डिंपल- रहने दे रहने दे, मैं सब जानती हू अभी मीठा बोल कर सुबह फिर से गोल हो जाएगा
अवी- नही दीदी अब मैं अपनी बात से नही फिरँगा
डिंपल- ठीक है देख लेंगे तू भी यही है और मैं भी
तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और अवी जाकर दरवाजा खोलता है तो सामने उसके पापा अनिल खड़े हुए थे
अवी- रास्ता देता हुआ एक तरफ हो जाता है
अनिल- क्यो रे डिंपल कहाँ है
अवी- पापा वो किचन मे है
अनिल- सुन अवी डिंपल से बोल मेरा खाना पॅक कर दे मेरी रात को 8 बजे से गस्ट मे ड्यूटी लगी है अब मैं सुबह 6 बजे तक ही आउन्गा, और तुझसे कुछ काम बोला था किया
अवी- कौन सा काम पापा
अनिल- नालयक पढ़ाई लिखाई मे तो बेकार है ही अब मक्कारी भी करने लगा है, तुझसे अपनी सभी ड्रेस पर प्रेस करके
रेडी करने का कहा था किया
अवी- अरे पापा वो तो मैने कल ही रेडी कर दी है
अनिल- शाबाश अब उनको मेरी पेटी मे जमा कर रख देना परसो सुबह इनस्पेक्षन है समझे
अवी- ओके पापा
अवी- पापा एक बात कहु एक मिनिट पहले मैं दीदी को आपका खाना पॅक करने का कह दू और फिर अवी किचन मे जाकर दीदी वो
डिंपल- मैने सुन लिया है अवी मैं कर रही हू बस 5 मिनिट
अवी- पापा आपका खाना पॅक हो रहा है, पापा वो मैं एक बात कहना चाहता था
अनिल- क्या बात
अवी- पापा क्या हम एक बाइक खरीद ले
अनिल- क्यो क्या ज़रूरत है बाइक की
अवी- पापा बहुत सारे काम पड़ते है जिसके लिए बार-बार पेदल ही भागना पड़ता है
अनिल- मतलब अभी तक तू पेदल आवारा घूमता था अब तुझे बाइक से घुमाऊ
अवी- पापा प्लीज़
अनिल- ठीक है एक शर्त पर तुझे बाइक ला सकता हू मुझे तू 12थ पास होकर दिखा दे
अवी- खुस होते हुए पक्का पापा
अनिल- एक दम पक्का
तभी डिंपल अंदर से अपने पापा का टिफिन लेकर उन्हे देती हुई लो पापा आपका खाना
अनिल- थॅंक यू बेटा अच्छा अब मैं जाता हू तुम लोग अच्छे से दरवाजा लगा कर सोना और कोई बात हो तो, उफ्फ हमारे घर मे
फोन भी नही है, एक काम कर अवी कल तू एक मोबाइल खरीद ला और वह मोबाइल डिंपल के पास रहेगा उसे ज़रूरत पड़ी तो
कम से कम थाने फोन तो कर सकती है क्यो डिंपल ठीक है ना
डिंपल- मुस्कुराते ही ठीक है पापा
अवी- पापा एक मैं भी ले लू क्या
अनिल- क्यो तू क्या करेगा फोन लेकर
अवी- पापा कभी आपको ज़रूरत हुई तो मुझे फोन कर सकते है
अनिल- मुझे पागल कुत्ते ने काटा है जो मैं तुझे फोन करूँगा और फिर अनिल और डिंपल हस्ने लगते है और अनिल घर के
बाहर निकल जाता है
अवी- मूह बनाते हुए मेरा बाप हिटलर से कम नही है
डिंपल- उसकी पीठ पर मारती हुई शर्म नही आती अपने पापा को हिटलर कहते हुए
अवी- ओके सॉरी पर तुमने सुना दीदी मैं 12 पास हो गया तो मेरे पास मेरी खुद की बाइक होगी, फिर तो दीदी मैं तुम्हे अपने
साथ कॉलेज बैठा कर ले जाया करूँगा और तुम्हारी उस पकाऊ सहेली स्वीटी की छुट्टी
डिंपल- अरे मुसद्दी लाल सपने देखना बंद कर और पहले 12 पास होने का सोच बाइक तो बाद की बात है
अवी- दीदी आज से तुम मुझे रोज रात को 2 घंटे पढ़ाऑगी मुझे कैसे भी करके एग्ज़ॅम पास करना है
डिंपल- मैने देख लिया कि तू रोज दो घंटे पढ़ेगा
अवी- नही दीदी सच्ची तुम जल्दी से फ्री होकर आओ मैं तुम्हारा बेड पर इंतजार करता हू और अवी बेडरूम मे चला जाता है
और डिंपल मुस्कुराते हुए उसे देखने लगती है,
डिंपल सभी काम ख़तम करके टीवी देखने बैठ जाती है और अवी जब बाहर आकर उसे देखता है तो
अवी- दीदी मैं तुम्हारा वेट कर रहा हू और तुम यहा टीवी खोल कर बैठ गई
डिंपल- अच्छा बाबा आती हू और फिर डिंपल उसके पीछे-पीछे बेडरूम मे पहुच जाती है और रवि अपनी बुक लेकर उसके
पास बेड पर बैठ जाता है,
डिंपल मूह हाथ धोकर पाउडर लगा कर आई थी जिसकी खुश्बू अवी की नाक मे जाती है और वह
डिंपल के हुस्न को देखने लगता है और डिंपल उसकी कॉपी मे केमिस्ट्री के सुत्र समझाने लगती है, अवी की नज़र अचानक
अपनी दीदी के मोटे-मोटे कसे हुए दूध पर पड़ जाती है और वह अपनी दीदी की गदराई जवानी मे खो जाता है और उसकी
कमीज़ मे से झाँकते उसके उन्नत उभारो को देखने लगता है, तभी डिंपल अपनी नज़रे उठा कर उसे देखती है और उसे
अपने मोटे-मोटे दूध देखते हुए पकड़ लेती है,
दोनो की नज़रे मिलती है और डिंपल की कातिल आँखो को देख कर अवी का मोटा लंड हरकत करने लगता है डिम्पल उसे खा
जाने वाली नज़रो से देखती है और अवी बिना डरे उसकी आँखो मे देखता रहता है, डिंपल कुछ पल बाद अपनी नज़रे नीचे
करके
डिंपल- तुझे आया समझ मे मैने क्या बताया है और फिर अवी की आँखो मे देखती है
अवी- उसकी कातिल नज़रो को देखता हुआ बस अपने होंठ हिला कर हाँ दीदी कह देता है और डिंपल
डिंपल- अब अगली स्टेप देख और ध्यान से समझ
अवी- ओके
डिंपल- उसे फिर से लिख -लिख कर समझाने लगती है और अवी की नज़रे फिर से अपनी दीदी के कसे हुए गदराए दूध पर टिक
जाती है, डिंपल पूरी स्टेप समझा कर जैसे ही उसे देखती है वह जल्दी से अपनी नज़रे कॉपी की ओर करके ओके दीदी आ गया
समझ मे,
डिंपल- उसे अपने दूध को देखते हुए देख लेती है और वही तकिये पर पीठ के बल लेटते हुए, ठीक है अब बिना देखे
मुझे करके बता
अवी- अपनी कॉपी मे लिखने की कोशिश करता है और डिंपल उसका चेहरा बड़े गौर से देखने लगती है, बीच-बीच मे अवी
अपनी दीदी के सुंदर चेहरे को देख लेता है और फिर थोड़ी देर बाद दीदी मुझे तो समझ मे नही आया
डिंपल- उसे गुस्से से देखती हुई कहाँ से समझ मे आएगा तेरा ध्यान तो कही और लगा रहता है
अवी- मुस्कुरकर कहाँ लगा रहता है
डिंपल- अपनी नज़रे इधर उधर करती हुई मैं नही जानती मुझे नींद आ रही है और डिंपल लेट जाती है
अवी- अच्छा मैं भी लेट कर पढ़ता हू और अवी अपनी बुक को अपनी दीदी की तरफ रख कर करवट ले कर अपनी दीदी की ओर मूह
करके पढ़ने लगता है, और डिंपल लेटे-लेटे उसे देखने लगती है और फिर कुछ देर बाद अपनी आँखे बंद करके सोचने
लगती है आज अवी का बिहेवियर कुछ अलग लग रहा है और पता नही यह मुझे ऐसी नज़रो से क्यो देख रहा है जबकि मैं
इसकी बहन हू
उधर डिंपल को आँखे बंद करके लेती हुए देख कर अवी डिंपल के खूबसूरत चेहरे उसके रसीले होंठो को देखता हुआ
अपने मन मे सोचने लगता है दीदी तुम कितनी खूबसूरत हो मेरा तो दिल ना जाने क्यो तुम्हे चाहने लगा है, मुझे नही
पता था कि मैं तुमसे इतना प्यार करता हू, इसका एहसास मुझे आज हो रहा है, कल से मैं तुम्हारा हर तरह से ख्याल
रखूँगा, और उसके खूबसूरत चेहरे को देखता हुआ अपने मन मे आइ लव यू दीदी, आइ लव यू, तभी डिंपल अपनी आँखे खोल
कर देखती है और उन दोनो की नज़रे मिल जाती है, एक पल के लिए दोनो एक दूसरे को देखने लगते है और फिर
डिंपल- अपने चेहरे पर गुस्सा दिखाते हुए, अवी मुझे घूर्ने की बजाय किताब मे ध्यान दे तो तेरा ही फयडा होगा
अवी- अपनी नज़रे किताब पर लगाते हुए, अपने मन मे दीदी तुमसे बड़ा फयडा अब मेरी लाइफ मे दूसरा कुछ नही हो सकता है
अवी बार-बार अपनी गर्दन उठा कर डिंपल को नही देख सकता था इसलिए वह उठ कर बैठ जाता है और किताब पर गर्दन झुका
कर अपनी नज़रो को तिरछा करके डिंपल की ओर जैसे ही देखता है उसकी नज़रे डिंपल की नज़रो से मिल जाती है और वह जल्दी से
अपनी नज़रे नीची करके वापस किताब पढ़ने लगता है और डिंपल अपना मूह दूसरी ओर घुमा कर मंद-मंद मुस्कुराने
लगती है,
अवी जब देखता है कि डिंपल ने दूसरी और मूह कर लिया है तो अवी किताब बंद करते हुए
अवी- दीदी मेरा तो मन नही लग रहा है और तुम मज़े से सोने लगी हो
डिंपल-मुस्कुराते हुए उसकी और मूह करके अवी आख़िर तू चाहता क्या है
अवी- डिंपल को देख कर अपने मन मे, दीदी मैं तो बस तुम्हे ही देखते रहना चाहता हू
डिंपल- बोलता क्यो नही
अवी- वो दीदी, अच्छा मे पढ़ता हू पर तुम भी जागती रहो ना, तुम सोने लगती हो तो मुझे भी नींद आने लगती है
डिंपल- अच्छा रोज तो 1-1 बजे तक टीवी मे घुसा रहता था और आज जब पढ़ने को कहा तो तुझे नींद आने लगी है
अवी- दीदी तुम भी कुछ पढ़ो ना, फिर मेरा भी मन लगा रहेगा
डिंपल- अच्छा तू पढ़ मे ज़रा बाथरूम से आती हू
अवी- पर तुम क्यो जा रही हो
डिंपल- अपनी आँखे निकाल कर उसे दिखाती हुई, लोग बाथरूम क्यो जाते है
अवी- मुस्कुराता हुआ अच्छा-अच्छा ठीक है और डिंपल पलट कर जाने लगती है और अवी उसकी गदराई गंद को देखने लगता
है तभी डिंपल एक बार घूम कर उसे देखती है और उसे अपने मोटे-मोटे चूतड़ देखते हुए पाती है तो एक दम से रुक
जाती है और अवी जल्दी से अपनी नज़रे अपनी किताब मे गढ़ा देता है और डिंपल उसे घुरती हुई बाथरूम मे घुस जाती है
थोड़ी देर बाद डिंपल जब वापस आती है तो अवी लेट कर अपनी किताब पढ़ रहा था, डिंपल भी अपनी बुक उठा कर अवी के बगल
मे लेट जाती है और अवी की और मूह करके पढ़ने लगती है, डिंपल किताब पढ़ती रहती है और अवी उसके सुंदर चेहरे को
देख-देख कर उसके हुस्न की मन ही मन तारीफ करता रहता है, डिंपल जब भी नज़र उठा कर देखती है अवी को अपनी और
देखता हुआ पाती है, करीब आधे घंटे बाद जब डिंपल अवी को अपनी ओर घूरते हुए देखती है तो
डिंपल- तू मुझे घूर-घूर कर क्यो देख रहा है, आधे घंटे से बस एक ही पेज खोल कर पढ़ रहा है, क्या मेरे मूह
मे लड्डू रखे है
अवी- वो दीदी
डिंपल – क्या वो-वो कर रहा है, सच-सच बता क्यो देख रहा है मुझे
अवी- डिंपल की बात सुन कर अपनी नज़रे नीची कर लेता है
डिंपल- नीचे क्या देख रहा है बोलता क्यो नही, क्यो घूर रहा है मुझे आज दिन भर से
अवी- उसकी आँखो मे देख कर, इसलिए कि तुम मुझे अच्छी लगती हो
डिंपल- अवी की बात सुन कर एक पल उसे देखती रह जाती है और फिर रोज तो तू मुझे कभी नही देखता था फिर आज ऐसा क्या
देख लिया तूने जो दिन भर से मुझे इस तरह घूर रहा है
अवी- मैं नही जानता पर आज तुम मुझे बहुत अच्छी लग रही हो
डिंपल अवी की बात सुन कर अपना मूह फाडे उसको देखती रह जाती है और अवी अपनी नज़रे झुका लेता है
डिंपल- अपने चेहरे पर गुस्सा लाती हुई ठीक है तो तू बैठ कर मुझे देखता रह मैं अब सो रही हू और डिंपल अपनी आँखे
बंद करके लेट जाती है,
अवी कुछ देर नज़रे नीचे किए रहता है उसके बाद धीरे से डिंपल के साइड मे लेट जाता है और उसके हुस्न को अपनी नज़रो से
देखते हुए मन ही मन उसे चूमने की कल्पना करने लगता है, करीब 10 मिनिट बाद डिंपल अपनी आँखे खोल कर जैसे
ही अवी को देखती है उसकी नज़रे अवी से मिल जाती है,
डिंपल- उसके सर पर हाथ रख कर अवी तेरी तबीयत तो ठीक है ना, ऐसे पागलो की तरह आँखे फाडे मुझे क्यो देख रहा
है, चल अब अपनी आँखे बंद कर और सोने की कोशिश कर
अवी- अपनी आँखे बंद कर लेता है और डिंपल उसको देखती हुई कुछ सोचने लगती है, थोड़ी देर आँखे बंद रखने के
बाद अवी फिर से अपनी आँखे खोल कर डिंपल को देखता है और डिंपल उसको देख कर मुस्कुराते हुए
डिंपल- तूने फिर से अपनी आँखे खोल ली चल अब आँखे बंद करके सो जा
अवी- दीदी मैं अपनी आँखे भी बंद कर लेता हू तब भी मुझे तुम्हारा चेहरा ही दिखाई देने लगता है
डिंपल- अवी की बात सुन कर सोच मे पड़ जाती है और अच्छा मेरी बात सुन, तेरा क्या यह मन कर रहा है कि तू मुझे ही
देखता रहे
अवी- हाँ दीदी
डिंपल- और तुझे आँखे बंद करने पर भी मेरा ही चेहरा दिखाई देता है
अवी- हाँ दीदी
डिंपल- तो ठीक है ना तू अपनी आँखे बंद करके ही मुझे देखता रह इससे तुझे नींद भी आ जाएगी
अवी- ठीक है दीदी
डिंपल- चल अब सो जा ओके अब मैं उधर मूह कर लू
अवी- उसकी बात का कोई जवाब ना देकर खुद उसकी ओर अपनी पीठ करके दूसरी और मूह घुमा लेता है और डिंपल उसको देखती
रह जाती है और फिर डिंपल अपनी आँखे खोल कर सोचने लगती है, यह अवी को आज हो क्या गया है, यह कैसी बहकी-बहकी
बाते कर रहा है, पता नही इस लड़के का क्या होगा और फिर डिंपल अवी की ओर करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगती है
अवी- लेटा हुआ अपने मन मे दीदी तुम समझती क्यो नही कि मैं तुम्हे कितना चाहता हू, काश मैं तुम्हे अपने सीने से
चिपका कर सुला सकता, तुम्हे छूने का मेरा बहुत दिल करता है पर तुम कुछ समझती ही नही, तुम नही जानती मैं
तुम्हारे बिना नही रह सकता हू, और बस यही सोचते-सोचते कि कैसे अपनी दीदी को अपने सीने से लगा कर जी भर कर प्यार
करू उसकी नींद लग जाती है,
सुबह अवी 6 बजे ही सो कर उठ जाता है और उठते ही अपनी दीदी का चेहरा देखता है और धीरे से बहुत डरते-डरते डिंपल
के गालो को बहुत हल्के से चूम लेता है और जब वह डिंपल को चूम लेता है तो अपने मन ही मन मे बहुत खुस हो जाता
है जैसे उसने कोई बड़ी भारी चीज़ पा ली हो उसके बाद अवी नहा धोकर कंप्लीट हो जाता है, 7 बजे जब डिंपल उठ कर अवी
को सोफे पर नहा धोकर बैठे हुए टीवी पर न्यूज़ देखते हुए पाती है तो उसको बहुत हैरानी होती है और वह अवी के पास
जाकर
डिंपल- अरे अवी आज यह सूरज पश्चिम से कैसे निकल आया, क्या बात है
अवी- डिंपल का खूबसूरत चेहरा देखते हुए, दीदी यह सब तुम्हारा ही कमाल है
डिंपल- उसे आश्चर्या से देखते हुए मैने क्या किया है
अवी- अपने मन मे मुस्कुराता हुआ, दीदी तुमने मेरा दिल चुरा लिया है अब मैं मेरा ना होकर तुम्हारा हो गया हू
डिंपल- बोल ना मैने ऐसा क्या कर दिया कि तू पूरा बदल गया
अवी- पता नही दीदी, मुझे जल्दी से चाइ पिला दो मुझे स्कूल के लिए देर हो रही है
डिंपल- मुस्कुराते हुए क्यो नही साहेब अब तो आप जो कहो डिंपल करने को तैयार है
अवी- अपने मन मे तो क्या मेरी बाँहो मे आ सकती हो
डिंपल जल्दी से किचन मे जाकर दो कप चाइ लेकर आती है और अवी के पास बैठ कर उसे चाइ देते हुए खुद भी पीने लगती
है, अवी बिना किसी डर के डिंपल को देखता हुआ चाइ पीने लगता है और डिंपल बीच-बीच मे अवी को देख कर मुस्कुरा
देती है, अवी का दिल बस अपनी दीदी के खूबसूरत चेहरे को देख-देख कर एक अलग ही खुशी का अनुभव कर रहा था और फिर
अवी अपनी चाइ ख़तम करके
अवी- दीदी तुम कॉलेज से कितनी बजे घर आ जाओगी
डिंपल- कुछ सोच कर 4 बजे तक
अवी- अच्छा दीदी अब मैं चलता हू और 4 बजे आपका वेट करूँगा और अवी डिंपल के पास जाता है और उसका हाथ एक बार
पकड़ कर उसकी आँखो मे देखता हुआ अपने मन मे आइ लव यू दीदी कह कर बाहर निकल जाता है,
डिंपल अवी को बिल्कुल सीरीयस चेहरा करके देखती ही रह जाती है पर उसे समझ नही आता कि आख़िर अवी इतना एक ही दिन मे
बदल कैसे गया, और डिंपल अपने आप से बाते करती हुई, आख़िर कुछ तो चल रहा है अवी के दिमाग़ मे, कुछ तो ऐसा हुआ
है जिसके कारण अवी एक दम से इतना बदल गया, पर आख़िर क्या चल रहा है अवी के मन मे, खेर जो भी है मेरा भाई
सुधर तो गया, भगवान करे अब वह ऐसा ही रहे फिर से ना बदले
दिन के 9 बज रहे थे और डिंपल अपने काम मे लगी हुई थी तभी उसके दरवाजे की डोर बेल बजती है और वह जाकर कौन
है , अरे जानेमन मैं हू स्वीटी, डिंपल दरवाजा खोल कर
डिंपल- अरे इतनी सुबह-सुबह आज तू कैसे आ गई
स्वीटी- यार घर पर मन नही लग रहा था, भैया और भाभी सुबह 7 बजे शिर्डी के लिए निकल गये है और मैं अकेली
बोर हो रही थी सो सोचा तेरे पास ही चला जाए फिर इधर से ही कॉलेज भी चल देंगे
डिंपल- आ बैठ पर तू नही गई शिर्डी, तू भी साई के दर्शन कर आती
स्वीटी- अरे यार मुझे कबाब मे हड्डी बनने का कतई शौक नही है, और वैसे भी मईन तो सिर्फ़ एक ही देवता को मानती हू
उनका मंदिर होता तो ज़रूर चली जाती
डिंपल- क्यो तू कौन से देवता को मानती है
स्वीटी- मुस्कुराते हुए मेरे सबसे पसंदीदा भगवान कामदेव
डिंपल- उसकी बात सुन कर उसकी पीठ पर मारती हुई तू कभी नही सुधर सकती है, साली भगवान को भी नही छ्चोड़ती है
स्वीटी- सच मेरी जान मुझे तो सबसे ज़्यादा पसंद काम देव ही है सच मे कितने सेक्सी होंगे ना
डिंपल- मुस्कुराते हुए चल चुप कर और ये बता चाइ पिएगी या कुछ खाने के लिए बनाऊ
स्वीटी- अरे डार्लिंग खाने का बनाने की ज़रूरत नही है मैं तेरे लिए भी खाने का लेकर आई हू हम कॉलेज मे खा
लेंगे, बस थोड़ी-थोड़ी चाइ हो जाए तो मज़ा आ जाएगा, वैसे भी सुबह-सुबह आज कल ठंड लगने लगी है
डिंपल- अच्छा ठीक है तू बैठ मैं अभी चाइ बना कर लाती हू
स्वीटी- चल मैं भी तेरे साथ किचन मे चलती हू और फिर दोनो किचन मे आ जाती है
स्वीटी- एक बात बता डिंपल तू घर मे भी सलवार शूट मे पूरी धकि रहती है कुछ हल्के फुल्के कपड़े पहना कर
डिंपल- मुझे तेरे जैसी नंगी होकर घूमने का शौक नही है
स्वीटी- अरे यार कम से कम टीशर्त स्कर्ट या पाजामा पहन लिया कर वह सब आराम दायक होते है और तुझे भी रिलॅक्स
लगेगा
डिंपल- ठीक है इस सनडे हम शॉपिंग करने जाएगे तब तू ही अपनी पसंद के दिला देना
स्वीटी- ये हुई ना कुछ बात, अड्वान्स जमाना है जानम अड्वान्स बन कर रहा करो
स्वीटी- अरे तुझे एक बात पता है
डिंपल- क्या
स्वीटी- हमारे कॉलेज का एक लड़का कुछ दिनो से तेरे पीछे-पीछे घूम रहा था और तुझे फसाने के चक्कर मे था
लेकिन तेरे भाई को उसके बारे मे किसी ने कॉलेज मे बता दिया कि वह तेरी दीदी के बारे मे किसी से गंदी बाते कर रहा था
तब तेरे चिकने भाई ने उसकी जम कर धुनाई कर दी
डिंपल- लेकिन तुझे किसने बताया
स्वीटी- अरे अपने कॉलेज की आरती है ना उसी को कही से पता चला था और उसने मुझे फोन करके बताया था, भाई कमाल
है तेरा भाई तो कॉलेज मे ना होकर भी तुझ पर पूरी नज़र रखता है कि कौन तेरे आजू बाजू फटक रहा है और कौन
नही, मानना पड़ेगा तेरे चिकने को बहुत ख्याल है उसे अपनी प्यारी दीदी का
डिंपल- मुझे पता था कि उसने किसी को मारा है पर यह नही पता था कि उसका कारण मैं थी
स्वीटी- भाई इससे तो यह ही पता चलता है कि तेरा भाई नही चाहता कि कोई लड़का तुझे छुए भी, कही वह ही तो तुझे
छूना नही चाहता है