चाची की ऐसी बात सुन कर ऐसा लगा जैसे मेरे लंड से पानी निकल जाएगा और मैने अपना मूह उसके दूध मे घुसा दिया
तो चाची ने मेरे कान मे धीरे से कहा, रघु चुपचाप मेरे पीछे-पीछे आजा और चाची वहाँ से उठी और चल दी,
अवी- फिर तुम गये कि नही
रघु – यार डर तो बहुत लग रहा था लेकिन फिर भी ना जाने कैसे हिम्मत आ गई और मैं भी उसके पीछे-पीछे जाने लगा तो
नीचे जाकर मैने देखा वह बाथरूम के गेट पर खड़ी मेरा इंतजार कर रही थी पूरे घर मे सन्नाटा था और हमारा
मकान कुछ ऐसा बना था कि आसपास उची इमारत और बीच मे आँगन बना हुआ था और आँगन के एक कोने मे बाथरूम
था मैं चुपचाप अपना सर नीचे झुकाए हुए चाची की ओर बढ़ने लगा और चाची बाथरूम के अंदर घुस गई और फिर
जैसे ही मैं बाथरूम के पास पहुचा चाची ने झट से मेरा हाथ खींच कर मुझे अंदर कर लिया और बाथरूम की कुण्डी
लगा दी
अवी- फिर क्या हुआ
रघु- अरे क्या बताऊ मेरी तो डर के मारे जान निकली जा रही थी चाची की उमर भी उस समय करीब 28 साल की रही होगी, मैं
बेकार मे ही डर रहा था जबकि चाची ने मुझे चूमते हुए कहा, रघु ले जल्दी से मुझे अपने मोटे लंड से चोद दे,
और फिर चाची वही अपनी साडी उठा कर झुक गई और अपनी मोटी गोरी गंद को मेरी तरफ कर दिया, मैं थोड़ा घबराते हुए
लेकिन खुश होते हुए चाची की मोटी गंद और उसकी गुदा और चूत को पीछे से सहलाने लगा, चाची अरे रघु इतना समय
नही है हमारे पास यह सब तू चोद्ते हुए कर लेना पहले अपना लंड अंदर डाल दे, चूत छूकर देख कितना पानी छोड़ रही
है, चल जल्दी से मार दे धक्का, मैने देर करना उचित नही समझा और अपने पेंट को खोल कर घुटनो तक सरका कर अपने
लंड का निशाना चाची की चूत मे लगा कर एक कस के धक्का मार दिया और मेरा मोटा लंड सॅट से चाची की चूत को
फाड़ते हुए अंदर घुस गया और चाची आह करती हुई मेरे लंड को अपनी चूत मे अड्जस्ट करने लगी और फिर मैने
धीरे-धीरे उसे चोदना शुरू कर दिया कुछ देर बाद चाची अपनी मोटी गंद का धक्का मेरे लंड पर मारने लगी और कहने
लगी, रघु थोडा कस-कस कर चोद और ज़ोर से चोद आह, आह और मैं चाची की बात सुन कर उनकी कमर पकड़ कर धक्के
मारने लगा, चुकी यह मेरी पहली चुदाई थी और जो कुछ भी देखा था वह सब पिक्चर मे देख कर ही सीखा था इसलिए मैं
जल्दी ही झाड़ गया पर शायद चाची को उतनी चुदाई से भी मज़ा आ चुका था और जब मेरा पानी निकल गया तब कुछ देर
बाद चाची ने वही बैठ कर मेरे सामने ही पेशाब किया और अपनी चूत को पानी से धोकर अपने पेटी कोट से पोछते हुए
मुझसे बोली मैं जा रही हू तू थोडा रुक कर आना और फिर चाची चली गई,
अवी- फिर क्या हुआ रघु भैया
रघु- बस कुछ देर तक मैं इंतजार करता रहा फिर मैं भी वहाँ से चल दिया और जब उपर पहुचा तो मैने देखा मेरी
जगह पर चाची ने किसी बच्चे को सुला दिया था और उस बच्चे की जगह खाली थी सो मैं वहाँ जाकर सो गया, पर मुझे
रात भर नींद नही आई
अवी- मुस्कुराते हुए यार रघु भैया तुम्हारी चाची तो बहुत मस्त माल है क्या गदराई हुई मोटी गंद है उसकी, तुम तो
मतलब आज भी उसे कस कर चोद्ते होंगे और तुमने आज तक मुझे बताया भी नही, वैसे मैं तुम्हारी निगाहो से समझ
तो गया था जब तुम्हारी चाची इधर से गुजरती है तो तुम उसकी मोटी गंद को बहुत प्यार से घूरते हो
रघु- अरे अवी भैया यही तो तुम जानते नही, तुम जैसा सोच रहे हो वैसा नही है, वो दिन था और आज का दिन है उसके बाद
मेरी चाची ने कभी मुझे भाव नही दिया और एक बार मैने कोशिश की तो उसने मुझे झटकते हुए कह दिया जो हुआ सो
हुआ, अब मेरी ओर ध्यान भी मत देना नही तो मुझे तेरे बाप से यह कहते देर नही लगेगी कि इसने सोते हुए मेरे दूध
पकड़ लिए थे, बस तब से अवी भैया मैं उस छीनाल चाची का कोई भरोशा नही करता हू, पता चला कब भोसड़ी की जूते खिलवा दे,
अवी- अरे यार रघु भैया तुम्हे उसे ऐसे ही नही छोड़ना चाहिए था
रघु- अरे अवी भैया वह बहुत छीनाल किस्म की औरत है उससे दूर रहने मे ही भलाई है, खेर छोड़ो उस बात को और अब
यह सोचो कि तुम अपनी गर्लफ्रेंड के बारे मे क्या करने वाले हो
अवी- रघु भैया मैं तो उसे सच मुच बहुत चाहता हू और वह मुझसे ज़्यादा दिन तक नाराज़ नही रह पाएगी ऐसा मेरा
विश्वास है, मैं उसे जल्दी ही मना लूँगा, बस मुझे थोड़ी टेन्षन हिटलर की रहती है
रघु- कौन हिट्लर अवी भैया
अवी- मुस्कुराते हुए, अरे कोई नही यार मैं तो उस लड़की के बाप की बात कर रहा था, अच्छा रघु भैया मैं अब चलता हू
तुमसे बाद मैं मिलूँगा
रघु- अवी भैया एक बात कहना थी
अवी- हाँ बोलो ना
रघु- अवी भैया हमारे बीच जो भी बाते होती है वह मैं चाहता हू कि हम दोनो के बीच ही रहे
अवी- अरे यार रघु भाई यह भी कोई कहने की बात है, तुम अवी से विश्वासघात की उम्मीद कभी मत करना
रघु- मुस्कुराते हुए नही अवी भैया, ऐसा नही है मैं तुम पर विश्वास ना करता तो इतनी बड़ी बात कहता ही क्यो
अवी- अच्छा मैं चलता हू फिर मिलेंगे
रघु- अच्छा भैया
अवी टहलता हुआ अपने घर की ओर चल देता है पर उसका दिल बहुत घबरा रहा था और वह अपनी दीदी का सामना करने के
ख्याल से काफ़ी नेरवास महसूस कर रहा था, जब वह घर पहुचता है तो उसके घर के बाहर पोलीस की गाड़ी खड़ी रहती है
और वह समझ जाता है कि हिट्लर घर मे ही है और उसका दिल और भी घबराने लगता है, और उसके कदम वही रुक जाते है
और वह खड़ा होकर सोचने लगता है कि कही पापा ने दीदी को रोते हुए देख लिया होगा तो कारण भी पूंच्छा होगा और कही
दीदी ने कुछ बता दिया होगा तो आज हिटलर उसकी चमड़ी उधेड़ कर रख देगा,
फिर अवी अपने मन मे सोचता है, नही-नही दीदी कभी ऐसा नही करेगी वह मुझसे इतना प्यार जो करती है, पर मैने भी
तो आज उसके साथ बहुत बड़ी हरकत की है, हो सकता है उसके गुस्से मे दीदी ने हिट्लर को बता दिया हो, फिर कुछ सोच कर
चलो चलते है जो होगा देखा जाएगा और फिर अवी अपने घर की ओर चल देता है,
अवी जैसे ही घर के अंदर घुसता है सामने उसका बाप और दो पोलीस वाले और बैठे-बैठे चाइ पी रहे थे और
अवी- नमस्ते अंकल
पोलीस्मॅन- नमस्ते अवी, कहो क्या हाल है
अवी- सब ठीक है अंकल
अनिल- अवी जा डिंपल से कह दे मेरा खाना ना बनाए मैं रात को देर से आउन्गा
अवी- अच्छा पापा
अवी चुपचाप पहले किचन मे जाता है जब डिंपल वहाँ नज़र नही आती है तो वह अपने रूम की ओर जाता है और डिंपल
बेड पर लेटी हुई कोई बुक पढ़ रही थी अवी गेट पर खड़ा होकर ही
अवी-दीदी पापा का खाना मत बनाना वह कह रहे है वह रात को देर से आएगे और अवी वापस बाहर आ जाता है
कुछ देर बाद अनिल उन पोलीस वालो के साथ वापस चला जाता है और अवी बैठ कर सोचने लगता है कि दीदी से कैसे बात करू,
लेकिन उसकी हिम्मत नही होती है और वह अपने पापा के रूम मे जाकर लेट जाता है,
शाम को डिंपल खाना बनाती रहती है और अवी किचन मे जाकर
अवी- दीदी नाराज़ हो मुझसे
डिंपल- उसकी बात का कोई जवाब नही देती है और अपने काम मे बिज़ी रहती है लेकिन उसका चेहरा बहुत गंभीर नज़र आता
है,
अवी- दीदी आइ आम सॉरी
डिंपल- उसकी ओर कोई ध्यान नही देती है और अवी वापस बाहर जाकर बैठ जाता है, अवी का मन किसी काम मे नही लगता है
और वह बार-बार टीवी के चॅनेल बदलता रहता है, तभी डिंपल उसके लिए खाना लेकर आती है और खाना रख कर सीधे
अपने कमरे मे चली जाती है,
अवी- वहाँ से उठ कर डिंपल के कमरे मे जाता है, डिंपल बेड पर उल्टी लेटी रहती है और अवी उसके पास खड़ा होकर
दीदी- तुम भी खाना खा लो ना
डिंपल- उसकी बात का कोई जवाब नही देती है
अवी- अब माफ़ भी कर दो कब तक ऐसे ही नाराज़ रहोगी
डिंपल जब कोई रिप्लाइ नही देती है तो
अवी- ठीक है तुम नही खओगि तो मैं भी नही खाउन्गा और फिर से बाहर आकर अपने पापा के रूम मे जाकर लेट जाता है
डिंपल कुछ देर तक अपने बेड पर लेटी रहती है और फिर उठ कर बाहर आती है तो खाने की थाली वही ऐसी की ऐसी रखी रहती
है और डिंपल वहाँ से थाली उठा कर वापस किचन मे रख कर धीरे से अपने पापा के रूम मे जाकर झाकति है और अवी
को लेटे हुए देख कर वापस अपने रूम मे आ जाती है,
दोनो अलग-अलग एक दूसरे के बारे मे सोचते हुए सो जाते है, रात को करीब 2 बजे उनके घर की बेल बजती है और अवी उठ कर
दरवाजा खोलता है और अनिल अंदर आ जाता है,
अनिल- क्या बात है बड़ी जल्दी दरवाजा खोल दिया, अभी तक सोया नही था क्या
अवी- बस पापा नींद लगने ही वाली थी कि आप ने बेल बजा दी
अनिल- अच्छा जा एक गिलास पानी ला कर दे दे और जाकर सो जा
अवी अनिल को पानी देकर अपने रूम मे चला जाता है जहा डिंपल लेटी रहती है. अवी डिंपल के पास धीरे से लेटता हुआ उसके
खूबसूरत चेहरे को देखने लगता है और फिर धीरे से डरते हुए उसके गालो को चूम लेता है और वही चुपचाप लेट जाता
है,
सुबह 8 बजे अनिल चाइ पीकर जब जाने लगता है तब
अवी- पापा आज हम लोग घूमने जा रहे है
अनिल- ठीक है लेकिन जल्दी लौट आना और डिंपल का ध्यान रखना ये नही कि आवारा गिर्दी मे लग जाए
अवी- ठीक है पापा और फिर अनिल अपने जेब से कुछ पैसे निकाल कर अवी को देते हुए ले डिंपल को लेजा कर दे दे और कोई बात हो
तो फोन कर देना
अवी- ओके पापा और फिर अनिल बाहर चला जाता है, तभी मोबाइल की घंटी बजती है और अवी के कान खड़े हो जाते है और वह
डिंपल की बाते सुनने लगता है जो कि दूसरे कमरे मे होती है
डिंपल- हाँ ठीक है स्वीटी हम लोग रेडी है तू 9 बजे तक आएगी ना, चल ठीक है ओके
ठीक 9 बजे उनके घर के सामने एक स्कार्पियो आकर रुकती है और उसमे से तीन लोग बाहर निकलते है
अवी जल्दी से बाहर आकर देखता है और
स्वीटी- अरे वाह अवी तुम तो एक दम रेडी हो, डिंपल तैयार हुई कि नही,
अवी- वो भी रेडी है स्वीटी
स्वीटी- अवी इनसे मिलो ये है मेरे भैया नरेन्द्र और ये है मेरी भाभी शालिनी
अवी- नमस्ते भैया, नमस्ते भाभी
नरेन्द्रा- ओह तो तुम हो अवी, भाई तुम्हे पहले कभी देखा नही था जबकि डिंपल तो कई बार हमारे घर आ चुकी है
अवी- पर भैया मैं आपको जानता हू
नरेन्द्रा- अरे वाह तो फिर कभी घर क्यो नही आए
अवी- बस भैया कभी मौका ही नही लगा
शालिनी- अरे अवी वह भी तो तुम्हारा ही घर है जब चाहे आ सकते हो
अवी- मुस्कुराता हुआ अपने मन मे भाभी मुझे क्या पता था कि स्वीटी की भाभी इतनी मस्त है नही तो मैं तो कब का
आपसे मिलने आ चुका होता, आओ भाभी, आइए भैया अंदर आइए, और फिर सभी लोग अंदर आ जाते है
डिंपल उन सभी को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर डिंपल जब चाइ बनाने का कहती है तो
नरेन्द्रा- अरे नही डिंपल चाइ वाई रहने दो अब हम रास्ते मे ही चाइ पिएगे, फिलहाल तो हमे चलना चाहिए, वैसे मेरा
गाँव दूर नही है 2 घंटे मे पहुच जाएगे, और फिर स्कार्पीओ की आगे की सीट मे अवी और नरेन्द्रा बैठ जाते है और
पीछे की सीट पर डिंपल, स्वीटी और उसकी भाभी शालिनी बैठ जाती है,
रास्ते मे एक पहाड़ी वाले स्थान पर रुक कर नरेन्द्र उन लोगो के कुछ फोटोग्रॅफ खिचता है और फिर
नरेन्द्रा- यार अवी लो अब मेरे भी फोटो तो खिचो नही तो बाद मे फोटो देख कर लगेगा की बस तुम लोग ही घूमने गये
थे और मैं कही नज़र ही नही आउन्गा, अवी जब फोटो खिचने के लिए उन सभी को देखता है तो उसकी नज़रे डिंपल से मिलती
है और डिंपल अपनी नज़रे नीचे झुका लेती है और अवी स्माइल प्लीज़ कहता है पर उन सभी के अलावा डिंपल अपनी नज़रे
नीचे किए हुए खड़ी रहती है और अवी की बैचैनि बढ़ जाती है, कुछ ही समय मे सभी लोग गाँव मे पहुच जाते है
और
नरेन्द्रा- ये देखो अवी हम लोगो का पुस्तैनि मकान है यहा अब कोई नही रहता है जब मेरे पापा थे तो वह यही रहते
थे अब तो यह घर रामू काका की देख रेख मे रहता है और फिर वहाँ रामू काका आ जाता है और उन लोगो का समान उठा कर अंदर ले जाता है,
सभी लोगो के लिए रामू काका खाने पीने का बंदोबस्त करता है और फिर
नरेन्द्रा भाई दोपहर हो गई है अब हम लोग आराम करते है शाम को हम लोग अपने खेतो की ओर घूमने चलेगे ओके
फिर नरेन्द्र और शालिनी एक रूम मे चले जाते है और
स्वीटी- डिंपल को देख कर मुस्कुराते हुए क्यो जानेमन कैसा लगा हमारा गाँव
डिंपल- थोड़ा मुस्कुरकर अच्छा है
स्वीटी- अवी तुम्हे कैसा लगा
अवी- अच्छा है स्वीटी
स्वीटी- भाई मैं भी जाकर सोउंगी और तुम लोगो का रूम वह है, मैं जानती थी कि तुम लोग साथ ही रहना पसंद करोगे
इसलिए मैने तुम्हारे लिए एक ही रूम साफ करवाया था, इसमे कोई प्राब्लम तो नही है ना
अवी- एक दम से मुस्कुराते हुए नही स्वीटी, इसमे कोई प्राब्लम नही है और डिंपल उसकी बात सुन कर उसकी ओर देखने लगती
है,
डिंपल- स्वीटी मैं भी तेरे ही रूम मे आ जाती हू ना
स्वीटी- डिंपल की ओर देखते हुए, जैसी तेरी मर्ज़ी और फिर स्वीटी उठ जाती है और डिंपल भी अवी की ओर बिना देखे
स्वीटी के पीछे-पीछे चल देती है और अवी का दिमाग़ खराब हो जाता है, अवी जैसे तैसे उस रूम मे अपनी दोपहर गुज़ारता
है और बार-बार रूम के बाहर आकर देखता है कि कही डिंपल नज़र आ जाए लेकिन जब उसे कोई नज़र नही आता है तो वह
भी चुपचाप जाकर लेट जाता है, शाम को सभी लोग घर के बाहर चारपाई पर बैठे होते है अतभी गाँव के दो तीन लोग
नरेन्द्र से मिलने आते है और फिर
नरेन्द्रा- अरे शालिनी मैं थोडा अपने दोस्तो के साथ गाँव की चोपाल तक जा रहा हू तुम लोग ऐसा करो चारो जाकर खेत की
और घूम आओ, ठीक है ना
स्वीटी- हाँ ठीक है भैया, अब मैं जानती हू तुम रात को 10 बजे से पहले आने वाले नही हो पर 10 तक आ ही जाना नही तो
भाभी खाना नही खाएगी और आपका इंतजार करती रहेगी
नरेन्द्रा- शालिनी की ओर मुस्कुरकर देखते हुए, अरे बिल्कुल आ जाउन्गा, भला मैं तुम्हारी भाभी को भूखा कैसे रख
सकता हू
नरेन्द्र के जाने के बाद शालिनी जो की सलवार शूट मे थी और स्वीटी और डिंपल जीन्स और टीशर्ट पहने हुई थी के साथ अवी
चल देता है और सभी लोग बाते करते हुए गाँव की टेडी मेडी पगडंडी से होते हुए खेतो की ओर जाने लगते है थोड़ा
आगे चलने के बाद उन लोगो मे ग्रूप बन जाता है आगे-आगे डिंपल और स्वीटी बाते करती हुई जा रही थी और पीछे-पीछे
अवी और शालिनी बाते करते हुए जा रहे थे
अवी की निगाहे डिंपल और स्वीटी के मोटे-मोटे चूतादो पर जमी हुई थी जो कि जीन्स मे कसे हुए थे और बहुत ही मादक
अंदाज मे थिरक रहे थे, अवी ने यह महसूस किया था कि डिंपल के भारी चूतादो का साइज़ स्वीटी के चूतादो से कुछ
ज़्यादा था और डिंपल की मोटी-मोटी जंघे भी बहुत गुदाज और कसी हुई नज़र आ रही थी, अवी ने पहले कभी डिंपल को इस
तरह कसी हुई जीन्स मे नही देखा था और उसका लंड अपनी जवान गदराई बहन की मस्त मोटी गंद देख कर चलते-चलते
भी खड़ा हो चुका था, और वह अपने मन मे सोच रहा था दीदी वाकई तुम बहुत सेक्सी हो तुम मुझसे कितना ही नाराज़ क्यो
ना हो जाओ तुम्हे अवी अपनी बाँहो मे पूरी नंगी करके ज़रूर भरेगा,
शालिनी- क्या बात है अवी बहुत चुप-चुप चल रहे हो, क्या मेरा साथ तुम्हे अच्छा नही लग रहा है
अवी- नही भाभी ऐसी कोई बात नही है,
शालिनी- तो फिर कुछ बात करो ना
अवी- आप ही कुछ बोलिए ना भाभी
शालिनी- अवी मैं तो चलते-चलते थक गई हू चलो किसी आम के पेड़ की छाँव मे बैठते है
अवी- ठीक है भाभी उस सामने वाले पेड़ की छाव के नीचे बैठते है पर स्वीटी और दीदी को भी आवाज़ देकर रोक लेता हू
शालिनी- अरे नही उन्हे घूमने दो हम थोड़ा रुक कर फिर चलते है ना
अवी- अच्छा ठीक है और फिर एक पेड़ के नीचे शालिनी और अवी बैठ जाते है शालिनी अपने पेर लंबे करके पेड़ के तने से टिक
जाती है और अवी उसके सामने पालती मार कर बैठ जाता है
अवी शालिनी का भरा हुआ गदराया बदन एक नज़र मे देख लेता है और शालिनी उसकी निगाहो को पढ़ लेती है और मुस्कुराते
हुए अपनी आँखे बंद करके
शालिनी- हे अवी कितनी ठंडक है यहाँ लगता है बैठते ही नींद आ जाएगी
अवी- मुस्कुराता हुआ हाँ वह तो है
शालिनी- अवी को देखती हुई, मैने सुना है इस साल से तुम कॉलेज जाने वाले हो
अवी- हाँ भाभी
शालिनी- अपने सीने से दुपट्टा हटा कर अपनी गोद मे रखते हुए अपने गदराए हुए दूध को गहरी सांस लेकर उठाते
हुए, फिर तो तुम्हारे मज़े हो जाएगे, खूब नई-नई लड़कियो से दोस्ती करने को मिलेगी
अवी- शालिनी के कसे हुए मोटे-मोटे दूध को ललचाई नज़रो से देखता हुआ, मुस्कुरकर अरे भाभी लड़कियो से दोस्ती के लिए
ज़रूरी नही की कॉलेज ही जाना हो
शालिनी- उसको अपनी नशीली आँखो से देखती हुई, मुस्कुरकर अच्छा बाते तो ऐसी कर रहे हो जैसे कई लड़किया फसा रखी
हो तुमने
अवी- शालिनी के रसीले होंठो को देखता हुआ, अरे भाभी अवी को लड़किया फसाने की ज़रूरत नही पड़ती है, लड़किया अवी के पास खुद ही फस्ने को चली आती है