अजब प्रेम की गजब कहानी

अवी- यार रघु भैया तुम बात तो बिल्कुल ठीक कह रहे हो, पर इसके भी आगे बढ़ने के लिए क्या करना चाहिए,

रघु- क्या वह लड़की ज़्यादा नखरा दिखा रही है क्या, मेरा मतलब है तुम्हे मना भी नही कर रही होगी और तुम्हे

अपने पास भी नही आने दे रही होगी

अवी- बिल्कुल ठीक कह रहे हो रघु भाई मैं उसे हर तरह से बता चुका हू पर पता नही वह जान भुज कर अंजान बन रही

है या फिर मेरे पास आना ही नही चाहती

रघु- अवी भैया फिर तो एक ही बात हो सकती है वह सोचती होगी कि तुम ही पहल करके उसे अपनी बाँहो मे भर लो, जब तक

तुम उसे यहाँ वहाँ हाथ नही लगाओगे वह ऐसे ही नखरा करती रहेगी, थोड़ा बहुत उसे छुओगे तब ही तो उसके भी बदन

मे करेंट दौदेगा, एक बार तुमने थोड़ा सा करेंट उसके बदन मे दौड़ा दिया तो फिर वह खुद ही तुम्हारे आस पास

मंडराने लगेगी ताकि तुम उसे फिर से थोड़ा करेंट लगाओ और उसे मज़ा आए

अवी- खुश होते हुए क्या बात है रघु भैया, तुमने एक दम पते की बात कही है, बिना उसके करीब जाए उसे पिघलाना

आसान नही होगा जब मैं उसके करीब जाकर उसे थोड़ा चूऊंगा तब ही तो उसे भी एहसास होगा कि किसी मर्द के साथ चिपकने

मे कैसा लगता है,

रघु- पर अवी भैया वह है कौन

अवी-अरे रघु भाई तुम उसे नही जानते हो पर वह मुझे इतनी प्यारी लगती है कि मैं उसे दिन रात अपनी बाँहो मे लेकर

चूमते रहना चाहता हू

रघु- मुस्कुराते हुए केवल चूमना ही चाहते हो या उसे चोदना भी चाहते हो

अवी- रघु की बात सुन कर एक दम से उत्तेजित हो जाता है और अपने मन मे सोचता है क्या मे सचमुच अपनी दीदी को

चोदना चाहता हू

रघु- अरे कहाँ खो गये अवी भैया लगता है अपनी जान को ख्यालो मे ही चोदने लगे हो क्या

अवी- रघु भाई एक ज़रूरी काम याद आ गया मैं बाद मे तुम्हारे पास आता हू

रघु- अरे अवी भैया बस 5 मिनिट और रुक जाओ फिर चले जाना, क्या कोई बहुत खूबसूरत अप्सरा को पटाने मे लगे हो, मैं तो कहता हू अवी भैया अब तुम बड़े भी हो गये हो और सुंदर भी दिखते हो, जल्दी से उसे पटा कर उसे अपनी बाँहो मे भर लो, सच अवी भैया आज तक तुमने किसी लड़की को चोदा नही है ना

अवी- नही रघु भाई किसी को नही चोदा है

रघु- और किसी को नंगी देखा है कि नही

अवी- फोटो और मूवी मे देखा है पर वास्तविक मे नही देखा है

रघु- अरे अवी भैया जब तुम उसे पूरी नंगी करके अपने सीने से चिपकाओगे ना तब तुम यही कहोगे कि इससे ज़्यादा मज़ा दुनिया मे किसी भी चीज़ मे नही है, और फिर एक बात और कहु अवी भैया, लड़कियो को चोदने मे तो बहुत मज़ा आता है पर अगर हम उस लड़की को चोदे जिसे हम सच्चे दिल से प्यार भी करते है तब अवी भैया वह मज़ा 100 गुना से भी ज़्यादा बढ़ जाता है क्योकि उस समय तुम उसे सच्चे दिल से अपनी बाँहो मे भर कर उसे प्यार करते हो

अवी- रघु भैया आप यह बात तो बिल्कुल सही कह रहे हो, पर मैने उसे कभी चोदने के बारे मे सोचा नही है

रघु- अवी भैया जिस दिन वह तुम्हे अपना मान लेगी ना तो सब से पहले वह तुमसे चुदने के लिए ही तड़पेगी, और तुम उसे जिस दिन अपने सीने से लगा लोगे ना उस दिन से तुम उसे पूरी नंगी करके अपने बदन से चिपकाने के लिए तड़पने लगॉगे, यह होता है प्यार और सेक्स मे, जब प्यार और सेक्स दोनो एहसास मिल जाते है तो दुनिया के हर सुख उसके आगे फीके नज़र आते है

क्या तुम उसे नंगी देखने के लिए नही तड़प्ते हो

अवी- हाँ रघु भैया मैं उसे पूरी नंगी करके अपनी बाँहो मे भर कर उसे खूब प्यार करना चाहता हू

रघु-मुस्कुराते हुए और उसे चोदना चाहते हो या नही

रघु की बात सुन कर अवी का लंड खड़ा हो जाता है और उसकी आँखो के सामने बस उसकी दीदी का ही चेहरा घूमने लगता है

अवी- हाँ रघु भैया मैं उसे चोदना भी चाहता हू, मैं उसे बहुत प्यार करता हू रघु भैया बस तुम दुआ करो कि वह जल्दी से मेरी बाँहो मे आ जाए

रघु- मैं अपने दोस्त के लिए सच्चे दिल से कामना करता हू कि तुम्हे जल्दी ही तुम्हारा सच्चा प्यार हासिल हो जाए

अवी- अच्छा रघु भाई अब मैं जाता हू फिर आउन्गा

रघु- अवी भैया ऐसे ही आ जया करो तुम आते हो तो बड़ा अच्छा लगता है

अवी- क्यो नही रघु भैया, अच्छा अब मैं जाता हू फिर मिलेंगे

रघु-अच्छा अवी भैया फिर आना

अवी सीधा अपने घर की ओर चल देता है और उसका दिल अपनी दीदी को जल्द से जल्द देखने के लिए मचलने लगता है

वह घर पहुचता है और दरवाजा बजाता है थोड़ी देर बाद डिंपल दरवाजा खोल कर

डिंपल-कहाँ गया था

अवी- बस यही पास मे ही था दीदी

डिंपल- बोल के नही जा सकता था, मैं अंदर थी और तू चुपचाप चला गया

अवी- मुस्कुराते हुए डिंपल के गाल को अपने हाथो से छूकर अपने हाथो को अपने मूह से चूमता हुआ, दीदी तुम गुस्से

मे बहुत खूबसूरत लगती हो और फिर अवी घर के अंदर आ जाता है और डिंपल अपना मूह फाडे उसे देखती रहती है फिर

मंद-मंद मुस्कुराते हुए वापस दरवाजा लगा देती है, और वापस आकर अवी के पास आकर बैठ जाती है

अवी डिंपल को घूर कर देखने लगता है और डिंपल उसकी ओर देख कर

डिंपल-ऐसे क्या देख रहा है

अवी- मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ कर, अपनी खूबसूरत दीदी को देख रहा हू

डिंपल- अपना हाथ छुड़ाते हुए, तुझे और कोई काम है मुझे देखने के अलावा

अवी- दीदी एक बात बोलू

डिंपल- कौन सी बात

अवी- उसके गालो को अपने हाथो से छूकर, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो

डिंपल- मुस्कुरकर मुझे लगता है तू एक दो दिन से पागल हो गया है

अवी- डिंपल के सामने ही उसके भरे हुए बदन पर नज़र मारते हुए उसकी बाँहो मे अपनी उंगली उपर से लेकर नीचे की ओर

चला कर, जिसकी इतनी खूबसूरत दीदी हो वह पागल नही तो क्या होगा

डिंपल-मुस्कुरा कर उठते हुए, मैं जा रही हू तू बैठ यहा

अवी-अपनी दीदी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खिचता है और वह एक दम से उसकी गोद मे गिरते हुए बैठ जाती है और फिर जल्दी

से उठने की कोशिश करती है और अवी उसका हाथ पकड़ कर, दीदी कहाँ जा रही हो

डिंपल- अपनी आँखे दिखा कर खड़ी हो जाती है और अवी तू पागल हो गया है यह क्या कर रहा है

अवी -उसका हाथ पकड़ कर दीदी मैं तुम्हारी पप्पी लेना चाहता हू

डिंपल- अपना हाथ छुड़ा कर, छोड़ मुझे और मुस्कुराते हुए जाने लगती है और पलट कर अवी तू सचमुच पागल हो गया

है

अवी- बैठे-बैठे मुस्कुराता हुआ, दीदी प्लीज़ एक पप्पी दे दो ना

डिंपल- मुस्कुराते हुए पलट कर बड़ा आया पप्पी लेने वाला और अपने बेडरूम मे घुस जाती है

अवी उसे देख कर मुस्कुराता रहता है और फिर थोड़ी देर बाद ही डिंपल वापस बाहर आती है और अवी को देख कर मुस्कुराते

हुए किचन मे चली जाती है और फिर वापस आकर अवी के सामने बैठ कर एक बुक उठा कर पढ़ने लगती है, अवी उसको

देख कर मुस्कुराता है और डिंपल भी उसे देख कर मुस्कुराने लगती है, अवी कुछ देर तक डिंपल के खूबसूरत चेहरे को

देखता रहता है फिर कुछ सोच कर दीदी चलो मार्केट चले

डिंपल- मगर क्यो

अवी- तुम भूल गई पापा ने कहा था कि मोबाइल खरीद लेना

डिंपल- हाँ कहा तो था पर

अवी- उसका हाथ पकड़ कर उठाते हुए जल्दी उठो ना

डिंपल- अब ज़रा रुक जा तेरे सर पर तो एक दम से भूत सवार हो जाता है, मुझे अपने कपड़े तो चेंज करने दे

अवी- अच्छा ठीक है चलो जल्दी कर लो

डिंपल- उठ कर अपने रूम की ओर जाती है और अवी उसके पीछे-पीछे रूम मे पहुच जाता है, डिंपल अपने आप से ज़ोर से

बतियाते हुए क्या पहनु, क्या पहनु

अवी- दीदी जीन्स और टीशर्ट पहन लो

डिंपल- मुस्कुरा कर चल तू कहता है तो पहन लेती हू और फिर डिंपल अपना जीन्स और टीशर्ट निकाल कर अवी को देखती हुई तू

यहाँ खड़ा-खड़ा मेरा मूह क्या देख रहा है मुझे कपड़े पहनना है

अवी- तो पहनो ना जल्दी से

डिंपल- उसे घुरती हुई तू बाहर जाएगा तब ना पहनूँगी

अवी- उसकी बात को सुन कर उसके जिस्म को अपनी निगाहो से उपर से नीचे तक देखता हुआ उसकी आँखो मे देखता है और डिंपल

उसकी नज़रो को देखने लगती है और अवी अपनी दीदी की आँखो मे देखता हुआ धीरे-धीरे उसकी ओर जाने लगता है दोनो के

चेहरे पर सीरीयस भाव थे लेकिन दोनो की नज़रे बिना पालक झपकाए एक दूसरे की आँखो मे देख रही थी, अवी जैसे-जैसे

डिंपल के करीब जा रहा था डिंपल कुछ बेचैन होती जा रही थी और अवी जब उसके एक दम से करीब पहुच जाता है तो

डिंपल की साँसे कुछ तेज हो जाती है,

दोनो एक दूसरे के बिल्कुल करीब खड़े हुए एक दूसरे की आँखो मे देखते है तभी

अवी- उसके गोरे गालो पर अपना हाथ फेर कर सहलाता हुआ, दीदी जब तुम मुझे अपनी ऐसी निगाहो से देखती हो तो मेरा दिल करता

है कि मैं तुम्हे, और फिर अवी कहते हुए एक दम से रुक जाता है और पलट कर रूम से वापस आने लगता है और डिंपल

एक बुत की तरह उसे देखती रहती है और अपने मन मे खुद ही कुछ सवाल करने लगती है और अपने आप को ही धोखा देते

हुए यह सोचती है कि पता नही अवी ऐसी बाते क्यो कर रहा है जबकि उसका दिल सच्चाई के काफ़ी करीब होता है और वह अवी

की हर्कतो को समझने लग जाता है, अवी की बातो पर डिंपल को कभी गुस्सा आता है और कभी उसे उसकी हरकते अच्छी भी

लगने लग जाती है, डिपेंड करता है कि उसका मन कैसा है,

डिंपल जैसे ही बाहर आती है अवी उसको देख कर सन्न रह जाता है क्यो की वह डिंपल को पहले बहुत कम टीशर्ट और जीन्स

मे देख पाया था, उनका टाइमिंग ही ऐसा था कि अवी सुबह से शाम तक गायब रहता था और डिंपल कभी जीन्स टीशर्ट कॉलेज पहन कर जाती भी तो शाम को आने के बाद उतार देती थी,

डिंपल का भरा हुआ बदन और खूबसूरती देख कर अवी एक दम से पागल हो जाता है और जब उसकी नज़रे डिंपल के कसे

हुए मोटे-मोटे दूध जो टशहिर्त से साफ नज़र आ रहे थे को देख कर एक दम से उसके मोटे-मोटे दूध को घूर्ने लगता

है और डिंपल बड़े आश्चर्या से उसकी नज़रो को अपने दूध पर गढ़ाए देख कर मन ही मन बहुत गुस्सा होती है पर

पता नही अवी को कुछ कह क्यो नही पाती है, अवी इसी वजह से बिना डरे जब तक उसका मन करता है डिंपल के दूध को

निहारता रहता है और फिर आख़िर मे डिंपल को ही मजबूरन उसे कहना पड़ता है, अवी क्या देख रहा है अब चल भी

अवी- उसकी आँखो मे खुश होता हुआ देख कर, दीदी तुम नही जानती तुम कितनी खूबसूरत हो

डिंपल- उसके मूह से अपनी तारीफ सुन कर पता नही अंदर ही अंदर कुछ खुश हो जाती है और चल अब ज़्यादा झूठी तारीफ मत

कर मेरी और यह ले लॉक दरवाजे पर लगा दे

अवी उसके हाथ से लॉक ले लेता है और डिंपल उसके साइड से घर के बाहर जाने लगती है और अवी जब अपनी दीदी के गदराए हुए

मोटे-मोटे चूतादो को जो जीन्स मे पूरी तरह कसे हुए एक अलग ही अंदाज मे थिरक रहे थे को देखता ही रह जाता है

और डिंपल थोड़ा आयेज जाकर उसकी ओर पलट के देखती है तो अवी को अपने चूतादो को देखता पाकर अपने चेहरे पर गुस्सा

लाते हुए अपने मन मे अवी तू कितना गंदा है अपनी सग़ी बहन को ही इस तरीके से देख रहा है पता नही दूसरी लड़कियो के साथ क्या करता होगा,

अवी- डोर को लॉक करके डिंपल के पास आकर उसके गले मे हाथ डाल कर चलो दीदी

डिंपल- उसका हाथ हटाते हुए, उसको घूर कर देखती हुई बाहर तो कम से कम तमीज़ से चलो

अवी- मुस्कुराता हुआ, तुम तो ऐसी बात कर रही हो दीदी जैसे मैं घर मे तुम्हारे साथ बदतमीज़ी करता हू

डिंपल- अपने मन मे, तो कौन सा मुझे तमीज़ की नज़र से देखता है, तेरी हरकते मैं बराबर दो दिन से देख रही हू

अपने आप को ज़्यादा ही स्मार्ट समझने लगा है,

डिंपल- अरे अवी कोई रिक्शा तो लेकर आ

अवी- अरे दीदी चलो पाँव-पाँव ही चलते है घूमना फिरना भी हो जाएगा

डिंपल- उसे घूर कर देखती है और अवी मुझे पाँव-पाँव नही जाना है तू जल्दी से कोई रिक्शा ले कर आ

अवी- अच्छा बाबा गुस्सा क्यो करती हो कहो तो तुम्हे अपनी गोद मे उठा कर ले चलु

डिंपल- ज़्यादा स्मार्ट मत बन और कोई रिक्शे को हाथ दे और अवी एक रिक्शे को रोकता है और फिर दोनो उसमे सवार हो जाते है

अवी आगे की ओर झुक कर डिंपल के खूबसूरत मुखड़े को घूर्ने लगता है और डिंपल बिल्कुल करीना केपर की स्टाइल मे उसे गुस्से से घूर कर देखने लगती है

तभी अवी की नज़रे अपनी दीदी के मोटे-मोटे टीशर्ट मे कसे हुए दूध पर चली जाती है और डिंपल उसे अपने दूध को

घूरते हुए देख लेती है और अपने हाथ आगे लेजा कर दोनो हाथो को अपने मोटे-मोटे दूध पर बाँध लेती है और

सामने देखने लगती है, अवी उसके गुस्से से लाल चेहरे को देखता रहता है और अपने मन मे सोचता है दीदी तुम नही जानती

तुम्हारे इस गुस्से से लाल चेहरे को चूमने के लिए मैं कितना तड़प रहा हू, लगता है मैं तुम्हारी मोहब्बत मे पागल हो

जाउन्गा,

डिंपल- अवी को लगातार अपनी और घूरते देख कर, धीरे से कहती है, अवी कम से कम यहाँ तो मुझे इस तरह मत घूर

अवी- क्यो घर मे, मैं तुम्हे घूरता हू क्या

डिंपल- उसको आँखे दिखाती हुई ज़्यादा स्मार्ट मत बन

अवी- मुस्कुरकर दीदी कही ऐसा होता कि यह रिक्शा जिंदगी भर ऐसे ही चलता रहता और मैं तुम्हे ऐसे ही बैठे-बैठे

देखता रहता,

डिंपल- उसकी बात सुन कर अपनी मुस्कान रोक नही पाती है और, अवी तू कितनी ही कोशिश कर ले तेरी कोई भी इच्छा कभी पूरी

होने वाली नही है,

अवी- दीदी मेरी जिंदगी मे चाहे कोई भी इच्छा पूरी ना हो, पर बस एक इच्छा मैं चाहता हू की ज़रूर पूरी हो जाए

डिंपल- उसको देखती हुई कौन सी इच्छा

अवी- अपने चेहरे पर सीरीयस भाव लाता हुआ डिंपल की आँखो मे देखने लगता है और डिंपल कुछ देर तक उसकी आँखो

को देखती है और अवी जैसे ही अपनी नज़रे एक बार अपनी दीदी के मोटे-मोटे दूध पर डाल कर वापस डिंपल की आँखो मे

देखता है, डिंपल कुछ झेप्ते हुए अपनी नज़रे दूसरी ओर करके बाहर देखने लगती है,

अवी अपने शर्ट की जेब से पेन निकालता है और अपनी नज़रे नीचे करके अपनी हथेली को खोलता है और डिंपल उसकी और देख कर

उसकी हथेली को देखने लगती है, अवी पेन से अपनी हथेली पर एक खड़ी लाइन खिचता है और फिर पेन से खड़ी लाइन के उपर

के हिस्से से उल्टा सी बनाता हुआ उसे उस लाइन के नीचे के हिस्से से मिला कर डी बना देता है और धीरे से अपनी मुट्ठी बंद

करके जैसे ही डिंपल की ओर देखता है डिंपल एक दम से अपना मूह दूसरी ओर घुमा लेती है और उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से

धड़कने लगता है, अवी डिंपल से वापस अपनी नज़रे हटा कर अपनी मुट्ठी की ओर देखता है और डिंपल उसको अपना मूह

सामने किए हुए उसकी हथेली की ओर तिर्छि नज़रो से देखती है और अवी उस डी को अपने पेन से गहरा करता हुआ उसके आगे आइ

लव यू लिख कर वापस अपनी मुट्ठी को बंद करके जैसे ही डिंपल की ओर देखता है डिंपल की साँसे एक दम से चढ़ जाती है

और वह अपने मूह को दूसरी ओर घुमा कर अपनी आँखे बंद कर लेती है,

डिंपल अभी भी दूसरी ओर देख रही थी और अवी उसको देखता हुआ अपने मन मे, दीदी अवी ने अगर तुम्हे अपने प्यार मे

पागल नही कर दिया तो मेरा नाम भी अवी नही और अवी अपनी हथेली को खोल कर अपने होंठो से उसे चूम लेता है,

कुछ देर बाद अवी रिक्शे वाले को रोकने को कहता है और फिर उतर कर रिक्शे वाले को पैसे देते हुए डिंपल की ओर देखता

है और डिंपल उसकी ओर देखती है और

अवी- डिंपल की आँखो मे देखता हुआ, रिक्शे वाले से कहता है, तुम भी आज मेरी लाइफ के एक यादगार पल के हिस्से बन गये हो भैया

रिक्षेवला- मैं कुछ समझा नही बाबू जी

अवी- डिंपल की आँखो मे देखता हुआ, समझदार के लिए इशारा काफ़ी है भैया और फिर अवी डिंपल की ओर चल देता है

और डिंपल अपनी नज़रे नीचे करते हुए सामने की ओर चल देती है, डिंपल का चेहरा पूरी तरह सीरीयस था और उसका माइंड

काम नही कर रहा था, अवी की हर्कतो ने उसे पूरी तरह सोचने पर मजबूर कर दिया था, दोनो चुपचाप चलते हुए

मोबाइल गॅलरी पर पहुच जाते है और फिर शॉपकीपर से मोबाइल दिखाने के लिए कहते है,

शॉपकीपर- देखिए सर कौन सा पसंद है

अवी- अरे भैया मेरी नही इनकी पसंद का लेना है, और डिंपल की ओर देख कर दीदी देखो तुम्हे कौन सा अच्छा लग रहा

है

डिंपल- उसे देखती हुई तुझे जो पसंद हो ले ले

अवी- डिंपल की आँखो मे देख कर मुझे क्या पसंद है दीदी वह तुम अच्छी तरह जानती हो

डिंपल- उसको घूर कर देखती हुई एक मोबाइल उठा कर ये वाला दे दो भैया

शॉपकीपर- अच्छा मेडम अभी पॅक कर देता हू और फिर अवी उसको पैसे देकर मोबाइल ले लेता है और दुकान से बाहर आ

जाते है,

डिंपल- अब चले

अवी- अरे दीदी केवल जिस्म से काम नही चलेगा, इस मोबाइल का दिल तो लिया ही नही

डिंपल- उसको देखती हुई क्या मतलब

अवी- अरे दीदी जिस तरह दिल के बिना शरीर बेजान होता है उसी तरह सिम के बिना यह मोबाइल भी तो बेजान है

डिंपल- उसकी बात का कोई जवाब नही देती है और अवी उसका हाथ पकड़ कर एरटेल का सिम लेने के लिए दूसरी दुकान पर जाने

लगता है और डिंपल अपना हाथ छुड़ा कर उसको घूर कर देखती हुई उसके साथ चल देती है, अवी एक सिम पर्चेस करके

वहाँ से वापस आकर

अवी-दीदी कुछ खाना है क्या

डिंपल- नही

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