “क्या माई और मेरी चूत तुझको पसंद है?” मां मुझसे पूछे और फिर से बोली, “देख मुझको खुश करने के लिए झूठ मत बोलना।” करता हूँ. मेरे लिए तुम प्यार और सुंदरता की देवी हो। मैं तुमसे हमशा प्यार करता रहूंगा और जब तुम चाहोगी मेरा लंड तुम्हारी चूत की सेवा के लिए तैयार रहेगा।” मां मुस्कुरा कर बोली, ”बस अब बहुत हो चुका है। चा लैब मैन लगा कर मेरी चूत की सेवा कर और उसको जी लगा कर अपने लंड से चोद। माई मारे चूत की खुजली से मारी जा रही हूँ। तू अपना लंड अंदर तक डाल कर मेरी चूत के अंदर चल रही चिटियों का मार डाल और मुझे शांत कर। बेटा चोद मेरी चूत खूब कस कर चोद।”
“अब आज के बाद ना तो मैं तेरा मां हूं और ना ही तू मेरा बेटा है। असज के बुरे से तू मेरा पति है और तेरा पत्नी” मेरे ढक्को के जवाब में मां अपनी कमर उछालते हुए मुझसे बोली। थोरी देर के बाद मा फिर से बोली, “आज की रात हमलोग की छाया का सुहागरात है। मैं वो सब काम करूंगी जो एक पत्नी अपने पति के लिए करती है। तुझे काम ही पसंद है, मुझसे बोल, मैं तेरी हर बात मन्ने के लिए तैयार हूं।” हमलोग एक दूसरे को अपनी अपनी बाहों में जाकर रखा था और अपनी अपनी कमर उठा कर एक दूसरे की चूत और लंड चोद रहे थे। मेरा लंड माँ की चूत की गरमी पाकर चूत के अंदर बहुत ही कारा हो गया था। Is chudai ke pahale mera lund ek bar MA ki munh ke jhar choka tha aur isliye is chudai me mera lund jharne me jyada waqt le raha tha. माँ की चूत अब तक की चुदाई में दो बार अपना पानी चोर चुकी थी और अपनी चुदाई की खुशी में पागल हो रही थी। माँ मुझको अपने हाथों से पाकर कर बेटाहाशा चूम रही थी और मुझसे लिपट रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसी नई दुल्हन, नई चुदाई, ऐसे पागल हो रही है। जैसे जैसे माँ मुझको चूम रही थी, मेरा खून भी खुल रहा था और मुझको मेरे अंडों में तनब महसस होने लगा था। थोरी देर के मेरा लंड माँ की चूत को चोदते अपना पानी चोर दिया। जैसी ही मेरी माँ की चूत के अंदर अपना लंड थैंक्स कर झड़ा, माँ भी तीसरी बार झड़ गई। हमलोग एक दूसरे के शरीर को अपने हाथों से देखकर निकले थे और जब तक मेरा आखिरी बुंद मां की चूत में ना चल गया, मां को नहीं छोड़ा।
हम लोग झरने के बाद एक दूसरे के हाथों में लेते रहे। हम लोग बिना सांस के चुदाई करते हैं, उखर चुकी हैं और अब बिना धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहे हैं। माई अपना सार मा की फुली फुली चूंची पर रख कर सो गया और ना जाने भी कब मुझसे लिपट सो गई। हम लोग रात भर एक दूसरे से लिपट कर सोते रहे, और जब सुबह आंख खुली तो देखा मा अभी भी मेरे साथ नंगी ही सो रही है। माई उठ कट मा को चूम किया और उनकी चूंची को सहलाने लगा। थोरी देर के बाद मा भी अपनी आंख खोल दी और हमसे लिपट कर मुस्कुरा कर बोली, “बेटा कैसा रहा हमलोग का सुहरात? मजा आया की नहीं? ठीक ठीक बोल बेटा हमको चोद कर तुझको और तेरे लंड को मजा मिला की नहीं?” माई भी माँ से लिपट कर बोला, “माँ बहुत मजा आया हमारी सुहागरात में तुमको चोद कर। क्या एक बार फिर से मैं तुमको चोद सकती हूँ?” माँ बोली, “बेटा एक बार क्यों? तू जितना बार चाहे मुझको चोद सकता है। जब चाहे चोद सकता है। अब पूरी की पूरी तेरी हूँ। बोल बेटा बोल्ट तू मुझको इस समय किस आसन में चोदेगा? मैं तब अपनी माँ की चूत में उंगली करता हूँ।” चाहता हूँ. तुम उठ कर पलंग पर झुक जाओ और पीछे से तुम्हारी चूत में अपना खरा लंड डाल कर चोदने लगा। और माँ एक ही बहन पर पति पत्नी जैसे नागे सोते हैं और चुदाई करते हैं कि वो मेरी अपनी छोटी बहन (मेरी मौसी) को पता कर मुझसे चुदवाएगी।

समाप्त

माँ के जिस्म का मालिक

रोहन के गाँव में मर्दों को औरतों से बहुत ऊँचा दर्जा मिलता था। ज्योति ने भी अपने परिवार और समाज से यही सीखा था कि औरत को मर्द के हर आदेश का पालन करना चाहिए। इस बात का फायदा रोहन को हुआ क्योंकि उसे ज्योति के शरीर को पाना था। ज्योति की आकर्षक बनावट, उसके उभार और उसकी मासूम सी शक्ल किसी को भी ललचा देने वाली थी।

रोहन ज्योति के साथ संबंध बनाना चाहता था लेकिन रोहन के पापा ज़्यादातर समय घर पर रहते थे, इसलिए वह ज्योति के साथ ज़्यादा कुछ कर नहीं पाता था। लेकिन वह दिन दूर नहीं था जब रोहन को ज्योति को अपनी औरत बनाने का मौका मिला। रोहन के दादा की तबीयत खराब होने की वजह से उसके पापा को 2 हफ्तों के लिए अपने गाँव जाना पड़ा। पापा के जाते ही ज्योति को एक अजीब सी बेचैनी हुई, उसे रोहन की नज़रों में हवस दिखने लगी थी।

ज्योति ने महसूस किया कि वह उसे छूने के बहाने ढूँढ रहा था। जब रोहन पीछे से उसे आकर गले लगाता, तब ज्योति को उसकी उत्तेजना अपने शरीर पर महसूस होती थी। जब वह पीछे मुड़कर उसे देखती, तो रोहन उसे देख कर मुस्कुरा रहा होता था। ज्योति को एक अजीब सी घबराहट और अपने बदन में एक गर्मी महसूस होने लगी। रात में ज्योति यही सोच रही थी कि अब जब पापा घर पर नहीं हैं, तो क्या रोहन इसलिए करीब आने की कोशिश कर रहा है।

अगले दिन ज्योति ने देखा कि बाथरूम की कुंडी खराब थी, तो उसने सोचा कि रोहन के उठने से पहले नहा लेती हूँ। जब वह बाथरूम में गई और कपड़े उतार कर नहाने लगी, तभी पीछे से बाथरूम का दरवाजा खुला और रोहन वहां नग्न खड़ा था। ज्योति चिल्लाई, “रोहन यह क्या कर रहे हो!” रोहन ने कहा, “आज आई है तू मेरी पकड़ में।” ज्योति के गीले बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह अपने शरीर को ढकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह नज़ारा देख कर रोहन और भी बेकाबू हो गया।

रोहन ने ज्योति को कस कर पकड़ा और उसे चूमना शुरू कर दिया। ज्योति ने उसे पीछे धकेलने की कोशिश की लेकिन रोहन ने उसे गोद में उठा लिया। उसने ज्योति के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने शुरू किए, लेकिन धीरे-धीरे ज्योति का विरोध कम होने लगा और उसे सालों में पहली बार ऐसा सुख महसूस हुआ। रोहन ने उसके शरीर के साथ खेलते हुए उसे पूरी तरह अपने वश में कर लिया। अंत में रोहन ने कहा, “अब से तू मेरी बीवी है, समझी?”

थोड़ी देर बाद ज्योति कमरे में गई तो रोहन वहां बैठा था। ज्योति ने कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और वह पापा को कुछ नहीं बताएगी, लेकिन रोहन हँसने लगा। उसने ज्योति को बाज़ार चलने को कहा, वह भी बिना साड़ी के, सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में। ज्योति डर गई थी लेकिन रोहन ने उसे मास्क पहनाया और उसे इसी हालत में बाज़ार ले गया। वहां भीड़ में भी रोहन उसे पीछे से छूता रहा और उसे उत्तेजित करता रहा।

फिर रोहन उसे एक सुनसान गली में ले गया जहाँ उसने फिर से ज्योति के साथ संबंध बनाए। पड़ोस का एक सब्जीवाला यह सब छुपकर देख रहा था। वह हैरान था कि माँ और बेटे के बीच यह सब हो रहा है, लेकिन ज्योति अब खुद इस सुख का आनंद ले रही थी और रोहन का साथ दे रही थी। घर वापस आने के बाद ज्योति को अहसास हुआ कि अब उसके शरीर पर सिर्फ रोहन का हक है। उसने हमेशा मर्द की आज्ञा मानना सीखा था, और अब वह मर्द उसका अपना बेटा बन चुका था। उनके रिश्ते की मर्यादा अब खत्म हो चुकी थी।